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Saturday, August 15, 2026

अमावस्या पर कौन-कौन से शुभ कार्य करें ?

अमावस्या पर और कौन - कौन से शुभ काम कर सकते हैं...!

अमावस्या पर कौन - कौन से शुभ कार्य करें ? 

सूर्य - चन्द्रमा की युति, पितृस्मरण, दान, साधना और ज्योतिषीय दृष्टि से रहस्य !

सनातन धर्म की परंपरा में अमावस्या को केवल चन्द्रमा के दिखाई न देने की तिथि नहीं माना गया है। 

सूर्य - चन्द्रमा की युति, पितृस्मरण, दान, साधना और ज्योतिषीय दृष्टि से रहस्य !

सनातन धर्म की परंपरा में अमावस्या को केवल चन्द्रमा के दिखाई न देने की तिथि नहीं माना गया है। 

अमावस्या वह अवस्था है जब सूर्य और चन्द्रमा आकाश में लगभग एक ही राशि में स्थित होते हैं।

 
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{ About this item

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चन्द्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता, इस लिए यह रात्रि बाहरी प्रकाश की अपेक्षा अंतर्मुखता, आत्मचिंतन, साधना और पुराने संस्कारों की समीक्षा का प्रतीक मानी जाती है।

अमावस्या पर हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, पिता, तेज, प्रतिष्ठा और जीवनशक्ति का प्रतिनिधि माना जाता है, जबकि चन्द्रमा मन, माता, भावनाओं, स्मृति और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है। 

इस लिए अमावस्या में सूर्य - चन्द्रमा का संयोग व्यक्ति को अपने भीतर झांकने का अवसर देने वाला माना जाता है।

आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।

शिवलिंग पर जल - दूध चढ़ाएं। 

चंदन का लेप करें। 

बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

इस तिथि पर महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए। 

धार्मिक परंपराओं में इसी कारण अमावस्या पर पितृस्मरण, तर्पण, दान, दीप - धूप, जप, ध्यान, देवपूजन और सेवा जैसे शुभ कार्य किए जाते हैं।

अमावस्या का सबसे बड़ा रहस्य :


अमावस्या को कई लोग केवल “अशुभ दिन” मान लेते हैं, लेकिन यह धारणा अधूरी है। 

अमावस्या का एक महत्वपूर्ण संदेश है—

समापन के बाद नई शुरुआत।

जैसे चन्द्रमा दिखाई न देने के बाद शुक्ल पक्ष में धीरे - धीरे नया चन्द्रप्रकाश दिखाई देता है, वैसे ही मनुष्य भी अपने जीवन के पुराने दुःख, गलत आदतें, नकारात्मक विचार और अधूरे संकल्प छोड़कर नई दिशा अपना सकता है।

इस लिए अमावस्या का वास्तविक रहस्य डर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और नये संकल्प में है।

पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

भगवान श्रीकृष्ण को दूध चढ़ाएं और माखन - मिश्री का भोग लगाएं। 

कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

किसी मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, गुलाल, अबीर, भोग के लिए मिठाई, घी - तेल, भगवान के वस्त्र आदि दान कर सकते हैं।

शनि काले कर्मों से पीड़ा देतेकाले रंग से नहीं :

अमावस्या पर किए जाने वाले प्रमुख शुभ कार्य

1. पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण :


अमावस्या पर अपने दिवंगत माता - पिता, दादा - दादी और पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करना सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक कार्यों में माना जाता है।

अपने घर की परंपरा के अनुसार तर्पण, पितृस्मरण या सरल प्रार्थना की जा सकती है।

यदि किसी पितर का नाम ज्ञात हो तो उनका नाम लेकर श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। 

यदि नाम ज्ञात न हो तो ज्ञात - अज्ञात सभी पूर्वजों के लिए प्रार्थना की जा सकती है।

इसका आध्यात्मिक संदेश है—

जिस वंश और परिवार से हमें जीवन, संस्कार और परंपरा मिली, उसके प्रति कृतज्ञ होना।


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2. अन्नदान और भोजन कराना :

 
अमावस्या पर अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना अत्यंत सरल और श्रेष्ठ सेवा है।

गरीब, वृद्ध, असहाय या भूखे व्यक्ति को भोजन देना केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि मानवीय सेवा भी है।

पितरों के नाम पर भोजन कराने की परंपरा में सबसे महत्वपूर्ण बात भोजन की मात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा की भावना है।

3. सूर्य को अर्घ्य देना :

 
अमावस्या के दिन प्रातःकाल सूर्य को स्वच्छ जल से अर्घ्य देना और सूर्यदेव का स्मरण करना शुभ धार्मिक अभ्यास माना जाता है। 

सूर्य को ज्योतिष में आत्मबल, पिता, प्रतिष्ठा और जीवनशक्ति का कारक माना जाता है। 

इस लिए सूर्योपासना के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संकल्प कर सकता है।

जल अर्पित करते समय मन में प्रार्थना करें—

“हे सूर्यदेव, मुझे सत्य, धर्म, स्वास्थ्य, आत्मबल और सद्कर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।”


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4. भगवान शिव की पूजा :

 
अमावस्या पर शिवजी का स्मरण और पूजा करने की परंपरा अनेक हिंदू परिवारों में प्रचलित है। 

शिवलिंग पर जल अर्पित करके “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जा सकता है।

यदि विस्तृत पूजा संभव न हो तो केवल शांत मन से भगवान शिव का ध्यान करना भी सरल आध्यात्मिक अभ्यास है।

इस का उद्देश्य मन की अशांति कम करना और अपने भीतर संयम तथा वैराग्य की भावना विकसित करना है।

5. हनुमानजी की भक्ति :


यदि व्यक्ति शनि, भय, निराशा या कठिन परिस्थितियों को लेकर चिंतित हो तो अमावस्या पर हनुमानजी का स्मरण किया जा सकता है।

हनुमान चालीसा का पाठ, “ॐ हनुमते नमः” का जाप या श्रीराम नाम का स्मरण किया जा सकता है।

हनुमानजी की भक्ति का मुख्य संदेश साहस, सेवा, विनम्रता और धर्म के प्रति समर्पण है।

इस लिए केवल शनि के भय से हनुमानजी की पूजा करने के बजाय जीवन में साहस और सदाचार बढ़ाने के उद्देश्य से उनकी भक्ति करना अधिक सार्थक है।

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6. दीपक और धूप :



अमावस्या की शाम घर में स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाना शुभ परंपरा मानी जाती है।

पितृस्मरण या देवपूजन के समय अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार धूप की जा सकती है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण धुआं नहीं बल्कि श्रद्धा है। 

अत्यधिक धुआं करना आवश्यक नहीं है। 

यदि किसी व्यक्ति को धुएं से परेशानी होती है तो दीपक जलाकर मानसिक प्रार्थना करना पर्याप्त विकल्प हो सकता है।

दीपक का प्रतीकात्मक संदेश अत्यंत सुंदर है—

अंधकार कितना भी हो, एक छोटा प्रकाश भी उसे चुनौती देता है।

7. ध्यान और मौन : 


अमावस्या आत्मचिंतन के लिए विशेष अवसर हो सकती है। 

सुबह या शाम 10 – 15 मिनट शांत बैठकर अपनी श्वास पर ध्यान दें। 

अपने पिछले महीने के कार्यों की समीक्षा करें।


अपने आप से तीन प्रश्न पूछें—


मैंने क्या अच्छा किया?

मुझसे क्या गलती हुई?

आने वाले समय में मुझे क्या सुधारना है?

यह सरल अभ्यास अमावस्या को वास्तविक आत्मशुद्धि का दिन बना सकता है।


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8. मंत्रजप : 




अपनी श्रद्धा के अनुसार इष्टदेव का मंत्र जप किया जा सकता है।

शिवभक्त “ॐ नमः शिवाय”, हनुमानजी के भक्त “ॐ हनुमते नमः”, सूर्योपासक “ॐ सूर्याय नमः” और शनिदेव के भक्त “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप कर सकते हैं।

मंत्रजप करते समय संख्या से अधिक मन की एकाग्रता और श्रद्धा को महत्व देना चाहिए।

9. जरूरतमंदों की सहायता : 


अमावस्या पर गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना शुभ कार्य माना जा सकता है। 

अन्न, वस्त्र, शिक्षा सामग्री या आवश्यकता की कोई उपयोगी वस्तु अपनी क्षमता के अनुसार दी जा सकती है।

यदि किसी व्यक्ति को आर्थिक सहायता देना संभव न हो तो किसी वृद्ध की सेवा, भूखे को भोजन, किसी बीमार व्यक्ति के लिए सहायता या किसी विद्यार्थी को पढ़ाई में सहयोग करना भी सेवा का सुंदर रूप है।


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10. पशु - पक्षियों के प्रति करुणा :



भारतीय धार्मिक परंपरा में जीवों के प्रति दया को पुण्यकारी माना गया है।

अपनी स्थानीय परिस्थितियों और स्वच्छता के नियमों का ध्यान रखते हुए पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना या किसी जरूरतमंद जीव की सहायता करना करुणा का अच्छा अभ्यास हो सकता है।

लेकिन ऐसा करते समय किसी स्थान पर गंदगी या लोगों के लिए असुविधा उत्पन्न नहीं करनी चाहिए।

जन्मकुंडली के अनुसार अमावस्या का महत्व : 


जन्मकुंडली में अमावस्या के गोचर का फल उस राशि और भाव पर निर्भर माना जाता है जहां सूर्य - चन्द्रमा का संयोग बन रहा है। 

यदि अमावस्या प्रथम भाव से संबंधित हो तो आत्मचिंतन, व्यक्तित्व और जीवन - दिशा पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

द्वितीय भाव से संबंध होने पर परिवार, वाणी और धन - संबंधी मामलों की समीक्षा की जा सकती है।

चतुर्थ भाव से संबंध होने पर घर, माता और मानसिक शांति से जुड़े विषयों पर ध्यान दिया जा सकता है।

नवम भाव से संबंध होने पर धर्म, गुरु, पिता, पितृपरंपरा और आध्यात्मिक विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

दशम भाव से संबंध होने पर नौकरी, व्यापार, कर्म और प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नये संकल्प लिए जा सकते हैं।

द्वादश भाव से संबंध होने पर ध्यान, एकांत, आध्यात्मिकता और अनावश्यक खर्चों को नियंत्रित करने पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

लेकिन ये सामान्य संकेत हैं। 

निश्चित फल के लिए पूरी जन्मकुंडली, दशा और गोचर का विचार आवश्यक है।

काले रंग को शनि ग्रह से जोड़कर शुभ कामों में त्यागने की धारणा बना दी है जो सही नहीं है। 

शनि, न्याय के देवता हैं। 

वह सिर्फ काले कर्मों से कारण पीड़ा देते हैं। 

काले रंग की वजह से नहीं। 

विज्ञान के अनुसार काला रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा सोखने वाला रंग है। 

वहीं, सफेद रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा परिवर्तित करने वाला रंग होता है। 

किसी भी तरह की ऊर्जा को सबसे कम सोखता है।

इसी तरह हम नजर से बचने के लिए...! 

किसी देवालय से, साधु, संत और ऋषि द्वारा काला धागा बंधवाते हैं...! 

क्योंकि उनकी सकारात्मक ऊर्जा ज्यादा समय तक काले रंग में रह सकती है। 

बच्चों के लिए मां ही भगवान होती हैं। 

सबसे ज्यादा वात्सल्य से भरी होती हैं...! 

इसी लिए उनके हाथ का लगाया काला टीका बच्चों की रक्षा करता है। 

ये ही वजह है कि जब आप सत्संग, प्रवचन, देवदर्शन और किसी से शिक्षा प्राप्त करने जाए...! 

तो काली टोपी का इस्तेमाल करें तो...! 

आप वहां की सकारात्मक ऊर्जा को ज्यादा संचित कर पाते हैं...! 

और लंबे समय तक उपयोग कर पाते हैं।

जब हम किसी शोक सभा में जाते हैं तो सफेद कपड़े पहनकर जाते हैं। 

जिस से वहां की शोकाकुल भावनाएं हम में न आएं। 

डॉक्टर का एप्रीन भी सफेद रंग का होता है। 

जिससे बीमारियों के प्रभाव का उन पर कम हो। 

इसी तरह विमान और जहाज चलाने वाले ही सफेद कपड़े पहनते हैं। 

जिससे सूर्य के ताप का कम कम से कम अवशोषण हो।

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प्रश्नकुंडली के अनुसार :

 
यदि अमावस्या के दिन कोई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा जाए तो प्रश्नकुंडली में चन्द्रमा, सूर्य, लग्न, लग्नेश और प्रश्न से संबंधित भावों का विचार किया जा सकता है। 

यदि प्रश्न पुराने कार्य के समाप्त होने या नई शुरुआत से संबंधित हो, तो अमावस्या का प्रतीकात्मक अर्थ विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।

लेकिन केवल अमावस्या होने से किसी प्रश्न का निश्चित उत्तर नहीं दिया जा सकता।

गोचर के अनुसार शुभ कार्य :


गोचर में अमावस्या जिस राशि में बनती है, उस राशि से संबंधित जीवन-विषयों की समीक्षा करना शुभ माना जा सकता है।

उदाहरण के लिए पृथ्वी तत्व की राशियों में अमावस्या हो तो धन, व्यवस्था और व्यावहारिक जीवन पर ध्यान दिया जा सकता है। 

जल तत्व की राशियों में भावनात्मक शांति और आध्यात्मिक चिंतन को महत्व दिया जा सकता है। 

अग्नि तत्व में साहस और नई दिशा का संकल्प तथा वायु तत्व में ज्ञान, संवाद और विचारों की समीक्षा की जा सकती है।

ये ज्योतिषीय प्रतीकात्मक संकेत हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

अंकशास्त्र और हस्तरेखा की दृष्टि :



अंकशास्त्र में व्यक्ति की जन्मतिथि और संख्यात्मक प्रभावों का अध्ययन किया जाता है, जबकि हस्तरेखा में हाथ की रेखाओं और पर्वतों का निरीक्षण किया जाता है।

अमावस्या को इन दोनों विधाओं से जोड़ते समय यह समझना चाहिए कि प्रत्येक पद्धति के अपने नियम हैं। 

केवल अमावस्या देखकर अंकशास्त्र या हस्तरेखा का निश्चित फल नहीं निकाला जा सकता।

फिर भी अमावस्या को आत्मनिरीक्षण का दिन बनाकर व्यक्ति अपने व्यवहार, निर्णय और भविष्य की दिशा पर विचार कर सकता है।
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अमावस्या पर किन कार्यों से बचें ? 

 
अमावस्या पर अनावश्यक भय फैलाने, किसी व्यक्ति को शाप या दोष देने और अंधविश्वास में पड़ने से बचना चाहिए।

बिना पूरी जन्मकुंडली देखे किसी व्यक्ति को पितृदोष, शनि दोष या अन्य गंभीर दोष बताकर डराना उचित नहीं है।

क्रोध, झूठ, निंदा, हिंसा और नशे से बचना चाहिए।

किसी भी पूजा या उपाय को आर्थिक दिखावे का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।

अमावस्या का सबसे बड़ा उपाय : 


अमावस्या का सबसे बड़ा उपाय केवल पूजा - पाठ नहीं, बल्कि अपने कर्मों को सुधारना है। 

यदि घर में माता - पिता जीवित हैं तो उनकी सेवा करें।

यदि पूर्वज दिवंगत हैं तो उनके अच्छे संस्कारों को अपने जीवन में उतारें।

यदि किसी से गलती हुई है तो क्षमा मांगें।

यदि किसी का अधिकार रोका है तो उसे वापस करने का प्रयास करें।

यदि कोई गरीब या जरूरतमंद है तो अपनी क्षमता के अनुसार सहायता करें।

यही वह कर्म है जो धार्मिक साधना को वास्तविक जीवन से जोड़ता है।

इसी तरह जैन संत, साध्वियां, ईसाई धर्म में पादरी और नन, जो संसार से विरक्त होने के भाव से अपना जीवन जीना चाहते हैं। 
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अमावस्या का शुभ संकल्प :


अमावस्या की रात एक दीपक जलाकर मन में यह संकल्प लिया जा सकता है—

“मैं अपने जीवन के अंधकार को पहचानूंगा, गलत आदतों को छोड़ने का प्रयास करूंगा, अपने माता - पिता और पूर्वजों का सम्मान करूंगा, जरूरतमंद की सहायता करूंगा और सत्य, धर्म, सेवा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने का प्रयास करूंगा।”

यही अमावस्या के रहस्य का सबसे सुंदर रूप है।

“मैं अपने जीवन के अंधकार को पहचानूंगा, गलत आदतों को छोड़ने का प्रयास करूंगा, अपने माता - पिता और पूर्वजों का सम्मान करूंगा, जरूरतमंद की सहायता करूंगा और सत्य, धर्म, सेवा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने का प्रयास करूंगा।”

यही अमावस्या के रहस्य का सबसे सुंदर रूप है।

अमावस्या की रात एक दीपक जलाकर मन में यह संकल्प लिया जा सकता है—


“मैं अपने जीवन के अंधकार को पहचानूंगा, गलत आदतों को छोड़ने का प्रयास करूंगा, अपने माता - पिता और पूर्वजों का सम्मान करूंगा, जरूरतमंद की सहायता करूंगा और सत्य, धर्म, सेवा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने का प्रयास करूंगा।”

यही अमावस्या के रहस्य का सबसे सुंदर रूप है।

अमावस्या की रात एक दीपक जलाकर मन में यह संकल्प लिया जा सकता है—

“मैं अपने जीवन के अंधकार को पहचानूंगा, गलत आदतों को छोड़ने का प्रयास करूंगा, अपने माता - पिता और पूर्वजों का सम्मान करूंगा, जरूरतमंद की सहायता करूंगा और सत्य, धर्म, सेवा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने का प्रयास करूंगा।”

यही अमावस्या के रहस्य का सबसे सुंदर रूप है।

ऐसे लोगों को भी सफेद कपड़े पहनने का नियम होता है। 

जिससे संसार का मोह - माया, लोभ और लालच का उन पर प्रभाव न पड़े।

निष्कर्ष :


अमावस्या पर सूर्य और चन्द्रमा का एक ही राशि में होना ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संयोग माना जाता है। 

सूर्य आत्मबल और चन्द्रमा मन का प्रतीक है। 

इस लिए यह समय बाहरी प्रदर्शन की अपेक्षा आत्मचिंतन, पितृस्मरण, देवभक्ति, दान, ध्यान और नये संकल्प के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।

पितरों का स्मरण, अन्नदान, सूर्य को अर्घ्य, शिवपूजा, हनुमानजी की भक्ति, दीप-धूप, मंत्रजप, ध्यान, जरूरतमंद की सहायता और सदाचार—

ये अमावस्या के प्रमुख शुभ कार्य हो सकते हैं।

जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के अनुसार इन कार्यों को व्यक्ति की परिस्थिति के अनुरूप अपनाया जा सकता है। 

परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपाय का मूल्य उसकी श्रद्धा के साथ - साथ उसके पीछे किए गए अच्छे कर्मों में है।

अमावस्या हमें सिखाती है—


अंधकार से डरना नहीं है, उसमें दीप जलाना है।

पुराने दुःख को पकड़कर नहीं बैठना है, उससे सीखना है।

पूर्वजों को केवल याद नहीं करना है, उनके अच्छे संस्कारों को आगे बढ़ाना है।

और आने वाले महीने को केवल भाग्य के भरोसे नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों के साथ शुरू करना है।

🌸🙏🏻 ॐ सूर्याय नमः। ॐ सोमाय नमः। ॐ नमः शिवाय। ॐ हनुमते नमः। ॐ पितृभ्यो नमः। 🙏🏻🌸

विशेष सूचना: वेद, पुराण, ज्योतिष, अंकशास्त्र और हस्तरेखा से संबंधित उपरोक्त बातें धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं के संदर्भ में प्रस्तुत हैं। 

अलग - अलग संप्रदायों और कुलपरंपराओं में अमावस्या के नियम तथा विधियों में अंतर हो सकता है। 

किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली के निश्चित फल के लिए पूरी कुंडली, दशा और गोचर का अध्ययन आवश्यक है। हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!!
🙏हर हर महादेव हर...!!
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