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Sunday, December 7, 2025

क्योंकि ज्योतिषी ईश्वर नहीं है ?

क्योंकि ज्योतिषी ईश्वर नहीं है ?

यह एक बहुत ही गहरा और महत्वपूर्ण प्रश्न है।


ज्योतिषी को ईश्वर नहीं मानने के मुख्य कारण और विचार निम्नलिखित हैं:


🌟 ज्योतिषी और ईश्वर में मुख्य अंतर


*उत्पत्ति और शक्ति ( Origin and Power ):*

*ईश्वर ( God ):* संपूर्ण सृष्टि का *सृष्टिकर्ता, पालक और संहारक* माना जाता है। 

वह *सर्वशक्तिमान* ( Omnipotent ), *सर्वज्ञ* ( Omniscient ), और *सर्वव्यापी* ( Omnipresent ) है।

*ज्योतिषी ( Astrologer ):* वह एक *मनुष्य* है जो ज्ञान और गणना ( Astronomical and mathematical knowledge ) का उपयोग करके ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव की *व्याख्या* करता है। 


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उसकी शक्ति *सीमित* है और वह त्रुटि कर सकता है।

**भविष्य को बदलने की क्षमता ( Ability to Change the Future ):*

**ईश्वर:* भक्त मानते हैं कि ईश्वर की कृपा या इच्छा से *भाग्य बदला जा सकता है* या बड़े संकटों को टाला जा सकता है।

**ज्योतिषी:* वह केवल *भविष्यवाणी* ( Prediction ) करता है और संभावित खतरों के लिए *उपाय* ( Remedies ) बता सकता है, लेकिन उसके पास भाग्य को *सीधे बदलने की कोई शक्ति नहीं* है।

**ज्ञान की प्रकृति ( Nature of Knowledge ):*

**ईश्वर:* उसका ज्ञान *स्वयं-जनित* ( Self - born ) और *असीमित* है।

**ज्योतिषी:* उसका ज्ञान *अध्ययन, अनुभव, और ग्रंथों* ( Vedas, scriptures, astronomical tables ) पर आधारित है। 

यह ज्ञान मानवीय सीमाओं से बंधा हुआ है।
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# निष्कर्ष

ज्योतिष को एक *विज्ञान* या *कला* ( Science or Art of Interpretation ) माना जाता है, जो हमें *दैवीय योजना (Divine Plan)* को समझने में मदद करती है।

ज्योतिषी उस *डाकिया ( Postman )* के समान है जो आपको खबर देता है कि क्या होने की संभावना है, लेकिन वह उस *पत्र के लेखक ( Author of the Letter )* के समान नहीं है, जिसका अर्थ है वह ईश्वर नहीं है जिसने आपका भाग्य लिखा है।

संक्षेप में: *ज्योतिषी एक मार्गदर्शक है, सृष्टिकर्ता नहीं।*

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क्या आप जानना चाहेंगे कि ज्योतिष की सीमाएँ क्या हैं?


पुरुष की कुंडली में राहु नौवें घर में बैठा होने से शादी पत्नी पर क्या प्रभाव पड़ेगा , दूसरी शादी होगी क्या ?

नमस्कार! ज्योतिष के अनुसार, *पुरुष की कुंडली में नवम भाव ( 9th house ) में राहु* का बैठना वैवाहिक जीवन और पत्नी पर मिश्रित प्रभाव डाल सकता है।

यह एक जटिल स्थिति है, और इसका अंतिम परिणाम कुंडली के *अन्य ग्रहों, राशियों, और दशाओं* पर बहुत अधिक निर्भर करता है।

# पत्नी पर प्रभाव ( Effects on Wife )

नवम भाव धर्म, भाग्य, गुरु और लंबी यात्राओं का होता है। 

राहु यहाँ बैठकर इन क्षेत्रों से संबंधित प्रभाव विवाह में भी लाता है:

**असामान्य या आधुनिक सोच:* पत्नी *आधुनिक, स्वतंत्र विचारों वाली, या पारंपरिक मान्यताओं से अलग* सोच रखने वाली हो सकती है। 

वह अपने धर्म या संस्कृति से अलग पृष्ठभूमि की भी हो सकती है, या वह सामान्य धार्मिक रीति - रिवाजों से हटकर चलती हो।

**भाग्य में परिवर्तन:* विवाह के बाद जातक ( पति ) के *भाग्य में अचानक और महत्वपूर्ण बदलाव* आ सकते हैं। 

ये बदलाव विदेश यात्रा, करियर में वृद्धि, या उच्च शिक्षा से जुड़े हो सकते हैं, जिसमें पत्नी का अप्रत्यक्ष योगदान हो सकता है।

**यात्रा या विदेश से संबंध:* यह योग *विदेशी या दूर के स्थान* की लड़की से विवाह का संकेत दे सकता है, या विवाह के बाद लंबी यात्राएँ / विदेश यात्राएँ हो सकती हैं।

**वैवाहिक जीवन में चुनौतियाँ:* राहु की उपस्थिति वैवाहिक जीवन में *असंतोष, चुनौतियाँ या कुछ अनिश्चितता* पैदा कर सकती है, खासकर वैचारिक मतभेद या धार्मिक / सांस्कृतिक भिन्नता के कारण। 
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कुछ ज्योतिषीय मतों के अनुसार, यह वैवाहिक जीवन के लिए अनुकूल नहीं होता है।

# दूसरी शादी के योग ( Possibility of Second Marriage )

**राहु का नवम भाव में होना सीधे तौर पर दूसरी शादी का कारक नहीं है।* 

दूसरी शादी के योग मुख्य रूप से *सप्तम भाव ( 7th House ) और इसके स्वामी* की स्थिति, *शुक्र ग्रह, और उन पर **पाप ग्रहों ( जैसे राहु, केतु, शनि ) के अशुभ प्रभाव* से देखे जाते हैं।

**यदि नवम भाव का राहु सप्तम भाव या उसके स्वामी को पीड़ित करता है, या सप्तम भाव में कोई और गंभीर दोष हो, **तो वैवाहिक जीवन में बड़ी परेशानियाँ ( जैसे अलगाव, तलाक ) आ सकती हैं, जो **संभावित रूप से* दूसरी शादी की ओर ले जा सकती हैं।

**निष्कर्ष:* केवल नौवें घर के राहु के आधार पर *दूसरी शादी की भविष्यवाणी नहीं* की जा सकती है। 

इसके लिए *पूरी कुंडली का गहन विश्लेषण* आवश्यक है।

#सारांश

राहु एक मायावी ग्रह है जो जिस भाव में बैठता है, वहाँ *असामान्य, अप्रत्याशित और भ्रम* की स्थिति पैदा करता है। नवम भाव में राहु जातक को धर्म, भाग्य और मान्यताओं के प्रति लीक से हटकर दृष्टिकोण देता है, जिसका असर पत्नी और वैवाहिक जीवन पर भी पड़ता है।

*सटीक जानकारी* के लिए आपको एक योग्य ज्योतिषी से *पूरी जन्म कुंडली* का विश्लेषण करवाना चाहिए।

क्या आप अपनी कुंडली में राहु के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ *सामान्य ज्योतिषीय उपाय* जानना चाहेंगे?

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मंगल महादशा सबसे ज्यादा किस ग्रह को प्रभावित करती है ?


यह एक जटिल प्रश्न है, क्योंकि मंगल महादशा के दौरान सभी नौ ग्रहों की अंतर्दशा आती है, और हर अंतर्दशा का अपना विशिष्ट प्रभाव होता है।

हालांकि, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, मंगल महादशा में राहु ( Rahu ) और शनि ( Saturn ) की अंतर्दशा को अक्सर सबसे अधिक तीव्र और महत्वपूर्ण माना जाता है:

1. राहु ( Rahu )

सबसे उत्तेजक / तीव्र प्रभाव: राहु की अंतर्दशा को मंगल महादशा में सबसे उत्तेजक (Volatile ) और अप्रत्याशित माना जाता है।

कारण: मंगल की तीव्र, आक्रामक ऊर्जा जब राहु ( जो भ्रम, अचानकता और विस्तार का कारक है ) से मिलती है, तो यह 'अग्नि - भ्रम' योग बना सकती है, जिससे व्यक्ति में महत्वाकांक्षा, भ्रम, जल्दबाजी और दुर्घटनाओं / विवादों की आशंका बढ़ जाती है।

2. शनि ( Saturn )

सबसे बड़ा परिवर्तन और चुनौती: शनि की अंतर्दशा लगभग 13 महीने की होती है। 

शनि अनुशासन, कर्म और विलम्ब का ग्रह है।

कारण: मंगल की तेज और उग्र ऊर्जा को शनि नियंत्रित करने की कोशिश करता है, जिससे 'मंगल - शनि योग' बनता है। 

यह समय कठोर सबक, बाधाएं, विलंब, और मानसिक दबाव दे सकता है, लेकिन यदि व्यक्ति अनुशासित रहे तो अंततः लाभदायक होता है।
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निष्कर्ष :

यदि आप सबसे अधिक उत्तेजक और अप्रत्याशित प्रभाव की बात कर रहे हैं, तो वह राहु की अंतर्दशा होती है।

यदि आप सबसे अधिक संघर्ष, धैर्य और अनुशासन की परीक्षा वाले प्रभाव की बात कर रहे हैं, तो वह शनि की अंतर्दशा होती है।

किसी भी ग्रह का प्रभाव अंततः आपकी जन्म कुंडली में मंगल और अन्य ग्रहों की स्थिति, युति ( Conjunction ) और दृष्टि पर निर्भर करता है।

क्या आप मंगल महादशा में किसी विशिष्ट अंतर्दशा ( जैसे राहु या शनि की ) के बारे में अधिक जानना चाहेंगे?

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अपनी राशि ( Rashi ) जानने के मुख्य रूप से दो तरीके हैं:


1. जन्मतिथि के आधार पर ( सूर्य राशि - Sun Sign )

पश्चिमी ज्योतिष में इसे सूर्य राशि (Sun Sign) कहते हैं, जो आपकी जन्म की तारीख ( महीने ) से तय होती है। यह सबसे आसान तरीका है:

राशि ( Zodiac Sign ) तारीख सीमा ( Date Range )

मेष ( Aries ) 21 मार्च से 19 अप्रैल

वृषभ ( Taurus ) 20 अप्रैल से 20 मई

मिथुन ( Gemini ) 21 मई से 20 जून

कर्क ( Cancer ) 21 जून से 22 जुलाई

सिंह ( Leo ) 23 जुलाई से 22 अगस्त

कन्या ( Virgo ) 23 अगस्त से 22 सितंबर

तुला ( Libra ) 23 सितंबर से 23 अक्टूबर

वृश्चिक ( Scorpio ) 24 अक्टूबर से 22 नवंबर

धनु ( Sagittarius ) 23 नवंबर से 21 दिसंबर

मकर ( Capricorn ) 22 दिसंबर से 19 जनवरी

कुंभ ( Aquarius ) 20 जनवरी से 18 फरवरी

मीन ( Pisces ) 19 फरवरी से 20 मार्च
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2. जन्म विवरण के आधार पर ( चंद्र राशि - Moon Sign )

भारतीय या वैदिक ज्योतिष में, चंद्र राशि ( Moon Sign ) को अधिक महत्व दिया जाता है। 

यह आपकी कुंडली की मुख्य राशि होती है और राशिफल इसी के आधार पर देखा जाता है।

चंद्र राशि पता करने के लिए आपको निम्नलिखित की आवश्यकता होगी:

जन्म की तारीख ( Date of Birth )

जन्म का समय ( Time of Birth )

जन्म का स्थान ( Place of Birth )

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में स्थित होता है, वही आपकी चंद्र राशि कहलाती है। 

इसे जानने के लिए:

आप अपनी जन्म कुंडली देख सकते हैं।

आप किसी ज्योतिषी से सलाह ले सकते हैं।

आप ऑनलाइन 'राशि कैलकुलेटर' का उपयोग कर सकते हैं, जहाँ आपको अपनी जन्म की जानकारी भरनी होगी।

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👉 नाम के पहले अक्षर से कुछ लोग अपने नाम के पहले अक्षर के आधार पर भी अपनी राशि का अनुमान लगाते हैं, क्योंकि वैदिक ज्योतिष में नामकरण अक्सर चंद्र राशि के पहले अक्षर से ही किया जाता है। 

हालाँकि, यह हमेशा सटीक नहीं होता।

अगर आप अपनी जन्म की तारीख बता दें, तो मैं आपकी सूर्य राशि ( Sun Sign ) पता करने में मदद कर सकता हूँ।
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