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Wednesday, January 29, 2025

जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है ? :

जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है...?

जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है...?

ग्रहों की दशा से भी बड़ी चीज क्या है ?

कर्म, धर्म, पुरुषार्थ और मनुष्य का आचरण — एक ज्योतिषीय कथा

एक समय की बात है। 

एक नगर में एक वृद्ध विद्वान ज्योतिषाचार्य रहते थे। 

उन्होंने जीवन का अधिकांश समय वैदिक ज्योतिष, खगोलविद्या, हस्तरेखा, वास्तु और धर्मशास्त्र के अध्ययन में बिताया था। 

उनके पास दूर - दूर से लोग अपनी जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के विषय में फल जानने आते थे।

एक दिन एक बहुत धनवान व्यक्ति उनके पास आया।

प्रयागराज में महाकुंभ का शुभारंभ 13 जनवरी से हो चुका है, और यह 26 फरवरी 2025 तक चलेगा।

प्रयागराज में महाकुंभ का शुभारंभ 13 जनवरी से हो चुका है, और यह 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। 

संगम नगरी में लगे इसे महाकुंभ में देश दुनिया से लाखों की संख्या में श्रद्धालु, साधु - संत और पर्यटक पवित्र डुबकी लगाने आ रहे हैं। 

मान्यता है कि महाकुंभ के इस भव्य आयोजन में डुबकी लगाने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और शांति का आगमन भी होता है। 

इसी बीच 25 जनवरी 2025 यानी की आज महाकुंभ नगर में अमर उजाला और उससे जुड़े उपक्रम जीवांजलि और माय ज्योतिष की ओर से 'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है जहां कई ज्योतिषाचार्य शामिल होने के लिए आएं है, यहां सभी ज्योतिष शास्त्र के अद्भुत विज्ञान और इसकी गहराई पर अपनी राय रख रहे हैं, 








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उसने अपनी जन्मकुंडली सामने रखते हुए कहा—

“गुरुदेव! मेरी कुंडली में ग्रहों की दशा अच्छी नहीं चल रही। 

शनि की दशा है, राहु का प्रभाव है, गोचर भी अनुकूल नहीं है। 

मुझे व्यापार में नुकसान हो रहा है, परिवार में अशांति है और मन में भय बना रहता है। 

आप ऐसा कोई उपाय बताइए जिससे मेरी सारी परेशानियाँ समाप्त हो जाएँ।”

इस दौरान ज्योतिषाचार्य प्रभु ने अपनी बात रखते हुए लाल किताब के रहस्यमय संसार के बारे में जिक्र किया....!

लाल किताब क्या है....?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लाल किताब ज्योतिष की प्रमुख शाखा है, जो भारतीय ज्योतिष पर आधारित है। 

माना जाता है कि इस लाल किताब में कुंडली दोष और जीवन की समस्याओं को सुलझाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। 

ज्योतिषाचार्य ने कुंडली देखी और कुछ देर मौन रहे।

फिर बोले—

“तुम्हें ग्रहों का फल जानने से पहले अपने कर्मों का फल देखना चाहिए।”

व्यक्ति थोड़ा आश्चर्यचकित हुआ।

“गुरुदेव! मैं तो ग्रहों के कारण परेशान हूँ। इसमें मेरे कर्म कहाँ से आ गए?”

ज्योतिषाचार्य मुस्कुराए और बोले—

“यही वह प्रश्न है जिसे समझे बिना ज्योतिष अधूरा रह जाता है।”
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फॉर्मूला आधारित है ज्योतिष :

लाल किताब विशेषज्ञ पंडारामा ज्योतिषाचार्य प्रभु राज्यगुरु ने कहा कि इस समय आकाश में ग्रहों की स्थिति इस प्रकार है कि महाकुंभ की धरती पर जो पानी है, वह अमृततुल्य है। 


यहां त्रिवेणी है। 

जब इंसान ग्रहों की अलग - अलग स्थिति में जन्म लेता है, तो इससे उसकी सोच दूसरों से अलग हो जाती है। 

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए पंडारामा ज्योतिषाचार्य प्रभु राज्यगुरु ने कहा कि आजकल ज्योतिष विज्ञान में कई लोग यह गलती कर देते हैं कि वे एक घर के अंदर बैठे ग्रह के फल को पढ़ देते हैं। 

ज्योतिष असल में एक विज्ञान है एक गणित है जो भी इसके फॉर्मूले समझ जाएगा, वह ज्योतिष विज्ञान समझ पाएगा।

उन्होंने कहा—

“जन्मकुंडली में ग्रह समय और कर्मफल के संकेत दे सकते हैं। 

प्रश्नकुंडली वर्तमान परिस्थिति का संकेत दे सकती है। 

गोचर यह बता सकता है कि कौन - सा समय किस प्रकार की परीक्षा या अवसर लेकर आया है। 

दशा और अंतरदशा घटनाओं के सक्रिय होने का समय बता सकती हैं। 

लेकिन मनुष्य केवल ग्रहों का खिलौना नहीं है।”

“सबसे महत्वपूर्ण बात है— 

वह स्वयं क्या सोचता है, क्या बोलता है और क्या करता है।”
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संस्कार की परिभाषा का किया जिक्र :

ऋषि - मुनियों ने ग्रहों की दिशा से अलग हमें एक महत्वपूर्ण चीज बताई, जिसका नाम है संस्कार।

पंडारामा ज्योतिषाचार्य प्रभु राज्यगुरु ने कहा कि जब तक हम किसी चीज की गहराई में नहीं उतर जाते है तब तक उसके बारे में पूरा ज्ञान नहीं मिल पाता। 

आजकल लोग व्यसनों से जूझ रहे हैं और बच्चे बिगड़ रहे हैं। 

ऐसा ना हो इस लिए ही संस्कार बनाए गए थे।

जिनके ग्रह खराब हैं, उनके आचार - विचार को भी नियंत्रण में रखा जाए, इसी के लिए संस्कार बने थे। 

दुनिया में बड़ी सोच वाले लोग सिर्फ 20 फीसदी है, उनमें भी श्रेष्ठ विचार रखने वालों की संख्या एक-दो फीसदी ही है। 

दुनिया में आज नासमझों की भीड़ बहुत ज्यादा है।
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नाराज हो जाते हैं पितर मौनी अमावस्‍या के दिन भूलकर भी न करें ये काम, लगता है पाप....!

माघ मास की अमावस्‍या को मौनी अमावस्‍या कहते हैं। 

इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने और दान पुण्‍य के कार्य करने का विशेष महत्‍व होता है। 

इस साल मौनी अमावस्‍या पर श्रद्धालुओं को कुंभ स्‍नान का परम पुण्‍य प्राप्‍त होगा। 

मौनी अमावस्‍या पर मौन व्रत रखने के साथ ही कुछ खास नियमों का पालन करना भी अनिवार्य माना जाता है। 

आइए आपको बताते हैं कि मौनी अमावस्‍या पर कौन सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
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मौनी अमावस्‍या है और इस बार मौनी अमावस्‍या पर महाकुंभ का अद्भुत संयोग बना है। 

इस दिन गंगा स्‍नान और दान पुण्‍य जैसे धार्मिक कार्य करने का विशेष महत्‍व होता है। 

मौनी अमावस्‍या पर व्रत करने और पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्‍मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से आपको जीवन में तरक्‍की प्राप्‍त होती है।


जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है


इस बार तो लोगों को मौनी अमावस्‍या पर कुंभ स्‍नान करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हो रहा है। 

मौनी अमावस्‍या पर मौन व्रत रखने का महत्‍व शास्‍त्रों में बहुत खास माना गया है। 

साथ ही इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन भी किया जाता है। 

तो आइए आपको बताते हैं कि मौनी अमावस्‍या के नियम और किन बातों का रखें विशेष ध्‍यान।

🌸 पहला रहस्य — ग्रह संकेत देते हैं, कर्म जीवन बनाता है :

ज्योतिषाचार्य ने एक दीपक जलाया और बोले—

“देखो, यह दीपक प्रकाश देता है। 

लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी आँखें बंद कर ले तो उसे प्रकाश दिखाई नहीं देगा। 

इसी प्रकार शुभ ग्रहयोग जीवन में अवसर दे सकता है, लेकिन यदि मनुष्य आलस्य, अहंकार, असत्य, लोभ और गलत निर्णयों में पड़ा रहे तो वह अवसर भी व्यर्थ हो सकता है।”

“इसी लिए केवल यह पूछना कि ‘मेरी दशा कब बदलेगी?’ 

पर्याप्त नहीं है।”

“सही प्रश्न यह होना चाहिए—

मैं इस समय क्या कर्म कर रहा हूँ?


मेरे निर्णय धर्मसम्मत हैं या नहीं?

मैं अपने वर्तमान अवसर का उपयोग कैसे कर रहा हूँ?”

पुराणीय परंपरा में कर्म और आचरण का महत्व बार - बार सामने आता है। 

भविष्य पुराण की उपलब्ध संस्कृत सामग्री में मन, वाणी और शरीर से किए जाने वाले कर्मों का भी विवेचन मिलता है।

⭐ दूसरा रहस्य — दशा से ऊपर पुरुषार्थ :

व्यक्ति ने पूछा—

“तो क्या ग्रहों की दशा का कोई महत्व नहीं?”

आचार्य बोले—

“नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है।”


गोचर का महत्व है। 

जन्मकुंडली का महत्व है। 

प्रश्नकुंडली का महत्व है। 

लेकिन इन्हें जीवन का अंतिम और एकमात्र निर्णयकर्ता मान लेना उचित नहीं।”

“ज्योतिष दिशा दिखाने वाली विद्या है। 

वह यह समझने में सहायता करती है कि कौन - सा समय संघर्ष का हो सकता है, कौन - सा अवसर का, कौन - सा सावधानी का और कौन - सा उन्नति का।”

“परंतु अवसर मिलने के बाद चलना तो तुम्हें ही पड़ेगा।”

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मौनी अमावस्‍या पर क्‍या करें :

मौनी अमावस्‍या पर बिना अन्‍न जल ग्रहण किए अनाज का दान करें।

मौनी अमावस्‍या पर ब्राह्मणों को भोजन करवाने का खास महत्‍व होता है। 

अगर आप ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कम से कम एक व्‍यक्ति के खाने की मात्रा के अनुसार काली उड़द और चावल दान करें।

“यही पुरुषार्थ है।”

फिर आचार्य ने कहा—

“मान लो किसी व्यक्ति की कुंडली में धन प्राप्ति के योग हैं। 

लेकिन वह काम ही नहीं करता, व्यापार में अनुशासन नहीं रखता, गलत लोगों पर विश्वास करता है और धन का दुरुपयोग करता है। 

तो केवल कुंडली का शुभ योग उसके जीवन को अपने आप समृद्ध नहीं बना देगा।”

“दूसरी ओर किसी व्यक्ति की कुंडली में संघर्ष के संकेत हों, फिर भी वह परिश्रम करे, संयम रखे, सही निर्णय ले, धर्मपूर्वक कार्य करे और समय का सदुपयोग करे—

तो वह कठिन समय को भी पार करने की क्षमता विकसित कर सकता है।”

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साथ ही तिल और गरम वस्‍त्रों का भी दान करें। 

साथ ही उसमें कुछ सामर्थ्य के अनुसार धन राशि भी दान करें। 

ऐसा करने से आपकी ग्रह दशा में सुधार होता है और आपको पितरों की कृपा प्राप्‍त होती है।

मौनी अमावस्या पर गाय, कुत्ते और कौवे जैसे जानवरों को खाना खिलाने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। 

इस दिन ऐसा करने से पितृ खुश होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। 

मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

मौनी अमावस्‍या पर घर में सत्‍य नारायण भगवान की कथा करवाने से घर में नकारात्‍मक शक्तियों का अंत होता है और आपके परिवार में सुख शांति बढ़ती है।


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🙏 तीसरा रहस्य — धर्म :

आचार्य ने आगे कहा—

“कर्म से भी पहले एक प्रश्न है—कर्म कैसा है?”

“हर कर्म अच्छा नहीं होता।”

“धन कमाना कर्म है, लेकिन अधर्मपूर्वक धन कमाना अलग बात है।”

“बोलना कर्म है, लेकिन झूठ और अपमानजनक वाणी अलग बात है।”

“व्यापार करना कर्म है, लेकिन धोखा देना अलग बात है।”

“दान करना कर्म है, लेकिन दिखावे के लिए दान करना अलग बात है।”

“इसी लिए धर्म कर्म को दिशा देता है।”

भविष्य पुराण की उपलब्ध सामग्री में भी ज्ञान के साथ कर्मयोग के आचरण की बात आती है—

अर्थात कर्म को सही समझ और धर्मबुद्धि के साथ करना महत्वपूर्ण माना गया है।

आचार्य बोले—

“यदि ग्रह शुभ हैं लेकिन आचरण गलत है, तो मनुष्य अपने ही कर्मों से अपने लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकता है।”

“और यदि समय कठिन है लेकिन आचरण श्रेष्ठ है, तो मनुष्य उस कठिन समय से सीख लेकर आगे बढ़ सकता है।” 

मौनी अमावस्‍या पर सुबह के वक्‍त पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और शाम में सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं। 

साथ ही इस‍ दिन नदी में दीपक प्रवाहित करना भी शुभ माना जाता है। 

इसके साथ ही घर में लगी पूर्वजों की तस्‍वीर के पास भी दीपक जलाना चाहिए!

अमावस्‍या तिथि पितरों को समर्पित होती है इस लिए दक्षिण दिशा में शाम के वक्‍त सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं और साथ ही मुख्‍य द्वार पर दोनों तरफ 2 दीपक भी जलाकर रखें।

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🌺 चौथा रहस्य — मन :


“अब सबसे महत्वपूर्ण स्थान आता है—

मन का।”

आचार्य बोले—

“मनुष्य पहले मन में निर्णय करता है, फिर वाणी में उसे व्यक्त करता है और अंततः शरीर से उसे कर्म में बदलता है।”

“इस लिए केवल बाहर का उपाय पर्याप्त नहीं है।”

“यदि व्यक्ति प्रतिदिन पूजा करे लेकिन मन में किसी के प्रति घृणा, छल, लोभ और अन्याय रखे, तो उसे अपने आचरण की भी परीक्षा करनी चाहिए।”

“मंत्र के साथ मन चाहिए।”

“पूजा के साथ श्रद्धा चाहिए।”

“दान के साथ करुणा चाहिए।”

“व्रत के साथ संयम चाहिए।”

“ज्योतिषीय उपाय के साथ सही कर्म चाहिए।”

यही कारण है कि केवल ग्रह को दोष देने के बजाय अपने व्यवहार को देखना आवश्यक है।

🌿 पाँचवाँ रहस्य — उपाय का वास्तविक अर्थ :

व्यक्ति ने पूछा—

“गुरुदेव, फिर ग्रहों के उपाय क्यों बताए जाते हैं?”

आचार्य ने उत्तर दिया—

“उपाय का अर्थ केवल किसी वस्तु को खरीदकर पूजा में रख देना नहीं है।”

“उपाय का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को अनुशासन, श्रद्धा, सेवा, संयम, सदाचार और सकारात्मक कर्म की दिशा में ले जाना भी होना चाहिए।”

“यदि शनि से संबंधित कठिन समय है तो केवल तेल चढ़ाना ही सब कुछ नहीं। 

अपने कर्मों में ईमानदारी, श्रम, अनुशासन और जरूरतमंदों की सेवा को भी स्थान देना चाहिए।”

“यदि गुरु कमजोर माना जा रहा है तो केवल पूजा नहीं—

ज्ञान, सदाचार, गुरुजनों का सम्मान और धर्म - अध्ययन भी जीवन में आना चाहिए।”

“यदि सूर्य से संबंधित समस्या बताई जाती है तो केवल अर्घ्य नहीं—

अपने जीवन में सत्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और पिता - सदृश वरिष्ठों के सम्मान को भी स्थान देना चाहिए।”

“यदि चंद्रमा से संबंधित मानसिक अशांति दिखाई जाती है तो केवल मंत्र नहीं—

मन को शांत करने वाला जीवन, संयमित दिनचर्या और सद्भाव भी आवश्यक है।”

इस प्रकार उपाय ग्रह को “खुश” करने से अधिक स्वयं को सुधारने की साधना बन जाता है।

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मौनी अमावस्‍या पर क्‍या न करें : 

मौनी अमावस्या पर लोग अपने पितरों को याद करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। 

इस दिन कुछ तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। 

ऐसा माना जाता है कि इससे पितरों को कष्ट होता है।

पितरों की आत्मा की शांति के लिए उन्हें याद करते समय कुछ भी नकारात्मक नहीं बोलना चाहिए।

कुत्ता, गाय और कौवे जैसे जानवरों को भी परेशान नहीं करना चाहिए।

पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य करना बहुत महत्वपूर्ण है। 

ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

🔱 छठा रहस्य — प्रश्नकुंडली क्या बताती है ?

आचार्य ने कहा—

“प्रश्नकुंडली भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

जब व्यक्ति किसी विशेष प्रश्न को लेकर आता है, तब प्रश्न के समय की ग्रहस्थिति से उस विषय की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया जाता है।”

“लेकिन प्रश्नकुंडली भी यह नहीं कहती कि मनुष्य को अपने कर्म छोड़ देने चाहिए।”

“वह परिस्थिति को समझने का एक साधन है।”

“निर्णय में विवेक, अनुभव और धर्मबुद्धि की आवश्यकता फिर भी रहती है।”

🌞 सातवाँ रहस्य — गोचर क्या करता है ?

“गोचर का अर्थ है वर्तमान आकाशीय ग्रहस्थिति।”

“गोचर हमें यह समझने में सहायता कर सकता है कि किसी जन्मकुंडली के संदर्भ में कौन-सी ऊर्जा या परिस्थिति सक्रिय हो सकती है।”

“लेकिन गोचर को भय का कारण नहीं बनाना चाहिए।”

“शनि का गोचर आया तो जीवन समाप्त नहीं हो गया।”

“राहु आया तो सब कुछ नष्ट नहीं हो गया।”

“गुरु का गोचर आया तो बिना कर्म किए धन की वर्षा नहीं हो जाएगी।”

“ग्रह समय की भाषा बोलते हैं; मनुष्य को कर्म की भाषा में उत्तर देना होता है।”


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🌸 आठवाँ रहस्य — भाग्य और कर्म :

अब उस व्यक्ति का सबसे बड़ा प्रश्न आया—

“गुरुदेव! यदि सब कुछ कर्म पर निर्भर है तो भाग्य क्या है?”

आचार्य ने कहा—

“भाग्य और कर्म को शत्रु मत समझो।”

“मनुष्य के जीवन में पूर्वकर्मों से संबंधित फल की परंपरा को भारतीय दर्शन में महत्व दिया गया है। परंतु वर्तमान जीवन में किए जाने वाले कर्म भी महत्वपूर्ण हैं।”

“जन्मकुंडली को तुम एक मानचित्र की तरह समझो।”

“मानचित्र रास्ते की जानकारी देता है। लेकिन चलना तुम्हें पड़ता है।”

“कभी रास्ते में पहाड़ आता है। कभी नदी। कभी सरल मार्ग। कभी कठिन चढ़ाई।”

“लेकिन यात्री की बुद्धि, तैयारी, धैर्य और पुरुषार्थ यह निर्धारित करते हैं कि वह उस यात्रा का सामना कैसे करता है।”

💯 अंतिम शिक्षा — ग्रहों से पहले स्वयं को देखो :

व्यक्ति अब शांत हो गया।

उसने पूछा—

“गुरुदेव! तो मेरी कुंडली का सबसे बड़ा उपाय क्या है?”

आचार्य ने कुंडली बंद कर दी।

और बोले—

“आज से सात बातें याद रखना।”

पहली — सत्य।

झूठ से बचो और वाणी को शुद्ध रखो।

दूसरी — धर्म।

जिस कर्म से स्वयं और दूसरे का अनावश्यक अहित हो, उससे बचो।

तीसरी — पुरुषार्थ।

सिर्फ शुभ समय की प्रतीक्षा मत करो; उपलब्ध समय का उपयोग करो।

चौथी — संयम।

क्रोध, लोभ, अहंकार और अत्यधिक इच्छा पर नियंत्रण रखो।

पाँचवीं — सेवा।

अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करो।

छठी — साधना।

ईश्वर-स्मरण, मंत्र, पूजा, स्वाध्याय और ध्यान को जीवन में स्थान दो।

सातवीं — विवेक।

ज्योतिषीय संकेत को समझो, लेकिन हर निर्णय में बुद्धि, परिस्थिति और वास्तविकता को भी देखो।

फिर आचार्य ने कहा—

“याद रखो—”

“ग्रहों की दशा समय बताती है,
गोचर परिस्थिति का संकेत देता है,
जन्मकुंडली संभावनाएँ दिखाती है,
प्रश्नकुंडली प्रश्न की दिशा बताती है,
लेकिन कर्म, धर्म, पुरुषार्थ और आचरण

मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

व्यक्ति ने सिर झुका दिया।

उसने कहा—

“गुरुदेव, आज तक मैं ग्रहों को बदलने के उपाय खोज रहा था। 

आज समझ आया कि मुझे अपने कर्मों को बदलने का उपाय भी करना चाहिए।”

आचार्य मुस्कुराए।

“यही ज्योतिष की सबसे बड़ी शिक्षा है।”

“ज्योतिष का उद्देश्य मनुष्य को भयभीत करना नहीं, बल्कि उसे समय की प्रकृति समझाकर सही कर्म की ओर प्रेरित करना है।”

“यदि कुंडली में कठिन समय दिखे तो सावधान हो जाओ।”

“यदि शुभ समय दिखे तो आलसी मत बनो।”

“यदि बाधा दिखे तो धैर्य रखो।”

“यदि अवसर दिखे तो पुरुषार्थ करो।”

“यदि उपाय बताया जाए तो श्रद्धा के साथ उसके पीछे के सदाचार को भी समझो।”

“और सबसे बढ़कर — अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करो।”

भारतीय धार्मिक परंपरा में कर्म, धर्म, अनुष्ठान और आचरण का यह संबंध अनेक ग्रंथों में अलग - अलग रूपों में मिलता है। 

भविष्य पुराण की सामग्री में भी कर्म के साथ ज्ञान और आचरण को जोड़ा गया है तथा मन, वाणी और शरीर से किए कर्मों का विवेचन मिलता है।

साफ - सफ़ाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

घर के आस - पास गंदगी नहीं फैलानी चाहिए। 

इस दिन स्वच्छता का महत्व है। 

यह माना जाता है कि स्वच्छ वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।

इस लिए जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के ग्रहों की दशा को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन दशा से परे सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है—

मनुष्य अपने वर्तमान जीवन में क्या कर रहा है?

कर्म + धर्म + पुरुषार्थ + सदाचार + संयम + साधना + विवेक = जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग।

ग्रहों को दोष देने से पहले अपने कर्मों को देखिए।

दशा बदलने की प्रतीक्षा करने से पहले अपनी दिशा बदलिए।

उपाय करने से पहले अपने आचरण को देखिए।

और भाग्य को कोसने से पहले पुरुषार्थ कीजिए।

क्योंकि—

🌸 “समय संकेत दे सकता है, पर सही दिशा में चलने का पुरुषार्थ मनुष्य को स्वयं करना पड़ता है।” 🌸

🙏🏻 ॐ तत्सत् 🙏🏻 ज्योतिषाचार्य पंडारामा प्रभु राज्यगुरु ऑन लाइन/ ऑफ लाइन ज्योतिषी 
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Tuesday, January 28, 2025

श्री वैदिक ज्योतिष शास्त्र अनुसार मौनी अमावस्या महात्म ।

श्री वैदिक ज्योतिष शास्त्र अनुसार मौनी अमावस्या महात्म ।

|| मौनी अमावस्या व्रत कथा ||

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री अथर्ववेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण, श्री अग्नि पुराण, श्री विष्णु पुराण तथा सनातन धर्म की पुराणिक एवं ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मौनी अमावस्या के महत्व, प्रभाव, फल, नियम और उपाय को समझने के लिए यह कथा प्रस्तुत है।

मौनी अमावस्या की कथा को लेकर जो प्रचलित कथा है उसके अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण परिवार कांचीपुरी में रहता था। 

पति पत्नी दोनों ही धर्मात्मा थे और धर्म पूर्वक अपनी गृहस्थी चलाते थे। 

इनका नाम देवस्वामी था और इनकी पत्नी का नाम धनवती था। 



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इन के सात सात पुत्र और एकमात्र पुत्री थी जिसका नाम गुणवती था। 

जब गणुवती सयानी हुई और तो देवस्वामी से धनवती ने कहा कि पुत्री के विवाह के लिए अब वर देखना चाहिए। 

ब्रह्मण ने अपने छोटे पुत्र को बहन गुणवती की कुंडली दी और कहा कि ज्योतिषी से इनकी कुंडली दिखवा लाओ जिससे गुणवती के विवाह की बात आगे चले। 

ज्योतिषी को कन्या की कुण्डली दिखाई, उसने बताया कि विवाह होते ही कन्या विधवा हो जाएगी। 

ज्योतिषी की यह बात जब ब्राह्मण परिवार को मालूम हुआ तो वह बहुत दुखी हो गया और इसका उपाय पूछा।

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ज्योतिषी ने बताया कि, हे ब्राह्मण सिंहल द्वीप में एक पतिव्रता महिला रहती है जिसका नाम सोमा धोबिन है, यदि कन्या की शादी से पहले सोमा आपके घर आकर पूजन करे और अपना आशीर्वाद दे तो यह दोष दूर हो जाएगा। 

ब्राह्मण ने अपनी पुत्री गुणवती को अपने सबसे छोटे पुत्र के साथ सिंहलद्वीप भेज दिया। 

दोनों भाई बहन सागर किनारे पहुंचकर उसे पार करने के बारे में विचार करने लगे। 

जब समुद्र को पार करने का कोई रास्ता नहीं मिला तो दोनों भूखे प्यासे एक पीपल वृक्ष के नीचे आराम करने लगे। 

पेड़ पर घोसले में एक गिद्ध का परिवार रहता था। 

उस समय घोसले में सिर्फ गिद्ध के बच्चे थे, वे सुबह से भाई बहन की बातों और क्रियाकलापों को देख रहे थे।

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शाम के समय जब गिद्ध की माता बच्चों के लिए भोजन लेकर घोसले में आई तो बच्चों ने पेड़ के नीचे लेटे भाई बहन की कहानी माता को बताई। 

उनकी बातें सुनकर गिद्ध की माता को दोनों भाई बहनों दया आई और बच्चों के कहने से उसने कहा कि तुम लोग अब चिंता मत करो मैं इन्हें सागर पार करवा दूंगी। 

बच्चों ने माता की बातों को सुनकर खुशी खुशी भोजन ग्रहण किया। 

गिद्ध की माता बच्चों को भोजन करवाकर दोनों भाई बहनों के पास आई और बोली कि मैंने आपकी समस्याओं को जान लिया है। 

आप चिंता मत कीजिए आपकी समस्या का निदान मैं कर दूंगी और आपको सोमा धोबन के पास पहुंचा दूंगी। 

गिद्ध की बातों को सुनकर दोनों भाई बहनों का मन आनंदित हो गया और उन्होने वन में मौजूद कंद मूल को खाकर रात काट ली। 

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सुबह होते ही गिद्ध ने दोनों भाई बहनों को समुद्र पार करवा दिया और सिंहलद्वीप में सोमा धोबिन के घर के पास पहुंचा दिया।

गुणवती सोमा धोबन के घर के पास छुपकर रहने लगी। 

हर दिन सुबह होने से पहले गुणवती सोमा का घर लीप दिया करती थी। 

एक दिन सोमा ने अपनी बहुओं से पूछा कि प्रतिदिन सुबह हमारा घर कौन लीपता है।

बहुओं ने प्रशंसा के लोभ से कहा कि हमारे अलावा यह काम और कौन करेगा। 

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लेकिन सोमा को बहुओं की बातों पर भरोसा नहीं हुआ और वह यह जानने के लिए पूरी रात जागती रही कि कौन है जो हर दिन सूर्योदय से पहले घर लीप जाता है। 

सोमा ने देखा कि, एक कन्या उसके आंगन में आई और आंगन लीपने लगी। 

सोमा गुणवती के पास आई और उससे पूछने लगी कि तुम कौन हो और क्यों हर सुबह मेरे आंगन को लीपकर चली जाती हो। 

गुणवती ने तब अपना सारा हाल सोमा से कह डाला। 

गुणवती के बातों को सुनकर सोमा ने कहा कि, तुम्हारे सुहाग के लिए मैं तुम्हारे साथ चलूंगी।




सोमा ने ब्राह्मण के घर आकर पूजा किया, लेकिन विधि का विधान कौन टाल सकता है। 

गुणवती का विवाह होते ही उसके पति की मृत्यु हो गई। 

तब सोमा ने अपने सभी पुण्य गुणवती को दान कर दिया। 

सोमा के पुण्य से गुणवती का पति जीवित हो गया। 

लेकिन पुण्यों की कमी से सोमा के पति और बेटे की मृत्यु हो गई। 

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लेकिन सोमा ने अपना घर छोड़ने से पहले बहुओं से कह दिया था कि मेरे लौटने से पहले अगर मेरे पति और बेटों को कुछ होता है तो उनके शरीर को संभलकर रखना। 

बहुओं ने सास की आज्ञा को मानकर सभी के शरीर को संभलकर रखा। 

उधर सोमा ने सिंहलद्वीप लौटते हुए रास्ते में पीपल के वृक्ष की छाया में विष्णुजी की पूजा कर 108 बार पीपल की परिक्रमा की। 

इसके पुण्य के प्रभाव से सोमा के घर लौटते ही उसके पति और बेटे फिर से जीवित हो गए।

इस लिए मौनी अमावस्या के व्रत करने वाले व्रतियों को यह कथा सुनकर पीपल की 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए। 

और भगवान विष्णु सहित शिवजी की पूजा भी करनी चाहिए।

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मौनी अमावस्या व्रत के लाभ :

माघ मास में तिल, ऊनी वस्त्र, घी का दिन बहुत ही पुण्यदायी होता है। 

इस लिए मौनी अमावस्या पर इन वस्तुओं का दान जरूर करना चाहिए। 

यह जरूरी नहीं कि आप बहुत दान करें लेकिन अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार थोड़ा दान भी आप कर सकते हैं। 

इस से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति मृत्यु पश्चात उत्तम लोक में स्थान पाता है। 

व्यक्ति मुनि पद को प्राप्त करता है। 

एक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मनुष्यों के धरती पर लाने वाले प्रथम मनुष्य मनु ऋषि का जन्म हुआ था। 

मनु ऋषि के नाम से भी इस व्रत का नाम मौनी अमावस्या है।

बहुत प्राचीन समय की बात है। 

एक नगर में एक विद्वान ज्योतिषी रहते थे। 

वे जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर, नक्षत्र, तिथि और ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करते थे। 

उनके पास दूर - दूर से लोग अपने जीवन की समस्याओं का समाधान पूछने आते थे।

एक दिन एक युवक उनके पास आया। 

युवक ने कहा—

“गुरुदेव! मेरे जीवन में बार - बार बाधाएँ आती हैं। 

मन अशांत रहता है, निर्णय लेने में कठिनाई होती है, परिवार में तनाव रहता है और पुराने काम पूरे नहीं होते। 

मैंने अनेक उपाय किए, फिर भी मन को शांति नहीं मिली। 

इसका कारण क्या है?”

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ज्योतिषी ने उसकी जन्मकुंडली देखी और कहा—

“वत्स! केवल ग्रहों को दोष देने से जीवन का रहस्य नहीं समझा जा सकता। 

ग्रह कर्म के संकेतक हैं। 

मनुष्य का आचरण, वाणी, विचार, संस्कार, दान, तप, सेवा और आत्मसंयम भी जीवन के फल को प्रभावित करते हैं। 

आने वाली मौनी अमावस्या तुम्हारे लिए आत्मचिंतन का विशेष अवसर है।”


युवक ने पूछा—


“गुरुदेव! मौनी अमावस्या इतनी महत्वपूर्ण क्यों मानी जाती है?”


ज्योतिषी बोले—


“माघ मास की अमावस्या को अनेक परंपराओं में मौनी अमावस्या अथवा माघी अमावस्या कहा जाता है। 

अमावस्या का अर्थ है वह तिथि जिसमें सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि - देशांतर के निकट होते हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य आत्मतत्त्व, चेतना, पिता और तेज का प्रतिनिधि माना जाता है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं, स्मृति और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है।


इस लिए अमावस्या का समय साधना, आत्मनिरीक्षण और मन को भीतर की ओर मोड़ने के लिए परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण माना गया।”


फिर ज्योतिषी ने समझाया—


“मौनी अमावस्या में ‘मौन’ केवल बोलना बंद करना नहीं है। 

इसका वास्तविक साधना - पक्ष है—

वाणी पर नियंत्रण, अनावश्यक विवाद से दूरी, मन को शांत करना, आत्मचिंतन और ईश्वर - स्मरण।”


परंपरा में इस दिन मौन व्रत, स्नान, ध्यान, जप, दान और पितृ - स्मरण को विशेष महत्व दिया जाता है। माघ मास में स्नान की परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है और मौनी अमावस्या को इसका प्रमुख दिवस माना जाता है।

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🌑 अमावस्या और चंद्रमा का रहस्य :

ज्योतिषी ने युवक से कहा—

“वत्स! जन्मकुंडली में चंद्रमा मन का प्रतिनिधि माना जाता है। 

यदि जन्मकुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में हो, शुभ ग्रहों से संबंध रखता हो और बलवान हो तो व्यक्ति में मानसिक स्थिरता, संवेदनशीलता, कल्पनाशक्ति और निर्णय क्षमता अच्छी हो सकती है।


इसके विपरीत चंद्रमा पीड़ित हो तो ज्योतिषीय परंपरा में मन की चंचलता, चिंता, अस्थिरता, भ्रम, भावनात्मक उतार - चढ़ाव या निर्णय में असमंजस जैसे फल बताए जाते हैं।


इस लिए अमावस्या की साधना को चंद्र - तत्त्व को संतुलित करने वाली आध्यात्मिक साधना के रूप में देखा जा सकता है।”


फिर उन्होंने कहा—


“लेकिन याद रखना—

हर व्यक्ति के लिए एक ही अमावस्या का फल समान नहीं होता।”


जन्मकुंडली में चंद्रमा किस राशि में है, किस भाव में है, किस नक्षत्र में है, किन ग्रहों से युति या दृष्टि है, चंद्रमा की दशा - अंतरदशा क्या है और वर्तमान गोचर क्या है—

इन सबको मिलाकर फलादेश किया जाता है।

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🌑 अमावस्या और चंद्रमा का रहस्य :

ज्योतिषी ने युवक से कहा—

“वत्स! जन्मकुंडली में चंद्रमा मन का प्रतिनिधि माना जाता है। 

यदि जन्मकुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में हो, शुभ ग्रहों से संबंध रखता हो और बलवान हो तो व्यक्ति में मानसिक स्थिरता, संवेदनशीलता, कल्पनाशक्ति और निर्णय क्षमता अच्छी हो सकती है।


इस के विपरीत चंद्रमा पीड़ित हो तो ज्योतिषीय परंपरा में मन की चंचलता, चिंता, अस्थिरता, भ्रम, भावनात्मक उतार - चढ़ाव या निर्णय में असमंजस जैसे फल बताए जाते हैं।


इस लिए अमावस्या की साधना को चंद्र - तत्त्व को संतुलित करने वाली आध्यात्मिक साधना के रूप में देखा जा सकता है।”


फिर उन्होंने कहा—


“लेकिन याद रखना—

हर व्यक्ति के लिए एक ही अमावस्या का फल समान नहीं होता।”


जन्मकुंडली में चंद्रमा किस राशि में है, किस भाव में है, किस नक्षत्र में है, किन ग्रहों से युति या दृष्टि है, चंद्रमा की दशा - अंतरदशा क्या है और वर्तमान गोचर क्या है—

इन सबको मिलाकर फलादेश किया जाता है।

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🔱 जन्मकुंडली के अनुसार मौनी अमावस्या :

ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो तो मौनी अमावस्या पर विशेष रूप से—


मौन, ध्यान, शिवपूजन, चंद्र - स्मरण, सात्त्विक आहार, दान और मंत्र - जप करना मन को अनुशासित करने की साधना बन सकता है।


यदि चंद्रमा पर शनि का प्रभाव हो तो मानसिक दबाव और अकेलेपन की अनुभूति के संदर्भ में आत्मसंयम और सेवा का मार्ग उपयोगी माना जाता है।


यदि चंद्रमा पर मंगल का प्रभाव हो तो क्रोध और भावनात्मक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए मौन विशेष साधना बन सकता है।


यदि चंद्रमा राहु - केतु से संबंधित हो तो भ्रम, अस्थिरता और अनावश्यक विचारों से बचने के लिए ध्यान, मंत्र - जप और सात्त्विक दिनचर्या को महत्व दिया जाता है।


यदि चंद्रमा शुभ गुरु या शुक्र आदि के प्रभाव में हो तो आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति, दान और ज्ञान - अध्ययन के माध्यम से उस शुभता को मजबूत करने की परंपरा है।


यहाँ एक बात विशेष है —

इन संकेतों को व्यक्तिगत कुंडली के बिना अंतिम फलादेश नहीं माना जाना चाहिए।

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🔮 प्रश्नकुंडली में मौनी अमावस्या :

युवक ने फिर पूछा—

“गुरुदेव! यदि किसी व्यक्ति के पास जन्मकुंडली न हो तो?”


ज्योतिषी बोले—


“तब परंपरागत ज्योतिष में प्रश्नकुंडली से प्रश्न पूछे जाने के समय की ग्रहस्थिति का विचार किया जा सकता है।”


यदि प्रश्नकुंडली में चंद्रमा शुभ हो, केंद्र - त्रिकोण में बलवान हो या शुभ ग्रहों से संबंधित हो तो मानसिक स्थिति में सुधार और कार्यों में स्पष्टता की संभावना का संकेत माना जा सकता है।


यदि चंद्रमा अत्यधिक पीड़ित हो तो व्यक्ति को तत्काल निर्णय लेने के बजाय कुछ समय शांत होकर विचार करने की सलाह दी जा सकती है।


इस लिए मौनी अमावस्या का एक बड़ा संदेश है—


पहले मन को शांत करो, फिर निर्णय करो।

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🪐 गोचर के ग्रह और मौनी अमावस्या :

मौनी अमावस्या के समय गोचर का विचार करते हुए ज्योतिषी सूर्य और चंद्रमा की युति को विशेष रूप से देखते हैं, क्योंकि अमावस्या का मूल खगोलीय स्वरूप ही सूर्य - चंद्रमा के एक ही दिशा - क्षेत्र में आने से संबंधित है।


गोचर में शनि का प्रभाव हो तो अनुशासन, सेवा, धैर्य और कर्म की ओर ध्यान देना उपयोगी आध्यात्मिक संदेश माना जाता है।


गुरु का शुभ प्रभाव हो तो ज्ञान, धर्म, दान, गुरु - सेवा और सदाचार को बढ़ाना शुभ माना जाता है।


मंगल का प्रभाव हो तो क्रोध, जल्दबाजी और विवाद से बचना चाहिए।


बुध का प्रभाव हो तो वाणी, लेखन, व्यापारिक निर्णय और मानसिक विश्लेषण में संयम रखना चाहिए।


शुक्र के प्रभाव में संबंधों, परिवार और भोग - विलास के स्थान पर प्रेम, सौहार्द और दान को महत्व देना उचित माना जाता है।


राहु - केतु की स्थिति में भ्रम, भय, अंधविश्वास और अनावश्यक मानसिक तनाव से बचकर गुरु - मार्गदर्शन और सात्त्विक साधना अपनाना अधिक उचित है।

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🕉️ मौन का वास्तविक अर्थ :

ज्योतिषी ने युवक से कहा—

“वत्स! यदि तुम पूरे दिन मौन रहकर भीतर ही भीतर क्रोध, ईर्ष्या, भय और दूसरों के प्रति कटु विचार करते रहोगे, तो वह पूर्ण मौन नहीं है।


सच्चा मौन तीन स्तरों का है—


वाणी का मौन — कटु वचन न बोलना।


मन का मौन — अनावश्यक विचारों को कम करना।


कर्म का मौन — ऐसा कार्य न करना जिससे किसी प्राणी को अनावश्यक कष्ट हो।


इस लिए मौनी अमावस्या आत्मसंयम का दिन है।”

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🪔 मौनी अमावस्या के प्रमुख नियम :

परंपरागत रूप से इस दिन व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार—


1. प्रातः जल्दी उठकर स्नान करे।

2. स्वच्छ वस्त्र धारण करे।

3. ईश्वर का स्मरण करके मौन व्रत का संकल्प ले।

4. सामर्थ्य हो तो पवित्र नदी, तीर्थ या घर पर श्रद्धापूर्वक स्नान करे।

5. भगवान शिव, विष्णु या अपने इष्टदेव का स्मरण करे।

6. अपनी परंपरा के अनुसार मंत्र-जप करे।

7. जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ या यथाशक्ति दान करे।

8. पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करे।

9. पूरे दिन अनावश्यक विवाद, चुगली और कठोर वाणी से बचे।

10. सात्त्विक भोजन करे और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या उपवास रखे।


मौनी अमावस्या पर स्नान, दान, जप, तप, ध्यान और पितृ-  स्मरण की परंपरा अनेक धार्मिक स्रोतों में बताई जाती है।

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🌾 पितृ - स्मरण और तर्पण :

अमावस्या को पितृ - स्मरण की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। 

इस लिए परिवार की परंपरा और योग्य आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध - संबंधी कर्म या दान किया जा सकता है।


यहाँ भी दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण है—

श्रद्धा, कृतज्ञता और सदाचार।


यदि किसी कारण विधिवत तर्पण संभव न हो तो अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करके जरूरतमंद को भोजन कराना और उनके नाम से दान करना सरल धार्मिक भावना हो सकती है।

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🌸 मौनी अमावस्या के सरल उपाय :

ज्योतिषीय एवं धार्मिक परंपरा के अनुसार व्यक्ति अपनी कुंडली की आवश्यकता के अनुसार सरल उपाय कर सकता है—


चंद्रमा के लिए:

शिवजी का पूजन, शांत मन से ध्यान और चंद्र - संबंधित मंत्र - जप।


शनि संबंधी मानसिक दबाव के लिए:

गरीब, वृद्ध या श्रमिक की सेवा तथा यथाशक्ति दान।


गुरु की कृपा के लिए:

गुरु, साधु, विद्वान या जरूरतमंद व्यक्ति का सम्मान और ज्ञान - दान।


पितृ शांति की भावना से:

पितरों का स्मरण, तर्पण अथवा परंपरा के अनुसार दान।


मन की शांति के लिए:

कम बोलना, अधिक सुनना, ध्यान करना और दिनभर विवाद से दूर रहना।

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🚫 क्या नहीं करना चाहिए ?

मौनी अमावस्या पर परंपरागत रूप से अनावश्यक क्रोध, झूठ, चुगली, अपमान, हिंसा, नशा, विवाद और असंयमित व्यवहार से बचने की सलाह दी जाती है।


किसी भी उपाय को भय पैदा करके या “निश्चित रूप से ग्रहदोष समाप्त हो जाएगा” जैसी गारंटी के रूप में नहीं लेना चाहिए।


ग्रहों के उपाय का मूल उद्देश्य आत्मसंयम, सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक अनुशासन होना चाहिए।

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🌺 कथा का संदेश :

अंत में ज्योतिषी ने युवक से कहा—

“वत्स! ग्रह आकाश में अपनी गति से चलते हैं। 

मनुष्य उन्हें रोक नहीं सकता। 

लेकिन अपने कर्म, वाणी, विचार और व्यवहार को नियंत्रित कर सकता है।


मौनी अमावस्या का सबसे बड़ा उपाय किसी महंगे अनुष्ठान में नहीं, बल्कि अपने भीतर के शोर को कम करने में है।


एक दिन ऐसा रखो जब तुम किसी की निंदा न करो।


एक दिन ऐसा रखो जब क्रोध का उत्तर क्रोध से न दो।


एक दिन ऐसा रखो जब अपने पूर्वजों को कृतज्ञता से याद करो।


एक दिन ऐसा रखो जब किसी भूखे को भोजन मिले।


एक दिन ऐसा रखो जब मनुष्य अपने भीतर झाँककर स्वयं से पूछे—


मैं कहाँ गलत था?

मुझे क्या सुधारना है?

और आने वाले समय में मुझे कौन - सा श्रेष्ठ कर्म करना है?


यही मौन धीरे - धीरे साधना बन जाता है।


यही साधना मन को स्थिर करती है।


और यही स्थिर मन ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों के शुभ संकेतों को समझने और जीवन में सही कर्म करने की शक्ति देता है।


इस लिए मौनी अमावस्या केवल अमावस्या की एक तिथि नहीं, बल्कि मौन, मन, मंत्र, दान, पितृ - स्मरण, आत्मचिंतन और सद्कर्म का आध्यात्मिक संगम है।


🌑 मौन में मन को देखो।

🕉️ मन में ईश्वर को स्मरण करो।

🌸 पितरों के प्रति कृतज्ञ रहो।

🪔 दान से सेवा करो।

⭐ ग्रहों से अधिक अपने कर्म को सुधारो।


“मौनं आत्मविचारस्य द्वारम्।”

अर्थात — मौन आत्मचिंतन का द्वार बन सकता है।


🙏🏻 मौनी अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ।

🌸 ॐ नमः शिवाय। 🌸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।🌸 सर्वे भवन्तु सुखिनः। 🙏🏻

 || महर्षि मनु सतरूपाजी की जय हो || पंडारामा प्रभु राज्यगुरू  ( द्रविड़ ब्राह्मण )

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!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -

श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय

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(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 

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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....

जय द्वारकाधीश....

जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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