भारतीय वैदिक ज्योतिष मे रोहिणी नक्षत्र के जातक:
भारतीय वैदिक ज्योतिष मे रोहिणी नक्षत्र के जातक :
ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में रोहिणी नक्षत्र को चन्द्रमा का अत्यंत प्रिय नक्षत्र बताया गया है।
यह नक्षत्र जीवन में सौंदर्य, प्रेम, ऐश्वर्य, कृषि, धन, संतान सुख, कला तथा उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
भारतीय वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का विशेष स्थान माना गया है।
उनमें रोहिणी नक्षत्र अत्यंत शुभ, सौम्य और समृद्धि प्रदान करने वाला नक्षत्र माना जाता है।
इसका स्वामी चंद्रदेव हैं और इसके अधिदेवता प्रजापति ( ब्रह्मा ) माने जाते हैं।
वैदिक परंपरा में रोहिणी नक्षत्र को सृजन, उन्नति, सौंदर्य, कृषि, अन्न, धन, कला और परिवार की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
यही कारण है कि जब कोई ग्रह गोचर में रोहिणी नक्षत्र से होकर गुजरता है, तब उसके प्रभाव जीवन के अनेक क्षेत्रों में अनुभव किए जाते हैं।
राशिफल में रोहिणी नक्षत्र 40.00 अंशों से 53.20 अंशों के मध्य स्थित हैं।
रोहिणी के पर्यायवाची नाम हैं-
विधि, विरंचि, शंकर अरबी में इसे अल्दे वारान कहते हैं।
रोहिणी नक्षत्र के साथ अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
कहीं उसे कृष्ण के अग्रज बलराम की मां कहा गया है तो कहीं लाल रंग की गाय ।
उसे कश्यप ऋषि की पुत्री, चंद्रमा की पत्नी भी माना गया है।
Latón Lord Vishnu Narayan Narayana Moorti Murti Idolo estatua de ídolo de oración para Pooja – Decoración del hogar (7 pulgadas de altura)
- { Artesanía Divina: Hecha a mano con latón de primera calidad por artesanos expertos, esta estatua del Señor Balaji Vishnu trae divinidad y espiritualidad a su hogar, lugar de trabajo o escritorio, agregando un aura de paz, armonía y buena suerte.
- Dimensiones ideales: mide 6.75 x 4.25 x 2 pulgadas y pesa 22.58 oz, por lo que es un tamaño perfecto para templos del hogar, escritorios de oficina, o como centro de mesa en tu espacio vital, añadiendo un toque espiritual y decorativo.
- Duradera y fácil de mantener: hecha de latón de alta calidad, esta estatua está construida para durar. Para mantener su aspecto y brillo, simplemente límpialo con un tejido de algodón seco para mantenerlo brillante y con un aspecto nuevo durante años.
- Perfecto para regalar: una opción de regalo considerada y auspiciosa para familiares y amigos en ocasiones como inauguraciones de la casa, bodas, festivales o cualquier evento especial que requiera bendiciones y positividad.
- Artesanos de apoyo: Esta estatua está hecha a mano, apoyando a los artesanos que conservan las artes y oficios tradicionales de los viejos tiempos }
वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है।
प्रत्येक नक्षत्र का अपना विशिष्ट स्वभाव, देवता, ग्रहाधिपति तथा जीवन पर प्रभाव होता है।
इन में रोहिणी नक्षत्र अत्यंत शुभ, आकर्षक, समृद्धि देने वाला तथा सृजन शक्ति का प्रतीक माना गया है
रोहिणी की आकृति स्थ की भांति आंकी गयी है।
उसमें कितने तारे हैं, इस विषय में मतभेद हैं।
सामान्यतः रोहिणी नक्षत्र में पांच तारों की स्थिति मानी गयी है।
दक्षिण भारत के ज्योतिषी रोहिणी में बियालिस तारों की उपस्थिति मानते हैं।
उनके लिए रोहिणी वट वृक्ष स्वरूप का है।
यह नक्षत्र वृष राशि ( स्वामी शुक्र ) के अंतर्गत आता है।
रोहिणी के देवता ब्रह्मा हैं और अधिपति ग्रह-चंद्र।
+++ +++
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली तथा गोचर में यदि रोहिणी नक्षत्र शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति जीवन में सम्मान, धन, परिवार का सुख तथा उत्तम प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
वहीं यदि यह पाप ग्रहों से पीड़ित हो जाए तो मानसिक अस्थिरता, आर्थिक रुकावट, पारिवारिक तनाव तथा निर्णय क्षमता में कमी देखने को मिल सकती है।
गण: मनुष्य योनिः सर्प व नाड़ी: अंत्या चरणाक्षर हैं-
ओ, वा, वी, वू रोहिणी नक्षत्र में जातक सामान्यतः छरहरे, आकर्षक नेत्र एवं चुम्बकीय व्यक्तित्व वाले होते हैं।
वे भावुक हृदय होते हैं और अक्सर भावावेग में ही निर्णय करते हैं।
उन्हें तुनुकमिजाज भी कहा जा सकता है और उनका हठ लोगों को परेशान कर देता है।
उनमें आत्म लुब्धता की भावना भी होती हैं।
वे औरों पर तत्काल भरोसा कर लेते हैं और धोखा भी खाते हैं।
लेकिन यह सब उनकी सत्यनिष्ठता में कोई कमी नहीं लाता।
ऐसे जातक वर्तमान में ही जीते हैं, कल की चिंता से सर्वथा मुक्त उनका जीवन उतार - चढ़ाव से भरा रहता है।
वे हर कार्य निष्ठा से संपन्न करना चाहते हैं, पर अधैर्य उन्हें कोई भी कार्य पूरा नहीं करने देता।
उनकी ऊर्जा बंट सी जाती है।
वे एक को साधने की बजाय सबको साधने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसे जातकों को यह उक्ति याद रखनी चाहिए कि एक ही साधे सब सधे, सब साधे सब जाय! यदि वे अधैर्य त्याग कर संयमित होकर कार्य करें तो जीवन में यशस्वी भी हो सकते हैं।
+++ +++
रोहिणी नक्षत्र का स्वरूप :
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है तथा इसकी अधिष्ठात्री शक्ति प्रजापति ब्रह्मा माने जाते हैं।
यह नक्षत्र वृषभ राशि में स्थित होता है।
इसका स्वभाव स्थिर, सौम्य, सृजनशील तथा आकर्षक माना जाता है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति सामान्यतः सुंदर व्यक्तित्व वाले, मधुरभाषी, कलाप्रिय, परिवार का सम्मान करने वाले तथा समाज में प्रतिष्ठित होते हैं।
उन में व्यापार, कृषि, कला, संगीत, साहित्य, अभिनय, शिक्षा तथा प्रशासनिक क्षमता भी देखने को मिलती है।
युवावस्था उनके लिए सतत् संघर्ष लेकर आती है।
आर्थिक समस्याओं के अतिरिक्त स्वास्थ्य की गड़बड़ी भी उन्हें परेशान किये रहती है।
अड़तीस वर्ष की अवस्था के बाद ही जीवन में स्थिरता आती है।
ऐसे जातक माता के प्रति विशेष आसक्त होते हैं।
मातृपक्ष से ही उन्हें लाभ भी होता है।
पिता की ओर से उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं होता ।
ऐसे जातकों में यह भी देखा गया है कि जरूरत पड़ने पर वे तमाम रीति - रिवाजों और मान्यताओं को तिलांजलि भी देते हैं।
ऐसे जातकों का वैवाहिक जीवन भी विशेष सुखद नहीं बताया गया है।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक रक्त संबंधी विकारों के शिकार हो सकते हैं-
यथा रक्त का मधुमेह आदि ।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मी जातिकाएं भी सुंदर एवं आकर्षक व्यक्तित्व वाली होती हैं।
वे सद्-व्यवहार वाली होती हैं तथापि प्रदर्शन- प्रिय भी, रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातकों की तरह वे भी तुनुकमिजाजी के कारण दुःख उठाती हैं।
वे व्यवहारिक होती हैं, अतः वे थोड़े से प्रयत्न से अपनी इस आदत पर काबू पा सकती हैं।
ऐसी जातिकाएं प्रत्येक कार्य को भली भांति करने में सक्षम होती हैं।
फलतः उनका पारिवारिक जीवन भी सुखी होता है।
लेकिन पूर्ण वैवाहिक एवं पारिवारिक सुख प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने ही स्वभाव पर अंकुश लगाने की सलाह दी जाती है।
ऐसी जातिकाओं का स्वास्थ्य प्रायः ठीक ही रहता है।
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल, द्वितीय चरण का शुक्र, तृतीय चरण का बुध एवं चतुर्थ चरण का स्वयं चंद्र होता है।
भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्ल पक्ष की दशमी से लेकर कृष्ण पक्ष की पंचम तिथि तक की अवधि ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ मानी जाती है।
इस समय के दौरान चंद्रमा की ऊर्जा अधिकतम या लगभग अधिकतम होती है - जिसे ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय तय करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
गोचर में रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव :
जब गोचर का चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र से गुजरता है तब मन में प्रसन्नता, सौम्यता तथा सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं।
नए कार्य प्रारम्भ करना, खरीदारी, गृह प्रवेश, कृषि कार्य, व्यापारिक योजना तथा शुभ कार्यों के लिए यह समय सामान्यतः अनुकूल माना जाता है।
यदि इसी अवधि में गुरु की शुभ दृष्टि हो तो आर्थिक लाभ, परिवार में सुख तथा नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
यदि राहु, केतु या शनि का अशुभ प्रभाव हो तो भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए तथा धैर्य रखना चाहिए।
+++
+++
ऐसे जातकों को सत्तापक्ष से लाभ मिलता है।
वे चिकित्सा या इंजीनियरिंग के अलावा ट्रेजरी विभाग में भी सफल हो सकते हैं, विशेषकर सूत निर्यात, औषध या अलंकरण वस्तुओं के व्यापार में सामान्यतः जन्मभूमि से दूर ही उनका उत्कर्ष होता है।
Lab Certified Semi-Precious Bracelet | Unisex both for Men & Women | 18beads Stretchable Bracelet | Natural Crystal Healing Stone | Best for Gifting
Visit the Chitshakti Store https://amzn.to/49SYqc4
{ Material type
India }
{ About this item
- Natural Healing Azurite Stone: Made with authentic Azurite stone, known for its healing energy and calming properties.
- Enhances Meditation and Intuition: The deep blue energy of Azurite Bracelet supports meditation, improves focus, and boosts intuitive abilities.
- Azurite Crystal bracelet : Handcrafted from the captivating Azurite Crystal gemstone, celebrated for its intuition-enhancing and insight-promoting properties.
- Elegant Peacock Bracelet: Symbolizing the eye of the heart, adding a spiritual and aesthetic touch to the Azurite bracelet.
- Thoughtful Gift for All Occasions: A meaningful and stylish gift for men, women, boys, and girls, perfect for personal use or gifting to loved ones. }
प्रश्नकुंडली में रोहिणी नक्षत्र :
जब प्रश्न पूछे जाने के समय चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र में स्थित हो तो अधिकांश प्रश्नों में शुभ परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
यदि प्रश्न विवाह, संतान, नौकरी, व्यापार, कृषि, भवन, वाहन, शिक्षा या धन प्राप्ति से संबंधित हो तो सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है।
किन्तु यदि उसी समय राहु, केतु या शनि का अधिक प्रभाव हो तो कार्य में विलंब, भ्रम या बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।



No comments:
Post a Comment