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Wednesday, October 29, 2025

वैदिक ज्योतिष शास्त्र विद्या में जन्मकुंडली से मृत्यु योग जाने कैसे....!

सभी ज्योतिष मित्रो को मेरा निवेदन है..., आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे..., मे किसी के लेखो की कोपी नहि करता..., किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही है..., कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्ता भाई..., और आगे भी नही बढ़ता..., आप आपके महेनत से त्यार होने से बहुत आगे बठा जाता है...,

धन्यवाद......,  जय द्वारकाधीश...,

वैदिक ज्योतिष शास्त्र विद्या में से जन्मकुंडली मृत्यु योग जाने कैसे....!

वैदिक ज्योतिष शास्त्र विद्या में जन्मकुंडली से मृत्यु योग जाने कैसे....!

अखिल भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत जैसा कि मैं आप लोगों को कि सात प्रकार का के वृक्ष के बारे में चर्चा किए....! 

कि बालारिष्ट योग रिस्ट कि अल्पायु से मध्यायु दीर्घायु इस दिव्य आयुष एवं अमित आयुक्त तो अभी आप लोगों के सामने हम चर्चा करेंगे....! 

इस प्रकार की जो योग हैं कैसे बनाते हैं और इस से बचाओ तो हम क्या करें का हिंदी क्या होता है....! 

का सबसे प्रथम ए सनम में सर्वप्रथम यह जानने का प्रयास करते हैं है...! 

कि जन्म से आवर्तक की आईडी होती है उसे अखिल भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत का बालारिष्ट कहा गया है....! 





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कि यह रोती क्यों है इसको भी जानना आवश्यक है.....! 

कि किस कारण से होती है कि किस परिस्थिति में होती है हैं....! 

तो आइए स्टेट विचार करते हैं तो जातक के जन्मांग चक्र में लग्न से 168 12 स्थान में पाप ग्रहों से युक्त चंद्रमा हो तब व्यक्ति की मृत्यु बाल्यावस्था में हो जाती है है....! 

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इस के अलावा कि सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण का समय जो होता है में सूर्य चंद्र राहु एक ही राशि में हो तथा लग्न पर क्रूर ग्रह उग्र मतलब शनि मंगल के पीछे आया हो तब बालक के साथ माता - पिता की मृत्यु का भी डू योग बनता है....! 

अलग से छठे भाव में चंद्रमा लग्न में सभी और सप्तम में मंगल हो तो बालक के पिता की मृत्यु करवा दू योग बनता है....! 

अथवा यह मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होता है हैं....! 

अब इनसे बचने का उपाय क्या होता है इन से बचाते से जाता है....! 





इस ग्रंथों में कि बालारिष्ट योग से बचने के लिए ने बताया गया है कि बालक अपने साथी का चंद्रमा और मोती काले धागे में डाल करके बनाया जाता है....! 

इस से पालक के सिर से मृत्यु का संकट टल जाता है...! 

ऐसा कि हमारे भारतीय विद्वानों का मत है कि दूसरे नंबर पर आते हैं....! 

योगारिष्ट योगारिष्ट कैसे बनता है...!

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एक हाथ वर्ष के पश्चात आप भी इस वर्ष पहले इ में होने वाली लड़की को योगारिष्ट कहा जाता है....! 

कि इस प्रकार की मृत्यु तब होती है जब जातक के जन्म कुंडली के अंतर्गत अष्टम भाव में शनि मंगल के सिर पूर्वग्रहों से दूषित हो जाता है...! 

और लग्न में बैठा विपरीत ग्रह वक्री होता है इस लिए इसे योगारिष्ट करते हैं....! 

दूसरी अमावस्या से पहले की चतुर्दशी और अष्टमी को यह योग गुरु प्रभाव रहता है....! 

जिन लोगों के माता-पिता कर्मों में लिप्त रहते हैं उनके बालों के योग से ही होती है हैं....! 

अब इनसे बचने के उपाय क्या है योग बारिश से बचने के लिए...!

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कि भारतीय शास्त्रों के अंतर्गत है ऐसे जातक के माता - पिता को सत्कर्म करना चाहिए...! 

यह दिए इसी का धन स्वर्ण को पूरा लेते हैं या किसी की हत्या में लिख सकते हैं....! 

तब उनके बालों की मृत्यु विश्व में में आ जाती है है ऐसे परिस्थिति में कि ऐसे जातक के लिए मैं सिर्फ एक उपाय यह उपाय क्या है सिर्फ की उपाधि कि ऐसे जातक के लिए...! 
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कि कालों के काल महाकाल कि शिव की उपासना एक मात्र साधन है कि अब है इसके बाद कि योगारिष्ट की चर्चा कर दिए अब इसके बाद जो है में आता है अल्पायु हैं....! 

अल्पायु में को 206 32 वर्ष की आयु को कि हमारे ऋषि-मुनियों मधुकरा
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कि अल्प आयु का नाम दिया अल्पायु योग बनता कैसे है....! 

कि यदि लगने चंद्र राशि में है जैसे मेष कर्क तुला मकर राशि में हो तथा अष्टमेश वृषभ राशि मिथुन कन्या धनु मीन राशियों में हो तब अल्पायु योग बनता है...! 

यदि लग्नेश शुक्र शत्रु हो तब जातक अल्पायु होता है है....! 
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इसी प्रकार यदि शनि और चंद्रमा दोनों स्थित राशि में हो अथवा एक शब्द और दूसरा द्विस्वभाव राशि में हो तब व्यक्ति की मृत्यु बीच से 32 वर्ष की आयु में होती है....! 

जिसे हम मत भाइयों के नाम से जानते हैं....! 

आइए इनसे बचने के उपाय इनका परिहार परिहार के लिए ज्योतिषशास्त्र में जो उपाय बताए....!

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गए लेकिन जो हमारे लिए सरल हो सुगम हो उपाय को अपनाकर कर सकते हैं...! 

इस के लिए महामृत्युंजय का प्रयोग कि प्रत्येक माह की दोनों अष्टमी को शिवजी का दही से अभिषेक करना श्रेयस्कर बताया गया है....! 

कि इसके बार का वध आयोग की चर्चा करते हैं 125 वर्ष के लाभ ा 164 264 वर्ष तक की आयु को मजबूत कहा गया है....! 

कि बनता कहते हैं यदि लग्न में सूर्य कसम ग्रहों है है तब यह योग बनता है....! 
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अर्थात मिथुन व कन्या लग्न वालों की प्रायः मत का उपयोग होती है....! 

कि यदि लग्नेश तथा अष्टमेश में में से एक जल राशि मेष कर्क तुला मकर तथा विकराल स्थिति जैसे वृषभ सिंह वृश्चिक कुंभ किन राज्यों में हो तब जातक की मृत्यु योग होती है....! 

यदि शनि और चंद्रमा दोनों भी स्वभाव राशि में हो या एक स्तर तथा दूसरा स्थिर राशि में हो तब जातक पधारो योग पर होता है...! 

तथा यदि लग्नेश तथा अष्टमेश सामान्य के स्थानों में हो तब भी जातक मत भायऊ होता है....! 

कई विद्वानों का मत यह भी है कि मदारियों योग वाले यात्रियों की मृत्यु जन्म स्थान से दूर होती है है...! 

अब इसे भी बचने का उपाय मैं अभी से बचने के लिए....! 

इस जातक को चांदी का स्वस्तिक बनाकर के गले में धारण करना चाहिए प्रत्येक शनिवार को गरीबों को काले कंबल एवं चप्पल का दान देना चाहिए....!
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कि यह उपाय ऐसे जातक के लिए श्री अख्तर बताया गया अब पांचवें नंबर पर आते हैं....! 

दीर्घायु के लिए ए दिल भाइयों योग भारतीय ज्योतिष शास्त्र में तो वो फट से में 120 वर्ष की आयु तक होने वाली मृत्यु को दीर्घायु अथवा पूर्ण ऐसा कहा जाता है....! 

यदि जन्म लगने सूर्य मित्र हो तो व्यक्ति को पूर्ण आयु प्राप्त होती है....! 

लग्नेश और अष्टमेश शुक्र दोनों उच्च राशि में हो तो जातक दीर्घायु होता है......! 







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लग्नेश तथा अष्टमेश में से एक स्थिति तथा दूसरा द्विस्वभाव राशि में हो तो जातक दीर्घायु होता है यदि शुभ ग्रह तथा लगने केंद्र में हो तो जातक दीर्घायु होता है....!

लग्न में गुरु शुक्र के साथ हो की दृष्टि पड़ रही हो तो जातक पूर्ण करता है....! 

लगने पूर्ण बली हो तथा कोई भी ग्रह उससे उत्सव या मित्र राशि के आठवें अबे हो तब भी जातक की पूर्ण आयु होती है....! 

कि इस योग वाले जातक को जीवन आम तौर पर सुखमय व्यतीत करता है....! 

ऐसा देखा गया है लेकिन बीच - बीच में कई प्रकार के रोग परेशान करते रहते हैं....! 

इन लोगों को जीवन पर्यंत और विष्णु की उपासना आराधना करनी चाहिए....! 

कि अब छह नंबर का लो जिस भी आलू बताया गया है देखिए यहां पर विचार करने की बात है....! 

और पूर्ण आयु 120 वर्ष ने बताया गया है अब इसके ऊपर हम चलते हैं....!

मैं तो बस पिता है कि आयोग से जुड़ा नहीं है किंतु यह बताता है....! 

कि व्यक्ति का जीवन कैसा होगा अपने जीवन को किस प्रकार से का यदि की कुंडली में शुभ ग्रह बुध बृहस्पति शुक्र और चंद्रमा केंद्र और त्रिकोण में हो और सब पाप ग्रह 3 - 6 - 11 स्थानों तथा अष्टम भाव में शुभ ग्रह हों....! 

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शुभ राशि हो तो व्यक्ति के जीवन में दिव्य आलू का प्रादुर्भाव होता है....! 

तब ऐसा योग प्राप्त होता है ऐसा जातक जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं....! 

कि यज्ञ अनुष्ठान क्रियाओं के द्वारा हजारों वर्ष हमारे ऋषि - मुनि इसी के माध्यम से अपने जीवन को बढ़ाते गए तो कि आदित्य दुर्गम है.....! 

किंतु ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसे जातक का जन्म मृत्यु लोक में संभव नहीं है....! 

कि ऐसी आयुक्त अपॉइंट ऋषि - मुनि ही पा सकते हैं...! 

जैसे भारत द्वारा जिस अगस्त ऋषि इत्यादि ड्रॉप लोगों ने देवरहवा बाबा का नाम सुना होगा यह लोग दो है.....! 

तपोनिष्ठ थे तो ऐसे लोगों को इस तरह का योग को प्राप्त हुआ कि अब सातवें नंबर पर जो चर्चा की गई है....! 

तो उसके लिए बताया क्या है अमित आयोग अब यह अमितायु क्या है....! 

अमित आलू पाने वाले प्राणी भी दुर्लभ देवताओं व सचिव व को ऐसी आलू प्राप्त होती है....! 

इस के अनुसार यदि गुरु ग्राम पुनः अपने चतुर्थ वर्ग में होकर केंद्र में हो शुक्र प्रावधान अपने शरीर में हो एवं कर्क लग्न तब तक मानव देवता होता है....! 

जिसकी कोई सीमा नहीं होती है और यह इच्छा मृत्यु का वर पाने में सक्षम होता है कुछ विद्वानों का मत है लोगों ने पितामह मैं तो फेसबुक की तमाम आपको ऐसा योग प्राप्त हुआ था....! 

इच्छा मृत्यु का वरदान था उनको मृत्यु प्रत्येक व्यक्ति के लिए अटल सकती है....! 

फिर भी ग्रहों के योग का आलू के निर्धारण में बहुत बड़ी भूमिका होती है....! 

कुछ विशिष्ट उपाय मृत्यु को कुछ समय के लिए उन उपायों को करके हम डाल सकते हैं....!

लेकिन जिस तरह से जन्म निश्चित है उसी तरह से पीड़ित है तो आप लोगों के सामने हम भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत व जो मृत्यु के साथ प्रकार बताए गए....! 

जो उसका उपाय बताया गया आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया और इसी तरह से आप लोगों का का प्यार मैं कुत्ता वर्धन मिलता रहेगा है....! 

तो इसी तरह की चर्चा लेकर कि आप लोगों के सामने कि मैं ज्योतिषाचार्य पंडित पंडारामा राज्यगुरु प्रभु वोरीया आप लोगों का बहुत - बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूं है....! 

जो आप लोग ता वर्धन करते रहते हैं....! 

तो ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत जो हमारी इसकी मृत्यु द्वारा कि उनके अनुभव लिखे गए हैं....! 
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