google-site-verification: google5cf1125c7e3f924f.html pina_AIA2RFAWACV3EAAAGAAFWDICOQVKPGQBAAAAALGD7ZSIHZR3SASLLWPCF6DKBWYFXGDEB37S2TICKKG6OVVIF3AHPRY7Q5IA { "event_id": "eventId0001" } { "event_id": "eventId0001" } https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec Astrologer: जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है ? :

Wednesday, January 29, 2025

जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है ? :

जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है...?

जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है...?

ग्रहों की दशा से भी बड़ी चीज क्या है ?

कर्म, धर्म, पुरुषार्थ और मनुष्य का आचरण — एक ज्योतिषीय कथा

एक समय की बात है। 

एक नगर में एक वृद्ध विद्वान ज्योतिषाचार्य रहते थे। 

उन्होंने जीवन का अधिकांश समय वैदिक ज्योतिष, खगोलविद्या, हस्तरेखा, वास्तु और धर्मशास्त्र के अध्ययन में बिताया था। 

उनके पास दूर - दूर से लोग अपनी जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के विषय में फल जानने आते थे।

एक दिन एक बहुत धनवान व्यक्ति उनके पास आया।

प्रयागराज में महाकुंभ का शुभारंभ 13 जनवरी से हो चुका है, और यह 26 फरवरी 2025 तक चलेगा।

प्रयागराज में महाकुंभ का शुभारंभ 13 जनवरी से हो चुका है, और यह 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। 

संगम नगरी में लगे इसे महाकुंभ में देश दुनिया से लाखों की संख्या में श्रद्धालु, साधु - संत और पर्यटक पवित्र डुबकी लगाने आ रहे हैं। 

मान्यता है कि महाकुंभ के इस भव्य आयोजन में डुबकी लगाने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और शांति का आगमन भी होता है। 

इसी बीच 25 जनवरी 2025 यानी की आज महाकुंभ नगर में अमर उजाला और उससे जुड़े उपक्रम जीवांजलि और माय ज्योतिष की ओर से 'अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है जहां कई ज्योतिषाचार्य शामिल होने के लिए आएं है, यहां सभी ज्योतिष शास्त्र के अद्भुत विज्ञान और इसकी गहराई पर अपनी राय रख रहे हैं, 








FILLISKA® LED Mirror/Picture/Vanity Light with Warmwhite Light and Luxurious Gold Finish (Luxurious Gold-8672)(2 Year Warranty)

https://amzn.to/3VXQX50





{ About this item

  • 3 in 1 Colour Changing Function
  • Asthetic Design That Suits All Type of Interiors
  • Energy Efficient: Utilising LED technology, this mirror light is highly energy efficient, 
  • consuming less power while providing ample illumination.
  • Versatile Design: With a sleek and modern design, this mirror light can be mounted on any wall 
  • or placed on a vanity or dresser.
  • Easy Installation: Simple to install, this mirror light comes with all the necessary hardware and instructions for a hassle-free setup. }




उसने अपनी जन्मकुंडली सामने रखते हुए कहा—

“गुरुदेव! मेरी कुंडली में ग्रहों की दशा अच्छी नहीं चल रही। 

शनि की दशा है, राहु का प्रभाव है, गोचर भी अनुकूल नहीं है। 

मुझे व्यापार में नुकसान हो रहा है, परिवार में अशांति है और मन में भय बना रहता है। 

आप ऐसा कोई उपाय बताइए जिससे मेरी सारी परेशानियाँ समाप्त हो जाएँ।”

इस दौरान ज्योतिषाचार्य प्रभु ने अपनी बात रखते हुए लाल किताब के रहस्यमय संसार के बारे में जिक्र किया....!

लाल किताब क्या है....?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लाल किताब ज्योतिष की प्रमुख शाखा है, जो भारतीय ज्योतिष पर आधारित है। 

माना जाता है कि इस लाल किताब में कुंडली दोष और जीवन की समस्याओं को सुलझाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। 

ज्योतिषाचार्य ने कुंडली देखी और कुछ देर मौन रहे।

फिर बोले—

“तुम्हें ग्रहों का फल जानने से पहले अपने कर्मों का फल देखना चाहिए।”

व्यक्ति थोड़ा आश्चर्यचकित हुआ।

“गुरुदेव! मैं तो ग्रहों के कारण परेशान हूँ। इसमें मेरे कर्म कहाँ से आ गए?”

ज्योतिषाचार्य मुस्कुराए और बोले—

“यही वह प्रश्न है जिसे समझे बिना ज्योतिष अधूरा रह जाता है।”
+++ +++

फॉर्मूला आधारित है ज्योतिष :

लाल किताब विशेषज्ञ पंडारामा ज्योतिषाचार्य प्रभु राज्यगुरु ने कहा कि इस समय आकाश में ग्रहों की स्थिति इस प्रकार है कि महाकुंभ की धरती पर जो पानी है, वह अमृततुल्य है। 


यहां त्रिवेणी है। 

जब इंसान ग्रहों की अलग - अलग स्थिति में जन्म लेता है, तो इससे उसकी सोच दूसरों से अलग हो जाती है। 

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए पंडारामा ज्योतिषाचार्य प्रभु राज्यगुरु ने कहा कि आजकल ज्योतिष विज्ञान में कई लोग यह गलती कर देते हैं कि वे एक घर के अंदर बैठे ग्रह के फल को पढ़ देते हैं। 

ज्योतिष असल में एक विज्ञान है एक गणित है जो भी इसके फॉर्मूले समझ जाएगा, वह ज्योतिष विज्ञान समझ पाएगा।

उन्होंने कहा—

“जन्मकुंडली में ग्रह समय और कर्मफल के संकेत दे सकते हैं। 

प्रश्नकुंडली वर्तमान परिस्थिति का संकेत दे सकती है। 

गोचर यह बता सकता है कि कौन - सा समय किस प्रकार की परीक्षा या अवसर लेकर आया है। 

दशा और अंतरदशा घटनाओं के सक्रिय होने का समय बता सकती हैं। 

लेकिन मनुष्य केवल ग्रहों का खिलौना नहीं है।”

“सबसे महत्वपूर्ण बात है— 

वह स्वयं क्या सोचता है, क्या बोलता है और क्या करता है।”
+++ +++

संस्कार की परिभाषा का किया जिक्र :

ऋषि - मुनियों ने ग्रहों की दिशा से अलग हमें एक महत्वपूर्ण चीज बताई, जिसका नाम है संस्कार।

पंडारामा ज्योतिषाचार्य प्रभु राज्यगुरु ने कहा कि जब तक हम किसी चीज की गहराई में नहीं उतर जाते है तब तक उसके बारे में पूरा ज्ञान नहीं मिल पाता। 

आजकल लोग व्यसनों से जूझ रहे हैं और बच्चे बिगड़ रहे हैं। 

ऐसा ना हो इस लिए ही संस्कार बनाए गए थे।

जिनके ग्रह खराब हैं, उनके आचार - विचार को भी नियंत्रण में रखा जाए, इसी के लिए संस्कार बने थे। 

दुनिया में बड़ी सोच वाले लोग सिर्फ 20 फीसदी है, उनमें भी श्रेष्ठ विचार रखने वालों की संख्या एक-दो फीसदी ही है। 

दुनिया में आज नासमझों की भीड़ बहुत ज्यादा है।
+++ +++
नाराज हो जाते हैं पितर मौनी अमावस्‍या के दिन भूलकर भी न करें ये काम, लगता है पाप....!

माघ मास की अमावस्‍या को मौनी अमावस्‍या कहते हैं। 

इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने और दान पुण्‍य के कार्य करने का विशेष महत्‍व होता है। 

इस साल मौनी अमावस्‍या पर श्रद्धालुओं को कुंभ स्‍नान का परम पुण्‍य प्राप्‍त होगा। 

मौनी अमावस्‍या पर मौन व्रत रखने के साथ ही कुछ खास नियमों का पालन करना भी अनिवार्य माना जाता है। 

आइए आपको बताते हैं कि मौनी अमावस्‍या पर कौन सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
+++ +++
मौनी अमावस्‍या है और इस बार मौनी अमावस्‍या पर महाकुंभ का अद्भुत संयोग बना है। 

इस दिन गंगा स्‍नान और दान पुण्‍य जैसे धार्मिक कार्य करने का विशेष महत्‍व होता है। 

मौनी अमावस्‍या पर व्रत करने और पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्‍मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से आपको जीवन में तरक्‍की प्राप्‍त होती है।


जानिए ग्रहों की दशा से भी परे सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है


इस बार तो लोगों को मौनी अमावस्‍या पर कुंभ स्‍नान करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हो रहा है। 

मौनी अमावस्‍या पर मौन व्रत रखने का महत्‍व शास्‍त्रों में बहुत खास माना गया है। 

साथ ही इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन भी किया जाता है। 

तो आइए आपको बताते हैं कि मौनी अमावस्‍या के नियम और किन बातों का रखें विशेष ध्‍यान।

🌸 पहला रहस्य — ग्रह संकेत देते हैं, कर्म जीवन बनाता है :

ज्योतिषाचार्य ने एक दीपक जलाया और बोले—

“देखो, यह दीपक प्रकाश देता है। 

लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी आँखें बंद कर ले तो उसे प्रकाश दिखाई नहीं देगा। 

इसी प्रकार शुभ ग्रहयोग जीवन में अवसर दे सकता है, लेकिन यदि मनुष्य आलस्य, अहंकार, असत्य, लोभ और गलत निर्णयों में पड़ा रहे तो वह अवसर भी व्यर्थ हो सकता है।”

“इसी लिए केवल यह पूछना कि ‘मेरी दशा कब बदलेगी?’ 

पर्याप्त नहीं है।”

“सही प्रश्न यह होना चाहिए—

मैं इस समय क्या कर्म कर रहा हूँ?


मेरे निर्णय धर्मसम्मत हैं या नहीं?

मैं अपने वर्तमान अवसर का उपयोग कैसे कर रहा हूँ?”

पुराणीय परंपरा में कर्म और आचरण का महत्व बार - बार सामने आता है। 

भविष्य पुराण की उपलब्ध संस्कृत सामग्री में मन, वाणी और शरीर से किए जाने वाले कर्मों का भी विवेचन मिलता है।

⭐ दूसरा रहस्य — दशा से ऊपर पुरुषार्थ :

व्यक्ति ने पूछा—

“तो क्या ग्रहों की दशा का कोई महत्व नहीं?”

आचार्य बोले—

“नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है।”


गोचर का महत्व है। 

जन्मकुंडली का महत्व है। 

प्रश्नकुंडली का महत्व है। 

लेकिन इन्हें जीवन का अंतिम और एकमात्र निर्णयकर्ता मान लेना उचित नहीं।”

“ज्योतिष दिशा दिखाने वाली विद्या है। 

वह यह समझने में सहायता करती है कि कौन - सा समय संघर्ष का हो सकता है, कौन - सा अवसर का, कौन - सा सावधानी का और कौन - सा उन्नति का।”

“परंतु अवसर मिलने के बाद चलना तो तुम्हें ही पड़ेगा।”

+++ +++

मौनी अमावस्‍या पर क्‍या करें :

मौनी अमावस्‍या पर बिना अन्‍न जल ग्रहण किए अनाज का दान करें।

मौनी अमावस्‍या पर ब्राह्मणों को भोजन करवाने का खास महत्‍व होता है। 

अगर आप ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कम से कम एक व्‍यक्ति के खाने की मात्रा के अनुसार काली उड़द और चावल दान करें।

“यही पुरुषार्थ है।”

फिर आचार्य ने कहा—

“मान लो किसी व्यक्ति की कुंडली में धन प्राप्ति के योग हैं। 

लेकिन वह काम ही नहीं करता, व्यापार में अनुशासन नहीं रखता, गलत लोगों पर विश्वास करता है और धन का दुरुपयोग करता है। 

तो केवल कुंडली का शुभ योग उसके जीवन को अपने आप समृद्ध नहीं बना देगा।”

“दूसरी ओर किसी व्यक्ति की कुंडली में संघर्ष के संकेत हों, फिर भी वह परिश्रम करे, संयम रखे, सही निर्णय ले, धर्मपूर्वक कार्य करे और समय का सदुपयोग करे—

तो वह कठिन समय को भी पार करने की क्षमता विकसित कर सकता है।”

+++ +++
साथ ही तिल और गरम वस्‍त्रों का भी दान करें। 

साथ ही उसमें कुछ सामर्थ्य के अनुसार धन राशि भी दान करें। 

ऐसा करने से आपकी ग्रह दशा में सुधार होता है और आपको पितरों की कृपा प्राप्‍त होती है।

मौनी अमावस्या पर गाय, कुत्ते और कौवे जैसे जानवरों को खाना खिलाने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। 

इस दिन ऐसा करने से पितृ खुश होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। 

मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

मौनी अमावस्‍या पर घर में सत्‍य नारायण भगवान की कथा करवाने से घर में नकारात्‍मक शक्तियों का अंत होता है और आपके परिवार में सुख शांति बढ़ती है।


+++ +++

🙏 तीसरा रहस्य — धर्म :

आचार्य ने आगे कहा—

“कर्म से भी पहले एक प्रश्न है—कर्म कैसा है?”

“हर कर्म अच्छा नहीं होता।”

“धन कमाना कर्म है, लेकिन अधर्मपूर्वक धन कमाना अलग बात है।”

“बोलना कर्म है, लेकिन झूठ और अपमानजनक वाणी अलग बात है।”

“व्यापार करना कर्म है, लेकिन धोखा देना अलग बात है।”

“दान करना कर्म है, लेकिन दिखावे के लिए दान करना अलग बात है।”

“इसी लिए धर्म कर्म को दिशा देता है।”

भविष्य पुराण की उपलब्ध सामग्री में भी ज्ञान के साथ कर्मयोग के आचरण की बात आती है—

अर्थात कर्म को सही समझ और धर्मबुद्धि के साथ करना महत्वपूर्ण माना गया है।

आचार्य बोले—

“यदि ग्रह शुभ हैं लेकिन आचरण गलत है, तो मनुष्य अपने ही कर्मों से अपने लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकता है।”

“और यदि समय कठिन है लेकिन आचरण श्रेष्ठ है, तो मनुष्य उस कठिन समय से सीख लेकर आगे बढ़ सकता है।” 

मौनी अमावस्‍या पर सुबह के वक्‍त पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और शाम में सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं। 

साथ ही इस‍ दिन नदी में दीपक प्रवाहित करना भी शुभ माना जाता है। 

इसके साथ ही घर में लगी पूर्वजों की तस्‍वीर के पास भी दीपक जलाना चाहिए!

अमावस्‍या तिथि पितरों को समर्पित होती है इस लिए दक्षिण दिशा में शाम के वक्‍त सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं और साथ ही मुख्‍य द्वार पर दोनों तरफ 2 दीपक भी जलाकर रखें।

+++ +++

🌺 चौथा रहस्य — मन :


“अब सबसे महत्वपूर्ण स्थान आता है—

मन का।”

आचार्य बोले—

“मनुष्य पहले मन में निर्णय करता है, फिर वाणी में उसे व्यक्त करता है और अंततः शरीर से उसे कर्म में बदलता है।”

“इस लिए केवल बाहर का उपाय पर्याप्त नहीं है।”

“यदि व्यक्ति प्रतिदिन पूजा करे लेकिन मन में किसी के प्रति घृणा, छल, लोभ और अन्याय रखे, तो उसे अपने आचरण की भी परीक्षा करनी चाहिए।”

“मंत्र के साथ मन चाहिए।”

“पूजा के साथ श्रद्धा चाहिए।”

“दान के साथ करुणा चाहिए।”

“व्रत के साथ संयम चाहिए।”

“ज्योतिषीय उपाय के साथ सही कर्म चाहिए।”

यही कारण है कि केवल ग्रह को दोष देने के बजाय अपने व्यवहार को देखना आवश्यक है।

🌿 पाँचवाँ रहस्य — उपाय का वास्तविक अर्थ :

व्यक्ति ने पूछा—

“गुरुदेव, फिर ग्रहों के उपाय क्यों बताए जाते हैं?”

आचार्य ने उत्तर दिया—

“उपाय का अर्थ केवल किसी वस्तु को खरीदकर पूजा में रख देना नहीं है।”

“उपाय का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को अनुशासन, श्रद्धा, सेवा, संयम, सदाचार और सकारात्मक कर्म की दिशा में ले जाना भी होना चाहिए।”

“यदि शनि से संबंधित कठिन समय है तो केवल तेल चढ़ाना ही सब कुछ नहीं। 

अपने कर्मों में ईमानदारी, श्रम, अनुशासन और जरूरतमंदों की सेवा को भी स्थान देना चाहिए।”

“यदि गुरु कमजोर माना जा रहा है तो केवल पूजा नहीं—

ज्ञान, सदाचार, गुरुजनों का सम्मान और धर्म - अध्ययन भी जीवन में आना चाहिए।”

“यदि सूर्य से संबंधित समस्या बताई जाती है तो केवल अर्घ्य नहीं—

अपने जीवन में सत्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और पिता - सदृश वरिष्ठों के सम्मान को भी स्थान देना चाहिए।”

“यदि चंद्रमा से संबंधित मानसिक अशांति दिखाई जाती है तो केवल मंत्र नहीं—

मन को शांत करने वाला जीवन, संयमित दिनचर्या और सद्भाव भी आवश्यक है।”

इस प्रकार उपाय ग्रह को “खुश” करने से अधिक स्वयं को सुधारने की साधना बन जाता है।

+++ +++

मौनी अमावस्‍या पर क्‍या न करें : 

मौनी अमावस्या पर लोग अपने पितरों को याद करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। 

इस दिन कुछ तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। 

ऐसा माना जाता है कि इससे पितरों को कष्ट होता है।

पितरों की आत्मा की शांति के लिए उन्हें याद करते समय कुछ भी नकारात्मक नहीं बोलना चाहिए।

कुत्ता, गाय और कौवे जैसे जानवरों को भी परेशान नहीं करना चाहिए।

पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य करना बहुत महत्वपूर्ण है। 

ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

🔱 छठा रहस्य — प्रश्नकुंडली क्या बताती है ?

आचार्य ने कहा—

“प्रश्नकुंडली भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

जब व्यक्ति किसी विशेष प्रश्न को लेकर आता है, तब प्रश्न के समय की ग्रहस्थिति से उस विषय की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया जाता है।”

“लेकिन प्रश्नकुंडली भी यह नहीं कहती कि मनुष्य को अपने कर्म छोड़ देने चाहिए।”

“वह परिस्थिति को समझने का एक साधन है।”

“निर्णय में विवेक, अनुभव और धर्मबुद्धि की आवश्यकता फिर भी रहती है।”

🌞 सातवाँ रहस्य — गोचर क्या करता है ?

“गोचर का अर्थ है वर्तमान आकाशीय ग्रहस्थिति।”

“गोचर हमें यह समझने में सहायता कर सकता है कि किसी जन्मकुंडली के संदर्भ में कौन-सी ऊर्जा या परिस्थिति सक्रिय हो सकती है।”

“लेकिन गोचर को भय का कारण नहीं बनाना चाहिए।”

“शनि का गोचर आया तो जीवन समाप्त नहीं हो गया।”

“राहु आया तो सब कुछ नष्ट नहीं हो गया।”

“गुरु का गोचर आया तो बिना कर्म किए धन की वर्षा नहीं हो जाएगी।”

“ग्रह समय की भाषा बोलते हैं; मनुष्य को कर्म की भाषा में उत्तर देना होता है।”


+++ +++

🌸 आठवाँ रहस्य — भाग्य और कर्म :

अब उस व्यक्ति का सबसे बड़ा प्रश्न आया—

“गुरुदेव! यदि सब कुछ कर्म पर निर्भर है तो भाग्य क्या है?”

आचार्य ने कहा—

“भाग्य और कर्म को शत्रु मत समझो।”

“मनुष्य के जीवन में पूर्वकर्मों से संबंधित फल की परंपरा को भारतीय दर्शन में महत्व दिया गया है। परंतु वर्तमान जीवन में किए जाने वाले कर्म भी महत्वपूर्ण हैं।”

“जन्मकुंडली को तुम एक मानचित्र की तरह समझो।”

“मानचित्र रास्ते की जानकारी देता है। लेकिन चलना तुम्हें पड़ता है।”

“कभी रास्ते में पहाड़ आता है। कभी नदी। कभी सरल मार्ग। कभी कठिन चढ़ाई।”

“लेकिन यात्री की बुद्धि, तैयारी, धैर्य और पुरुषार्थ यह निर्धारित करते हैं कि वह उस यात्रा का सामना कैसे करता है।”

💯 अंतिम शिक्षा — ग्रहों से पहले स्वयं को देखो :

व्यक्ति अब शांत हो गया।

उसने पूछा—

“गुरुदेव! तो मेरी कुंडली का सबसे बड़ा उपाय क्या है?”

आचार्य ने कुंडली बंद कर दी।

और बोले—

“आज से सात बातें याद रखना।”

पहली — सत्य।

झूठ से बचो और वाणी को शुद्ध रखो।

दूसरी — धर्म।

जिस कर्म से स्वयं और दूसरे का अनावश्यक अहित हो, उससे बचो।

तीसरी — पुरुषार्थ।

सिर्फ शुभ समय की प्रतीक्षा मत करो; उपलब्ध समय का उपयोग करो।

चौथी — संयम।

क्रोध, लोभ, अहंकार और अत्यधिक इच्छा पर नियंत्रण रखो।

पाँचवीं — सेवा।

अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करो।

छठी — साधना।

ईश्वर-स्मरण, मंत्र, पूजा, स्वाध्याय और ध्यान को जीवन में स्थान दो।

सातवीं — विवेक।

ज्योतिषीय संकेत को समझो, लेकिन हर निर्णय में बुद्धि, परिस्थिति और वास्तविकता को भी देखो।

फिर आचार्य ने कहा—

“याद रखो—”

“ग्रहों की दशा समय बताती है,
गोचर परिस्थिति का संकेत देता है,
जन्मकुंडली संभावनाएँ दिखाती है,
प्रश्नकुंडली प्रश्न की दिशा बताती है,
लेकिन कर्म, धर्म, पुरुषार्थ और आचरण

मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

व्यक्ति ने सिर झुका दिया।

उसने कहा—

“गुरुदेव, आज तक मैं ग्रहों को बदलने के उपाय खोज रहा था। 

आज समझ आया कि मुझे अपने कर्मों को बदलने का उपाय भी करना चाहिए।”

आचार्य मुस्कुराए।

“यही ज्योतिष की सबसे बड़ी शिक्षा है।”

“ज्योतिष का उद्देश्य मनुष्य को भयभीत करना नहीं, बल्कि उसे समय की प्रकृति समझाकर सही कर्म की ओर प्रेरित करना है।”

“यदि कुंडली में कठिन समय दिखे तो सावधान हो जाओ।”

“यदि शुभ समय दिखे तो आलसी मत बनो।”

“यदि बाधा दिखे तो धैर्य रखो।”

“यदि अवसर दिखे तो पुरुषार्थ करो।”

“यदि उपाय बताया जाए तो श्रद्धा के साथ उसके पीछे के सदाचार को भी समझो।”

“और सबसे बढ़कर — अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करो।”

भारतीय धार्मिक परंपरा में कर्म, धर्म, अनुष्ठान और आचरण का यह संबंध अनेक ग्रंथों में अलग - अलग रूपों में मिलता है। 

भविष्य पुराण की सामग्री में भी कर्म के साथ ज्ञान और आचरण को जोड़ा गया है तथा मन, वाणी और शरीर से किए कर्मों का विवेचन मिलता है।

साफ - सफ़ाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

घर के आस - पास गंदगी नहीं फैलानी चाहिए। 

इस दिन स्वच्छता का महत्व है। 

यह माना जाता है कि स्वच्छ वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।

इस लिए जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के ग्रहों की दशा को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन दशा से परे सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है—

मनुष्य अपने वर्तमान जीवन में क्या कर रहा है?

कर्म + धर्म + पुरुषार्थ + सदाचार + संयम + साधना + विवेक = जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग।

ग्रहों को दोष देने से पहले अपने कर्मों को देखिए।

दशा बदलने की प्रतीक्षा करने से पहले अपनी दिशा बदलिए।

उपाय करने से पहले अपने आचरण को देखिए।

और भाग्य को कोसने से पहले पुरुषार्थ कीजिए।

क्योंकि—

🌸 “समय संकेत दे सकता है, पर सही दिशा में चलने का पुरुषार्थ मनुष्य को स्वयं करना पड़ता है।” 🌸

🙏🏻 ॐ तत्सत् 🙏🏻 ज्योतिषाचार्य पंडारामा प्रभु राज्यगुरु ऑन लाइन/ ऑफ लाइन ज्योतिषी 
+++ +++
+++ +++

No comments:

Post a Comment

शुक्र प्रदोष का प्रभाव बारह राशियों के फल, नियम :

शुक्र प्रदोष का प्रभाव बारह राशियों के फल, नियम : शुक्र प्रदोष का प्रभाव बारह राशियों के फल, नियम : जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर एवं बारह ...