google-site-verification: google5cf1125c7e3f924f.html pina_AIA2RFAWACV3EAAAGAAFWDICOQVKPGQBAAAAALGD7ZSIHZR3SASLLWPCF6DKBWYFXGDEB37S2TICKKG6OVVIF3AHPRY7Q5IA { "event_id": "eventId0001" } { "event_id": "eventId0001" } https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec Astrologer: October 2025

Friday, October 31, 2025

दैनिक राशी फल कितना सच होता है....!

सभी ज्योतिष मित्रो को मेरा निवेदन है..., आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे..., मे किसी के लेखो की कोपी नहि करता..., किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही है..., कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्ता भाई..., और आगे भी नही बढ़ता..., आप आपके महेनत से त्यार होने से बहुत आगे बठा जाता है...,

धन्यवाद......,  जय द्वारकाधीश..., 

दैनिक राशी फल कितना सच होता है....!

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद और श्री यजुर्वेद के अनुसार जन्मकुंडली एवं प्रश्नकुंडली की तुलना में दैनिक राशिफल कितना सही होता है?

आज के समय में लगभग प्रत्येक समाचार पत्र, टीवी चैनल, वेबसाइट और सोशल मीडिया मंच पर दैनिक राशिफल प्रकाशित किया जाता है। 

अनेक लोग सुबह उठते ही अपनी राशि का भविष्य पढ़ते हैं और उसी के आधार पर दिन की योजना बनाने का प्रयास करते हैं। 

किंतु प्रश्न यह है कि क्या केवल राशि के आधार पर बताया गया दैनिक राशिफल वास्तव में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में समान रूप से लागू हो सकता है? 

क्या वैदिक ज्योतिष, ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा प्राचीन ज्योतिष परंपरा भी यही कहती है?

में आप लोगों का हार्दिक स्वागत करता हूं कि आप लोग कुशल मंगल होंगे कि आज का जो यह ब्लॉग पोस्ट है बहुत ही महत्वपूर्ण समाज में आज मीडिया में बहुत ही भ्रामक स्थिति चल रही है...! 

इसी विषय को लेकर के हम उपस्थित हुए हैं क्या आप भोज पड़ते हैं दैनिक राशिफल दैनिक राशिफल कितना सच होता है....! 

इस से हम इसलिए ऐड करेंगे क्योंकि लोग इतने भ्रमित हो चुके हैं मीडिया में इतने भ्रामक स्थिति यह है

कि लोगों का भारतीय ज्योतिष शास्त्र के ऊपर विश्वास नहीं बन पा रहा है और धनियां फैलती जा रही है...! 

कि व्यायाम दीजिए का या आप सभी मैं न्यूज़ चैनलों और समाचार पत्रों में नित्य प्रसारित जो होता है...! 

प्रकाशित होते रहते हैं दैनिक राशिफल को तो अवश्य देख रहे होंगे सुन रहे होंगे...! 

लेकिन आजकल अधिकांश व्यक्ति प्रातः काल समाचार पत्र में सर्वप्रथम दैनिक राशिफल वाले इस तरह में अपनी राशि का हृदय करके वह अपने दिन का पूर्वानुमान लगाने में उत्सुक रहते हैं...! 

और जब शाम को सूरज ढलता है तो हम महसूस करते हैं...! 





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{ About this item

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वैदिक ज्योतिषशास्त्र का उत्तर स्पष्ट है — 

दैनिक राशिफल केवल एक सामान्य संकेत हो सकता है, जबकि किसी व्यक्ति का वास्तविक और अधिक सटीक फल उसकी जन्मकुंडली तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रश्नकुंडली के गहन अध्ययन से ही ज्ञात होता है।

वैदिक ज्योतिष का आधार केवल बारह राशियाँ नहीं हैं। 

इसमें ग्रह, नक्षत्र, भाव, लग्न, दशा, अंतरदशा, गोचर, योग, ग्रहबल, दृष्टियाँ और अनेक सूक्ष्म नियमों का विचार किया जाता है। 
इसलिए केवल सूर्य राशि या चंद्र राशि के आधार पर भविष्य का पूर्ण निर्णय करना उचित नहीं माना गया है।
कि उनकी राशि का जो फलित दैनिक राशिफल में बताया गया था...! 
वह तो पसंद की निकला अब उसके बाद इसका परिणाम क्या होता है...! 
ऋग्वेद में सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और कालचक्र के महत्व का वर्णन मिलता है। 
यजुर्वेद में भी समय, यज्ञ, ऋतु और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के साथ मनुष्य के जीवन के संबंध का उल्लेख है। इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर आगे चलकर वैदिक ज्योतिष का विकास हुआ, जिसमें ग्रहों की गति और समय का मनुष्य के कर्मफल से संबंध स्थापित किया गया।
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जब किसी बालक का जन्म होता है, उसी क्षण आकाश में ग्रहों की जो स्थिति होती है, उसी के आधार पर उसकी जन्मकुंडली बनाई जाती है। 
यह कुंडली उसके जीवन का मूल मानचित्र मानी जाती है। 
इसमें केवल राशि ही नहीं, बल्कि लग्न, बारह भाव, नौ ग्रह, सत्ताईस नक्षत्र, दशाएँ, योग तथा ग्रहों की परस्पर स्थिति का गहन अध्ययन किया जाता है।
है अब इसके बाद वे ज्योतिष शास्त्र को कोसने लगते हैं उनकी आस्था अपने लगती है यह एक सामान्य प्रक्रिया है....! 
है लेकिन हम आप लोगों के बीच में जो उपस्थित हुए हैं...! 
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इसी तरीके को लेकर के विश्लेषण करेंगे और आप लोगों के व्यक्तियों को दूर करने का प्रयास करेंगे कि....! 
इसके विपरीत दैनिक राशिफल केवल एक राशि के आधार पर तैयार किया जाता है। 
उदाहरण के लिए यदि किसी दिन मेष राशि के करोड़ों लोग हैं, तो क्या सभी को एक ही दिन समान लाभ, समान हानि, समान नौकरी, समान धन या समान स्वास्थ्य प्राप्त होगा? 
निश्चित रूप से ऐसा संभव नहीं है। 
प्रत्येक व्यक्ति का जन्म समय, जन्म स्थान, लग्न, ग्रह स्थिति और कर्म अलग-अलग होते हैं। 
इसलिए परिणाम भी अलग होते हैं।
आज हम आप लोगों को दैनिक राशिफल से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण प्रामाणिक तथ्यों पर चर्चा करेंगे कि हम आप सभी सनातन धर्मी शुभचिंतकों को यह बतला देना चाहते हैं....! 
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कि आजकल जिस प्रकार दैनिक राशिफल बताया जा रहा है....! 
यही कारण है कि कई बार व्यक्ति का दैनिक राशिफल शुभ बताता है, लेकिन वास्तविक जीवन में कठिनाई आती है। 
दूसरी ओर किसी का राशिफल सामान्य या अशुभ दिखाई देता है, फिर भी उसे सफलता प्राप्त हो जाती है। 
इसका कारण उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में उपस्थित ग्रहयोग और दशाएँ होती हैं।
जो प्रकाशित किया जा रहा है वह ग्रामक एवं और प्रमाणित होता है...! 
उसका कोई शास्त्र से लेना देना नहीं है...! 
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वैदिक ज्योतिष में दशा और अंतरदशा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। 
यदि किसी व्यक्ति की शुभ ग्रह की दशा चल रही हो तो सामान्य गोचर भी उसे लाभ दे सकता है। 
वहीं यदि अशुभ दशा हो तो अच्छा दैनिक राशिफल भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। 
इस लिए केवल राशिफल देखकर किसी बड़े निर्णय पर पहुँचना उचित नहीं माना जाता।
ज्योतिषीय आधार भी नहीं होता है....! 
अब है इसका कारण क्या है है कि करीब - करीब 99 वृद्धि दैनिक राशिफल का त्वरित शक्ति निकलता है...! 
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जिन व्यक्तियों सही होता भी है तो वह उनकी निजी जन्मपत्रिका की ग्रंथियों दशाओं का परिणाम होता है...! 
प्रश्नकुंडली भी वैदिक ज्योतिष की अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है। 
जब जन्म का सही समय उपलब्ध न हो या किसी विशेष प्रश्न का तत्काल उत्तर जानना हो, तब प्रश्न पूछे जाने के समय की ग्रह स्थिति के आधार पर प्रश्नकुंडली बनाई जाती है। 
इससे विवाह, नौकरी, व्यापार, खोई हुई वस्तु, न्यायालय, यात्रा, रोग, संतान और अन्य अनेक विषयों पर अपेक्षाकृत अधिक विशिष्ट संकेत प्राप्त किए जाते हैं।






आप निश्चित ही यह बात सुनकर चौंक जाएंगे हम कुछ विद्वान इससे अपने भिन्न भिन्न राय ही रखेंगे प्रक्रिया भी किंतु हम यहां आपके विचार है तू कुछ सब ठीक प्रस्तुत कर देना चाहते हैं...! 
दैनिक राशिफल व्यक्ति को केवल यह बता सकता है कि आज ग्रहों का सामान्य प्रभाव कैसा हो सकता है। 
लेकिन यह नहीं बता सकता कि उसी दिन किसी विशेष व्यक्ति को कौन-सी घटना किस समय घटित होगी। 
इसके लिए व्यक्तिगत कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।
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जिनके अध्ययन से आप पधारे राशिफल प्रामाणिकता का अंदाजा लगा सकते हैं....! 
खगोलशास्त्र भी इस विषय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
ग्रह वास्तव में निरंतर गति करते रहते हैं। 
उनकी स्थिति प्रतिदिन बदलती है और उसी परिवर्तन के आधार पर गोचर का विचार किया जाता है। किंतु ग्रहों का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर समान नहीं पड़ता, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की जन्मकुंडली अलग होती है।
आसानी से लेकिन ध्यान दीजिएगा कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में लिप्त के लिए ग्रह - स्थिति मुख्य रूप से उत्तरदाई होता है...! 
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कि चाहे वह जन्म पत्रिका की ग्रह स्थिति हो यह गोचरीय स्थिति हो ज्योतिष के गोचर शास्त्र के अनुसार ग्रह गोचर था छात्रों के राशि परिवर्तन की प्रतिदिन नहीं होती है...! 
इसी कारण अनुभवी वैदिक ज्योतिषाचार्य केवल राशि देखकर अंतिम निर्णय नहीं देते। 
वे पहले जन्मतिथि, जन्मसमय, जन्मस्थान, लग्न, ग्रह स्थिति, दशा, गोचर, नक्षत्र तथा आवश्यक होने पर प्रश्नकुंडली का भी अध्ययन करते हैं। 
तभी अधिक विश्वसनीय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन संभव होता है।
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ग्रहों का राशि परिवर्तन प्रतिदिन नहीं होता है हर ग्रहों का अलग - अलग समय है है...! 
आज सोशल मीडिया पर आकर्षक शीर्षकों के साथ अनेक दैनिक राशिफल प्रसारित किए जाते हैं। उनका उद्देश्य प्रायः सामान्य जानकारी देना होता है। 
उन्हें पूर्णतः असत्य भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे गोचर के आधार पर सामान्य संकेत देते हैं। लेकिन उन्हें प्रत्येक व्यक्ति का निश्चित भविष्य मान लेना भी उचित नहीं है।
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अब यह जो नंबर ग्रह नवग्रहों के बोतल का अलग - अलग काल है...! 
वैदिक परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि ग्रह केवल संभावनाओं और परिस्थितियों के संकेत देते हैं। मनुष्य के शुभ कर्म, सदाचार, ईश्वर - भक्ति, यज्ञ, दान, जप, तप, सेवा और विवेकपूर्ण निर्णय भी उसके जीवन की दिशा को प्रभावित करते हैं। 
इस लिए केवल राशिफल पर निर्भर रहने के बजाय कर्म को सर्वोच्च महत्व देना चाहिए।
समय है जिन में सूर्य बुध भगत एक माप मंगल 57 दिन गुरु एक वर्ष राहु - केतु डेढ़ वर्ष पुत्र शनि ड्राइव वर्ष में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं....! 
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यह सभी लोग जानते हैं फिर भ्रामक स्थिति में बड़े जाते हैं...! 
यदि किसी व्यक्ति को विवाह, नौकरी, व्यवसाय, संतान, स्वास्थ्य, विदेश यात्रा, आर्थिक निवेश, भूमि - भवन या न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने हों, तो केवल दैनिक राशिफल पढ़कर निर्णय नहीं लेना चाहिए। 
ऐसे अवसरों पर जन्मकुंडली और आवश्यकता पड़ने पर प्रश्नकुंडली का विस्तृत अध्ययन अधिक उपयोगी माना जाता है।
क्योंकि मीडिया में बहुत ही भ्रामक स्थिति चल रही है...! 
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अब हम बात करेंगे इस चंद्रमा के लिए बहुत ही सरल प्रक्रिया में आता हूं ताकि आप लोग इन चीजों से बचें चंद्रमा के गोत्र की तो चंद्रमा भी सवा दो दिन में अपनी राशि परिवर्तन करता है....! 
अतः निष्कर्ष यही है कि दैनिक राशिफल एक सामान्य दिशा - सूचक है, जबकि जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली व्यक्ति विशेष के जीवन का अधिक सूक्ष्म और व्यक्तिगत विश्लेषण प्रस्तुत करती हैं। वैदिक ज्योतिष का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि समय की प्रकृति को समझाकर उचित कर्म, उचित निर्णय और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देना है।
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इसका आशय यह हुआ कि सवा दो दिन तक तो ग्रहण में परिवर्तन होगा यदि किसी ग्रह का गोचर हुआ तो अगले दिन से लेकर इन दिनों तक यही स्थिति रहेगी जो वृश्चिक राशि में स्थित है....! 
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उसी राशि में रहेगा तो ओर से सम्मान जो सामान्य स्थिति है...! 

जब हम वैदिक ज्ञान, खगोल विज्ञान, ग्रहों की गति, जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और कर्म सिद्धांत—
इन सभी को साथ लेकर चलते हैं, तभी ज्योतिष का वास्तविक लाभ प्राप्त होता है। 
इस लिए दैनिक राशिफल को केवल एक सामान्य संकेत मानें, किंतु जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय सदैव योग्य विद्वान द्वारा आपकी व्यक्तिगत कुंडली के गहन अध्ययन के बाद ही लें। 
यही वैदिक ज्योतिष की संतुलित और परंपरागत दृष्टि मानी जाती है।
जो ग्रह स्थिति के आधार पर फलित प्रति कैसे परिवर्तित हो सकता है...! 
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आप विचार कर सकते हैं स्वयं सोच सकते हैं स्वयं निर्णय ले सकते हैं...! 

ब्रह्म क्यों पड़ते हैं अब ध्यान दीजिए का्य जन्मपत्रिका सर्वाधिक जो महत्वपूर्ण होती है....! 
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वह किस कसूर की पर होती है हमारा जो या भारतीय ज्योतिष है....! 

कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में किसी जातक के फलित के लिए उसकी जन्मपत्रिका की लग्न कुंडली को सर्वाधिक महत्व प्रदान किया गया है....! 
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इसके पश्चात नवमांश कुंडली है कि वर्ग कुंडली है फिर भी छोकरी 10 वें उसके बाद योगिनी दशा लें और साथ में और इसके अंत में वाउचर को मान्यता दी गई है...! 

जब हम च को ही फलित करते समय सबसे अंतिम पायदान पर रखा जाता है...! 
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तो केवल चंद्रमा के वाउचर व नक्षत्र से दैनिक राशिफल निकालना कहां तक उचित होगा कहां तक प्रामाणिक होगा अ कि दैनिक राशिफल भी होता है....! 

लेकिन उपयुक्त आधार पर क्या यह मान लिया जाए कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में दैनिक राशिफल होता ही नहीं है...! 
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कि यहां पर ध्यान देने की बात है समझने की बात है ऐसा नहीं है...! 

दैनिक राशिफल भी ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत ही आता है किंतु वह प्रत्येक जातक का निजी होता है...! 
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और उसका आधार क्या होता है....! 

प्रश्न कुंडली वन नष्ट जातिगत पद्धति होता है....! 
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तो उस दैनिक राशिफल के लिए व्यक्ति को दही व घी के पास जोशी से प्रश्न करना होता है....! 

या प्रश्न करना होता है कि मेरा आज का दिन कैसा रहेगा तब ज्योतिषी प्रश्न ज्योतिष कुंडली के आधार पर अथवा उस व्यक्ति के को जो अंक होता है...! 
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अंकों पूछ कर दिए आप शास्त्र के माध्यम से कि उसके सिंह के बारे में गणना करके उस दिन का भविष्य संकेत देते हैं....! 

यह तो हो गया आधार इस प्रकार का दैनिक राशिफल व्यक्तिगत होता है...! 
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कि सार्वजनिक तय क्रश फल होता है....! 

सार्वजनिक दश लिंक राशिफल का किसी भी शास्त्र में कोई भी प्रमाण नहीं है....! 
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यह बिल्कुल भ्रामक स्थिति हैं हमारे मतानुसार जो शास्त्र को हम अध्ययन किए हैं....! 

जिस शास्त्र के माध्यम से हम जो है अंधकार को दूर करते हैं....! 
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जो भविष्य में घटने वाली घटनाएं हैं उनका हम जानकारी प्राप्त करते हैं...! 

तो ध्यान दीजिएगा कि हमारे मतानुसार समा चार पत्रों और न्यूज चैनलों ने जो आज प्रसारित व प्रकाशित होने वाले दैनिक राशिफल के भरत को गंभीरता से लेते हुए...! 

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अपनी जन्म पत्रिका के ट्रस्टियों दशाओं अपनी राशि बूचर पर अधिक विश्वास करना चाहिए यह शास्त्री मत है....! 
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यह हमारे ऋषि यों के द्वारा उद्धृत तथ्य है है...! 

अब यदि किसी दिन के बारे में जानने की अभिलाषा हो उस चुकता हो...! 
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तो उसके लिए बहुत आवश्यक हो तो किसी विद्वान दायित्व किसे प्रश्न करके इस संबंध में निर्णय करना अधिक श्रेयस्कर वह लाभदायक करता है...! 

तो आशा करता हूं कि आप लोग यह जो ब्रह्म की स्थितियां चल रही है...! 
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इस से आप लोग जो है स्पष्ट रूप से कंफर्म हो गए हैं है तो यह जो जानकारी है...! 

आपको कैसी लगी आप वीडियो को लाइक करते हैं...! 
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कमेंट करके अवश्य लाने और जिन सज्जन को कोई भी प्रश्न बनता है तो आप अवश्य कमेंट करें...! 

उसका शास्त्रोक्त विधि के हिसाब से समाधान किया जाएगा....! 
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लेकिन आप लोगों से हाथ जोड़कर के पूरे निवेदन करता हूं कि इन भ्रामक पोल कल्पित तथ्यों पर विचार करें....! 

क्योंकि निराधार है जो आधार है....! 
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उस आधारित आप जो है कसम की पर रखते हुए है उन बच्चों पर आप रिचार्ज कराने अवश्य सफलता मिलेगी....! 

इसी तरह से बहुत सारे वीडियो पड़े यह चैनल पर आप चाहे तो देख सकते हैं...! 
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और जो भी सही पहली बार इस प्रोग्राम को देख रहे हैं....! 

आप भी जुड़ने के लिए आप ब्लॉग पोस्ट को सब्सक्राइब कर लें ने लाइक कर लें...! 
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में ताकि इसी तरह से प्रोग्राम का नोटिफिकेशन आपको पहुंचे और आप भी जानकारी प्राप्त करें...! 

अपने समाज में अपने रिश्तेदार में अपने भाई - बंधुओं में अधिक से अधिक इसको शेयर करें...! 
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पहुंचाने ताकि लोग दिग्भ्रमित न हो जो हमारी भारतीय पद्धति है....! 

जो हमारे पूर्वजों द्वारा लिखित तथ्य है उसका आधार लें उस आधार से श्रद्धापूर्वक हम उसको अपना में और चतुर्दिक विकास करें जो अंधकार शीघ्र है....! 
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ज्योतिष शास्त्र ऐसा है कि अंधकार से प्रकाश की ओर ले करके जाता है हर इंसान युक्त रहता है....! 

अपने भविष्य को जानने के लिए तो यह ज्योतिष शास्त्र बहुत ही महत्वपूर्ण शास्त्र है...! 
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लेकिन यह जो इतना आम नंबर 8 चल कल जो चल रहा है....! 

इस से मुक्ति पाने के लिए आपको सजग होना होगा और उसके बाद एक दूसरे को आप को मोटिवेट करना होगा...! 
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ज्यादा सेट करना होगा कि भ्रामक टीमों पर अपने तो मित्रों आज के लिए इतना...! 

ही इसी तरह से भी चर्चाओं को लेकर के उपस्थित होंगे.....! 

तब तक के लिए हर महादेव जय मां अंबे
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Wednesday, October 29, 2025

वैदिक ज्योतिष शास्त्र विद्या में जन्मकुंडली से मृत्यु योग जाने कैसे....!

सभी ज्योतिष मित्रो को मेरा निवेदन है..., आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे..., मे किसी के लेखो की कोपी नहि करता..., किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही है..., कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्ता भाई..., और आगे भी नही बढ़ता..., आप आपके महेनत से त्यार होने से बहुत आगे बठा जाता है...,

धन्यवाद......,  जय द्वारकाधीश...,

वैदिक ज्योतिष शास्त्र विद्या में से जन्मकुंडली मृत्यु योग जाने कैसे....!

वैदिक ज्योतिष शास्त्र विद्या में जन्मकुंडली से मृत्यु योग जाने कैसे....!

अखिल भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत जैसा कि मैं आप लोगों को कि सात प्रकार का के वृक्ष के बारे में चर्चा किए....! 

कि बालारिष्ट योग रिस्ट कि अल्पायु से मध्यायु दीर्घायु इस दिव्य आयुष एवं अमित आयुक्त तो अभी आप लोगों के सामने हम चर्चा करेंगे....! 

इस प्रकार की जो योग हैं कैसे बनाते हैं और इस से बचाओ तो हम क्या करें का हिंदी क्या होता है....! 

का सबसे प्रथम ए सनम में सर्वप्रथम यह जानने का प्रयास करते हैं है...! 

कि जन्म से आवर्तक की आईडी होती है उसे अखिल भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत का बालारिष्ट कहा गया है....! 





acer [SmartChoice Aspire 3 Laptop Intel Core Celeron N4500 Processor Laptop (8 GB LPDDR4X SDRAM/512 GB SSD/Win11 Home/38 WHR/HD Webcam) A325-45 with 39.63 cm (15.6") HD Display, Pure Silver, 1.5 KG

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कि यह रोती क्यों है इसको भी जानना आवश्यक है.....! 

कि किस कारण से होती है कि किस परिस्थिति में होती है हैं....! 

तो आइए स्टेट विचार करते हैं तो जातक के जन्मांग चक्र में लग्न से 168 12 स्थान में पाप ग्रहों से युक्त चंद्रमा हो तब व्यक्ति की मृत्यु बाल्यावस्था में हो जाती है है....! 

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इस के अलावा कि सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण का समय जो होता है में सूर्य चंद्र राहु एक ही राशि में हो तथा लग्न पर क्रूर ग्रह उग्र मतलब शनि मंगल के पीछे आया हो तब बालक के साथ माता - पिता की मृत्यु का भी डू योग बनता है....! 

अलग से छठे भाव में चंद्रमा लग्न में सभी और सप्तम में मंगल हो तो बालक के पिता की मृत्यु करवा दू योग बनता है....! 

अथवा यह मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होता है हैं....! 

अब इनसे बचने का उपाय क्या होता है इन से बचाते से जाता है....! 





इस ग्रंथों में कि बालारिष्ट योग से बचने के लिए ने बताया गया है कि बालक अपने साथी का चंद्रमा और मोती काले धागे में डाल करके बनाया जाता है....! 

इस से पालक के सिर से मृत्यु का संकट टल जाता है...! 

ऐसा कि हमारे भारतीय विद्वानों का मत है कि दूसरे नंबर पर आते हैं....! 

योगारिष्ट योगारिष्ट कैसे बनता है...!

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एक हाथ वर्ष के पश्चात आप भी इस वर्ष पहले इ में होने वाली लड़की को योगारिष्ट कहा जाता है....! 

कि इस प्रकार की मृत्यु तब होती है जब जातक के जन्म कुंडली के अंतर्गत अष्टम भाव में शनि मंगल के सिर पूर्वग्रहों से दूषित हो जाता है...! 

और लग्न में बैठा विपरीत ग्रह वक्री होता है इस लिए इसे योगारिष्ट करते हैं....! 

दूसरी अमावस्या से पहले की चतुर्दशी और अष्टमी को यह योग गुरु प्रभाव रहता है....! 

जिन लोगों के माता-पिता कर्मों में लिप्त रहते हैं उनके बालों के योग से ही होती है हैं....! 

अब इनसे बचने के उपाय क्या है योग बारिश से बचने के लिए...!

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कि भारतीय शास्त्रों के अंतर्गत है ऐसे जातक के माता - पिता को सत्कर्म करना चाहिए...! 

यह दिए इसी का धन स्वर्ण को पूरा लेते हैं या किसी की हत्या में लिख सकते हैं....! 

तब उनके बालों की मृत्यु विश्व में में आ जाती है है ऐसे परिस्थिति में कि ऐसे जातक के लिए मैं सिर्फ एक उपाय यह उपाय क्या है सिर्फ की उपाधि कि ऐसे जातक के लिए...! 
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कि कालों के काल महाकाल कि शिव की उपासना एक मात्र साधन है कि अब है इसके बाद कि योगारिष्ट की चर्चा कर दिए अब इसके बाद जो है में आता है अल्पायु हैं....! 

अल्पायु में को 206 32 वर्ष की आयु को कि हमारे ऋषि-मुनियों मधुकरा
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कि अल्प आयु का नाम दिया अल्पायु योग बनता कैसे है....! 

कि यदि लगने चंद्र राशि में है जैसे मेष कर्क तुला मकर राशि में हो तथा अष्टमेश वृषभ राशि मिथुन कन्या धनु मीन राशियों में हो तब अल्पायु योग बनता है...! 

यदि लग्नेश शुक्र शत्रु हो तब जातक अल्पायु होता है है....! 
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इसी प्रकार यदि शनि और चंद्रमा दोनों स्थित राशि में हो अथवा एक शब्द और दूसरा द्विस्वभाव राशि में हो तब व्यक्ति की मृत्यु बीच से 32 वर्ष की आयु में होती है....! 

जिसे हम मत भाइयों के नाम से जानते हैं....! 

आइए इनसे बचने के उपाय इनका परिहार परिहार के लिए ज्योतिषशास्त्र में जो उपाय बताए....!

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गए लेकिन जो हमारे लिए सरल हो सुगम हो उपाय को अपनाकर कर सकते हैं...! 

इस के लिए महामृत्युंजय का प्रयोग कि प्रत्येक माह की दोनों अष्टमी को शिवजी का दही से अभिषेक करना श्रेयस्कर बताया गया है....! 

कि इसके बार का वध आयोग की चर्चा करते हैं 125 वर्ष के लाभ ा 164 264 वर्ष तक की आयु को मजबूत कहा गया है....! 

कि बनता कहते हैं यदि लग्न में सूर्य कसम ग्रहों है है तब यह योग बनता है....! 
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अर्थात मिथुन व कन्या लग्न वालों की प्रायः मत का उपयोग होती है....! 

कि यदि लग्नेश तथा अष्टमेश में में से एक जल राशि मेष कर्क तुला मकर तथा विकराल स्थिति जैसे वृषभ सिंह वृश्चिक कुंभ किन राज्यों में हो तब जातक की मृत्यु योग होती है....! 

यदि शनि और चंद्रमा दोनों भी स्वभाव राशि में हो या एक स्तर तथा दूसरा स्थिर राशि में हो तब जातक पधारो योग पर होता है...! 

तथा यदि लग्नेश तथा अष्टमेश सामान्य के स्थानों में हो तब भी जातक मत भायऊ होता है....! 

कई विद्वानों का मत यह भी है कि मदारियों योग वाले यात्रियों की मृत्यु जन्म स्थान से दूर होती है है...! 

अब इसे भी बचने का उपाय मैं अभी से बचने के लिए....! 

इस जातक को चांदी का स्वस्तिक बनाकर के गले में धारण करना चाहिए प्रत्येक शनिवार को गरीबों को काले कंबल एवं चप्पल का दान देना चाहिए....!
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कि यह उपाय ऐसे जातक के लिए श्री अख्तर बताया गया अब पांचवें नंबर पर आते हैं....! 

दीर्घायु के लिए ए दिल भाइयों योग भारतीय ज्योतिष शास्त्र में तो वो फट से में 120 वर्ष की आयु तक होने वाली मृत्यु को दीर्घायु अथवा पूर्ण ऐसा कहा जाता है....! 

यदि जन्म लगने सूर्य मित्र हो तो व्यक्ति को पूर्ण आयु प्राप्त होती है....! 

लग्नेश और अष्टमेश शुक्र दोनों उच्च राशि में हो तो जातक दीर्घायु होता है......! 







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लग्नेश तथा अष्टमेश में से एक स्थिति तथा दूसरा द्विस्वभाव राशि में हो तो जातक दीर्घायु होता है यदि शुभ ग्रह तथा लगने केंद्र में हो तो जातक दीर्घायु होता है....!

लग्न में गुरु शुक्र के साथ हो की दृष्टि पड़ रही हो तो जातक पूर्ण करता है....! 

लगने पूर्ण बली हो तथा कोई भी ग्रह उससे उत्सव या मित्र राशि के आठवें अबे हो तब भी जातक की पूर्ण आयु होती है....! 

कि इस योग वाले जातक को जीवन आम तौर पर सुखमय व्यतीत करता है....! 

ऐसा देखा गया है लेकिन बीच - बीच में कई प्रकार के रोग परेशान करते रहते हैं....! 

इन लोगों को जीवन पर्यंत और विष्णु की उपासना आराधना करनी चाहिए....! 

कि अब छह नंबर का लो जिस भी आलू बताया गया है देखिए यहां पर विचार करने की बात है....! 

और पूर्ण आयु 120 वर्ष ने बताया गया है अब इसके ऊपर हम चलते हैं....!

मैं तो बस पिता है कि आयोग से जुड़ा नहीं है किंतु यह बताता है....! 

कि व्यक्ति का जीवन कैसा होगा अपने जीवन को किस प्रकार से का यदि की कुंडली में शुभ ग्रह बुध बृहस्पति शुक्र और चंद्रमा केंद्र और त्रिकोण में हो और सब पाप ग्रह 3 - 6 - 11 स्थानों तथा अष्टम भाव में शुभ ग्रह हों....! 

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शुभ राशि हो तो व्यक्ति के जीवन में दिव्य आलू का प्रादुर्भाव होता है....! 

तब ऐसा योग प्राप्त होता है ऐसा जातक जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं....! 

कि यज्ञ अनुष्ठान क्रियाओं के द्वारा हजारों वर्ष हमारे ऋषि - मुनि इसी के माध्यम से अपने जीवन को बढ़ाते गए तो कि आदित्य दुर्गम है.....! 

किंतु ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसे जातक का जन्म मृत्यु लोक में संभव नहीं है....! 

कि ऐसी आयुक्त अपॉइंट ऋषि - मुनि ही पा सकते हैं...! 

जैसे भारत द्वारा जिस अगस्त ऋषि इत्यादि ड्रॉप लोगों ने देवरहवा बाबा का नाम सुना होगा यह लोग दो है.....! 

तपोनिष्ठ थे तो ऐसे लोगों को इस तरह का योग को प्राप्त हुआ कि अब सातवें नंबर पर जो चर्चा की गई है....! 

तो उसके लिए बताया क्या है अमित आयोग अब यह अमितायु क्या है....! 

अमित आलू पाने वाले प्राणी भी दुर्लभ देवताओं व सचिव व को ऐसी आलू प्राप्त होती है....! 

इस के अनुसार यदि गुरु ग्राम पुनः अपने चतुर्थ वर्ग में होकर केंद्र में हो शुक्र प्रावधान अपने शरीर में हो एवं कर्क लग्न तब तक मानव देवता होता है....! 

जिसकी कोई सीमा नहीं होती है और यह इच्छा मृत्यु का वर पाने में सक्षम होता है कुछ विद्वानों का मत है लोगों ने पितामह मैं तो फेसबुक की तमाम आपको ऐसा योग प्राप्त हुआ था....! 

इच्छा मृत्यु का वरदान था उनको मृत्यु प्रत्येक व्यक्ति के लिए अटल सकती है....! 

फिर भी ग्रहों के योग का आलू के निर्धारण में बहुत बड़ी भूमिका होती है....! 

कुछ विशिष्ट उपाय मृत्यु को कुछ समय के लिए उन उपायों को करके हम डाल सकते हैं....!

लेकिन जिस तरह से जन्म निश्चित है उसी तरह से पीड़ित है तो आप लोगों के सामने हम भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत व जो मृत्यु के साथ प्रकार बताए गए....! 

जो उसका उपाय बताया गया आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया और इसी तरह से आप लोगों का का प्यार मैं कुत्ता वर्धन मिलता रहेगा है....! 

तो इसी तरह की चर्चा लेकर कि आप लोगों के सामने कि मैं ज्योतिषाचार्य पंडित पंडारामा राज्यगुरु प्रभु वोरीया आप लोगों का बहुत - बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूं है....! 

जो आप लोग ता वर्धन करते रहते हैं....! 

तो ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत जो हमारी इसकी मृत्यु द्वारा कि उनके अनुभव लिखे गए हैं....! 
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