ब्रह्मचर्य और जन्मकुंडली 2 ?
ब्रह्मचर्य और जन्मकुंडली 2 ?
ब्रह्मचर्य और जन्मकुंडली का प्रभाव, महत्व, फल, नियम एवं उपाय !
ब्रह्मचार्य का यौगिक अर्थ है ब्रह्म की प्राप्तिके लिये वेदों का अध्ययन करना ।
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री अथर्ववेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण, श्री अग्नि पुराण और श्री विष्णु पुराण सहित धार्मिक एवं ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित कथा !
करते हुवे वेदाध्ययन करते थे।
Bi-luma Advance Skin brightening Night cream with Vitamin C and hyluronic acid for even skin tone, dark spots and wrinkles
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| { Brand | Bi-Luma |
| Item Volume | 45 Millilitres |
| Item dimensions L x W x H | 10 x 10 x 5 Centimeters |
| Age Range (Description) | Adult |
| Special Feature | Hypoallergenic |
| Active Ingredients | almond oil,hyaluronic acid,sodium hyaluronate,vitamin c |
| Skin Type | All |
| Number of Items | 1 |
| Scent | Almond, Shea Butter |
| Item Form | Cream } |
{ About this item
- "Offers skin brightening and antiaging benefits - Brightens the skin withing 3 weeks and reduces wrinkles Enriched with Kakadum plum containing the richest source of Vitamin C for skin luminosity and radiance A blend of macademia nut oil, almond oil, shea butter and sodium hyaluronate improves skin hydration " }
🌺 ऋषि और शिष्य की अद्भुत कथा :
बहुत प्राचीन समय की बात है।
हिमालय की एक शांत पर्वतश्रेणी के बीच एक विशाल आश्रम था।
आश्रम के चारों ओर देवदार के वृक्ष, पास से बहती निर्मल नदी, प्रातःकाल पक्षियों का मधुर स्वर और रात्रि में आकाश में चमकते असंख्य नक्षत्र वातावरण को दिव्य बना देते थे।
उस आश्रम में एक महान ऋषि निवास करते थे।
वे वेद, वेदांग, ज्योतिष, धर्मशास्त्र, योग और आध्यात्मिक साधना के ज्ञाता माने जाते थे।
एक दिन उनका युवा शिष्य उनके पास आया।
उसने गुरु के चरणों में प्रणाम किया और बोला
“गुरुदेव! मैंने अनेक स्थानों पर ब्रह्मचर्य का महत्व सुना है।
कोई इसे केवल विवाह न करने से जोड़ता है, कोई इसे वीर्य - संयम कहता है, तो कोई इसे मन और इंद्रियों पर नियंत्रण बताता है।
क्या जन्मकुंडली से यह जाना जा सकता है कि किसी व्यक्ति के जीवन में ब्रह्मचर्य का कितना महत्व रहेगा ?
क्या ग्रह मनुष्य की कामना, संयम और आध्यात्मिक शक्ति को प्रभावित करते हैं?”
ऋषि ने शांत भाव से उसकी ओर देखा और कहा—
“वत्स! तुम्हारा प्रश्न अत्यंत गहरा है।
ब्रह्मचर्य को केवल विवाह या अविवाहित जीवन तक सीमित कर देना उसके वास्तविक अर्थ को छोटा कर देना है।”
उन्होंने कहा—
“ब्रह्मचर्य का मूल भाव है—
ब्रह्म में आचरण, अर्थात अपनी शक्ति, विचार, इंद्रियों, समय और इच्छाओं को ऐसे मार्ग पर लगाना जिससे जीवन का उद्देश्य ऊँचा हो।”
“गृहस्थ व्यक्ति भी संयमी, मर्यादित और धर्ममय जीवन जीकर ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों का पालन कर सकता है।
इसी प्रकार केवल विवाह न करना ही पूर्ण ब्रह्मचर्य की गारंटी नहीं है, यदि मन निरंतर विषय - वासनाओं में भटकता रहे।”
शिष्य ध्यानपूर्वक सुनने लगा।
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🌞 ब्रह्मचर्य और ज्योतिष का संबंध :
ऋषि बोले—
“ज्योतिष मनुष्य के कर्म और स्वभाव के संकेतों का अध्ययन करता है।
ग्रह किसी व्यक्ति को जबरदस्ती पाप या पुण्य करने के लिए मजबूर नहीं करते।
जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति की प्रवृत्ति, मानसिक प्रकृति, इच्छाशक्ति, आकर्षण, संयम और जीवन की परिस्थितियों के संकेत दे सकती है।”
“इस लिए किसी व्यक्ति की ब्रह्मचर्य - शक्ति का निर्णय केवल एक ग्रह या एक भाव देखकर नहीं करना चाहिए।”
उन्होंने कहा—
“विशेष रूप से लग्न, पंचम भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव, चंद्रमा, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि की स्थिति तथा उनके परस्पर संबंधों को व्यापक रूप से देखना चाहिए।”
🌙 चंद्रमा — मन और ब्रह्मचर्य :
ऋषि ने सबसे पहले चंद्रमा की ओर संकेत किया।
“वत्स! मन पर नियंत्रण के बिना इंद्रियों पर नियंत्रण कठिन होता है।
इस लिए चंद्रमा का महत्व बहुत अधिक है।”
चंद्रमा मन, भावना, कल्पना, संवेदनशीलता और मानसिक स्थिरता का ज्योतिषीय कारक माना जाता है।
यदि चंद्रमा शुभ और बलवान हो तथा शुभ ग्रहों से संबंधित हो तो व्यक्ति में मानसिक संतुलन, विचारों पर नियंत्रण और परिस्थितियों को समझने की क्षमता बढ़ सकती है।
यदि चंद्रमा अत्यधिक पीड़ित हो तो मन में चिंता, कल्पना की अधिकता, भावनात्मक अस्थिरता या विषयों के प्रति अत्यधिक आकर्षण जैसी प्रवृत्तियाँ दिखाई दे सकती हैं।
ऋषि बोले—
“लेकिन याद रखना, वत्स—
कुंडली मन की प्रवृत्ति बता सकती है, मनुष्य का अंतिम निर्णय नहीं।”
🪷 पंचम भाव — विचार, संस्कार और विवेक :
💍 सप्तम भाव — संबंध, विवाह और कामना :
🔥 मंगल — ऊर्जा और इच्छाशक्ति :
🌸 शुक्र — आकर्षण और सौंदर्य :
📿 गुरु — संयम और सद्बुद्धि :
🪐 शनि — अनुशासन और तपस्या :
ब्रह्मचार्य के बल से ही प्राण वायु को रोक कर शरीर और मन की शद्धि के द्वारा नाना प्रकार के योग
साधनों में सफलता प्राप्त करते थे।
ब्रह्मचार्य के बल सेही नाना प्रकार की विधाओं शिख कर अपने ज्ञानं को अपना ओर जगत का
लौकिक एवं पारमार्थिकर्थि दोनो प्रकार का कल्याण कर लेतेहै।
इस जन्मकंडली के आधारित स्वामी विवेकानंद पर्णूर्ण तरह से ब्रह्मचार्य जीवन गर्म उग्र स्वभाव के
साथ विदेशों की यात्रा करनेके बाद भी जन्म भमिू जन्म देश के देश तरह ज्यादा आकर्षणर्ष धार्मिकर्मि
आध्यात्मिक ब्रह्मचार्य जीवन ही गुजार रहा था ।
सामने वालो को झुकाव में लाने की पर्णू र्ण टक्कर देने की ताकत भी रख शकता है।
गीता में कहा गया है कि मनष्यु अपने पर्वू जन्म र्व के कर्मों से वर्तमान जीवन को पाता हैऔर अलग - अलग क्षेत्रों सेजड़ुकर सफलता प्राप्त करता है।
कुछ लोग आध्यात्मिक जगत से जड़ु कर भी महान और प्रसिद्ध हो जातेहैं।
रामकृष्ण परमहंस, श्री श्री रविशंकर भी ऐसे ही लोगों में से हैं।
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दर असल इन सब के पीछे उनकी जन्मपत्री में मौजदू ग्रहों की खास स्थिति होती है।
जो ब्रह्मचार्य संन्यास योग बनाकर मनष्यु को आध्यात्मिक जगत में महान और सफल बना देता है।
अगर आपकी जन्मपत्री में भी ऐसे योग हैं।
तो समझ लीजिए आप भी भौतिक जगत से अलग आध्यात्म की दनिुया में अपनी पहचान बनाने में
सफल होंगे।
चन्द्रमा यदि शनि या मंगल के द्रेष्काण में हो कर मात्र शनि से दृष्ट हो तो भी जातक संन्यासी हो
सकता है।
यदि चन्द्रमा शनि या मंगल के नवांश मेंहो कर शनि से दृष्ट हो तब भी संन्यास योग बनता है।
यह योग स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कुंडली में बन रहा था।
स्वामी प्रभू पादजी की कुंडली थी ऐसी ही है।
सर्यू र्और गुरु की यतिु धार्मिक स्थानों में सेवा करने या पूजा स्थल के स्थलों के निर्माण का एक अति
महत्व पर्णूर्ण ज्योतिषीय योग है।
यह योग मकर लग्न की स्वामी प्रभू पादजी की कुंडली में था जिन्हों ने पिछली सदी में अनेक राधा - कृष्ण मंदिरों का विश्वभर में निर्माण करवाया ।
धर्म त्रिकोण लेजाता है ब्रह्मचार्य र्य आधात्मिक उन्नति की ओर कुंडली में धर्म त्रिकोण ( लग्न , पंचम और नवम ) तथा मोक्ष त्रिकोण ( चतुर्थ , अष्टम और द्वादश ) की स्वामियों का सम्बन्ध जातक को जीवन मेंआधात्मिक उन्नति की ओर लेकर जाता है।
यह योग जन्म लग्न और चंद्र लग्न दोनों सेदेखा जाना चाहिए।
शरीर मे सार वस्तु ही वीर्य ही है।
इस के नास से आज हमारा देश रस तल को पहुच गया है ब्रह्मचार्य नाश के ही कारण आज भी हम लोग
छोटी - छोटी बीमारियों का शिकार बन गए है।
जीवन की थोडीक ही अवस्था काल के गले मे जा रहे है।
इस के कारण आज हम लोग अपने बल , तजे , वीरता ओर आत्म सन्मान को खो कर पराधीनता की
बेड़ियों में जकड़ चकुे है।
ओर जो हमारा देश कि सिब्सम्य विश्व का सिरमौर ओर सभ्यताका उद्गमस्थान बना हुआ था ।
Auli Night Cream For Normal to Dry Skin Types | Alpha Arbutin, Almond Oil and Shea Butter | Anti Aging Face Cream to Reduce Lines & Wrinkles | As Good As New - 60GM
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| { Brand | AULI LIFESTYLE |
| Item Volume | 60 Millilitres |
| Item dimensions L x W x H | 7.5 x 7.5 x 7.5 Centimeters |
| Age Range (Description) | Adult |
| Special Feature | Natural Ingredients, Organic |
| Active Ingredients | almond oil |
| Skin Type | Dry, Normal |
| Number of Items | 1 |
| Scent | Tea Tree |
| Item Form | Cream } |
{ About this item
- ✅REPAIRS SKIN OVERNIGHT- Sweet Almond Oil and olive oil work together to repair damaged skin overnight. It reduces dryness, dullness, dehydration, pigmentation, and premature signs of aging.
- ✅ANTI-AGEING & ANTI-PIGMENTATION EXPERT - Manjistha, a natural herb that has multiple benefits for your skin, has anti-aging, anti-pigmentation and anti-allergy properties.
- ✅BRIGHTENS COMPLEXION - By repairing damage, it also boosts the health of your skin, and as a result, it improves uneven skin tone, reduces blemishes, and removes dark spots.
- ✅FIGHTS ACNE - Tea Tree oil, induced in this skin repair cream, helps fight acne, breakouts, inflammation, and blemishes. It also simultaneously, purifies pores and minimizes the production of sebum.
- ✅PREVENTS DULLNESS - Calendula, a well-known ingredient, prevents dryness & dullness. It deeply moisturizes and with the assistance of Wheatgerm Oil & Shea Butter, this night cream provides superior nourishment and revitalization. }
वही आज हम दुशरो के द्वारा लांछित ओर परदलित हो रहा है।
आज हम विद्या - बद्धि - बल - वीर्य , कला - कौशल - सब मेहम पिछड़ेहुए है।
इसी के कारण ही आज हम चरित्र मेंभी गिर गए है।
सारांश यह है कि !
किसी भी बात को लेकर आज हम संसार के सामने अपना मस्तक ऊंचा नही कर शकते।
वीर्य का नाश ही हमारी इस गिरी हुई दशा का प्रधान मख्यु कारण ही मालमू होता है।
आज के समय का चलचित्रों भी वीर्य रक्षा कर्य के लिये बनाया ही नही जाता कैसे वीर्य का नाश हो सब लोग का बद्धि नास हो ।
भाई - भाई के बीच, मा बेटियों के बीच , बहु सासु ओ के बीच लड़ाई झगड़े होता रहे।
किसी का भी स्त्री मा बहन बेटियों का ज्यादा अपमानित ओर आबरू से लांछित किया जाय ।
इस में कैसे प्रसकर्मी बने कैसे किसी का अपमानित किया जाय वही चलचित्रों आज के समय मे
ज्यादा फैसन बन चूका है।
🔮 प्रश्नकुंडली में ब्रह्मचर्य :
शिष्य ने पूछा—
“यदि किसी व्यक्ति के मन में वर्तमान समय में ब्रह्मचर्य या संयम का प्रश्न हो तो?”
ऋषि बोले—
“तब प्रश्नकुंडली का उपयोग किया जा सकता है।
प्रश्न के ठीक समय का लग्न, चंद्रमा, पंचम, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव तथा संबंधित ग्रहों की स्थिति देखकर प्रश्नकर्ता की वर्तमान मानसिक स्थिति और परिस्थिति के संकेतों का अध्ययन किया जाता है।”
लेकिन प्रश्नकुंडली को भी निश्चित भविष्यवाणी का एकमात्र आधार नहीं मानना चाहिए।
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🌗 गोचर में ग्रहों का प्रभाव :
गोचर में चंद्रमा, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि की चाल व्यक्ति के जीवन में अलग - अलग प्रकार के अनुभवों का संकेत दे सकती है।
चंद्रमा का गोचर मन को प्रभावित करने वाला अल्पकालिक संकेत माना जाता है।
शनि का प्रभाव दीर्घकालीन अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मपरीक्षण से जोड़ा जाता है।
गुरु का शुभ प्रभाव ज्ञान, धर्म और सद्बुद्धि की ओर प्रेरणा दे सकता है।
मंगल ऊर्जा और आवेग बढ़ा सकता है।
शुक्र आकर्षण, प्रेम और भोग की प्रवृत्तियों को सक्रिय कर सकता है।
परंतु गोचर का फल जन्मकुंडली, दशा - अंतरदशा और ग्रहबल के साथ देखकर ही समझना उचित है।
🌺 ब्रह्मचर्य के सरल नियम :
ऋषि ने शिष्य को दस नियम बताए—
१. मन को निरंतर अशुद्ध विचारों में न लगाएँ।
२. स्त्री या पुरुष को केवल भोग की वस्तु न समझें; सम्मान की दृष्टि रखें।
३. भोजन, निद्रा और मनोरंजन में संयम रखें।
४. नशे और अत्यधिक उत्तेजक वातावरण से दूर रहें।
५. नियमित व्यायाम करें।
६. प्रतिदिन कुछ समय ध्यान और मंत्र - जप करें।
७. अपने लक्ष्य और कर्म को स्पष्ट रखें।
८. माता - पिता और गुरुजनों का सम्मान करें।
९. अकेलेपन को नकारात्मक कल्पनाओं में बदलने के बजाय अध्ययन और साधना में लगाएँ।
१०. अपने ऊपर अत्यधिक कठोरता न करें; संयम को धीरे - धीरे जीवन का संस्कार बनाएँ।
🌿 ब्रह्मचर्य के परंपरागत उपाय :
परंपरागत धार्मिक साधना में भगवान शिव की उपासना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, “ॐ नमः शिवाय” का जाप, ध्यान, प्राणायाम, सात्त्विक आहार, सेवा, दान और स्वाध्याय को मन की शांति तथा आत्मसंयम के लिए उपयोगी माना जाता है।
सोमवार को शिवपूजन, प्रातःकाल स्नान करके सूर्य को अर्घ्य, माता - पिता का सम्मान और जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी शुभ धार्मिक आचरण माने जाते हैं।
यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष ग्रह के लिए रत्न या विशेष ज्योतिषीय उपाय करना चाहता है तो केवल सामान्य नियम देखकर नहीं, बल्कि उसकी पूरी जन्मकुंडली देखकर निर्णय लेना अधिक उचित है।
+++ +++
🌟 गुरु का अंतिम उपदेश :
रात्रि हो चुकी थी।
आकाश में पूर्ण चंद्रमा चमक रहा था।
शिष्य ने गुरु से कहा—
“गुरुदेव! आज मुझे समझ आया कि ब्रह्मचर्य केवल शरीर को रोकने का नाम नहीं है।”
ऋषि मुस्कुराए—
“हाँ वत्स। ब्रह्मचर्य का वास्तविक सार है—
अपनी जीवन - ऊर्जा को बिखरने से बचाकर उसे ज्ञान, धर्म, सेवा, साधना और श्रेष्ठ कर्मों में लगाना।”
“जन्मकुंडली व्यक्ति की प्रवृत्तियों का दर्पण हो सकती है, लेकिन वह तुम्हारे पुरुषार्थ का स्थान नहीं ले सकती।”
“यदि कुंडली में कोई चुनौती दिखाई दे तो भयभीत मत होना।
यदि शुभ योग दिखाई दे तो अहंकार मत करना।
दोनों परिस्थितियों में अपने कर्म और चरित्र को श्रेष्ठ बनाना ही सबसे बड़ा उपाय है।”
फिर ऋषि ने चंद्रमा की ओर देखते हुए कहा—
“ग्रह मार्ग के संकेत देते हैं, लेकिन उस मार्ग पर चलने का निर्णय मनुष्य स्वयं करता है।”
शिष्य ने गुरु के चरणों में प्रणाम किया।
उस दिन से उसने अपने जीवन में एक नया नियम बनाया—
मन पर विजय, इंद्रियों में संयम, कर्म में ईमानदारी, विचारों में पवित्रता और जीवन में धर्म।
और धीरे - धीरे उसे अनुभव हुआ कि सच्चा ब्रह्मचर्य किसी बाहरी बंधन का नाम नहीं, बल्कि भीतर जागी हुई ऐसी शक्ति है जो मनुष्य को निम्न आकर्षणों से उठाकर उच्च उद्देश्य की ओर ले जाती है।
🕉️ मंत्र :
“ॐ नमः शिवाय।”
“ॐ गुरवे नमः।”
🌸 ईश्वर सभी के मन में सद्बुद्धि, संयम, शांति, पवित्र विचार और धर्ममय जीवन की प्रेरणा प्रदान करें। 🙏🏻🌺
( आगे का लेख भाग 3 पर )
हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!!
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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद..
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
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