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Monday, July 7, 2025

सूर्य देव , शनि की साढ़े साती :

शनि की साढ़े साती  : 

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, श्री खगोलशास्त्र, श्री ऋग्वेद एवं श्री यजुर्वेद के आलोक में सूर्य देव, शनि की साढ़ेसाती, जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर, महत्व, नियम, फल एवं उपाय

भूमिका 

भारतीय संस्कृति में ज्योतिष केवल भविष्य बताने का साधन नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, कर्म और जीवन को संतुलित बनाने की विद्या मानी गई है। 
वैदिक ज्योतिष का आधार वेद, वेदांग तथा प्राचीन ऋषियों की परंपरा है। 
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के माध्यम से ग्रहों की स्थिति का अध्ययन कर जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया जाता है।

🪐ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र 🪐 

सूर्य देव :  

सूर्य देव आत्मबल, पिता, नेतृत्व, स्वास्थ्य और तेज के कारक माने जाते हैं, जबकि शनि देव कर्म, न्याय, अनुशासन, धैर्य और परिश्रम के प्रतीक हैं। 

विशेष रूप से शनि की साढ़ेसाती को लेकर समाज में अनेक धारणाएँ प्रचलित हैं। 

वास्तव में साढ़ेसाती केवल कष्ट का समय नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के कर्मों की परीक्षा और आत्मविकास का अवसर भी हो सकती है।

रविवार विशेष - सूर्य देव 

समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर न सिर्फ सम्पूर्ण संसार के कर्ताधर्ता है बल्कि नवग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। 


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सूर्य देव एक ऐसे देव हैं जिनके दर्शन के बिना किसी के भी दिन का आरंभ नहीं होता है। 

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। 

भगवान सूर्य का दिन होने के कारण रविवार को भगवान सूर्य का उपासना बेहद ही पुण्यकारक माना जाता है। 

वैदिक ज्योतिष और खगोलशास्त्र का संबंध :

वैदिक ज्योतिष ग्रहों की गणना खगोलशास्त्र के आधार पर करता है। 

खगोलशास्त्र ग्रहों की वास्तविक गति और स्थिति का अध्ययन करता है, जबकि ज्योतिष उन स्थितियों का पारंपरिक प्रतीकात्मक अर्थ बताता है। दोनों का अपना-अपना महत्व है।

सूर्यदेव को हिरण्यगर्भ भी कहा जाता है। 

हिरण्यगर्भ यानी जिसके गर्भ में ही सुनहरे रंग की आभा है। 

इनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करने के लिए रविवार के दिन सूर्य भगवान का विधिवत पूजा पाठ करके जल चढ़ाना चाहिए।

ऐसा करने से भगवान सूर्य की कृपा हमारे परिवार पर बनी रहती है। 

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जन्मकुंडली का महत्व :

जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के आधार पर जन्मकुंडली बनाई जाती है। 

इस से व्यक्ति के स्वभाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, व्यवसाय और जीवन के अनेक पक्षों का अध्ययन किया जाता है।

यदि सूर्य बलवान हो तो आत्मविश्वास, सम्मान और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। 

यदि सूर्य कमजोर हो तो आत्मबल में कमी, पिता से मतभेद या प्रतिष्ठा से जुड़े संघर्ष देखने को मिल सकते हैं।

🔆सूर्य - पिता, स्वास्थ्य, यश सम्मान, प्रशासनिक नौकरियां व व्यापार के कारक ग्रह है। 

कुंडली में इनके शुभ होने से इन सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है।

🔆उदयगामी सूर्य को प्रणाम करना प्रगति की निशानी है। 

इसी लिए सुबह - सुबह स्नान करके उगते सूर्य को देखना चाहिए, उन्हें प्रणाम करना चाहिए। 

इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 

🔆सूर्यदेव की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। 

इसके पश्चात् उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें "ॐ घृणि सूर्याय नम:" या फिर "ॐ सूर्याय नमः" कहते हुए जल अर्पित करें। 

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🔆सूर्य को दिए जाने वाले जल में केवल लाल, पीले पुष्प मिला सकते हैं, लेकिन इसके अलावा और किसी प्रकार की सामग्री जल में नहीं मिलानी चाहिए क्योंकि इससे जल की पवित्रता भंग होती है।

🔆अर्घ्य समर्पित करते समय नजरें लोटे के जल की धारा की ओर रखें। 

जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिम्ब एक बिन्दु के रूप में जल की धारा में दिखाई देगा।


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प्रश्नकुंडली का महत्व :

जब जन्म समय उपलब्ध न हो या किसी विशेष प्रश्न का उत्तर जानना हो, तब प्रश्न पूछने के समय की कुंडली बनाकर उसका विश्लेषण किया जाता है। 
अनुभवी ज्योतिषी प्रश्नकुंडली के आधार पर शुभ - अशुभ संभावनाओं का संकेत देते हैं।

🔆सूर्य को अर्घ्य समर्पित करते समय दोनों भुजाओं को इतना ऊपर उठाएं कि जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिंब दिखाई दे। 

🔆सूर्य देव की सात प्रदक्षिणा करें व हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए सूर्यनारायण के समक्ष आप इन मंत्रों का जाप भी कर सकते है-:

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गोचर का महत्व :

गोचर का अर्थ है ग्रहों का वर्तमान संचरण। 

जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति स्थायी रहती है, जबकि गोचर बदलता रहता है। 

इस लिए किसी घटना का विश्लेषण करते समय जन्मकुंडली और गोचर दोनों का संयुक्त अध्ययन अधिक उपयोगी माना जाता है।

1- ॐ सूर्याय नम:।

2- ॐ मित्राय नम:।

3- ॐ रवये नम:।

4- ॐ भानवे नम:।

5- ॐ खगाय नम:।

6- ॐ पूष्णे नम:।

7- ॐ हिरण्यगर्भाय नम:।

8- ॐ मारीचाय नम:।

9- ॐ आदित्याय नम:।

10- ॐ सावित्रे नम:।

11- ॐ अर्काय नम:।

12- ॐ भास्कराय नम:।।

सूर्य देव का महत्व :

वैदिक परंपरा में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। 

सूर्य जीवन ऊर्जा, आत्मविश्वास, शासन, पिता, प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं।

यदि सूर्य शुभ स्थिति में हो तो—

आत्मविश्वास बढ़ता है।

सरकारी कार्यों में सफलता मिल सकती है।

नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।

सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है।

यदि सूर्य अशुभ या कमजोर हो तो—

आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।

नेत्र या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

पिता से मतभेद संभव हैं।

सरकारी कार्यों में बाधाएँ आ सकती हैं।

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शनि की साढ़े साती  :

शनि की साढ़े साती के कुछ लक्षण दुर्गति परिणाम जाने अपने जन्म कुंडली से....!

बहुत सारी घटनाएं हमारे और आपके जीवन में हो रही है जो कि वर्तमान में शनि की अधिक प्रभाव और साडेसाती अधिया की असर के कारण हो रहा है जाने खास लक्षण 

हथेली की रेखाओं का रंग बदल जाना या नीला या काला हो जाना सिर की चमक गायब हो जाना और माथे पर काला रंग दिखना 

शनि देव का महत्व :

शनि को न्यायप्रिय ग्रह माना गया है। 

वे कर्म के अनुसार फल देने वाले ग्रह हैं। 

शनि परिश्रम, धैर्य, अनुशासन, सेवा, जिम्मेदारी और समय का महत्व सिखाते हैं।

यदि शनि शुभ हो तो—

कठिन परिश्रम का फल मिलता है।

दीर्घकालीन सफलता प्राप्त हो सकती है।

व्यक्ति गंभीर, जिम्मेदार और न्यायप्रिय बनता है।

यदि शनि चुनौतीपूर्ण स्थिति में हो तो—

कार्यों में विलंब हो सकता है।

मानसिक दबाव बढ़ सकता है।

आर्थिक या पारिवारिक चुनौतियाँ आ सकती हैं।

धैर्य की परीक्षा होती है।

शनि की साढ़ेसाती क्या है?

साढ़ेसाती तब मानी जाती है जब शनि जन्मराशि ( चंद्र राशि ) से बारहवें, प्रथम और दूसरे भाव से क्रमशः गोचर करता है। 

यह अवधि लगभग साढ़े सात वर्ष की होती है।

हर व्यक्ति की साढ़ेसाती का अनुभव समान नहीं होता। 

इसका प्रभाव जन्मकुंडली में शनि की स्थिति, दशा, अन्य ग्रहों के योग और व्यक्ति के कर्मों सहित अनेक कारकों पर निर्भर माना जाता है।

बात - बात पर गुस्सा आना वाणी और विचारों में बदलाव होना अचानक टेंशन बढ़ना और हमेशा सिर में दर्द रहना 

हर काम में असफलता मिलना 

शरीर में कुछ न कुछ कष्ट होना 

अपनों से धोखा मिलना मन मस्तिष्क बिना कारण के गर्म होना घर में पैसा टिकना न होना 

शनि की साढ़े साती तीन हिस्सों में होती है और हर हिस्सा लगभग ढाई साल का होता है. शनि साढ़े साती के दौरान, शनि व्यक्ति को जीवन भर के लिए सिख देने का प्रयास करता है. 

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साढ़ेसाती के संभावित प्रभाव :

धैर्य और सहनशक्ति की परीक्षा।

कार्यक्षेत्र में परिवर्तन या अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ।

आर्थिक अनुशासन की आवश्यकता।

परिवार और संबंधों में परिपक्वता।

आध्यात्मिक रुचि बढ़ सकती है।

जीवन की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार का अवसर मिलता है।

कई लोगों को इसी समय मेहनत के बाद बड़ी सफलता भी प्राप्त होती है।

शनि साढ़े साती के दौरान शनिदेव की पूजा करने से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है. 

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वर्तमान में मकर राशि कुंभ राशि पर शनि की साडेसाती अधिया का विशेष प्रभाव है जो की आने वाले समय में कर्ज जेल या अन्य धन का नुकसान तथा गुप्त शत्रुओं से 

अधिक पीड़ा तथा कार्य क्षेत्र व्यवसाय आदि में अधिक नुकसान होगा और वर्तमान में हो रहा है या मनोरोग या मानसिक रोग हो सकते हैं 

आप यथाशीघ्र शनि की साडेसाती अढैया की शांति निवारण करें और लाभ में...!

और अधिक जानकारी रत्न से जुड़ा हुआ परामर्श सलाह या आपको किसी भी तरह के रत्न चाहिए या जन्म कुंडली दिखाना है 

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शनि के नियम :

शनि अनुशासन और कर्म के प्रतीक हैं। 

इसलिए—

सत्य और ईमानदारी अपनाएँ।

मेहनत से कार्य करें।

बुजुर्गों और श्रमिकों का सम्मान करें।

अन्याय और छल से बचें।

धैर्य बनाए रखें।

सूर्य देव के नियम

प्रतिदिन प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें।

समय का सम्मान करें।

माता-पिता का आदर करें।

सत्य और सदाचार का पालन करें।

स्वास्थ्य का ध्यान रखें।


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पारंपरिक उपाय :

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार निम्न उपाय किए जाते हैं। 

इन्हें आस्था का विषय समझें; इनके निश्चित परिणाम का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

सूर्य के लिए:

प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करें।

आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

रविवार को सात्विक जीवनशैली अपनाएँ।

जरूरतमंदों की सहायता करें।

शनि के लिए:

शनिवार को दान - पुण्य करें।

श्रमजीवियों, गरीबों और बुजुर्गों की सेवा करें।

पीपल के वृक्ष के समीप श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्वलित करें ( स्थानीय परंपरा के अनुसार )।

शनि मंत्र या हनुमान चालीसा का श्रद्धा से पाठ करें।

यच्च किञ्चित् जगत्सर्वं,दृश्यते श्रूयतेऽपि वा।

अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं,व्याप्य नारायण:स्थित:।।


निष्कलाय विमोहाय,शुद्धायाशुद्धवैरिणे।

अद्वितीयाय महते,श्रीकृष्णाय नमो नमः।।

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जो कुछ हो चुका है, जो कुछ हो रहा है और होने वाला है...! 

वह दिखाई देने वाला और सुनने में आने वाला सम्पूर्ण जगत भगवान् नारायण ही हैं। 

इसमें भीतर और बाहर सब ओर से भगवान् नारायण ही व्याप्त हुए स्थित हैं।

'जो कला ( अवयव) से रहित हैं...! 

जिनमें मोह का सर्वथा अभाव है, जो स्वरूप से ही परम विशुद्ध हैं...! 

अशुद्ध ( स्वभाव तथा आचरण वाले) असुरों के शत्रु हैं तथा जिनसे बढ़कर या जिनके समान भी दूसरा कोई नहीं है...! 

उन सर्वमहान् परमात्मा श्रीकृष्ण को बारम्बार नमस्कार है।'

कर्म का महत्व :

वैदिक दर्शन के अनुसार ग्रह व्यक्ति के कर्मों के संकेतक माने जाते हैं। 

अच्छे कर्म, सत्यनिष्ठा, सेवा, संयम और ईश्वर में श्रद्धा जीवन को संतुलित बनाने में सहायक माने गए हैं। 

केवल उपायों पर निर्भर रहने के बजाय सदाचार और परिश्रम को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।       

     || विष्णु भगवान की जय हो ||

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राहु-केतु गोचर, करियर में आ सकती हैं रुकावटें :

राहु–केतु का गोचर ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. 

राहु और केतु हर 18 महीने में राशि बदलते हैं, 

और उनका यह परिवर्तन जीवन में कई तरह के अवसर, चुनौतियां और बदलाव लेकर आता है.

राहु-केतु का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

ये दोनों ग्रह वर्ष के दौरान राशि और नक्षत्र परिवर्तन करते हुए कई जातकों की किस्मत बदल सकते हैं. 

कुछ राशियों को लाभ और नए अवसर मिलेंगे, जबकि कुछ को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. 

नववर्ष की शुरुआत के तुरंत बाद 29 मार्च 2026 को केतु मघा नक्षत्र में गोचर करेंगे. 

इसके बाद 25 नवंबर 2026 को केतु अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और फिर 5 दिसंबर को कर्क राशि में आएंगे. 

इन परिवर्तनों से पारिवारिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत मामलों पर असर देखा जा सकता है.

दूसरी ओर, राहु 2 अगस्त 2026 को कुंभ राशि में रहकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. 

इस के बाद 5 दिसंबर 2026 को राहु कुंभ से निकलकर मकर में संचरण करेंगे. 

उनकी यह चाल करियर, जिम्मेदारियों और सामाजिक दायरे पर प्रभाव डाल सकती है. 

राहु - केतु का यह गोचर साल 2026 में कुछ राशि वालों के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण बना सकता है.

वृषभ राशि :

वृषभ राशि वालों के लिए यह समय घरेलू और बाहरी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. 

घर में तालमेल की कमी के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है. 

आर्थिक मामलों में यह अवधि सावधानी बरतने वाली होगी. 

किसी भी तरह का निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता है. 

धन का लेनदेन टालना ही अच्छा रहेगा. 

प्रेम विवाह की इच्छा रखने वालों के लिए भी स्थिति आसान नहीं रहेगी. 

सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगों को इस समय स्थानांतरण या तबादले से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

सिंह :

मेष राशि वालों को इस समय खास सावधानी रखनी होगी. 

करियर और नौकरी में अचानक चुनौतियां सामने आ सकती हैं. 

कारोबार से जुड़े लोगों को व्यवसाय में मंदी का सामना करना पड़ सकता है, 

जिससे तनाव बढ़ेगा. नौकरी करने वालों की जिम्मेदारियों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, 

जो दिनचर्या को प्रभावित करेगी. प्रेम संबंधों में उतावलेपन से बचें. 

आय के नए स्रोत बनेंगे, लेकिन व्यवसाय में मनचाहा लाभ पाने के लिए मेहनत और प्रयास बढ़ाने होंगे. 

लापरवाही या जल्दबाजी से दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

कन्या :

कन्या राशि वालों के लिए यह समय कई पुराने मामलों और विवादों में उलझा सकता है. 

यदि कोई मामला कोर्ट - कचहरी में चल रहा है, तो उससे जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं और मानसिक थकान भी महसूस हो सकती है. 

ऐसे मामलों में धैर्य और सतर्कता आवश्यक रहेगी. व्यवसाय से जुड़े जातकों को जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह दूरी बनाकर चलनी होगी. 

जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसान दे सकता है. 

इस वर्ष नए रिश्ते या नई साझेदारी में आने से भी बचना बेहतर रहेगा, 

क्योंकि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे.

सूर्य - शनि की युति, 4 जनवरी 2026 से शुरू होगा इन 3 राशियों का 'स्वर्णिम काल' :

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य और शनि जो एक-दूसरे के शत्रु माने जाते हैं, 4 जनवरी 2026 को 72 डिग्री कोण पर आकर पंचांक योग बनाने वाले हैं. 

ऐसे में शनि और सूर्य पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी. लगभग 30 साल बाद बन रहा यह दुर्लभ राजयोग तीन राशियों के लिए भाग्योदय का संकेत है.

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को क्रमश: पिता-पुत्र होने के साथ-साथ एक दूसरे का शत्रु भी माना गया है. 

हालांकि इन दोनों ही शक्तिशाली ग्रहों की जोड़ी नए साल 2026 की शुरुआत में एक बड़ा ही दुर्लभ योग बनाने वाली है. 

दरअसल, 4 जनवरी 2026 को सू्र्य-शनि एक दूसरे से 72 डिग्री कोण पर स्थित होकर पंचांक योग का निर्माण करेंगे. 

इस दौरान शनि स्वराशि मीन में होंगे और सूर्य धनु राशि में रहेंगे, 

जिस पर गुरु बृहस्पति की दृष्टि भी बनी रहेगी. 

ज्योतिषविदों ने इसे महा 'राजयोग' बताया  है, जो करीब 30 वर्ष बाद बनने जा रहा है. 

यह दुर्लभ संयोग 2026 की शुरुआत में 3 राशि के जातकों का भाग्योदय कर सकता है...!

कन्या राशि में साल 2026 की शुरुआत में कन्या राशि में नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करेगा. 

आपके धन, करियर, कारोबार से जुड़े जो कार्य लंबित थे, उनमें गति आएगी. 

नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और कुछ बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. 

कोई बड़ा पद मिलने से आपका मन प्रसन्न रहेगा. विदेश घूमने, पढ़ने या बसने का सपना सच हो सकता है.

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धनु राशि :

धनु राशि में सूर्य - शनि के इस दुर्लभ संयोग का असर धनु राशि पर भी दिखाई देगा. 

सफलता के लिए जिस बड़े मौके की तलाश आपको लंबे अरसे से है, वो बहुत जल्द मिलने वाला है. 

2026 की शुरुआत में व्यापारियों के हाथ मुनाफे की कोई बड़ी डील लग सकती है. 

नौकरीपेशा जातकों का भी भाग्य पूरा साथ देगा. समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. 

बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से खूब मुनाफा बटोरेंगे.

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मीन राशि :

मीन राशि सूर्य-शनि का ये संयोग मीन राशि वालों के लिए भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है. वित्तीय स्थिति में सुधार होगा. पुराना कर्ज या अटके हुए धन की वापसी होगी. यदि किसी निवेश में लंबे समय से पैसा फंसा हुआ था तो वो भी वापस मिल सकता है. जिन लोगों को काफी समय से रोजगार की तलाश है, उनकी ये खोज बहुत जल्द समाप्त हो सकती है. किसी अच्छी, बड़ी नौकरी का अवसर आपके हाथ लग सकता है. रोग-बीमारियों से भी छुटकारा पाएंगे.

निष्कर्ष :

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, खगोलशास्त्र, ऋग्वेद और यजुर्वेद की परंपरा हमें यह संदेश देती है कि जीवन में ग्रहों का अध्ययन आत्मचिंतन का माध्यम हो सकता है। 

सूर्य आत्मबल और प्रकाश का प्रतीक हैं, जबकि शनि न्याय, कर्म और अनुशासन का। शनि की साढ़ेसाती भय का विषय नहीं, बल्कि धैर्य, आत्मसुधार और कर्म के मूल्य को समझने का अवसर भी हो सकती है। 

उचित आचरण, ईश्वर-भक्ति, सेवा, सत्य और परिश्रम के साथ जीवन जीने वाला व्यक्ति कठिन समय में भी अनुभव, परिपक्वता और आत्मबल प्राप्त कर सकता है। यही वैदिक परंपरा का सार है।

!!!!! शुभमस्तु !!!

+++ +++

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -

श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय

PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 

-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-

(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 

" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,

" Shri Aalbai Niwas "

Shri Maha Prabhuji bethak Road,

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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 

नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....

जय द्वारकाधीश....

जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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