google-site-verification: google5cf1125c7e3f924f.html pina_AIA2RFAWACV3EAAAGAAFWDICOQVKPGQBAAAAALGD7ZSIHZR3SASLLWPCF6DKBWYFXGDEB37S2TICKKG6OVVIF3AHPRY7Q5IA { "event_id": "eventId0001" } { "event_id": "eventId0001" } https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec Astrologer: July 2026

Friday, July 31, 2026

कृष्ण और शुक्ल पक्ष :

कृष्ण और शुक्ल पक्ष :

कैसे शुरू हुए कृष्ण और शुक्ल पक्ष :

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, वेदाङ्ग ज्योतिष, जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली एवं गोचर के ग्रहों के अनुसार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का महत्व, नियम, फल एवं वैदिक उपाय !

पंचांग के अनुसार हर माह में तीस दिन होते हैं और इन महीनों की गणना सूरज और चंद्रमा की गति के अनुसार की जाती है। 

चन्द्रमा की कलाओं के ज्यादा या कम होने के अनुसार ही महीने को दो पक्षों में बांटा गया है जिन्हे कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष कहा जाता है।

पूर्णिमा से अमावस्या तक बीच के दिनों को कृष्णपक्ष कहा जाता है, वहीं इसके उलट अमावस्या से पूर्णिमा तक का समय शुक्लपक्ष कहलाता है। 

दोनों पक्ष कैसे शुरू हुए उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं भी हैं।




Dakshinavarti shankh Narayan Shank (3.5 inch - 5 inch) , White

Brand: Generic https://link.amazon/B09UTmXfV


  • { Natural Right Handed (Dakshinavarti) Shankh Non Blowable
  • Brings the progress,prosperity and abundance of wealth.
  • Quality product by the divine mart
  • keeps the proverty and scarcity out of home. }



कृष्ण और शुक्ल पक्ष से जुड़ी कथा :

इस तरह हुई कृष्णपक्ष की शुरुआत :

भारतीय सनातन संस्कृति में समय की गणना केवल दिन, सप्ताह और वर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक तिथि, पक्ष, नक्षत्र और ग्रह का अपना विशेष आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व है। 

चन्द्रमा की कलाओं के आधार पर प्रत्येक मास दो भागों में विभाजित होता है—

शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। 

वेदाङ्ग ज्योतिष, धर्मशास्त्र, पुराणों तथा वैदिक परंपरा में इन दोनों पक्षों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार दक्ष प्रजापति ने अपनी सत्ताईस बेटियों का विवाह चंद्रमा से कर दिया। 

ये सत्ताईस बेटियां सत्ताईस स्त्री नक्षत्र हैं और अभिजीत नामक एक पुरुष नक्षत्र भी है। 

लेकिन चंद्र केवल रोहिणी से प्यार करते थे। 

ऐसे में बाकी स्त्री नक्षत्रों ने अपने पिता से शिकायत की कि चंद्र उनके साथ पति का कर्तव्य नहीं निभाते। 

दक्ष प्रजापति के डांटने के बाद भी चंद्र ने रोहिणी का साथ नहीं छोड़ा और बाकी पत्नियों की अवहेलना करते गए। 

तब चंद्र पर क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने उन्हें क्षय रोग का शाप दिया। 

क्षय रोग के कारण सोम या चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे कम होता गया। 

कृष्ण पक्ष की शुरुआत यहीं से हुई।

कृष्ण पक्ष क्या है?

पूर्णिमा के बाद चन्द्रमा की कलाएँ धीरे-धीरे क्षीण होने लगती हैं और अमावस्या तक यह क्रम चलता है। 

इसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। 

यह आत्मचिंतन, साधना, वैराग्य, पितृकार्य, दोष - निवारण, तप, ध्यान तथा आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। 

ऐसे शुरू हुआ शुक्लपक्ष :

शुक्ल पक्ष क्या है ?

अमावस्या के अगले दिन से चन्द्रमा की कलाएँ बढ़ने लगती हैं। 

यह अवधि पूर्णिमा तक रहती है और इसे शुक्ल पक्ष कहा जाता है। 

यह वृद्धि, प्रकाश, समृद्धि, उत्साह, ज्ञान, आरंभ, विवाह, मांगलिक कार्य तथा देवपूजन का प्रतीक माना जाता है।

कहते हैं कि क्षय रोग से चंद्र का अंत निकट आता गया। 

वे ब्रह्मा के पास गए और उनसे मदद मांगी। तब ब्रह्मा और इंद्र ने चंद्र से शिवजी की आराधना करने को कहा। 

शिवजी की आराधना करने के बाद शिवजी ने चंद्र को अपनी जटा में जगह दी। 

ऐसा करने से चंद्र का तेज फिर से लौटने लगा। 

इससे शुक्ल पक्ष का निर्माण हुआ। 

चूंकि दक्ष ‘प्रजापति’ थे। 

चंद्र उनके शाप से पूरी तरह से मुक्त नहीं हो सकते थे। 

शाप में केवल बदलाव आ सकता था। 

इस लिए चंद्र को बारी - बारी से कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में जाना पड़ता है। 

दक्ष ने कृष्ण पक्ष का निर्माण किया और शिवजी ने शुक्ल पक्ष का।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के बीच अंतर :

जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर में चन्द्रमा की स्थिति मन, बुद्धि, भावनाओं, निर्णय क्षमता, परिवार, माता तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतिनिधित्व करती है। 

इस लिए कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का प्रभाव जीवन के अनेक क्षेत्रों में दिखाई देता है।

जब हम संस्कृत शब्दों शुक्ल और कृष्ण का अर्थ समझते हैं, तो हम स्पष्ट रूप से दो पक्षों के बीच अंतर कर सकते हैं। 

शुक्ल उज्ज्वल व्यक्त करते हैं, जबकि कृष्ण का अर्थ है अंधेरा।

जैसा कि हमने पहले ही देखा, शुक्ल पक्ष अमावस्या से पूर्णिमा तक है, और कृष्ण पक्ष, शुक्ल पक्ष के विपरीत, पूर्णिमा से अमावस्या तक शुरू होता है।

वैदिक ज्योतिष में महत्व :

वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को मन का स्वामी कहा गया है। 

यदि जन्मकुंडली में चन्द्रमा बलवान हो तो व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर, दयालु, लोकप्रिय और सुखी होता है। 

यदि चन्द्रमा कमजोर हो तो चिंता, अस्थिरता, भय, भ्रम तथा निर्णय लेने में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।

शुक्ल पक्ष में जन्म लेने वाले जातकों में सामान्यतः उत्साह, सकारात्मक सोच, विकास की इच्छा तथा समाज में आगे बढ़ने की प्रवृत्ति अधिक देखी जाती है। 

कृष्ण पक्ष में जन्म लेने वाले जातक प्रायः गंभीर, चिंतनशील, आध्यात्मिक, शोधप्रिय तथा अंतर्मुखी स्वभाव के हो सकते हैं। 

किंतु अंतिम फल सदैव सम्पूर्ण जन्मकुंडली के आधार पर ही निर्धारित होता है।




कौन सा पक्ष शुभ है ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, लोग शुक्ल पक्ष को आशाजनक और कृष्ण पक्ष को प्रतिकूल मानते हैं। 

यह विचार चंद्रमा की जीवन शक्ति और रोशनी के संबंध में है।

प्रश्नकुंडली में प्रभाव :

यदि किसी महत्वपूर्ण प्रश्न के समय शुक्ल पक्ष चल रहा हो तथा चन्द्रमा शुभ ग्रहों से प्रभावित हो तो कार्य की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

यदि कृष्ण पक्ष में प्रश्न पूछा गया हो तो परिणाम में विलंब, पुनर्विचार, बाधा अथवा पहले सुधार करने की आवश्यकता का संकेत मिल सकता है। 

फिर भी यदि शुभ योग हों तो सफलता संभव रहती है।

गोचर में महत्व :

गोचर में चन्द्रमा लगभग ढाई दिन में राशि बदलता है। 

यदि शुक्ल पक्ष में शुभ ग्रहों का सहयोग मिले तो नए कार्य, निवेश, शिक्षा, व्यापार, विवाह, गृहप्रवेश 

तथा शुभ आरंभ के लिए समय अनुकूल माना जाता है।

कृष्ण पक्ष में साधना, जप, तप, ऋण मुक्ति, दोष निवारण, पितृ तर्पण, आत्मविश्लेषण तथा अधूरे कार्य पूरे करने को श्रेष्ठ माना गया है।

भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्ल पक्ष की दशमी से लेकर कृष्ण पक्ष की पंचम तिथि तक की अवधि ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ मानी जाती है। 

शुक्ल पक्ष के शुभ कार्य :

- विवाह एवं सगाई

- गृह प्रवेश

- नया व्यापार प्रारम्भ

- वाहन या भूमि खरीदना

- शिक्षा प्रारम्भ करना

- देवप्रतिष्ठा

- यज्ञ एवं शुभ संस्कार

- धन निवेश

कृष्ण पक्ष के श्रेष्ठ कार्य :

- भगवान शिव की उपासना

- श्रीहनुमानजी का पूजन

- पितरों का तर्पण

- ग्रह शांति

- महामृत्युंजय जप

- ध्यान एवं योग

- दान-पुण्य

- आत्मचिंतन

इस समय के दौरान चंद्रमा की ऊर्जा अधिकतम या लगभग अधिकतम होती है - जिसे ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय तय करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

+++ +++

ग्रहों के अनुसार प्रभाव :

सूर्य मजबूत हो तो दोनों पक्षों में आत्मबल बना रहता है।

चन्द्रमा शुभ हो तो मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और सम्मान मिलता है।

मंगल शुभ हो तो साहस, भूमि और विजय प्राप्त होती है।

बुध शुभ हो तो बुद्धि, शिक्षा और व्यापार में लाभ होता है।

गुरु शुभ हो तो धर्म, संतान, ज्ञान और भाग्य का विकास होता है।

शुक्र शुभ हो तो सुख, दाम्पत्य, कला और ऐश्वर्य मिलता है।

शनि शुभ हो तो परिश्रम का उचित फल और स्थिर सफलता मिलती है।

राहु एवं केतु शुभ स्थिति में हों तो शोध, आध्यात्मिकता और विशेष उपलब्धियाँ प्राप्त हो सकती हैं, अन्यथा भ्रम और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

आध्यात्मिक महत्व :

शुक्ल पक्ष हमें बाहर की उन्नति का संदेश देता है, जबकि कृष्ण पक्ष भीतर की यात्रा का अवसर प्रदान करता है। 

एक पक्ष कर्म का है तो दूसरा आत्मनिरीक्षण का। 

दोनों मिलकर जीवन को संतुलित बनाते हैं।

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी समय और साधना के महत्व का वर्णन किया है। 

पुराणों में पूर्णिमा को भगवान विष्णु तथा अमावस्या को पितरों एवं भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी बताई गई है।

वैदिक नियम :

- प्रतिदिन प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें।

- सोमवार को भगवान शिव का पूजन करें।

- पूर्णिमा पर भगवान विष्णु एवं श्रीलक्ष्मी की पूजा करें।

- अमावस्या पर पितरों का स्मरण करें।

- चन्द्रमा के लिए दूध, चावल एवं सफेद वस्तुओं का दान करें।

- माता-पिता और गुरु का सम्मान करें।

- सत्य, संयम और सदाचार का पालन करें।

वैदिक उपाय :

- ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र का 108 बार जप करें।

- सोमवार का व्रत रखें।

- शिवलिंग पर जल एवं कच्चा दूध अर्पित करें।

- पूर्णिमा को श्रीसत्यनारायण भगवान की कथा सुनें या कराएँ।

- अमावस्या पर तिल, अन्न, वस्त्र और दीपदान करें।

- गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा करें।

- गौ सेवा एवं पक्षियों को अन्न खिलाएँ।

- प्रतिदिन कम से कम 11 मिनट ध्यान करें।

फल :

जो व्यक्ति समय के अनुसार उचित कर्म करता है, उसे मानसिक शांति, स्वास्थ्य, धन, परिवार में सुख, कार्यों में सफलता, आध्यात्मिक उन्नति तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। 

जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली तथा गोचर का सम्यक् विचार करके किए गए कार्य अधिक शुभ फल प्रदान करते हैं।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष केवल चन्द्रमा की घटती - बढ़ती कलाएँ नहीं हैं, बल्कि जीवन के दो महत्वपूर्ण आयाम हैं। 

शुक्ल पक्ष हमें विकास, प्रकाश, उत्साह और शुभ कार्यों की प्रेरणा देता है, जबकि कृष्ण पक्ष आत्मशुद्धि, साधना, पितृश्रद्धा और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाता है।

वैदिक ज्योतिष का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि समय, ग्रहों और कर्म के समन्वय से जीवन को श्रेष्ठ बनाना है। 

अतः जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर का विवेकपूर्ण अध्ययन कर, उचित समय पर शुभ कर्म, ईश्वर भक्ति, दान, जप, तप और सेवा करने वाला व्यक्ति जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।

+++ +++

भारतीय वैदिक ज्योतिष मे कृतिका नक्षत्र के जातक :

कृत्तिका नक्षत्र राशि फल में 26.40 से 40.00 अंशों के मध्य स्थित है। 

कृत्तिका के पर्यायवाची नाम हैं- हुताशन, अग्नि, बहुला अरबी में इसे अथ थुरेया' कहते हैं। 

इस नक्षत्र में छह तारों की स्थिति मानी गयी है। 

देवता अग्नि एवं स्वामी गुरु सूर्य है। 

कृत्तिका प्रथम चरण मेष राशि ( स्वामी : मंगल ) एवं शेष तीन चरण वृष राशि ( स्वामी: शुक्र ) में आते हैं।

गणः राक्षस, योनिः मेष एवं नाड़ी: अंत है। 

चरणाक्षर हैं: अ, इ, उ, ए ।

कृत्तिका नक्षत्र में जन्मे जातक मध्यम कद, चौड़े कंधे तथा सुगठित मांसपेशियों वाले होते हैं। 

ऐसे जातक अत्यंत बुद्धिमान, अच्छे सलाहकार, आशावादी कठिन परिश्रमी तथा एक तरह हठी भी होते हैं। 

वे वचन के पक्के तथा समाज की सेवा भी करना चाहते हैं। 

वे येन - केन - प्रकारेण अर्थ, यश नहीं प्राप्त करना चाहते, न तो अवैध मागों का अवलंबन करते हैं, न किसी की दया' पर आश्रित रहना चाहते हैं। 

उनमें अहं कुछ अधिक होता हैं, फलतः वे अपने किसी भी कार्य में कोई त्रुटि नहीं देख पाते। 

वे परिस्थितियों के अनुसार ढलना नहीं जानते। 

तथापि ऐसे जातक का • सार्वजनिक जीवन यशस्वी होता है। 

लेकिन अत्यधिक ईमानदारी भरा व्यवहार उनके पतन का कारण बन जाता है।

ऐसे जातकों को सत्तापक्ष से लाभ मिलता है। 

वे चिकित्सा या इंजीनियरिंग के अलावा ट्रेजरी विभाग में भी सफल हो सकते हैं, विशेषकर सूत निर्यात, औषध या अलंकरण वस्तुओं के व्यापार में सामान्यतः जन्मभूमि से दूर ही उनका उत्कर्ष होता है।

ऐसे जातकों का वैवाहिक जीवन सुखी बीतता है। 

पत्नी गुणवती, गृह कार्य में दक्ष तथा सुशील होती है। 

प्रायः उनकी पत्नी उनके परिवार की पूर्व परिचित ही होती है। 

प्रेम विवाह के भी सकेत मिलते हैं।

ऐसे जातकों का स्वास्थ्य भी सामान्यतः ठीक ही रहता है तथापि उन्हें दंत - पीडा, नेत्र - विकार, क्षय, बवासीर आदि रोग जल्दी ही पकड़ सकते हैं।

कृतिका नक्षत्र में जन्मी जातिकाएं मध्यम कद की बहुत रूपवती तथा साफ - सफाई पसंद होती हैं। 

वे अनावश्यक रूप से किसी से दबना' पसंद नहीं करतीं, फलतः जाने - अनजाने उनका स्वभाव कलह पैदा करने वाला बन जाता है। 

उनमें संगीत, कला के प्रति रुचि होती है तथा वे शिक्षिका का कार्य बखूबी कर सकती हैं। 

कृत्तिका के प्रथम चरण में जन्मी जातिकाएं उच्च अध्ययन में सफल होती हैं तथा प्रशासक, चिकित्सक, इंजीनियर आदि भी बन सकती हैं। 

कृत्तिका नक्षत्र में जन्मी जातिकाओं का वैवाहिक जीवन पूर्णतः सुखी नहीं रह पाता। 

पति से विलगाव या कभी-कभी प्रजनन क्षमता की हीनता भी इसका एक कारण हो सकती है। 

कृत्तिका के विभिन्न चरणों के स्वामी इस प्रकार हैं: प्रथम एवं चतुर्थ चरण- गुरु, द्वितीय एवं तृतीय चरण-शनि।

क्रमशः... आगे के लेख मे रोहिणी नक्षत्र के विषय मे विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

+++ +++

शनि के नक्षत्र में सूर्य का गोचर, 2 हफ्ते इन 3 राशियों को हो सकती है धनहानि :

सूर्य विशाखा से अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 2 दिसंबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. यह शनि का नक्षत्र है. ग्रहों की ये स्थिति तीन राशि के जातकों की मुश्किलें बढ़ा सकता है.

ग्रहों के राजा सूर्य 19 नवंबर को नक्षत्र परिवर्तन करने वाले हैं.  

इस दिन सूर्य विशाखा नक्षत्र से निकलकर अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश और 2 दिसंबर 2025 तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे.

कुल मिलाकर सूर्य करीब दो हफ्ते तक शनि के नक्षत्र में रहने वाले हैं. 

ज्योतिष में सूर्य - शनि को पिता - पुत्र के साथ - साथ शत्रु ग्रह भी माना गया है. 

ऐसे में शनि के नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश कुछ जातकों के लिए जीवन में तनाव,  

परेशानियों और संघर्ष की वजह भी बन सकता है.  

ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन तीन राशि के जातकों की मुश्किलें बढ़ा सकता है.

वृषभ राशि :

वृषभ राशि के जातकों के लिए ये 2 हफ्ते थोड़ा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं.  

आपके खर्चे बढ़ेंगे और आय में कमी आ सकती है. नौकरी - व्यापार में लोगों से मतभेद हो साकते हैं.  

वरिष्ठों के साथ टकराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.  

जल्दबाजी या अहंकार में लिया गया कोई भी निर्णय आपको बड़ा नुकसान दे सकता है. 

स्वास्थ्य के मामले में भी लापरवाही न करें. माता-पिता या घर के बुजुर्गों की सेहत का विशेष ख्याल रखना होगा. 


कर्क राशि :

कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह नक्षत्र परिवर्तन अनुकूल नहीं माना जा रहा है.  

आपके रिश्तों में तनाव या किसी करीबी व्यक्ति से दूरी बनने की संभावना है. 

दांपत्य जीवन में भी कड़वाहट आ सकती है. नौकरी या व्यापार में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी,  

जिससे मानसिक दबाव महसूस कर सकते हैं.  

धनधान्य के मामले में लोगों पर आंख बंद करके बिल्कुल भरोसा न करें. ठगी का शिकार हो सकते हैं.  

ठगी का शिकार हो सकते हैं. इस अवधि में कोई बड़ा निवेश करने से बचें.

मीन राशि :

मीन राशि वालों को भी इस अवधि में सावधानी बरतनी चाहिए. 

इस राशि में पहले ही शनि की साढ़ेसाती चल रही है. 

आपके कठोर शब्द और खराब वाणी लोगों के साथ संबंध बिगाड़ सकती है.  

आपके व्यवहार और कार्यशैली पर सवाल खड़े हो सकते हैं. 

इस दौरान किसी विवाद या बहस में पड़ने से बचें. 

वाहन चलाते समय सतर्क रहें. इस दौरान कोई भी ऐसा जोखिमभरा काम न करें, 

जिसमें नुकसान होने की संभावना हो.

पंडारामा प्रभु राज्यगुरु ज्योतिषी 

क्रमशः... आगे के लेख मे मृगशिरा नक्षत्र के विषय मे विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 

+++ +++

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -

श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय

PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 

-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-

(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 

" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,

" Shri Aalbai Niwas "

Shri Maha Prabhuji bethak Road,

JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )

सेल नंबर: . + 91- 9427236337 / + 91- 9426633096  ( GUJARAT )

Vist us at: www.sarswatijyotish.com

Skype : astrologer85

Email: prabhurajyguru@gmail.com

Email: astrologer.voriya@gmail.com

आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 

नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....

जय द्वारकाधीश....

जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

+++ +++

Wednesday, July 29, 2026

पंचमहापुरुष राजयोग :

पंचमहापुरुष राजयोग  :

श्रावण मास में पंचमहापुरुष राजयोग का महत्व, नियम, फल एवं उपाय :

सनातन धर्म में श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। 

यह महीना केवल व्रत, उपवास और पूजा का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तप, साधना और ग्रहों के शुभ प्रभाव को जागृत करने का भी श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली अथवा गोचर में विशेष ग्रह बलवान होकर केंद्र भावों में अपनी स्वराशि या उच्च राशि में स्थित होते हैं, तब पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण होता है। 

ऐसा योग व्यक्ति के जीवन में प्रतिष्ठा, धन, यश, आध्यात्मिक उन्नति और नेतृत्व क्षमता प्रदान करने वाला माना जाता है। 

श्रावण मास में जब भगवान शिव की आराधना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप और सात्त्विक जीवन अपनाया जाता है, तब इन शुभ योगों का प्रभाव और भी अधिक फलदायी माना जाता है।

सावन में 12 साल बाद गुरु बना रहे पंचमहापुरुष राजयोग, कर्क और मकर समेत कई राशियों को मिलेगा शिव कृपा का लाभ !

सावन के पवित्र महीने में 12 साल के बाद हंस महापुरुष राजयोग और गुरु पुष्यामृत योग का संयोग बन रहा है। 

इसके शुभ प्रभाव से कर्क और मकर सहित 5 राशियों के जातकों को भगवान शिव के साथ विष्णुजी का आशीर्वाद पाने का सौभाग्य मिलेगा। 

इसके शुभ प्रभाव से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती और धन-दौलत की कोई कमी नहीं रहेगी। 

आइए जानते हैं कि किन-किन राशियों को मिलेगा लाभ।




पंचमहापुरुष राजयोग क्या है?

वैदिक ज्योतिष में पाँच ग्रह — मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि — यदि लग्न से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में अपनी स्वराशि अथवा उच्च राशि में स्थित हों, तो पाँच महान राजयोग बनते हैं। 

इन्हें सामूहिक रूप से पंचमहापुरुष राजयोग कहा जाता है।


- मंगल से रुचक योग

- बुध से भद्र योग

- बृहस्पति से हंस योग

- शुक्र से मालव्य योग

- शनि से शश योग


amazon


Narmadeshwar Shivling with Golden Brass Snake & Stone Nandi Set, 3 Inches

Brand: Generic https://link.amazon/B03J5NEtu

 

{ About this item

  • 100% AUTHENTIC NARMADA RIVER STONE: Handpicked directly from the sacred banks of the holy Narmada River, this original Narmadeshwar Shivling is a self-manifested (Swayambhu) Banalingam. Each natural stone shivling possesses unique, divine markings formed by nature over centuries, ensuring you receive a truly one-of-a-kind holy Mahadev idol for your home
  • COMPLETE AUSPICIOUS POOJA JOD SET: Eliminate the hassle of buying separate spiritual accessories. This complete Shiva Lingam set includes the sacred Narmada stone shivlingam, a finely handcrafted natural black stone Nandi statue, and an elegant, durable metallic golden brass snake (Naag Chhatra) to perfectly complete the holy trinity for your rituals
  • APPROPRIATE SIZE FOR HOME PUJA TEMPLE: Meticulously sized and proportioned to fit beautifully inside any home mandir, office desk, or spiritual altar. This compact yet powerful divine Shiv ji murti combo enhances the spiritual aesthetic of your living space while radiating positive vibrations without crowding your pooja space
  • REMOVES NEGATIVE INFLUENCES AND ATTRACTS POSITIVITY: Removes bad omen, obstacles, and negative energies when placed anywhere in your home or workspace. Brings good luck, blessings, and success in life through its divine presence and spiritual energy
  • VASTU PROTECTION AND SPIRITUAL BENEFITS: According to Vastu Shastra, placing a natural Narmadeshwar Mahadev idol at home dispels negative energies, reduces planetary doshas, and attracts prosperity, peace, and health. It also serves as a highly auspicious and meaningful spiritual gift for housewarming, weddings, Mahashivratri, and festive occasions
  • SUITABLE FOR DAILY JAL AND MILK ABHISHEK: Made from high-density, premium-quality original Narmada Banalingam stone, this durable shivlingam set is well-suited for daily water, milk, curd, and honey Abhishek. The non-porous natural stone ensures zero erosion, color fading, or rust on the golden naag chhatra over years of regular worship
  • EXTENSIVE COLLECTION AVAILABLE: Wide variety of God Idols and Statues crafted in Brass and Marble available in our range, including Shiva Idol, Shiv Lingam, Nataraj, Adiyogi, and Shiva Family representations to enhance your spiritual collection and devotional practices
  • PERFECT SIZE FOR HOME PUJA TEMPLE: Meticulously sized and proportioned to fit beautifully inside any home mandir, office desk, or spiritual altar. This compact yet powerful divine Shiv ji murti combo enhances the spiritual aesthetic of your living space while radiating positive vibrations without crowding your pooja space. }



यदि इन योगों पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो और वे पाप प्रभाव से मुक्त हों, तो इनके शुभ परिणाम और अधिक प्रबल माने जाते हैं।

सावन के महीने में देव गुरु बृहस्पति कर्क राशि में होंगे। 

12 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रहा है कि सावन के महीने में गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में लौट रहे हैं। 

कर्क राशि में जब गुरु होते हैं तो बेहद शुभ और शक्तिशाली हंस राजयोग बनाते हैं। 

सावन के पवित्र महीने में 12 साल बाद हंस महापुरुष राजयोग का संयोग बन रहा है। 

ऐसे में भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति बुद्धिमान और ज्ञानी बनता है। 

जीवन के हर क्षेत्र में उसे सफलता प्राप्त होती है और धन - दौलत की कोई कमी नहीं रहती। 

इसके साथ ही गोचर के गुरु दौरान पुष्य नक्षत्र में होंगे जिससे बेहद ही शुभ और फलदायी गुरु पुष्यामृत राजयोग का योग भी बनेगा। 

वहीं, जीव और आत्मा दोनों के कारक ग्रह सूर्य सावन के महीने में कर्क राशि में होंगे। 

इस दौरान सूर्य और गुरु की युति भी होगी। 

17 अगस्त के बाद सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में चले जाएंगे। 

इससे सूर्य की स्थिति और प्रबल हो जाएगी। 

मेष, कर्क और मकर सहित 5 राशियों के जातकों को सावन में महीने में भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से लाभ प्राप्त होगा।

श्रावण मास में इन योगों का विशेष महत्व :

श्रावण मास भगवान शिव की कृपा का काल माना जाता है। 

शिव की आराधना से ग्रहदोषों की शांति और शुभ ग्रहों की शक्ति में वृद्धि होने की परंपरागत मान्यता है। 

यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचमहापुरुष योग विद्यमान हो अथवा गोचर में इन ग्रहों की विशेष अनुकूलता प्राप्त हो, तो श्रावण मास में किए गए जप, तप, दान और अभिषेक से शुभ फल अधिक प्रकट होने की मान्यता है।


प्रश्नकुंडली में भी यदि प्रश्न के समय ऐसे योग बनते हों, तो कार्य सिद्धि, सम्मान, पद प्राप्ति या आर्थिक लाभ की संभावना शुभ मानी जाती है।


पंचमहापुरुष राजयोग बनने के मुख्य नियम :

1. ग्रह पाँचों में से कोई एक होना चाहिए—मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र या शनि।

2. ग्रह केंद्र भाव (1, 4, 7 या 10) में स्थित हो।

3. ग्रह अपनी स्वराशि या उच्च राशि में हो।

4. ग्रह अत्यधिक निर्बल, अस्त या गंभीर पाप प्रभाव से ग्रस्त न हो।

5. लग्न और दशा का सहयोग मिलने पर योग का प्रभाव अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।

+++ +++

पाँचों योगों के फल :

1. रुचक योग ( मंगल )

यह योग साहस, पराक्रम, प्रशासनिक क्षमता, सैन्य सफलता, भूमि, भवन, तकनीकी कार्य और नेतृत्व प्रदान करने वाला माना जाता है। 
ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं।

श्रावण उपाय: मंगलवार अथवा श्रावण में शिवलिंग पर लाल चंदन, जल और बिल्वपत्र अर्पित करें तथा "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का जप करें।

2. भद्र योग ( बुध )

यह योग बुद्धिमत्ता, शिक्षा, व्यापार, लेखन, वाणी, गणित, संचार और तर्कशक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है। 
ऐसे जातक अपनी वाणी और विवेक से सम्मान प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण उपाय: भगवान गणेश और शिव की संयुक्त पूजा करें। 
हरी मूंग का दान करें तथा "ॐ बुं बुधाय नमः" मंत्र का जप करें।

3. हंस योग ( बृहस्पति )

यह योग धर्म, ज्ञान, गुरु कृपा, संतान सुख, सम्मान, न्यायप्रियता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। 
ऐसे व्यक्ति समाज में आदर प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण उपाय: गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें, शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाएँ और "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जप करें।

4. मालव्य योग ( शुक्र )

यह योग सौंदर्य, कला, वाहन, भवन, वैवाहिक सुख, ऐश्वर्य और भौतिक सुविधाओं का द्योतक माना जाता है। 
ऐसे जातकों में आकर्षक व्यक्तित्व और कलात्मक गुण हो सकते हैं।

श्रावण उपाय: शुक्रवार को सफेद पुष्प अर्पित करें, कन्याओं को मिठाई दें तथा "ॐ शुक्राय नमः" मंत्र का जप करें।

5. शश योग ( शनि )

यह योग संगठन क्षमता, अनुशासन, धैर्य, प्रशासन, राजनीति, उद्योग और दीर्घकालिक सफलता का प्रतीक माना जाता है। 
ऐसे व्यक्ति कठिन परिश्रम से ऊँचे पद प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण उपाय: शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाएँ, जरूरतमंदों की सेवा करें और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें।

जन्मकुंडली में फल :

यदि पंचमहापुरुष योग जन्मकुंडली में मजबूत हो तो व्यक्ति को जीवन में सम्मान, आर्थिक स्थिरता, प्रतिष्ठा, सामाजिक प्रभाव, निर्णय क्षमता और सफलता प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है। 
ग्रहों की दशा-अंतरदशा में इन योगों के फल अधिक स्पष्ट रूप से अनुभव हो सकते हैं।


amazon


Original Lakshmi Sangu Conch Shell Shankh for Pooja Blowing Shankh (White) Medium size 12 CM length and 18CM Round

Brand: Thenkumari https://link.amazon/B0ehI4aH5



{ About this item

  • Weight: 200 to 300 Grams...
  • Type: Plain Blowing Shankh, Sound: Very Loud
  • Material: Natural Conch Shell Shankh, Left Handed
  • Natural Loud Blowing Shankh, Medium Size, 5 inch in Length
  • When the conch is blown with controlled breath, the primordial sound of "Om" emanates from it. }


प्रश्नकुंडली में फल :


यदि प्रश्न पूछते समय प्रश्नकुंडली में ऐसा योग बने, तो रुके हुए कार्यों में गति, न्यायालय संबंधी मामलों में राहत, नौकरी या व्यवसाय में सफलता तथा शुभ समाचार मिलने की संभावना मानी जाती है।

गोचर में फल :

जब गोचर के ग्रह जन्मकुंडली के शुभ योगों को सक्रिय करते हैं, तब व्यक्ति को नए अवसर, पदोन्नति, आर्थिक लाभ, विवाह, संतान सुख, संपत्ति संबंधी कार्यों में प्रगति और समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। 
यदि गोचर प्रतिकूल हो, तो शुभ योगों के परिणामों में विलंब भी संभव माना जाता है।

मेष राशि: करियर आगे बढ़ेगा, पूर्व के अटके कार्य पूरे होंगे
मेष राशि के जातकों के चौथे उपरांत पंचम भाव में गुरु का गोचर होने जा रहा है। 
मेष राशि वालों पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। 
लेकिन ग्रहों की अनुकूलता बनी हुई है, जो इसके शुभ प्रभाव को आगे ले जाने का काम करेगी। 
वही, मंगल का गोचर सावन के दौरान इनकी राशि से तीसरे भाव में होगा। 
यह गोचर इनके पराक्रम को बढ़ाने वाला रहेगा। 
करियर में गतिशीलता बढ़ेगा और पूर्व के अटके हुए कार्यों को पूरा करना का पर्याप्त समय मिलेगा। इसके साथ ही सुख साधनों की प्राप्ति होगी।

मिथुन राशि: आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी, यात्रा का भी संयोग
मिथुन राशि में गुरु का गोचर आपके दूसरे भाव को प्रभावित करेगा। 
कुंडली का यह भाव धन, वाणी, शिक्षा और संचित संपत्ति का कारक होता है। 
सावन में इस बार बुध का गोचर कर्क राशि में देवगुरु बृहस्पति के साथ होने जा रहा है। 
यहां दूसरे भाव में बुध की युति सूर्य के साथ होने से बुधादित्य योग का निर्माण होगा। 
इससे करियर में आ रही परेशानियां दूर होगी और आर्थिक मामलों में गतिशीलता रहेगी। 
परीक्षा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। 
इसके अलावा धार्मिक या अन्य किसी यात्रा का भी संयोग बनता दिख रहा है।

कर्क राशि: व्यापारिक मामलों में सुधार होगा, समय लाभकारी रहेगा
कर्क राशि के लग्न भाव में गुरु का गोचर होने जा रहा है। 
कर्क राशि में 12 साल बाद सावन के महीने में उच्च के गुरु और सूर्य की युति बन रही है। 
इसके शुभ प्रभाव से मान-सम्मान बढ़ेगा और नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। 
इस दौरान कर्क राशि के जातकों के ज्ञान में वृद्धि होगी। 
इसके साथ ही आर्थिक और व्यापारिक मामलों में सुधार भी देखने को मिलेगा। 
नए व्यापारिक गठबंधन हो सकते हैं। 
करियर में भी अच्छे परिणाम मिलेंगे। 
सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय लाभकारी रहने वाला है। 
स्वास्थ्य में सुधार होने की प्रबल संभावना है।

वृश्चिक राशि: नौकरी बदलने का प्रयास सफल रहेगा
वृश्चिक राशि पूरे सावन गुरु का गोचर वृश्चिक राशि से भाग्य भाव में होगा। 
इस दौरान आपका भाग्य प्रबल रहेगा। 
तीर्थ यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है। 
इसके साथ ही किसी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का योग भी बनता हुआ दिख रहा है। नौकरी बदलने के लिए किए जा रहे प्रयास फलदायी रहेंगे। 
कर्म भाव में संचार करने से करियर में उन्नति होगी और कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग के लोगों से सहयोग भी मिलेगा। 

मकर राशि: कार्यक्षेत्र में सफलता के योग, गंभीरता बढ़ेगी
मकर राशि सावन के महीने में मकर राशि से सातवें भाव में गुरु का गोचर होगा। इस दौरान गुरु की दृष्टि आपकी राशि पर पड़ने से धार्मिक भावनाओं में वृद्धि होगी। मकर राशि के जातकों की बुद्धि में स्थिरता और गंभीरता बढ़ेगी। करियर की बात करें तो प्रबंधन क्षमता में विस्तार होगा। कार्यक्षेत्र में सफलता का संयोग भी बनता हुआ दिखाई दे रहा है। आपकी आर्थिक स्थिति भी सामान्य बनी रहेगी। हालांकि दान-पुण्य के कार्यों पर खर्चे भी हो सकते हैं।

श्रावण मास के विशेष उपाय :

- प्रतिदिन प्रातः शिवलिंग पर जल एवं गंगाजल से अभिषेक करें।
- बिल्वपत्र, धतूरा, आक के पुष्प तथा सफेद पुष्प श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- "ॐ नमः शिवाय" का कम से कम 108 बार जप करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जप करें।
- सोमवार का व्रत श्रद्धापूर्वक रखें।
- गौसेवा, अन्नदान और वस्त्रदान करें।
- ब्राह्मण, गुरु और माता-पिता का सम्मान करें।
- क्रोध, असत्य, नशा और तामसिक भोजन से यथासंभव दूर रहें।
- रुद्राभिषेक या लघुरुद्र का आयोजन सामर्थ्य अनुसार करें।
- गरीबों एवं रोगियों की सेवा को शिवसेवा का रूप मानकर करें।

क्या करें और क्या न करें

करें :

- सात्त्विक भोजन करें।
- प्रतिदिन ध्यान और प्रार्थना करें।
- शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें।
- संयमित वाणी और सदाचार अपनाएँ।

न करें :

- किसी का अपमान न करें।
- झूठ, छल और अन्याय से बचें।
- बिना कारण क्रोध न करें।
- नशे और हिंसा से दूर रहें।
- पूजा के समय मन को अशांत न रखें।
+++ +++

आध्यात्मिक संदेश :

पंचमहापुरुष राजयोग केवल धन या पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं है। 
इसका वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर स्थित श्रेष्ठ गुणों — साहस, विवेक, धर्म, सौंदर्यबोध और धैर्य— को जागृत करना है। 
श्रावण मास हमें स्मरण कराता है कि भगवान शिव की कृपा तभी स्थायी होती है जब मन में विनम्रता, सेवा, करुणा और सत्य का वास हो।

जिस व्यक्ति के जीवन में पंचमहापुरुष योग हो और वह श्रावण मास में श्रद्धा, भक्ति और सदाचार के साथ शिव उपासना करे, उसके शुभ कर्मों की शक्ति और आत्मबल में वृद्धि होने की परंपरागत मान्यता है। 
साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी ज्योतिषीय योग का फल संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहबल, दशा, गोचर और व्यक्ति के कर्मों के संयुक्त प्रभाव पर निर्भर करता है। 
इस लिए शुभ योगों के साथ सत्कर्म, ईश्वरभक्ति और मानव सेवा को जीवन का आधार बनाना ही सर्वोत्तम उपाय माना गया है।
हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 
+++ +++
+++ +++

शुक्र प्रदोष का प्रभाव बारह राशियों के फल, नियम :

शुक्र प्रदोष का प्रभाव बारह राशियों के फल, नियम : शुक्र प्रदोष का प्रभाव बारह राशियों के फल, नियम : जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर एवं बारह ...