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Sunday, August 9, 2026

ब्रह्मचार्य ओर जन्मकंुडली ?

ब्रह्मचार्य ओर जन्मकंुडली ?....

ब्रह्मचार्य का यौगिक अर्थ है ब्रह्म की प्राप्तिके लियेवेदोंका अध्ययन करना ।

प्राचीन काल मेछात्रगण ब्रह्मकी प्राप्ति के लियेगुरु के पास रहकर सावधानी के साथ वीर्य की रक्षा

करतेहुवेवेदाध्ययन करतेथे।

इस लियेधीरे- धीरे' ब्रह्मचार्य ' शब्द वीर्यरक्षाक र्य े अर्थमर्थ ेरूढ़ हो गया ।

आज हमेइस वीर्यरक्षाक र्य े सबंध मेंकुछ विचार करना है।

वीर्यरक्षा र्य ही जीवन हैऔर वीर्य का नाश ही मत्यृ ुहै।

वीर्यरक्षाक र्य े प्रभाव सेही प्राचीनकाल के लोग दीर्धजीवी र्ध , निरोगी , हष्ट - पष्टु , बलवान, बद्ुधिमान,

तजस्वी े , शरवीर ू , ओर दृढ़संकल्प होतेथे।

वीर्यरक्षाक र्य े कारण ही वेशीत , आतप, वर्षाआदिको सहकर नाना प्रकार के तप करनेमेंसमर्थ होतेथे

ब्रह्मचार्य के बल सेही प्राणवायुको रोककर शरीर और मन की शद्ुधि के द्वारा नाना प्रकार के योग

साधनों मेंसफलता प्राप्त करतेथे।

ब्रह्मचार्य के बल सेही नाना प्रकार की विधाओंशिखकर अपनेज्ञानंको अपना ओर जगत का

लौकिक एवंपारमार्थिकर्थि दोनो प्रकार का कल्याण कर लेतेहै।

::: दाखला तरीके :::

स्वामी विवेकानंद

जन्म तारीख : 12/01/1863

जन्म समय : 06/30 सबहु

जन्म स्थान कोलकत्ता

लग्न : 10

सर्यू र्य

; 09

चन्द्र : 06

मंगल : 01

बधु : 10

गुरु : 07

शक्रु :10


शनि 06

राहु:08

केतु:02

इस जन्मकंुडली के आधारित स्वामी विवेकानंद पर्णू र्णतरह सेब्रह्मचार्य जीवन गर्म उग्र स्वभाव के

साथ विदेशों की यात्रा करनेके बाद भी जन्म भमिू जन्म देश के देश तरह ज्यादा आकर्षणर्ष धार्मिकर्मि

आध्यात्मिक ब्रह्मचार्य जीवन ही गुजार रहा था ।


श्री नरेन्द्र मोदी ( भारत के प्रधानमंत्री )

जन्म तारीख : 17/09/1950

जन्म समय : 10/ 15 सबहु

जन्म स्थान : वड़नगर ( गुजरात )

लग्न : 07

सर्यू र्य

: 06

चन्द्र : 08

मंगल : 08

बधु : 06

गुरु : 11

शक्रु : 05

शनि : 05

राहु: 12

केतु: 06

इस कंुडली मेउग्र स्वभाव ब्रह्मचार्य जीवन जिस बात का जिद पकड़ लेवही बात को पर्णू र्णकरके ही रहे

सामनेवालो को झुकाव मेंलानेकी पर्णू र्णटक्कर देनेकी ताकत भी रख शकता है।

गीता मेंकहा गया हैकि मनष्यु अपनेपर्वूजन्म र्व के कर्मों सेवर्तमान र्त जीवन को पाता हैऔर अलग -

अलग क्षेत्रों सेजड़ुकर सफलता प्राप्त करता है।

कुछ लोग आध्यात्मिक जगत सेजड़ुकर भी महान और प्रसिद्ध हो जातेहैं।

रामकृष्ण परमहंस, श्री श्री रविशंकर भी ऐसेही लोगों मेंसेहैं।


दरअसल इन सब के पीछेउनकी जन्मपत्री मेंमौजदू ग्रहों की खास स्थिति होती है।

जो ब्रह्मचार्य र्य संन्यास योग बनाकर मनष्यु को आध्यात्मिक जगत मेंमहान और सफल बना देता है

अगर आपकी जन्मपत्री मेंभी ऐसेयोग हैं।

तो समझ लीजिए आप भी भौतिक जगत सेअलग आध्यात्म की दनिु या मेंअपनी पहचान बनानेमें

सफल होंगे।

चन्द्रमा यदि शनि या मंगल के द्रेष्काण मेंहोकर मात्र शनि सेदृष्ट हो तो भी जातक संन्यासी हो

सकता है।

यदि चन्द्रमा शनि या मंगल के नवांश मेंहो कर शनि सेदृष्ट हो तब भी संन्यास योग बनता है।

यह योग स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कंुडली मेंबन रहा था।

स्वामी प्रभपाद ु जी की कंुडली थी ऐसी ही है।

सर्यू र्यऔर गुरु की यतिु धार्मिकर्मि स्थानों मेंसेवा करनेया पजा ू स्थलों के निर्माण का एक अति

महत्वपर्णू र्णज्योतिषीय योग है।

यह योग मकर लग्न की स्वामी प्रभपाद ु जी की कंुडली मेंथा जिन्होंनेपिछली सदी मेंअनेक राधा -

कृष्ण मंदिरों का विश्वभर मेंनिर्माण करवाया ।

धर्म त्रिकोण लेजाता हैब्रह्मचार्य र्य आधात्मिक उन्नति की ओर

कंुडली मेंधर्म त्रिकोण ( लग्न , पंचम और नवम ) तथा मोक्ष त्रिकोण ( चतर्थु र्थ, अष्टम और द्वादश )

की स्वामियों का सम्बन्ध जातक को जीवन मेंआधात्मिक उन्नति की ओर लेकर जाता है।

यह योग जन्म लग्न और चंद्र लग्न दोनों सेदेखा जाना चाहिए।

शरीर मेसार वस्तुही वीर्य ही है।

इसके नास सेआज हमारा देश रसतलको पहुच गया हैब्रह्मचार्य नाश के ही कारण आज भी हम लोग

छोटी - छोटी बीमारियों का शिकार बन गए है।

जीवन की थोडीक ही अवस्था काल के गलेमेजा रहेहै।

इसके कारण आज हमलोग अपनेबल, तजे , वीरता ओर आत्मसन्मान को खो कर पराधीनता की

बेड़ियों मेंजकड़ चकुे है।

ओर जो हमारा देश किसिब्सम्य विश्व का सिरमौर ओर सभ्यताका उद्गमस्थान बना हुआ था ।


वही आज हम दशरो ु के द्वारा लांछित ओर परदलित हो रहा है।

आज हम विद्या - बद्ुधि - बल - वीर्य , कला - कौशल - सब मेहम पिछड़ेहुए है।

इसी के कारण ही आज हम चरित्र मेंभी गिर गए है।

सारांश यह हैकि !

किसी भी बात को लेकर आज हम संसार के सामनेअपना मस्तक ऊं चा नही कर शकते।

वीर्य का नाश ही हमारी इस गिरी हुई दशा का प्रधान मख्यु कारण ही मालमू होता है।

आज के समय का चलचित्रों भी वीर्यरक्षाक र्य े के लियेबनाया ही नही जाता कैसेवीर्य का नाश हो सब

लोग का बद्ुधि नास हो ।

भाई - भाई के बीच, मा बेटियों के बीच , बहुसासओु ंके बीच लड़ाई झगड़ेहोता रहे।

किसी का भी स्त्री मा बहन बेटियों का ज्यादा अपमानित ओर आबरू सेलांछित किया जाय ।

इस मेंकैसेप्रसकर्मी बनेकैसेकिसी का अपमानित किया जाय वही चलचित्रों आज के समय मे

ज्यादा फैसन बन चका ु है।

( आगेका लेख भाग 2 पर ) 

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