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Wednesday, July 29, 2026

पंचमहापुरुष राजयोग :

श्रावण मास में पंचमहापुरुष राजयोग का महत्व, नियम, फल एवं उपाय :

सनातन धर्म में श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। 

यह महीना केवल व्रत, उपवास और पूजा का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तप, साधना और ग्रहों के शुभ प्रभाव को जागृत करने का भी श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली अथवा गोचर में विशेष ग्रह बलवान होकर केंद्र भावों में अपनी स्वराशि या उच्च राशि में स्थित होते हैं, तब पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण होता है। 

ऐसा योग व्यक्ति के जीवन में प्रतिष्ठा, धन, यश, आध्यात्मिक उन्नति और नेतृत्व क्षमता प्रदान करने वाला माना जाता है। 

श्रावण मास में जब भगवान शिव की आराधना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप और सात्त्विक जीवन अपनाया जाता है, तब इन शुभ योगों का प्रभाव और भी अधिक फलदायी माना जाता है।

सावन में 12 साल बाद गुरु बना रहे पंचमहापुरुष राजयोग, कर्क और मकर समेत कई राशियों को मिलेगा शिव कृपा का लाभ !

सावन के पवित्र महीने में 12 साल के बाद हंस महापुरुष राजयोग और गुरु पुष्यामृत योग का संयोग बन रहा है। इसके शुभ प्रभाव से कर्क और मकर सहित 5 राशियों के जातकों को भगवान शिव के साथ विष्णुजी का आशीर्वाद पाने का सौभाग्य मिलेगा। इसके शुभ प्रभाव से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती और धन-दौलत की कोई कमी नहीं रहेगी। आइए जानते हैं कि किन-किन राशियों को मिलेगा लाभ।

पंचमहापुरुष राजयोग क्या है?


वैदिक ज्योतिष में पाँच ग्रह—मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि—यदि लग्न से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में अपनी स्वराशि अथवा उच्च राशि में स्थित हों, तो पाँच महान राजयोग बनते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से पंचमहापुरुष राजयोग कहा जाता है।


- मंगल से रुचक योग

- बुध से भद्र योग

- बृहस्पति से हंस योग

- शुक्र से मालव्य योग

- शनि से शश योग


यदि इन योगों पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो और वे पाप प्रभाव से मुक्त हों, तो इनके शुभ परिणाम और अधिक प्रबल माने जाते हैं।

सावन के महीने में देव गुरु बृहस्पति कर्क राशि में होंगे। 12 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रहा है कि सावन के महीने में गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में लौट रहे हैं। कर्क राशि में जब गुरु होते हैं तो बेहद शुभ और शक्तिशाली हंस राजयोग बनाते हैं। सावन के पवित्र महीने में 12 साल बाद हंस महापुरुष राजयोग का संयोग बन रहा है। ऐसे में भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति बुद्धिमान और ज्ञानी बनता है। जीवन के हर क्षेत्र में उसे सफलता प्राप्त होती है और धन-दौलत की कोई कमी नहीं रहती। इसके साथ ही गोचर के गुरु दौरान पुष्य नक्षत्र में होंगे जिससे बेहद ही शुभ और फलदायी गुरु पुष्यामृत राजयोग का योग भी बनेगा। वहीं, जीव और आत्मा दोनों के कारक ग्रह सूर्य सावन के महीने में कर्क राशि में होंगे। इस दौरान सूर्य और गुरु की युति भी होगी। 17 अगस्त के बाद सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में चले जाएंगे। इससे सूर्य की स्थिति और प्रबल हो जाएगी। मेष, कर्क और मकर सहित 5 राशियों के जातकों को सावन में महीने में भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से लाभ प्राप्त होगा।

श्रावण मास में इन योगों का विशेष महत्व


श्रावण मास भगवान शिव की कृपा का काल माना जाता है। शिव की आराधना से ग्रहदोषों की शांति और शुभ ग्रहों की शक्ति में वृद्धि होने की परंपरागत मान्यता है। यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में पंचमहापुरुष योग विद्यमान हो अथवा गोचर में इन ग्रहों की विशेष अनुकूलता प्राप्त हो, तो श्रावण मास में किए गए जप, तप, दान और अभिषेक से शुभ फल अधिक प्रकट होने की मान्यता है।


प्रश्नकुंडली में भी यदि प्रश्न के समय ऐसे योग बनते हों, तो कार्य सिद्धि, सम्मान, पद प्राप्ति या आर्थिक लाभ की संभावना शुभ मानी जाती है।


पंचमहापुरुष राजयोग बनने के मुख्य नियम


1. ग्रह पाँचों में से कोई एक होना चाहिए—मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र या शनि।

2. ग्रह केंद्र भाव (1, 4, 7 या 10) में स्थित हो।

3. ग्रह अपनी स्वराशि या उच्च राशि में हो।

4. ग्रह अत्यधिक निर्बल, अस्त या गंभीर पाप प्रभाव से ग्रस्त न हो।

5. लग्न और दशा का सहयोग मिलने पर योग का प्रभाव अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।

पाँचों योगों के फल

1. रुचक योग (मंगल)

यह योग साहस, पराक्रम, प्रशासनिक क्षमता, सैन्य सफलता, भूमि, भवन, तकनीकी कार्य और नेतृत्व प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं।

श्रावण उपाय: मंगलवार अथवा श्रावण में शिवलिंग पर लाल चंदन, जल और बिल्वपत्र अर्पित करें तथा "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का जप करें।

2. भद्र योग (बुध)

यह योग बुद्धिमत्ता, शिक्षा, व्यापार, लेखन, वाणी, गणित, संचार और तर्कशक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है। ऐसे जातक अपनी वाणी और विवेक से सम्मान प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण उपाय: भगवान गणेश और शिव की संयुक्त पूजा करें। हरी मूंग का दान करें तथा "ॐ बुं बुधाय नमः" मंत्र का जप करें।

3. हंस योग (बृहस्पति)

यह योग धर्म, ज्ञान, गुरु कृपा, संतान सुख, सम्मान, न्यायप्रियता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। ऐसे व्यक्ति समाज में आदर प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण उपाय: गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें, शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाएँ और "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जप करें।

4. मालव्य योग (शुक्र)

यह योग सौंदर्य, कला, वाहन, भवन, वैवाहिक सुख, ऐश्वर्य और भौतिक सुविधाओं का द्योतक माना जाता है। ऐसे जातकों में आकर्षक व्यक्तित्व और कलात्मक गुण हो सकते हैं।

श्रावण उपाय: शुक्रवार को सफेद पुष्प अर्पित करें, कन्याओं को मिठाई दें तथा "ॐ शुक्राय नमः" मंत्र का जप करें।

5. शश योग (शनि)

यह योग संगठन क्षमता, अनुशासन, धैर्य, प्रशासन, राजनीति, उद्योग और दीर्घकालिक सफलता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिश्रम से ऊँचे पद प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण उपाय: शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाएँ, जरूरतमंदों की सेवा करें और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें।
जन्मकुंडली में फल

यदि पंचमहापुरुष योग जन्मकुंडली में मजबूत हो तो व्यक्ति को जीवन में सम्मान, आर्थिक स्थिरता, प्रतिष्ठा, सामाजिक प्रभाव, निर्णय क्षमता और सफलता प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है। ग्रहों की दशा-अंतरदशा में इन योगों के फल अधिक स्पष्ट रूप से अनुभव हो सकते हैं।

प्रश्नकुंडली में फल

यदि प्रश्न पूछते समय प्रश्नकुंडली में ऐसा योग बने, तो रुके हुए कार्यों में गति, न्यायालय संबंधी मामलों में राहत, नौकरी या व्यवसाय में सफलता तथा शुभ समाचार मिलने की संभावना मानी जाती है।

गोचर में फल

जब गोचर के ग्रह जन्मकुंडली के शुभ योगों को सक्रिय करते हैं, तब व्यक्ति को नए अवसर, पदोन्नति, आर्थिक लाभ, विवाह, संतान सुख, संपत्ति संबंधी कार्यों में प्रगति और समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। यदि गोचर प्रतिकूल हो, तो शुभ योगों के परिणामों में विलंब भी संभव माना जाता है।

मेष राशि: करियर आगे बढ़ेगा, पूर्व के अटके कार्य पूरे होंगे
मेष राशि के जातकों के चौथे उपरांत पंचम भाव में गुरु का गोचर होने जा रहा है। मेष राशि वालों पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। लेकिन ग्रहों की अनुकूलता बनी हुई है, जो इसके शुभ प्रभाव को आगे ले जाने का काम करेगी। वही, मंगल का गोचर सावन के दौरान इनकी राशि से तीसरे भाव में होगा। यह गोचर इनके पराक्रम को बढ़ाने वाला रहेगा। करियर में गतिशीलता बढ़ेगा और पूर्व के अटके हुए कार्यों को पूरा करना का पर्याप्त समय मिलेगा। इसके साथ ही सुख साधनों की प्राप्ति होगी।

मिथुन राशि: आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी, यात्रा का भी संयोग
मिथुन राशि में गुरु का गोचर आपके दूसरे भाव को प्रभावित करेगा। कुंडली का यह भाव धन, वाणी, शिक्षा और संचित संपत्ति का कारक होता है। सावन में इस बार बुध का गोचर कर्क राशि में देवगुरु बृहस्पति के साथ होने जा रहा है। यहां दूसरे भाव में बुध की युति सूर्य के साथ होने से बुधादित्य योग का निर्माण होगा। इससे करियर में आ रही परेशानियां दूर होगी और आर्थिक मामलों में गतिशीलता रहेगी। परीक्षा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। इसके अलावा धार्मिक या अन्य किसी यात्रा का भी संयोग बनता दिख रहा है।

कर्क राशि: व्यापारिक मामलों में सुधार होगा, समय लाभकारी रहेगा
कर्क राशि के लग्न भाव में गुरु का गोचर होने जा रहा है। कर्क राशि में 12 साल बाद सावन के महीने में उच्च के गुरु और सूर्य की युति बन रही है। इसके शुभ प्रभाव से मान-सम्मान बढ़ेगा और नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। इस दौरान कर्क राशि के जातकों के ज्ञान में वृद्धि होगी। इसके साथ ही आर्थिक और व्यापारिक मामलों में सुधार भी देखने को मिलेगा। नए व्यापारिक गठबंधन हो सकते हैं। करियर में भी अच्छे परिणाम मिलेंगे। सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय लाभकारी रहने वाला है। स्वास्थ्य में सुधार होने की प्रबल संभावना है।

वृश्चिक राशि: नौकरी बदलने का प्रयास सफल रहेगा
वृश्चिक राशि पूरे सावन गुरु का गोचर वृश्चिक राशि से भाग्य भाव में होगा। इस दौरान आपका भाग्य प्रबल रहेगा। तीर्थ यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है। इसके साथ ही किसी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का योग भी बनता हुआ दिख रहा है। नौकरी बदलने के लिए किए जा रहे प्रयास फलदायी रहेंगे। कर्म भाव में संचार करने से करियर में उन्नति होगी और कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग के लोगों से सहयोग भी मिलेगा। 

मकर राशि: कार्यक्षेत्र में सफलता के योग, गंभीरता बढ़ेगी
मकर राशि सावन के महीने में मकर राशि से सातवें भाव में गुरु का गोचर होगा। इस दौरान गुरु की दृष्टि आपकी राशि पर पड़ने से धार्मिक भावनाओं में वृद्धि होगी। मकर राशि के जातकों की बुद्धि में स्थिरता और गंभीरता बढ़ेगी। करियर की बात करें तो प्रबंधन क्षमता में विस्तार होगा। कार्यक्षेत्र में सफलता का संयोग भी बनता हुआ दिखाई दे रहा है। आपकी आर्थिक स्थिति भी सामान्य बनी रहेगी। हालांकि दान-पुण्य के कार्यों पर खर्चे भी हो सकते हैं।

श्रावण मास के विशेष उपाय

- प्रतिदिन प्रातः शिवलिंग पर जल एवं गंगाजल से अभिषेक करें।
- बिल्वपत्र, धतूरा, आक के पुष्प तथा सफेद पुष्प श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- "ॐ नमः शिवाय" का कम से कम 108 बार जप करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जप करें।
- सोमवार का व्रत श्रद्धापूर्वक रखें।
- गौसेवा, अन्नदान और वस्त्रदान करें।
- ब्राह्मण, गुरु और माता-पिता का सम्मान करें।
- क्रोध, असत्य, नशा और तामसिक भोजन से यथासंभव दूर रहें।
- रुद्राभिषेक या लघुरुद्र का आयोजन सामर्थ्य अनुसार करें।
- गरीबों एवं रोगियों की सेवा को शिवसेवा का रूप मानकर करें।

क्या करें और क्या न करें

करें

- सात्त्विक भोजन करें।
- प्रतिदिन ध्यान और प्रार्थना करें।
- शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें।
- संयमित वाणी और सदाचार अपनाएँ।

न करें

- किसी का अपमान न करें।
- झूठ, छल और अन्याय से बचें।
- बिना कारण क्रोध न करें।
- नशे और हिंसा से दूर रहें।
- पूजा के समय मन को अशांत न रखें।

आध्यात्मिक संदेश

पंचमहापुरुष राजयोग केवल धन या पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर स्थित श्रेष्ठ गुणों—साहस, विवेक, धर्म, सौंदर्यबोध और धैर्य—को जागृत करना है। श्रावण मास हमें स्मरण कराता है कि भगवान शिव की कृपा तभी स्थायी होती है जब मन में विनम्रता, सेवा, करुणा और सत्य का वास हो।

जिस व्यक्ति के जीवन में पंचमहापुरुष योग हो और वह श्रावण मास में श्रद्धा, भक्ति और सदाचार के साथ शिव उपासना करे, उसके शुभ कर्मों की शक्ति और आत्मबल में वृद्धि होने की परंपरागत मान्यता है। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी ज्योतिषीय योग का फल संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहबल, दशा, गोचर और व्यक्ति के कर्मों के संयुक्त प्रभाव पर निर्भर करता है। इसलिए शुभ योगों के साथ सत्कर्म, ईश्वरभक्ति और मानव सेवा को जीवन का आधार बनाना ही सर्वोत्तम उपाय माना गया है।
हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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