शनि की साढ़े साती :
🪐ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र 🪐
सूर्य देव :
रविवार विशेष - सूर्य देव
समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर न सिर्फ सम्पूर्ण संसार के कर्ताधर्ता है बल्कि नवग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं।
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सूर्य देव एक ऐसे देव हैं जिनके दर्शन के बिना किसी के भी दिन का आरंभ नहीं होता है।
रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है।
भगवान सूर्य का दिन होने के कारण रविवार को भगवान सूर्य का उपासना बेहद ही पुण्यकारक माना जाता है।
सूर्यदेव को हिरण्यगर्भ भी कहा जाता है।
हिरण्यगर्भ यानी जिसके गर्भ में ही सुनहरे रंग की आभा है।
इनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करने के लिए रविवार के दिन सूर्य भगवान का विधिवत पूजा पाठ करके जल चढ़ाना चाहिए।
ऐसा करने से भगवान सूर्य की कृपा हमारे परिवार पर बनी रहती है।
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🔆सूर्य- पिता, स्वास्थ्य, यश सम्मान, प्रशासनिक नौकरियां व व्यापार के कारक ग्रह है।
कुंडली में इनके शुभ होने से इन सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है।
🔆उदयगामी सूर्य को प्रणाम करना प्रगति की निशानी है।
इसी लिए सुबह- सुबह स्नान करके उगते सूर्य को देखना चाहिए, उन्हें प्रणाम करना चाहिए।
इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
🔆सूर्यदेव की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।
इसके पश्चात् उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें "ॐ घृणि सूर्याय नम:" या फिर "ॐ सूर्याय नमः" कहते हुए जल अर्पित करें।
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+++🔆सूर्य को दिए जाने वाले जल में केवल लाल, पीले पुष्प मिला सकते हैं, लेकिन इसके अलावा और किसी प्रकार की सामग्री जल में नहीं मिलानी चाहिए क्योंकि इससे जल की पवित्रता भंग होती है।
🔆अर्घ्य समर्पित करते समय नजरें लोटे के जल की धारा की ओर रखें।
जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिम्ब एक बिन्दु के रूप में जल की धारा में दिखाई देगा।
🔆सूर्य को अर्घ्य समर्पित करते समय दोनों भुजाओं को इतना ऊपर उठाएं कि जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिंब दिखाई दे।
🔆सूर्य देव की सात प्रदक्षिणा करें व हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए सूर्यनारायण के समक्ष आप इन मंत्रों का जाप भी कर सकते है-:
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1- ॐ सूर्याय नम:।
2- ॐ मित्राय नम:।
3- ॐ रवये नम:।
4- ॐ भानवे नम:।
5- ॐ खगाय नम:।
6- ॐ पूष्णे नम:।
7- ॐ हिरण्यगर्भाय नम:।
8- ॐ मारीचाय नम:।
9- ॐ आदित्याय नम:।
10- ॐ सावित्रे नम:।
11- ॐ अर्काय नम:।
12- ॐ भास्कराय नम:।।
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शनि की साढ़े साती :
शनि की साढ़े साती के कुछ लक्षण दुर्गति परिणाम जाने अपने जन्म कुंडली से....!
बहुत सारी घटनाएं हमारे और आपके जीवन में हो रही है जो कि वर्तमान में शनि की अधिक प्रभाव और साडेसाती अधिया की असर के कारण हो रहा है जाने खास लक्षण
हथेली की रेखाओं का रंग बदल जाना या नीला या काला हो जाना सिर की चमक गायब हो जाना और माथे पर काला रंग दिखना
बात-बात पर गुस्सा आना वाणी और विचारों में बदलाव होना अचानक टेंशन बढ़ना और हमेशा सिर में दर्द रहना
हर काम में असफलता मिलना
शरीर में कुछ न कुछ कष्ट होना
अपनों से धोखा मिलना मन मस्तिष्क बिना कारण के गर्म होना घर में पैसा टिकना न होना
शनि की साढ़े साती तीन हिस्सों में होती है और हर हिस्सा लगभग ढाई साल का होता है. शनि साढ़े साती के दौरान, शनि व्यक्ति को जीवन भर के लिए सिख देने का प्रयास करता है.
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+++शनि साढ़े साती के दौरान शनिदेव की पूजा करने से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है.
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वर्तमान 2025 में मकर राशि कुंभ राशि पर शनि की साडेसाती अधिया का विशेष प्रभाव है जो की आने वाले समय में कर्ज जेल या अन्य धन का नुकसान तथा गुप्त शत्रुओं से
अधिक पीड़ा तथा कार्य क्षेत्र व्यवसाय आदि में अधिक नुकसान होगा और वर्तमान में हो रहा है या मनोरोग या मानसिक रोग हो सकते हैं
आप यथाशीघ्र शनि की साडेसाती अढैया की शांति निवारण करें और लाभ में...!
और अधिक जानकारी रत्न से जुड़ा हुआ परामर्श सलाह या आपको किसी भी तरह के रत्न चाहिए या जन्म कुंडली दिखाना है
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यच्च किञ्चित् जगत्सर्वं,दृश्यते श्रूयतेऽपि वा।
अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं,व्याप्य नारायण:स्थित:।।
निष्कलाय विमोहाय,शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते,श्रीकृष्णाय नमो नमः।।
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जो कुछ हो चुका है, जो कुछ हो रहा है और होने वाला है...!
वह दिखाई देने वाला और सुनने में आने वाला सम्पूर्ण जगत भगवान् नारायण ही हैं।
इसमें भीतर और बाहर सब ओर से भगवान् नारायण ही व्याप्त हुए स्थित हैं।
'जो कला ( अवयव) से रहित हैं...!
जिनमें मोह का सर्वथा अभाव है, जो स्वरूप से ही परम विशुद्ध हैं...!
अशुद्ध ( स्वभाव तथा आचरण वाले) असुरों के शत्रु हैं तथा जिनसे बढ़कर या जिनके समान भी दूसरा कोई नहीं है...!
उन सर्वमहान् परमात्मा श्रीकृष्ण को बारम्बार नमस्कार है।'
|| विष्णु भगवान की जय हो ||
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राहु-केतु गोचर, करियर में आ सकती हैं रुकावटें :
राहु–केतु का गोचर ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
राहु और केतु हर 18 महीने में राशि बदलते हैं,
और उनका यह परिवर्तन जीवन में कई तरह के अवसर, चुनौतियां और बदलाव लेकर आता है.
राहु-केतु का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ये दोनों ग्रह वर्ष के दौरान राशि और नक्षत्र परिवर्तन करते हुए कई जातकों की किस्मत बदल सकते हैं.
कुछ राशियों को लाभ और नए अवसर मिलेंगे, जबकि कुछ को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
नववर्ष की शुरुआत के तुरंत बाद 29 मार्च 2026 को केतु मघा नक्षत्र में गोचर करेंगे.
इसके बाद 25 नवंबर 2026 को केतु अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और फिर 5 दिसंबर को कर्क राशि में आएंगे.
इन परिवर्तनों से पारिवारिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत मामलों पर असर देखा जा सकता है.
दूसरी ओर, राहु 2 अगस्त 2026 को कुंभ राशि में रहकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे.
इस के बाद 5 दिसंबर 2026 को राहु कुंभ से निकलकर मकर में संचरण करेंगे.
उनकी यह चाल करियर, जिम्मेदारियों और सामाजिक दायरे पर प्रभाव डाल सकती है.
राहु - केतु का यह गोचर साल 2026 में कुछ राशि वालों के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण बना सकता है.
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वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों के लिए यह समय घरेलू और बाहरी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.
घर में तालमेल की कमी के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है.
आर्थिक मामलों में यह अवधि सावधानी बरतने वाली होगी.
किसी भी तरह का निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता है.
धन का लेनदेन टालना ही अच्छा रहेगा.
प्रेम विवाह की इच्छा रखने वालों के लिए भी स्थिति आसान नहीं रहेगी.
सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगों को इस समय स्थानांतरण या तबादले से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
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सिंह
मेष राशि वालों को इस समय खास सावधानी रखनी होगी.
करियर और नौकरी में अचानक चुनौतियां सामने आ सकती हैं.
कारोबार से जुड़े लोगों को व्यवसाय में मंदी का सामना करना पड़ सकता है,
जिससे तनाव बढ़ेगा. नौकरी करने वालों की जिम्मेदारियों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है,
जो दिनचर्या को प्रभावित करेगी. प्रेम संबंधों में उतावलेपन से बचें.
आय के नए स्रोत बनेंगे, लेकिन व्यवसाय में मनचाहा लाभ पाने के लिए मेहनत और प्रयास बढ़ाने होंगे.
लापरवाही या जल्दबाजी से दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
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कन्या
कन्या राशि वालों के लिए यह समय कई पुराने मामलों और विवादों में उलझा सकता है.
यदि कोई मामला कोर्ट - कचहरी में चल रहा है, तो उससे जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं और मानसिक थकान भी महसूस हो सकती है.
ऐसे मामलों में धैर्य और सतर्कता आवश्यक रहेगी. व्यवसाय से जुड़े जातकों को जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह दूरी बनाकर चलनी होगी.
जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसान दे सकता है.
इस वर्ष नए रिश्ते या नई साझेदारी में आने से भी बचना बेहतर रहेगा,
क्योंकि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे.
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सूर्य-शनि की युति, 4 जनवरी 2026 से शुरू होगा इन 3 राशियों का 'स्वर्णिम काल' :
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य और शनि जो एक-दूसरे के शत्रु माने जाते हैं, 4 जनवरी 2026 को 72 डिग्री कोण पर आकर पंचांक योग बनाने वाले हैं.
ऐसे में शनि और सूर्य पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी. लगभग 30 साल बाद बन रहा यह दुर्लभ राजयोग तीन राशियों के लिए भाग्योदय का संकेत है.
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को क्रमश: पिता-पुत्र होने के साथ-साथ एक दूसरे का शत्रु भी माना गया है.
हालांकि इन दोनों ही शक्तिशाली ग्रहों की जोड़ी नए साल 2026 की शुरुआत में एक बड़ा ही दुर्लभ योग बनाने वाली है.
दरअसल, 4 जनवरी 2026 को सू्र्य-शनि एक दूसरे से 72 डिग्री कोण पर स्थित होकर पंचांक योग का निर्माण करेंगे.
इस दौरान शनि स्वराशि मीन में होंगे और सूर्य धनु राशि में रहेंगे,
जिस पर गुरु बृहस्पति की दृष्टि भी बनी रहेगी.
ज्योतिषविदों ने इसे महा 'राजयोग' बताया है, जो करीब 30 वर्ष बाद बनने जा रहा है.
यह दुर्लभ संयोग 2026 की शुरुआत में 3 राशि के जातकों का भाग्योदय कर सकता है...!
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कन्या राशि :
कन्या राशि में साल 2026 की शुरुआत में कन्या राशि में नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करेगा.
आपके धन, करियर, कारोबार से जुड़े जो कार्य लंबित थे, उनमें गति आएगी.
नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और कुछ बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं.
कोई बड़ा पद मिलने से आपका मन प्रसन्न रहेगा. विदेश घूमने, पढ़ने या बसने का सपना सच हो सकता है.
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धनु राशि
धनु राशि में सूर्य - शनि के इस दुर्लभ संयोग का असर धनु राशि पर भी दिखाई देगा.
सफलता के लिए जिस बड़े मौके की तलाश आपको लंबे अरसे से है, वो बहुत जल्द मिलने वाला है.
2026 की शुरुआत में व्यापारियों के हाथ मुनाफे की कोई बड़ी डील लग सकती है.
नौकरीपेशा जातकों का भी भाग्य पूरा साथ देगा. समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा.
बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से खूब मुनाफा बटोरेंगे.
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मीन राशि :
मीन राशि सूर्य-शनि का ये संयोग मीन राशि वालों के लिए भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है. वित्तीय स्थिति में सुधार होगा. पुराना कर्ज या अटके हुए धन की वापसी होगी. यदि किसी निवेश में लंबे समय से पैसा फंसा हुआ था तो वो भी वापस मिल सकता है. जिन लोगों को काफी समय से रोजगार की तलाश है, उनकी ये खोज बहुत जल्द समाप्त हो सकती है. किसी अच्छी, बड़ी नौकरी का अवसर आपके हाथ लग सकता है. रोग-बीमारियों से भी छुटकारा पाएंगे.
!!!!! शुभमस्तु !!!
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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
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-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
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