सभी ज्योतिष मित्रो को मेरा निवेदन है..., आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे..., मे किसी के लेखो की कोपी नहि करता..., किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही है..., कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्ता भाई..., और आगे भी नही बढ़ता..., आप आपके महेनत से त्यार होने से बहुत आगे बठा जाता है...,
धन्यवाद......, जय द्वारकाधीश...,
मूल नक्षत्र के अंतर्गत आश्लेषा नक्षत्र / दिशाशूल का विचार :
मूल नक्षत्र के अंतर्गत आश्लेषा नक्षत्र :
मूल नक्षत्र के अंतर्गत आश्लेषा नक्षत्र के अंतर्गत चार चरणों में शिशु का जन्म होता है तो वह सुलभ क्या फलदाई होता है...!
लेकिन जब आप इस ब्लॉग पोस्ट को पूरी तरह से पढ़ोगे तो सारी बातें समझ में आएंगी कि क्या शुभ है या अशुभ है...!
कैसे हम जानकारी प्राप्त करें उसके लिए आप ही लोगों के पृथक प्रकार से विवेचन करने के लिए हम उपस्थित हुए हैं...!
तो आइए विश्लेषण को आरंभ करते हैं मित्रों ध्यान देने की बात है...!
कि शोल्डर संस्कार के अंतर्गत हमारे सनातन धर्म में हर गर्म के अपने एक रूप होते हैं और मूल के प्रथम चरण में जन्म लिए जाने वाले जो सिद्ध होते हैं...!
उनके लिए जो मृत्युसूचक होता है जो जन्म का नक्षत्र होता है...!
मूल का प्रथम चरण होता है वह पिता के लिए वसुंधरा होता है...!
मूल नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म होने से यह मात्र के लिए अशुभ कारक है...!
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यानि कि मंत्री के स्वास्थ्य में प्रभाव डालेगा दुष्प्रभाव डालेगा मूल नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जो शिशु है...!
आर्थिक क्षति का सूचक यह है मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्म लिया है...!
तो यह सुख कारक है अर्थात मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शिशु जब जन्म लेता है...!
वह सुख का कारक होता है वह सुख समृद्धि का सूचक होता है मूल नक्षत्र के प्रथम चरण से चतुर्थ चरणों तक का फल अश्लेषा नक्षत्र यह है...!
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आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से प्रथम चरण तक के लिए मूल नक्षत्र के विलोम अर्थात विपरीत समझना की जिए...!
जैसे आश्लेषा के चतुर्थ चरण में जन्म लिया है तो शिशु पितृ के लिए हानिकारक है..!
तृतीय चरण में जन्म लेने से मात्र के लिए हानिकारक है और द्वितीय चरण में धन हानि की संभावना होती है यह संकेत प्राप्त हो हैं...!
और लाख लेता नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाले शिशु जो होते हैं...!
वह पुत्र जो पुत्र कन्या उत्पन्न होते हैं तो ऐसे समय में उत्पन्न जातक धम्म सुख समृद्धि कारक होते हैं...!
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यहां पर ध्यान देने की अनिष्ट फलों की शांति के लिए शास्त्रों में शिशु के त्यागने से लेकर के अश्वगंधा नक्षत्रों की जो शांति प्रयोग करने पर मूल और आख्या में उत्पन्न दुश्मन से माता - पिता आदि के अनिष्ट फलों का संपूर्ण निराकरण हो जाता है...!
ऐसा भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के ग्रंथ में मुद्रित है प्रिय मित्रों इस ब्लॉग पोस्ट के अंतर्गत हम आप लोगों को यह समझाने व्यक्ति यह है...!
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कि जो गंडमूल होता है मूल नक्षत्र के एवं आश्लेषा नक्षत्र के जो चार चरण होते हैं...!
यह दोनों क्षेत्रों के बारे में चर्चा की गई मूल नक्षत्र के चार चरण और चार चरण आश्लेषा नक्षत्र का तो मुल्क के किन - किन नक्षत्रों में जातक का जन्म होता है...!
तो यह किसके लिए हानिकारक है इस के लिए शुक्र है आप नेताओं ने क्षेत्र में जिसका हानि करता है...!
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आज हम आप लोगों को यह बतलाएंगे की मूल नक्षत्र के अंतर्गत आश्लेषा नक्षत्र के अंतर्गत चार चरणों में शिशु का जन्म होता है तो वह सुलभ क्या फलदाई होता है...!
उसके लिए आप ही लोगों के पृथक प्रकार से विवेचन करने के लिए हम उपस्थित हुए हैं...!
तो आइए विश्लेषण को आरंभ करते हैं मित्रों ध्यान देने की बात है कि शोल्डर संस्कार के अंतर्गत हमारे सनातन धर्म में हर गर्म के अपने एक रूप होते हैं....!
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और मूल के प्रथम चरण में जन्म लिए जाने वाले जो सिद्ध होते हैं...!
उनके लिए जो मृत्युसूचक होता है जो जन्म का नक्षत्र होता है...!
मूल का प्रथम चरण होता है वह पिता के लिए वसुंधरा होता है...!
मूल नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म होने से यह मात्र के लिए अशुभ कारक है...!
यानि कि मंत्री के स्वास्थ्य में प्रभाव डालेगा दुष्प्रभाव डालेगा मूल नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जो शिशु है...!
आर्थिक क्षति का सूचक यह है मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्म लिया है...!
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तो यह सुख कारक है अर्थात मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शिशु जब जन्म लेता है वह सुख का कारक होता है वह सुख समृद्धि का सूचक होता है...!
मूल नक्षत्र के प्रथम चरण से चतुर्थ चरणों तक का फल अश्लेषा नक्षत्र यह है...!
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से प्रथम चरण तक के लिए मूल नक्षत्र के विलोम अर्थात विपरीत समझना कीजिए...!
जैसे आश्लेषा के चतुर्थ चरण में जन्म लिया है तो शिशु पितृ के लिए हानिकारक है तृतीय चरण में जन्म लेने से मात्र के लिए हानिकारक है...!
और द्वितीय चरण में धन हानि की संभावना होती है यह संकेत प्राप्त हो हैं...!
और लाख लेता नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाले शिशु जो होते हैं....!
वह पुत्र जो पुत्र कन्या उत्पन्न होते हैं तो ऐसे समय में उत्पन्न जातक धम्म सुख समृद्धि कारक होते हैं...!
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यहां पर ध्यान देने की अनिष्ट फलों की शांति के लिए शास्त्रों में शिशु के त्यागने से लेकर के अश्वगंधा नक्षत्रों की जो शांति प्रयोग करने पर मूल और आख्या में उत्पन्न दुश्मन से माता - पिता आदि के अनिष्ट फलों का संपूर्ण निराकरण हो जाता है...!
ऐसा भारतीय ज्योतिष शास्त्र के ग्रंथ में मुद्रित है प्रिय मित्रों इस ब्लॉग पोस्ट के अंतर्गत हम आप लोगों को यह समझाने व्यक्ति यह है...!
कि जो गंडमूल होता है मूल नक्षत्र के एवं आश्लेषा नक्षत्र के जो चार चरण होते हैं यह दोनों क्षेत्रों के बारे में चर्चा की गई मूल नक्षत्र के चार चरण और चार चरण आश्लेषा नक्षत्र का तो मुल्क के किन-किन नक्षत्रों में जातक का जन्म होता है...!
तो यह किसके लिए हानिकारक है इसके लिए शुक्र है आप नेताओं ने क्षेत्र में जिसका हानि करता है...!
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इस के लिए शुभ कारक होता है यह अत्यंत हम बहुत ही सरल रूप से आप लोगों के सामने विंटर देखिए आशा करता हूं....!
कि यह ब्लॉग पोस्ट आप लोगों को पसंद आएगा और आप लोग उपयोगी बनाएंगे...!
दिशाशूल का विचार :
अंतर्गत यात्रा विसलेषण को ले करके हम आए हुए हैं यात्रा विश्लेषण के अंतर्गत दिशाशूल कब नहीं होते हैं...!
किस परिस्थिति में दिशाशूल का विचार नहीं किया जाता है और इसके साथ - साथ कि यात्रा के दौरान यानि की यात्रा से पहले हम को क्या करना चाहिए...!
कि इस स्थिति में यात्रा वर्जित होती है उसके पहले क्या हमको सावधानी रखनी चाहिए...!
इत्यादि विषयों पर बहुत सुंदर ढंग से विश्लेषण करने वाले हैं तो ध्यान देने की बात है...!
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हर इंसान के जीवन में यात्राएं होती रहती हैं....!
किंतु उन यात्राओं के करने से पूर्व हमको कुछ विषय पर आवश्यक जानकारी रखनी पड़ती है....!
तो जब आप पूरी वीडियो को देखेंगे तो सारी बातें आप समझ पाएंगे और अपने जीवन में जब भी यात्रा करेंगे उसके पहले जानकारी रहेगी तो आप उसको उपयोगी बनाएंगे...!
तो आज का जो प्रसंग है अब यह महत्वपूर्ण है विचार करने की बात है...!
और शुभता से बचने की बात है हमारे सनातन धर्म के अंतर्गत को योनि कार्य करते हैं तो वह शुभ कार्य में शुभ मुहूर्त की आवश्यकता होती है...!
तो हम विश्लेषण को आरंभ करते हैं अपने परिवार में है कि शुभ कार्य कोई भी पड़ता है है...!
मान लीजिए यज्ञोपवीत संस्कार है किसी भी देवता की प्रतिष्ठा चल रही है...!
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होली इत्यादि उत्सव का कार्य है संयुक्त और जन्म-मरण यह जो है....!
मतलब जननाशौच और मरणाशौच लग गया है तक लग गया है....!
तब ऐसी स्थिति को और हमको क्या करना चाहिए जब तक पुस्तक समाप्त न हो जाए या जो शुभ कार्य चल रहा है वह समाप्त न हो जाए....!
तब तक हम को बिल्कुल यात्रा नहीं करने चाहिए इसी प्रकार और समय पर बिजली जो आकाशीय बिजली होती है....!
बिजली आदि का ज्ञान व बादलों का गरजना वृद्धि पाला गिरना इत्यादि दोस्त समझो में सात दिन तक यात्रा को वर्जित कर देना चाहिए...!
कि अब यहां पर ध्यान देने की बात है जैसे कि हम आप लोगों को पहले मत लाइक थिस है...!
कि कब दिशाशूल नहीं लागू होता है यहां पर ध्यान दीजिए काया हूं...!
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कि मान लीजिए वाराणसी से आप विंध्यवासिनी धाम के लिए यात्रा कर रहे हैं...!
तो यह तो साध्य है लेकिन जब आप रफे ग्राम या नगर की यात्रा करते हैं...!
उसके उपरांत दूसरे ग्राम अथवा नगर में प्रवेश करते हैं...!
तो ऐसी स्थिति में ए डिकेड टूल का विचार नहीं करना चाहिए पंचांग बुद्धि योगिनी इत्यादि का जो कि आचार्य गण है...!
आवश्यक विचार नहीं होता है ऐसे समय में मतलब उक्त लागू हो जाते हैं...!
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अब वस्तुओं का नाश हो जाता है शास्त्रकारों ने आदेश दिया है कि जब हम एक दिन की यात्रा करते हैं....!
दो दिन की यात्रा करते हैं तीन दिन की यात्रा करते हैं...!
लेकिन यात्रा के अंतर्गत हम नगर में प्रवेश करते हैं ग्राम में प्रवेश करते हैं...!
उसके उपरांत अन्य नगर ग्राम में प्रवेश होता है तो ऐसी स्थिति में कोई आवश्यक नहीं है...!
कि कुएं का विचार करना तो साथियों कहने का भाव यह है...!
कि हमारे यहां ऋषि - मुनियों ने हर तत्वों पर जानकारियां दी है...!
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शास्त्रों के अंतर्गत पीड़ित है हम उन जानकारियों को लेकर गए अपने जीवन में उपयोगी कर सकते हैं...!
कुंभ का संकेत समझ सकते हैं किस परिस्थिति में हम को यात्रावृत्त करना है...!
किस परिस्थिति में यात्रा ग्रहण करना है क्या संकेत होता है....!
तब यात्रा को वर्जित कर दें क्या कार्य होते हैं....!
सनातन धर्म के अंतर्गत परिवार में समाज में किस प्रकार के कार्य होते हैं....!
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तो जब तक कार्य संपादित न हो जाए तब तक यात्रा नहीं करनी चाहिए...!
इत्यादि विषयों पर आप लोगों के समक्ष हम चर्चा किए आपको यह जानकारी कैसी लगी आप लाइक करते हुए कमेंट करके अवश्य मतलब लेंगे...!
अगर किसी भी प्रकार की आपको समझने में सुविधा हुई तो आप कमेंट बॉक्स में अब लिखेंगे...!
अपना प्रयास निरंतर यहीं रहता है कि किसी भी प्रकार की संख्याओं समस्याओं उसका समाधान सम्यक रूपेण से किया जाए....!
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और जो भी सज्जन इस ब्लॉग पोस्ट को पहली बार देख रहे हैं तो दिए सब्सक्राइब है आप सब्सक्राइब दबा दें अधिक से अधिक लोगों को अपने इष्ट मित्रों को आप शेयर करें ताकि जानकारियां प्राप्त करते हुए सभी लोग लाभान्वित हो....!
और इसी तरह से जानकारियां आगे भी आप लोगों को मिलती रहे हैं...!
इसी आशा और विश्वास के साथ आज के लिए इतना तरफ से अगले विश्लेषण को हम मिलते हैं तब तक के लिए हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!!
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