अमावस्या पर और कौन - कौन से शुभ काम कर सकते हैं...!
अमावस्या पर कौन-कौन से शुभ कार्य करें?
सूर्य-चन्द्रमा की युति, पितृस्मरण, दान, साधना और ज्योतिषीय दृष्टि से रहस्य !
सनातन धर्म की परंपरा में अमावस्या को केवल चन्द्रमा के दिखाई न देने की तिथि नहीं माना गया है। अमावस्या वह अवस्था है जब सूर्य और चन्द्रमा आकाश में लगभग एक ही राशि में स्थित होते हैं। चन्द्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता, इसलिए यह रात्रि बाहरी प्रकाश की अपेक्षा अंतर्मुखता, आत्मचिंतन, साधना और पुराने संस्कारों की समीक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
अमावस्या पर हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।
आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।
शिवलिंग पर जल - दूध चढ़ाएं।
चंदन का लेप करें।
बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
इस तिथि पर महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए।
पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
भगवान श्रीकृष्ण को दूध चढ़ाएं और माखन - मिश्री का भोग लगाएं।
कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
किसी मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, गुलाल, अबीर, भोग के लिए मिठाई, घी - तेल, भगवान के वस्त्र आदि दान कर सकते हैं।
शनि काले कर्मों से पीड़ा देतेकाले रंग से नहीं :
काले रंग को शनि ग्रह से जोड़कर शुभ कामों में त्यागने की धारणा बना दी है जो सही नहीं है।
शनि, न्याय के देवता हैं।
वह सिर्फ काले कर्मों से कारण पीड़ा देते हैं।
काले रंग की वजह से नहीं।
विज्ञान के अनुसार काला रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा सोखने वाला रंग है।
वहीं, सफेद रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा परिवर्तित करने वाला रंग होता है।
किसी भी तरह की ऊर्जा को सबसे कम सोखता है।
इसी तरह हम नजर से बचने के लिए...!
किसी देवालय से, साधु, संत और ऋषि द्वारा काला धागा बंधवाते हैं...!
क्योंकि उनकी सकारात्मक ऊर्जा ज्यादा समय तक काले रंग में रह सकती है।
बच्चों के लिए मां ही भगवान होती हैं।
सबसे ज्यादा वात्सल्य से भरी होती हैं...!
इसी लिए उनके हाथ का लगाया काला टीका बच्चों की रक्षा करता है।
ये ही वजह है कि जब आप सत्संग, प्रवचन, देवदर्शन और किसी से शिक्षा प्राप्त करने जाए...!
तो काली टोपी का इस्तेमाल करें तो...!
आप वहां की सकारात्मक ऊर्जा को ज्यादा संचित कर पाते हैं...!
और लंबे समय तक उपयोग कर पाते हैं।
जब हम किसी शोक सभा में जाते हैं तो सफेद कपड़े पहनकर जाते हैं।
जिससे वहां की शोकाकुल भावनाएं हम में न आएं।
डॉक्टर का एप्रीन भी सफेद रंग का होता है।
जिससे बीमारियों के प्रभाव का उन पर कम हो।
इसी तरह विमान और जहाज चलाने वाले ही सफेद कपड़े पहनते हैं।
जिससे सूर्य के ताप का कम कम से कम अवशोषण हो।
इसी तरह जैन संत, साध्वियां, ईसाई धर्म में पादरी और नन, जो संसार से विरक्त होने के भाव से अपना जीवन जीना चाहते हैं।
ऐसे लोगों को भी सफेद कपड़े पहनने का नियम होता है।
जिससे संसार का मोह - माया, लोभ और लालच का उन पर प्रभाव न पड़े।
हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!!
🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏