ज्योतिषनुसार सूर्य अर्घ्य के आर्थिक एवं शारीरिक लाभ
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, श्री खगोलशास्त्र, श्री ऋग्वेद, श्री सामवेद, श्री यजुर्वेद, जन्मकुंडली एवं प्रश्नकुंडली के अनुसार सूर्य अर्घ्य का आर्थिक एवं शारीरिक महत्व, व्रत - विधि, लाभ, फल एवं उपाय
भारतीय शास्त्रों के अनुसाए सूर्य देव को जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. जी हां अक्सर आप अपनी समस्या लेकर जब किसी पंडित के पास जाते है, तो वो सबसे पहले सूर्य को अर्घ देने का उपाय ही सुझाते है।
वही अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे सूर्य ग्रह मजबूत हो तो यह माना जाता है, कि वह व्यक्ति काफी गुणवान होता है. साथ ही समाज मे उसका बहुत मान सम्मान भी होता है ।
इस के इलावा वह बहुत प्रतिष्ठित भी होता है. ऐसे मे कुंडली मे सूर्य ग्रह को मजबूत रखना बेहद जरुरी है।
ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
सनातन वैदिक परंपरा में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है।
ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अनेक वैदिक ग्रंथों में सूर्यदेव की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
सूर्य ही समस्त ग्रहों के राजा, आत्मा के कारक, तेज, स्वास्थ्य, आयु, आत्मविश्वास, नेतृत्व, पिता, शासन, प्रतिष्ठा और जीवन-ऊर्जा के प्रतीक माने गए हैं।
वैदिक ज्योतिष, जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली के अनुसार यदि सूर्य बलवान हो तो व्यक्ति को सम्मान, यश, धन, स्वास्थ्य और समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है।
यदि सूर्य निर्बल, पापग्रहों से पीड़ित या अशुभ भाव में हो तो व्यक्ति को आर्थिक कठिनाइयाँ, आत्मविश्वास की कमी, नेत्र रोग, सरकारी कार्यों में बाधा, पिता से मतभेद तथा मान - सम्मान में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
वैसे महाभारत काल से ऐसा माना जाता है, कि कर्ण नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करते थे और सूर्य को जल का अर्घ भी देते थे. इसके इलावा सूर्य देव की पूजा के बारे मे भगवान् राम की कथा मे भी यह लिखा गया है ।
कि भगवान् राम हर रोज सूर्य देव की पूजा करते थे और अर्घ देते थे. वैसे कलयुग मे भी ऐसे बहुत से लोग है जो सूर्य देव को जल अर्पित करते है और उनकी पूजा करते है ।
गौरतलब है, कि सूर्य देव को अगर पूरी विधि के साथ जल चढ़ाया जाये तो इसके परिणाम और भी अच्छे होते है।
ऐसी स्थिति में प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है।
यह केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन का भी श्रेष्ठ साधन है।
यदि हम सूर्य देव को चढाने वाले जल मे कुछ वस्तुए डाल कर उसे अर्पित करे तो इससे सही फल प्राप्त होता है. वैसे सूर्य देव को भी अलग अलग चीजों के लिए जल दिया जाता है. गौरतलब है ।
कि ज्योतिषशास्त्र मे सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है. इस लिए नियमित रूप से सूर्य को जल देने से यह माना जाता है ।
कि इससे आत्मा की शुद्धि होती है और इससे हमारा आत्म विश्वास भी बढ़ता है. इससे न केवल हमारा मनोबल बढ़ता है, बल्कि यह हमें कई बीमारियों से भी निजात दिलाता है।
इसके इलावा यदि आप शरीर मे कमजोरी महसूस करते है तो सूर्य को नियमित रूप से जल देने से इसका प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है।
जिससे आपका शरीर ऊर्जावान बनता है. इससे आपको नौकरी के क्षेत्र मे भी काफी लाभ मिलता है. जैसे यदि किसी को नौकरी की परेशानी हो, तो वो यदि सूर्य को नियमित रूप से जल प्रदान करे तो उसकी यह समस्या समाप्त हो सकती है।
साथ ही व्यावसाय मे भी लाभ होता है. इसके इलावा अगर प्रमोशन मे कोई समस्या हो तो उच्च अधिकारियो से सहयोग भी मिल सकता है. इससे आपकी सारी समस्याएं समाप्त हो जाती है ।
इस लिए सूर्य को हर रोज जल देना काफी फायदेमंद माना जाता है।
सूर्य अर्घ्य का आध्यात्मिक महत्व
ऋग्वेद में सूर्य को समस्त जगत का प्रकाश और जीवनदाता बताया गया है।
सूर्य का प्रकाश अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक और सत्य का मार्ग दिखाता है।
यजुर्वेद के अनुसार सूर्य की उपासना मनुष्य के भीतर तेज, ओज और दिव्यता का विकास करती है। सामवेद में सूर्य स्तुति के माध्यम से मन, वाणी और आत्मा की शुद्धि का वर्णन मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य आत्मबल का प्रतिनिधि है।
इस लिए सूर्य अर्घ्य केवल ग्रह शांति का उपाय नहीं, बल्कि आत्मबल, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का भी श्रेष्ठ माध्यम है।
मगर सूर्य को जल देते समय इस बात का ध्यान रखे कि स्नान करने के बाद ही सूर्य को जल दे. वैसे सूर्य की उपासना करना कोई नई बात नहीं है ।
यह परम्परा तो वैदिक काल से चल रही है. इसमें कोई शक नहीं कि सूर्य देव के उदय होने के बाद ही दुनिया से अंधकार खत्म होता है ।
इस से चारो तरफ रोशनी का प्रकाश हो जाता है. वास्तव मे सूर्य देव के उदय होने के बाद ही मानव, पशु पक्षी सभी अपने अपने कार्यो मे लग जाते है. फिर जैसे ही सूर्य अस्त होता है ।
हर कोई अपने अपने घर को लौट जाता है. गौरतलब है, कि सूर्य देव को जल अर्पित करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखे. जैसे कि सूर्य को, किसी ताम्बे के लौटे मे जल डाल कर दोनों हाथो से अर्पित करे।
जन्मकुंडली में सूर्य का प्रभाव :
यदि जन्मकुंडली में सूर्य प्रथम, पंचम, नवम, दशम या एकादश भाव में शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति नेतृत्व क्षमता, सरकारी सफलता, समाज में प्रतिष्ठा, धन और सम्मान प्राप्त करता है।
यदि सूर्य राहु, केतु या शनि से पीड़ित हो अथवा षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में अशुभ प्रभाव में हो तो अनेक प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
ऐसे समय में योग्य विद्वान ज्योतिषाचार्य से कुंडली का परीक्षण कर सूर्य अर्घ्य, सूर्य मंत्र जप, आदित्य हृदय स्तोत्र और दान आदि उपाय करना हितकारी माना जाता है।
आपको बता दे कि सूर्य देव सभी ग्रहो के राजा कहलाते है. जिस प्रकार ज्योतिष मे माता और मन के कारक चन्द्रमा है, उसी प्रकार पिता और आत्मा के कारक सूर्य है. यहाँ तक कि सभी हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में सूर्य देव की महिमा का वर्णन मिलता है।
इसके इलावा बहुत कम लोग ये बात जानते है, कि छठ व्रत में सूर्य को दिन में दो बार अर्घ दिया जाता है. सबसे पहले जब सूर्य उदय होता है और फिर जब वह अस्त होता है।
तो उसे जल चढ़ाया जाता है. ऐसे में यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच राशि यानि तुला में है. तो इसके अशुभ फल से बचने के लिए आपको हर रोज सूर्य देव को अर्घ देना चाहिए।
इस के साथ ही यदि सूर्य किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर अशुभ स्थान पर बैठा है. तो उन्हें सूर्य की उपासना करनी चाहिए।
इस के इलावा जिनकी कुंडली में सूर्य देव अशुभ ग्रहो और शनि के राहु केतु के प्रभावों में है. तो ऐसे व्यक्ति को हर रोज नियमानुसार सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए. यहाँ तक कि बीमारियों को दूर रखने के लिए भी हमें सूर्य की उपासना करनी चाहिए।
वही अगर स्किन संबंधी कोई समस्या हो तो आदित्य स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इससे लाभ आवश्य मिलता है. बता दे कि सूर्य देव को जल देने से हमारे जीवन में सभी इच्छाओ की पूर्ति होती है. वैसे सूर्य देव को अर्घ देते समय कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना भी जरुरी है।
जैसे सूर्य की पहली किरण को अर्घ देना सबसे ज्यादा फलदायक और उत्तम माना जाता है।
इसके लिए सबसे पहले आप प्रात काल सूर्य उदय होने से पहले उठ जाए और स्नान कर ले. फिर उगते सूर्य के सामने आसन लगा ले।
फिर आसन पर खड़े होकर ताम्बे के लौटे में जल डाल कर जल अर्पित करे. इसके बाद रक्त चंदन आदि से युक्त लाल रंग के पुष्प ले. आप लाल रंग का कोई भी पुष्प ग्रहण कर सकते है।
इस के इलावा रक्त चन्दन का मतलब है, लाल रंग का चंदन जो इस जल में डाल ले. इसके साथ ही आपको थोड़े से चावल डालने है ।
इस में आप भले ही चावल न डाले मगर रक्त चंदन और लाल रंग के पुष्प तो जल में जरूर डालने है और फिर अर्घ देना है. इसमें आप हाथ की मुट्ठी बना कर सूर्य को तीन बार जल अर्पित कर सकते है या सीधा ताम्बे के लौटे में जल डाल कर भी अर्पण कर सकते है।
प्रश्नकुंडली के अनुसार सूर्य :
जब कोई व्यक्ति आर्थिक संकट, नौकरी, स्वास्थ्य, सरकारी कार्य, प्रतिष्ठा या पिता से संबंधित प्रश्न लेकर आता है, तब प्रश्नकुंडली में सूर्य की स्थिति विशेष महत्व रखती है।
यदि सूर्य शुभ हो तो कार्य सिद्धि की संभावना बढ़ती है।
यदि सूर्य निर्बल हो तो नियमित सूर्य अर्घ्य, व्रत और मंत्र जप से शुभ परिणाम प्राप्त होने की मान्यता है।
हमेशा मंत्र को पढ़ते हुए ही जल अर्पित करना चाहिए और जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्य उदय दिखाई दे तो दोनों हाथो से ताम्बे के लौटे में जल डाल कर सूर्य को ऐसे जल दे जैसे कि सूर्य की किरणे पानी की धार से आपको साफ़ दिखाई दे।
इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखे कि जो जल आप सूर्य देव को अर्पण कर रहे है, वो आपके पैरो में नहीं आना चाहिए. ऐसे में अगर सम्भव हो सके तो एक बर्तन जरूर रख ले, ताकि जो जल आप अर्पण कर रहे है।
वो आपके पैरो को न छू सके. इसके बाद उस बर्तन में एकत्रित हुआ जल आप किसी भी पौधे में डाल सकते है।
इसके इलावा यदि आपको सूर्य भगवान् के दर्शन न हो तो रोज की तरह पूर्व दिशा में मुँह करके किसी शुद्ध स्थान पर आप जल अर्पित कर सकते है।
मगर जिस रास्ते से लोगों का आना जाना हो, वहां भूल कर भी जल अर्पित न करे. गौरतलब है, कि जल अर्पण करने के बाद दोनों हाथो से उस भूमि को स्पर्श करे और गला।
आंख, कान को छूकर भगवान् सूर्य देव को झुक कर प्रणाम करे. इसके साथ ही अर्घ देते समय आपको किसी एक सूर्य मंत्र का मन ही मन में उच्चारण जरूर करना चाहिए. फिर सीधे हाथ में जल लेकर उसे चारो तरफ छिड़कना चाहिए।
सूर्य अर्घ्य देने की विधि :
प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्वच्छ एवं हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
पूर्व दिशा की ओर मुख करके तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें।
उस में लाल पुष्प, थोड़ा सा अक्षत, रोली तथा यदि संभव हो तो थोड़ा गुड़ या लाल चंदन मिला सकते हैं।
सूर्योदय के समय दोनों हाथों से धीरे - धीरे जल अर्पित करें और जल की धार के बीच से सूर्य के दर्शन करें।
इस समय श्रद्धापूर्वक "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" अथवा गायत्री मंत्र का जप करें।
अर्घ्य के बाद सूर्य नमस्कार करें, माता - पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करें और दिनभर सत्य, सेवा तथा सदाचार का पालन करें।
सूर्य देव के 12 नाम :
1. ऊँ मित्राय: नमः
2. ऊँ रवये नमः
3. ऊँ सूर्यायः नमः
4. ऊँ भानवे नमः
5. ऊँ खगय नमः
6. ऊँ पुष्णे नमः
7. ऊँ हिरण्यगर्भाय नमः
8. ऊँ मारिचाये नमः
9. ऊँ आदित्याय नमः
10. ऊँ सावित्रे नमः
11. ऊँ आर्काय नमः
12. ऊँ भास्कराय नमः
इसके बाद जहाँ आप खड़े होकर जल अर्पित कर रहे है, उसी स्थान पर तीन बार घूम कर परिक्रमा कर ले और जहाँ आपने खड़े होकर सूर्य देव की पूजा की है वहां प्रणाम भी करे ।
वैसे आपको बता दे कि सूर्य देव का एक मंत्र तो यह है. ॐ सूर्याय नम:. इसके इलावा सूर्य को जल चढाने का उद्देश्य केवल सूर्य देव को प्रसन्न करना या यश की प्राप्ति करना नहीं है।
इस से हमारे स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है. जब सुबह उठ कर ताज़ी हवा और सूर्य की किरणे हमारे शरीर में प्रवेश करती है।
तो हमारा स्वास्थ्य भी हमेशा सही रहता है. इसके इलावा जब पानी की धारा में से सूर्य को किरणों को देखते है, तो इससे हमारी आँखों की रौशनी भी तेज होती है.
सूर्य व्रत की विधि :
रविवार का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रातः स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा करें।
लाल पुष्प, लाल वस्त्र, गुड़, गेहूँ और तांबे का पूजन करें।
दिनभर सात्त्विक आहार रखें अथवा सामर्थ्य के अनुसार उपवास करें।
सायंकाल सूर्यास्त से पूर्व भगवान सूर्य की स्तुति करें और निर्धनों को अन्न, गुड़, गेहूँ या तांबे का दान करें।
बता दे कि सूर्य की किरणों में विटामिन दी भरपूर मात्रा में होता है।
इस लिए जो व्यक्ति सुबह उठ कर सूर्य को जल देता है, वह तेजस्वी बनता है।
साथ ही इससे त्वचा में आकषर्ण और चमक आ जाती है।
एक तरफ जहाँ पेड़ पौधों को भोजन की प्राप्ति भी सूर्य की किरणों से होती है।
वही दूसरी तरफ ऋषि मुनियो का कहना है, कि सूर्य हमारे शरीर से हानिकारक तत्वों को नष्ट कर देता है।
बस सूर्य को जल अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखे कि इसे कभी भी सीधे न देखे बल्कि जल के बीच में से देखे.
आर्थिक लाभ :
वैदिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा, परिश्रम और सदाचार के साथ सूर्य उपासना करने से—
- रोजगार और व्यवसाय में प्रगति की संभावना बढ़ती है।
- सरकारी कार्यों में सहयोग प्राप्त हो सकता है।
- मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
- निर्णय क्षमता मजबूत होती है।
- नेतृत्व कौशल विकसित होता है।
- आत्मविश्वास बढ़ने से आर्थिक अवसरों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
- आलस्य कम होकर कर्मशीलता बढ़ती है।
यह ध्यान रखना चाहिए कि सूर्य अर्घ्य परिश्रम का विकल्प नहीं है, बल्कि सकारात्मक मनोबल और अनुशासन विकसित करने का आध्यात्मिक साधन है।
इसके इलावा सूर्य को 7 या 8 बजे तक जल चढ़ा दे।
वो इस लिए क्यूकि देर से चढ़ाया गया जल हानिकारक भी हो सकता है।
इस के साथ ही हमेशा ध्यान रखे कि जल में रक्त चंदन और लाल पुष्प हमेशा डाले।
यदि यह न हो तो आप लाल मिर्च के कुछ बीज भी डाल सकते है. यह तंत्र विद्या के काम आते है।
तो अब आगे से आप जब भी सूर्य देव को अर्घ दे तो इन बातों का खास ध्यान रखे।
शारीरिक लाभ :
प्रातःकाल की स्वच्छ धूप में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से नियमित दिनचर्या का पालन होता है।
इस से शरीर में स्फूर्ति, मानसिक प्रसन्नता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो सकता है।
सूर्य नमस्कार जैसे योगाभ्यास शरीर को लचीला बनाने, रक्तसंचार सुधारने तथा शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को गंभीर शारीरिक रोग हो तो धार्मिक साधना के साथ योग्य चिकित्सक की सलाह और उपचार अवश्य लेना चाहिए।
मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभ :
सूर्य उपासना से मन में अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है। नियमित मंत्रजप और ध्यान से मन की चंचलता कम होती है।
व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनता है और जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
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