google-site-verification: google5cf1125c7e3f924f.html pina_AIA2RFAWACV3EAAAGAAFWDICOQVKPGQBAAAAALGD7ZSIHZR3SASLLWPCF6DKBWYFXGDEB37S2TICKKG6OVVIF3AHPRY7Q5IA { "event_id": "eventId0001" } { "event_id": "eventId0001" } https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec Astrologer: December 2024

Saturday, December 28, 2024

पौष मास की अमावस्या पर सूर्य-चंद्र रहते हैं एक राशि में/जानिए इस दिन पितरों के लिए धूप-ध्यान क्यों करना चाहिए?

 

पौष मास कीअमावस्या पर सूर्य - चंद्र रहते हैं एक राशि में, जानिए इस दिन पितरों के लिए धूप-ध्यान क्यों करना चाहिए?  शनि देव को क्यों प्राप्त है क्रूर ग्रह का दर्ज़ा ?


पौष मास कीअमावस्या पर सूर्य-चंद्र रहते हैं एक राशि में, जानिए इस दिन पितरों के लिए धूप-ध्यान क्यों करना चाहिए? 


सोमवार को पौष मास का एक पक्ष पूरा हो जाएगा, इस दिन अमावस्या है। 

जब सोमवार को अमावस्या होती है से इसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। 

इस तिथि पर देवी - देवताओं की पूजा करने के साथ ही पितरों के लिए धर्म - कर्म करने का महत्व है। 
जानिए अमावस्या पर पितरों के लिए धूप - ध्यान करने की परंपरा क्यों है और इस दिन कौन - कौन से शुभ काम कर सकते हैं...!

अमावस्या तिथि के स्वामी पितर देव माने जाते हैं और इस तिथि का नाम अमा नाम के पितर के नाम पर पड़ा है....! 








Lord Surya on His Seven Horses Chariot - Brass Statue


https://amzn.to/4gX92Ko


इस कारण इस दिन पितरों के लिए खासतौर पर धर्म - कर्म करने की परंपरा है।

महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है....! 

कि पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पितर देव प्रसन्न होते हैं...! 

और घर - परिवार के सदस्यों पर कृपा बरसाते हैं। 

पितरों की कृपा से घर - परिवार में सुख - समृद्धि बनी रहती है। 

इन कामों के लिए अमावस्या तिथि सबसे शुभ मानी जाती है।

गरुड़ पुराण में लिखा है कि जो लोग अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, धूप - ध्यान करते हैं....! 

उनके पितर तृप्त होते हैं। 

पितरों को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर घर - परिवार को आशीर्वाद देते हैं।

पद्म पुराण के अनुसार अमावस्या पर किए जाने वाले शुभ कामों के बारे में बताया गया है। 

इस दिन व्रत, नदी स्नान और दान - पुण्य करने की परंपरा है। 

अमावस्या तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा खासतौर पर की जाती है।

स्कंद पुराण के मुताबिक अमावस्या पर तीर्थ यात्रा, गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान और भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। 

अमावस्या पर किए गए धर्म - कर्म से जाने - अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है।

ज्योतिष के अनुसार अमावस्या पर चंद्र और सूर्य एक साथ एक राशि में होते हैं। 

30 दिसंबर को चंद्र - सूर्य धनु राशि में रहेंगे। 

सूर्य की वजह से चंद्र की स्थिति कमजोर हो जाती है। 

इस दिन सूर्य को जल चढ़ाने के साथ ही चंद्र देव की प्रतिमा की भी पूजा करनी चाहिए। 

ऐसा करने से कुंडली के चंद्र और सूर्य से जूड़े दोष शांत होते हैं।

महाभारत के अनुसार पांडवों ने भी अमावस्या पर अपने पितरों का श्राद्ध - तर्पण किया था। 

इस दिन जल, अनाज, कपड़े और धन का दान करने से पितर तृप्त होते हैं।

जानिए अमावस्या पर और कौन - कौन से शुभ काम कर सकते हैं...!

अमावस्या पर हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। 

आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।

शिवलिंग पर जल - दूध चढ़ाएं। 

चंदन का लेप करें। 

बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

इस तिथि पर महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए। 

पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

भगवान श्रीकृष्ण को दूध चढ़ाएं और माखन - मिश्री का भोग लगाएं। 

कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

किसी मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, गुलाल, अबीर, भोग के लिए मिठाई, घी - तेल, भगवान के वस्त्र आदि दान कर सकते हैं।








शनि काले कर्मों से पीड़ा देतेकाले रंग से नहीं :

काले रंग को शनि ग्रह से जोड़कर शुभ कामों में त्यागने की धारणा बना दी है जो सही नहीं है। 

शनि, न्याय के देवता हैं। 

वह सिर्फ काले कर्मों से कारण पीड़ा देते हैं। 

काले रंग की वजह से नहीं। 

विज्ञान के अनुसार काला रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा सोखने वाला रंग है। 

वहीं, सफेद रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा परिवर्तित करने वाला रंग होता है। 

किसी भी तरह की ऊर्जा को सबसे कम सोखता है।

इसी तरह हम नजर से बचने के लिए...! 

किसी देवालय से, साधु, संत और ऋषि द्वारा काला धागा बंधवाते हैं...! 

क्योंकि उनकी सकारात्मक ऊर्जा ज्यादा समय तक काले रंग में रह सकती है। 

बच्चों के लिए मां ही भगवान होती हैं। 

सबसे ज्यादा वात्सल्य से भरी होती हैं...! 

इसी लिए उनके हाथ का लगाया काला टीका बच्चों की रक्षा करता है। 

ये ही वजह है कि जब आप सत्संग, प्रवचन, देवदर्शन और किसी से शिक्षा प्राप्त करने जाए...! 

तो काली टोपी का इस्तेमाल करें तो...! 

आप वहां की सकारात्मक ऊर्जा को ज्यादा संचित कर पाते हैं...! 

और लंबे समय तक उपयोग कर पाते हैं।

जब हम किसी शोक सभा में जाते हैं तो सफेद कपड़े पहनकर जाते हैं। 

जिससे वहां की शोकाकुल भावनाएं हम में न आएं। 

डॉक्टर का एप्रीन भी सफेद रंग का होता है। 

जिससे बीमारियों के प्रभाव का उन पर कम हो। 

इसी तरह विमान और जहाज चलाने वाले ही सफेद कपड़े पहनते हैं। 

जिससे सूर्य के ताप का कम कम से कम अवशोषण हो।

इसी तरह जैन संत, साध्वियां, ईसाई धर्म में पादरी और नन, जो संसार से विरक्त होने के भाव से अपना जीवन जीना चाहते हैं। 

ऐसे लोगों को भी सफेद कपड़े पहनने का नियम होता है। 

जिससे संसार का मोह - माया, लोभ और लालच का उन पर प्रभाव न पड़े।

शनि देव को क्यों प्राप्त है क्रूर ग्रह का दर्ज़ा ?


सूर्यपुत्र  नमस्तेऽस्तु   भास्करेऽभयदायिनी 
अधोदृष्टे  नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोस्तुऽते।

नमो मंदगते तुभ्यं निष्प्रभाय नमो नमः
 तपनाज्जातदेहाय नित्ययोगधराय  च।।








शनिदेव साक्षात रुद्र हैं। 

उनकी शरीर क्रांति इन्द्रनील मणि के समान है। 

शनि भगवान के शीश पर स्वर्ण मुकुट, गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्र सुशोभित हैं। 

शनिदेव गिद्ध पर सवार रहते हैं। 

हाथों में क्रमश: धनुष, बाण, त्रिशूल और वरमुद्रा धारण करते हैं। 

वे भगवान सूर्य तथा छाया ( सवर्णा ) के पुत्र हैं। 

वे क्रूर ग्रह माने जाते हैं। 

इनकी दृष्टि में क्रूरता का मुख्य कारण उनकी पत्नी का श्राप है। 

ब्रह्मपुराण के अनुसार बाल्यकाल से ही शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। 

वे भगवान श्रीकृष्ण के अनुराग में निमग्न रहा करते थे। 

युवावस्था में उनके पिता श्री ने उनका विवाह चित्ररथ की कन्या से करवा दिया। 

उनकी पत्नी सती, साध्वी एवं परम तेजस्विनी थी।

एक रात्रि वह ऋतु स्नान कर पुत्र प्राप्ति की इच्छा लिए शनिदेव के पास पहुंची...! 

पर देवता तो भगवान के ध्यान में लीन थे। 

उन्हें बाह्य संसार की सुधि ही नहीं थी। 

उनकी पत्नी प्रतीक्षा करके थक गई। 

उनका ऋतकाल निष्फल हो गया।\ 

इस लिए उन्होंने क्रुद्ध होकर शनिदेव को श्राप दे दिया...! 

कि आज से जिसे तुम देखोगे, वह नष्ट हो जाएगा।

ध्यान टूटने पर शनिदेव ने अपनी पत्नी को मनाया।

उनकी धर्मपत्नी को अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ...! 

किंतु श्राप के प्रतिकार की शक्ति उनमें नहीं थी...! 

तभी से शनिदेव अपना सिर नीचा करके रहने लगे...! 

क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि किसी का अनिष्ट हो। 
 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह यदि कहीं रोहिणी भेदन कर दे...! 

तो पृथ्‍वी पर 12 वर्षों का घोर दुर्भिक्ष पड़ जाए और प्राणियों का बचना ही कठिन हो जाए। 

शनि ग्रह जब रोहिणी भेदन कर बढ़ जाता है, तब यह योग आता है। 

यह योग महाराज दशरथ के समय में आने वाला था। 

जब ज्योतिषियों ने महाराज दशरथ को बताया कि...! 

यदि शनि का योग आ जाएगा...! 

तो प्रजा अन्न - जल के बिना तड़प - तड़पकर मर जाएगी। 

प्रजा को इस कष्ट से बचाने हेतु...! 

महाराज दशरथ अपने रथ पर सवार होकर नक्षत्र मंडल में पहुंचे। 

पहले तो उन्होंने नित्य की भांति शनिदेव को प्रणाम किया...! 

इस के पश्चात क्षत्रिय धर्म के अनुसार उन से युद्ध करते हुए...! 

उन पर संहारास्त्र का संधान किया। 

शनिदेव, महाराज दशरथ की कर्तव्यनिष्ठा से अति प्रसन्न हुए...! 

और उनसे कहा वर मांगो - महाराज दशरथ ने वर मांगा कि जब तक सूर्य....! 

नक्षत्र आदि विद्यमान हैं....! 

तब तक आप संकटभेदन न करें। 

शनिदेव ने उन्हें वर देकर संतुष्ट किया।

 || जय श्री शनिदेव प्रणाम आपको ||

पंडारामा प्रभु ( राज्यगुरु )
🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

Saturday, December 21, 2024

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में महाकुंभ :

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में महाकुंभ 


जय श्री कृष्ण 

"अंहकार" मनुष्य का सबसे बड़े दुश्मन है,

यह न आपको किसी का होने देता है,

और न ही कोई आपका होना चाहता है

ज़िंदगी में मौका देने वाले भी मिलेंगे ,
और धोखा देने वाले भी मिलेंगे जो ,

मौका दे उसे धोखा कभी मत दो जो ,
धोखा दे उसे मौका कभी मत दो मनुष्य ,

के दिमाग मे दो घोडे दौडते है एक ,
नकारात्मक दुसरा सकारात्मक जिसको ,

ज्यादा खुराक दी जाये वही जीतता है ,
जीवन में सफल होने के लिए दो शक्तियों ,

की जरूरत होती है सहनशक्ति और ,
समझशक्ति। 

यदि ये दोनों हमारे पास हैं ।

तो हमको सफल होने से कोई नहीं रोक ,
सकता जब किसी इंसान का बुरा करके ,

भी आपको बुरा ना लगे तब समझ लीजिए,
कि बुराई आपके चरित्र में आ गयी है।







Preethi MGA-524 Atta Kneader, White

https://amzn.to/479SQC1




|| महाकुंभ मेला ||
    { 13 जनवरी 2025 }

पौष पूर्णिमा के दिन यानी 13 जनवरी 2025 को प्रयागराज में कुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा और इस दिन पहला शाही स्नान भी होगा और महाशिवरात्रि के दिन अंतिम शाही स्नान के साथ समापन भी हो जाएगा।

:- महाकुंभ में स्नान करने से सभी पाप हो जाते हैं नष्ट-:

साल 2025 में प्रयागराज के संगम किनारे इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। 

संगम के दौरान गंगा और यमुना नदी का साक्षात रूप देखने को मिलता है और सरस्वती नदी का अद्श्य रूप से मिलन होता है, इस वजह से प्रयागराज का महत्व और भी बढ़ जाता है। 

वैसे तो प्रयागराज के अलावा उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में अर्धकुंभ मेला हर 6 साल पर आयोजित किया जाता है। 

लेकिन साल 2025 में होने वाला महाकुंभ मेला का महत्व सबसे ज्यादा होता है। 

धार्मिक मान्यताओं को अनुसार, महाकुंभ मेला के दौरान प्रयागराज में स्नान व ध्यान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म -मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है//

:- 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा महाकुंभ मेला-:

कुंभ मेला भारत के चार तीर्थ स्थल प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में लगता है। 

साल 2025 में महाकुंभ मेला प्रयागराज में 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन शुरू होगा और 26 फरवरी महाशिवरात्रि व्रत के दिन शाही स्नान के साथ कुंभ मेले का समापन हो जाएगा। 

प्रयागराज के तट पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियां मिलती हैं और इस संगम तट पर स्नान करने को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

साल 2025 में पौष पूर्णिमा के दिन ही पहला शाही स्नान होगा और सबसे पहले शाही नागा साधु स्नान करने का मौका मिलता है क्योंकि नागा साधुओं को हिंदू धर्म का सेनापति माना जाता है//
 
:- इस चार स्थानों पर होता है कुंभ मेले का आयोजन-:

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला था तब उसकी कुछ बूंदे कलश से प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिरीं थी इसलिए इन चार स्थानों पर ही कुंभ मेले का आयोजन होता है। 

महाकुंभ मेला में शाही स्नान का विशेष महत्व होता है और इस दौरान हर अखाड़ा अपने शाही लाव - लश्कर के साथ संगम के तट पर पहुंचता है और सभी नाचते गाते संगम तट पर पहुंचते हैं और स्नान करते हैं//

:- कब और कैसे आयोजित होता है कुंभ मेला-:
                 (ज्योतिष सिद्धांत)

:- प्रयागराज -:

जब बृहस्पति देव यानी गुरु ग्रह वृषभ राशि में हों, जो अभी इसी राशि में मौजूद हैं और सूर्य ग्रह मकर राशि में हों, जो 14 जनवरी 2025 में सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में होता है। 

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है//

:- हरिद्वार -:

जब सूर्य ग्रह मेष राशि में गोचर कर चुके हों और बृहस्पति देव कुंभ राशि में गोचर कर चुके हों, तब कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में आयोजित किया जाता है। 

हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर मेले का आयोजन होता है//

:- नासिक -:

जब सिंह राशि में गुरु ग्रह और सूर्य ग्रह दोनों मौजूद होते हों, तब कुंभ मेले का आयोजन महाराष्ट्र के नासिक में होता है। 

नासिक में गोदावरी नदी के तट कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है//

: - उज्जैन-:

जब सूर्य ग्रह मेष राशि में विराजमान हों और गुरु ग्रह सूर्यदेव की राशि सिंह में विराजमान हों, तब उज्जैन में कुंभ मेले का आयोजन होता है। 

उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर कुंभ मेले का आयोजन होता है//

: - कुंभ और महाकुंभ में अंतर-:

कुंभ मेला हर तीन साल में एक एक बार उज्जैन, प्रयागराज, हरिद्वार और नासिक में आयोजित होता है। 

अर्ध कुंभ मेला 6 साल में एक बार हरिद्वार और प्रयागराज के तट पर आयोजिक किया जाता है। 

वहीं पूर्ण कुंभ मेला 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है, जो प्रयागराज में होता है। 

12 कुंभ मेला पूर्ण होने पर एक महाकुंभ मेले का आयोजन होता है, इससे पहले महाकुंभ प्रयाराज में साल 2013 में आयोजित हुआ था।

:- शाही स्नान -:

13 जनवरी 2024- पौष पूर्णिमा
14 जनवरी 2025 - मकर संक्रांति
29 जनवरी 2025- मौनी अमावस्या
3 फरवरी 2025 - वसंत पंचमी
12 फरवरी - माघी पूर्णिमा
26 फरवरी - महाशिवरात्रि पर्व ( अंतिम शाही स्नान )

:- महाकुंभ के स्थान..-:

कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का अवसर भी देता है। 

धार्मित मान्यता के अनुसार कुंभ में स्नान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।

यह धार्मिक आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का विशेष महत्व है। 

यह अद्वितीय मेला भारत के चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है। 

हालांकि, इसमें खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव माना जाता है। 

आइए जानते हैं किन दो ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्थान का चयन किया जाता है।

महाकुंभ का आयोजन केवल चार स्थानों पर ही होता है, जिसमें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन शामिल हैं।

इसका चयन ग्रह - नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

ज्योतिष के अनुसार, गुरु ( बृहस्पति ) और सूर्य की विशिष्ट राशियों में उपस्थिति के अनुसार तय होता है कि महाकुंभ किस स्थान पर आयोजित किया जाएगा।

:- प्रयागराज महाकुंभ -:

जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तो महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित होता है।

2025 में यही स्थिति होने के कारण महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है।

नासिक महाकुंभ

गुरु और सूर्य जब सिंह राशि में होते हैं, तो यह आयोजन नासिक में होता है। 

अगला नासिक महाकुंभ 2027 में होगा।

हरिद्वार महाकुंभ

गुरु कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तो महाकुंभ हरिद्वार में लगता है। 

2033 में हरिद्वार में यह मेला आयोजित होगा।

:- उज्जैन महाकुंभ -:

सूर्य मेष राशि में और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो महाकुंभ उज्जैन में लगता है। 

उज्जैन का अगला महाकुंभ 2028 में होगा..!!  
जय श्री कृष्ण
पंडारामा प्रभु राज्यगुरु 
( द्रविण ब्राह्मण )






==================================

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोज ये काम करने से मानसिक तनाव से मिलेगा छुटकारा :

कभी - कभी चीजें उस तरीके से संपन्न नहीं होती जैसा हम सोचते हैं और यह भी हमारे मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। 

ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि इसका कारण चंद्रमा या अन्य ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव के कारण हो सकता है। 

ग्रहों की शांति के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय भी बताए गए हैं।

मानसिक शांति के लिए करें ये उपाय :

आज के इस भागदौड़ के समय में हर दूसरा व्यक्ति मानसिक तनाव का शिकार हो रहा है। 

ऐसे में आप इन ज्योतिष उपायों द्वारा मानसिक तनाव से मुक्ति पा सकते हैं। 

साथ ही इससे आपको मानसिक शांति भी मिलती है। 

सोमवार को व्रत रखने का प्रयास करें और अपने दिन की शुरुआत मंदिर में जाकर या घर पर पूजा करके करें।

ग्रहों के प्रभाव से मिलेगी मुक्ति :

ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए अक्सर भगवान शिव की पूजा करते हुए उनके शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाना चाहिए। 

आप प्रतिदिन 'ओम नमः शिवाय' या 'ओम' का जाप कर सकते हैं। 

यह मंत्र आपको अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करता है।

ऐसे मजबूत होगा चंद्रमा :

रत्न पहनना भी बहुत फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कोई भी रत्न पहनने से पहले आपको ज्योतिष की सलाह जरूर लेनी चाहिए। 

प्रतिदिन चंद्र यंत्र धारण करके आप हमेशा शांति में रह सकते हैं और अपने आस - पास की सभी नकारात्मकता से खुद को ठीक कर सकते हैं। 

चांदी के गिलास में पानी पीने से चंद्रमा ग्रह के प्रभाव को मजबूत करने में मदद मिलती है।

मिलेगी मानसिक शांति :

आपको अपने माथे पर हमेशा नियमित रूप से केसर और हल्दी मिश्रित चंदन का तिलक लगाना चाहिए, इससे मानसिक तनाव को कम करने में सहायता मिलती है। 

बिस्तर पर जाने से पहले आपको हमेशा अपने हाथ और पैर धोने चाहिए।

रोज करें ये काम :

अपने पूजा कक्ष ( घर के पूजा स्थल ) के पास तुलसी का पौधा रखकर रोज सुबह और शाम उसपर दीया जलाएं। 

इससे राहु ग्रह के प्रभाव से छुटकारा मिलता है। 

जिससे आपको मानसिक शांति प्राप्त होती है और आपके घर का माहौल बेहतर होता है। 

साथ ही प्राणायाम करने की आदत अपनाएं। 

इस से दिमाग और शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
Shri Maha Prabhuji bethak Road,
JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
सेल नंबर: . + 91- 9427236337 / + 91- 9426633096  ( GUJARAT )
Vist us at: www.sarswatijyotish.com
Skype : astrologer85
Email: prabhurajyguru@gmail.com
Email: astrologer.voriya@gmail.com
आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

Tuesday, December 17, 2024

જન્મ કુંડળી માં શનિ ની મહા દશા અંતર દશા ના ઉપાય :

જન્મ કુંડળી માં શનિ ની મહા દશા અંતર દશા ના ઉપાય :


કોણસ્થ પિંગ્લો બભુ 
કૃષ્ણો રૌદ્રા ન્તકો યમઃ !
સૌરી શનૈ શ્વરો મદઃ 
પીપ્લા દેન સંસ્તુત: !!

એતાની દશ નામની 
પ્રાતરું ત્યાંય ચ: પહેત !
શનૈ શ્વર કૃતા પીડા 
ન કદાચિત ભવિષ્યતિ !!








5 Pieces Buddha OM Yoga Symbol Canvas Painting Abstract Golden Pattern Wall Art Decor Black Ornate Indian Yoga Circle Prints Pictures for Living Room Bedroom Dorm Home Decoration (60¡±Wx40¡±H)

https://amzn.to/4mVc4QI



અર્થ : 

        શનિ ની મહાદશા , અંતર દશા કે પ્રત્યુંતર દશા હોય કે શનિ ની નાની કે મોટી પનોતી 

        તેમાં લોઠાના પાયે હોય કે રૂપા ના પાયે હોય કે , સોના ના પાયે હોય કે , ચાંદી ના પાયે હોય કે પછી તાબા ના પાયે હોય છે , 

        તે સમય માં એક જ આશન પર બેસી ને આ મંત્ર ને ત્રણ વખત દરરોજ અને શનિવાર ના એકવીસ વખત તેવા એકવીસ શનિવાર પૂર્ણ અને બાવીસ માં શનિવાર આવે 

        ત્યાં સુધી કરવા માં શનિ ની પનોતી નાની પનોતી અઠી વર્ષ ની હોય કે મોટી પનોતી સાડા સાત વર્ષ ની હોય તેમાં અચૂક રાહત મળતી જોવા મળે છે .

+++ +++

સામાન્ય રીતે જોઈએ.

         શનિ ની અશુભ સ્થાન માં હોય કે શનિ ની મહા દશા , અંતર દશા કે પ્રત્યંતર દશા ચાલતી હોય અથવા અશુભ પનોતી નું ફળ મળી રહેલ હોય. 

તો તેમાં શનિ ના જાપ , દાન કે  હનુમાનજી ની સેવા પૂજન શનિ ગ્રહ ની પૂજન વિધિ કરવાથી શનિ ના કષ્ટ નું ફળ અચૂક ઓછું તો થાય છે , 

+++ +++

        તેમજ મંગળવાર અને શનિવારે જે શિવજી ના અગિયાર માં રુદ્ર હનુમાનજી ની સેવા પૂજન દર્શન તેમજ હનુમાન ચાલીસા ના દશ હજાર વખત પાઠ કરવામાં આવે અને જો સમય અનુસાર સંજોગ પણ હોય તો સુંદર કાંડ ના પાઠ પણ કરી શકાય છે. 

જે લાભ કારક ફળ પ્રાપ્ત કરવા માં મદદ કરી શકે છે 

+++ +++

        જી હા દસ શનિવાર હનુમાનજી ના પગ ઉપર અથવા પાસે ઉંમર ના વર્ષ અનુસાર અડદ ના દાણા અને તેમજ ફિલ્ટર વગર નું દેશી મીઠા ની કાકડી અર્પણ કરી શક્ય છે. 

તેમજ જાતક ના ઉંમર હિસાબ થી ગ્રામ ના હિસાબ ઉપર સિંગ તેલ ( મગફળી તેલ ) ને હનુમાનજી ના જમણા પગ ના ઘૂંટણ ઉપર અભિષેક કરવો જોઈએ.

+++ +++

તેમજ જી હા સિંદૂર ચઢાવવા ની ઈચ્છા હોય તો હનુમાનજી ના આખી મૂર્તિ ને જ સિંદૂર ચઢાવી શકાય અને દેશી સફેદ આંકડા ના ફૂલ ની માળા તેમજ જો વધારે કષ્ટ હોય તો ઉંમર ના હિસાબ માં જ સાત દાણા ના હિસાબ થી અડદ ના દાણા હનુમાનજી ના જમણા પગ ઉપર જ ચઢાવી શકાય છે.

શનિવાર ના વૃત :

        શનિવાર ના  દિવસે સવાર માં નહિ ધોઈ ને શુદ્ધ થઈ ને જ તમારા ઘરે પીવાના પાણી ના માટલા પાસે શુદ્ધ ઘી નો દીવો પ્રગટાવી. 

તમારા કુળદેવી નું નામ લઈ ને તમારે તમારા કુળદેવી પાસે જ કુળદેવી નું નામ લઈ ને અર્ચના પ્રાર્થના કરવાની કે. 

+++ +++

હે અમારી કુળદેવી માં અમે આજ રોજ મારા આ મન ના મારા નિર્ધારિત કાર્ય માટે અને મારા જન્મ કુંડળી માં કે ગોચર ગ્રહ દશા અનુસાર શનિ ની દશા કે નાની મોટી પનોતી નું ભ્રમણ થઈ રહેલ હોય તો હું મારા કાર્ય સરખી રીતે મારા મન અનુસાર કરી નથી શકતો. 

તો તે બાબત માટે હું આજ રોજ થી શનિવાર ના વૃત કરવા ની શરૂઆત કરું છું તો તમે મારા શનિવાર ના વૃત ને સફળતા અપાવશો 

+++ +++

        શનિવાર ના જ આખો દિવસ ચા દૂધ કોફી પી શકાય છે તેમાં બપોર ના કે કોઈ પણ સમય માં કોઈ ફ્રૂટ , ફરાળ નો આહાર કરી શકાય નહિ તેમ આખો દિવસ ચા દૂધ કોફી ઉપર જ ઉપવાસ કરવાનો રહેશે , 

        સાંજના જ જે છ વાગ્યા થી સાડા છ વાગ્યા ના જ સમય માં તમારી ઉંમર ના હિસાબ માં સાત દાણા જો તમારી ઉપર 50 વર્ષ ની હોય તો 350 દાણા હનુમજી ના જમણા પગ ઉપર ચઢાવી દેવા તેમજ ઉંમર ના હિસાબ માં એક પાવરું સીંગતેલ ( મગફળી નું તેલ ) હનુમાનજી ના જમણા પગ ઉપર ચઢાવવું. 

+++ +++

જૉ તમને સમય હોય તો ત્યાં હનુમાન ચાલિસા ના પાઠ તમારી ઇચ્છા અનુસાર અથવા સાત વખત કરી શકાય છે 

        ત્યાર બાદ જ રાત્રિ ના સમય માં ફક્ત અડદ નું શાક જ શનિવાર ના દિવસે જમવાનું તેમાં અડદ થી બનેલી કોઈ વસ્તુ પણ ના ચાલે કે ના તેમના સાથે કોઈ બીજી વસ્તુ પણ જમી શકાય. 

+++ +++

આવી રીતે એકવીસ શનિવાર ના એક વખત થાય તેવા સંડગ ચાર વખત મતલબ 84 શનિવાર કરવા ખાસ જરૂરી રહે છે.







શનિવાર ના દાન :

        શનિવાર ના દાન કરવું હોય તો પહેલાં શનિવાર ના વૃત તો કરવા જ પડે વૃત કર્યા વગર નું દાન કોઈ મહત્વ તો રહેતું જ નથી 

+++ +++

        દાન કરવાની વસ્તુઓ બાબત જોઈએ તો કાળા તલ , કાળા અડદ , કળશી, ભેસ , કાળો ધાબળો , કાળું કપડું , લોખંડ , તેલ નું દાન કરી શકાય છે , 

        જી હા દાન નો સમય સવાર નો અથવા માધ્યમ નો જ હોવો જરૂરી રહે છે સૂર્ય અસ્ત ના સમય કે સૂર્ય અસ્ત પછી રાત્રી ના સમય માં દાન નું કાઈ જ મહત્વ રહેતું નથી , 

+++ +++

        શનીવાર ના વૃત ના દિવસે જ્યારે સવાર માં સ્નાન કરવા જઈએ ત્યારે શરીર ઉપર સરસવ તેલ થી હાથ પગ અને પેટ ના ભાગ ને માલીશ કરી ને ત્યાર બાદ સ્નાન કરવામાં આવે તો પણ શનિ ની અસર માં ઘણી રાહત થાય છે , 

તેમજ તમારા નિત્ય કામ ધંધા કે નોકરી ના કામ માં પણ કુળદેવી અને ઇષ્ટ દેવ નું સમરણ વિશેષ કરવામાં મન માં તેમજ ઘર માં ઘણી રાહત ની અનુભૂતિ જોવા મળે છે.

+++ +++

        શનિની સાડાસાતી શરુ થશે, શનિદેવ કુંભ રાશિમાંથી બહાર નીકળીને મીન રાશિમાં ગોચર કરશે

        વૈદિક જ્યોતિષ શાસ્ત્ર અનુસાર, વર્ષ 2025માં શનિદેવ કુંભ રાશિમાંથી મીન રાશિમાં ગોચર કરશે. 

+++ +++

ત્યારે શનિની મોટી પનોતિ એટલે કે સાડાસાતી અને નાની પનોતિ એટલે કે ઢૈયાની અસર રાશિચક્ર પર અલગ - અલગ રીતે જોવા મળશે. 

વર્ષ 2025 કેટલીક રાશિઓ માટે ખરાબ રહેશે. વૈદિક જ્યોતિષ શાસ્ત્ર અનુસાર, તમામ ગ્રહોમાં શનિની ગતિ ખૂબ જ ધીમી છે,
 
+++ +++

તેથી શનિને એક રાશિમાં સંક્રમણ કરવામાં અઢી વર્ષનો સમય લાગે છે. 

ચાલો જાણીએ કે શનિની સાડાસાતી વર્ષ 2025માં કઈ રાશિમાં શરૂ થશે. 

+++ +++

        શનિની સાડાસાતી શરુ થશે હાલમાં મકર, કુંભ અને મીન રાશિના લોકો માટે શનિની સાડાસાતી ચાલી રહી છે. 

નવા વર્ષ 2025માં શનિનું મીન રાશિમાં ગોચર થવાથી મકર રાશિના લોકો માટે ચાલી રહેલી સાડાસાતીનો અંત આવશે અને મેષ રાશિના લોકો માટે શરુ થશે.
 
+++ +++

આ સાથે મીન રાશિના લોકો માટે સાડાસાતીનો બીજો તબક્કો અને કુંભ રાશિના લોકો માટે શનિનો છેલ્લો એટલે કે ત્રીજું ચરણ શરુ થશે. 

ત્યારે નવા વર્ષ 2025માં કુંભ, મીન અને મેષ રાશિના લોકો પર શનિની સાડાસાતીની અસર શરુ થશે.

+++ +++

        શનિનું ગોચર વૈદિક જ્યોતિષશાસ્ત્રમાં શનિની ચાલ, સ્થિતિ અને ગોચરનું વિશેષ મહત્ત્વ રહેલું છે, 

તેની અસર દેશ, વિશ્વ, અર્થતંત્ર, વેપાર અને મેષથી મીન સુધીની તમામ 12 રાશિઓ પર પડે છે. 

+++ +++

શનિદેવને એક રાશિમાં ગોચર કરવામાં અઢી વર્ષ લાગે છે, 

        આ પહેલા શનિએ 29 એપ્રિલ 2022ના રોજ કુંભ રાશિમાં પ્રવેશ કર્યો હતો. ત્યાર બાદ 12 જુલાઈના રોજ, 

+++ +++

શનિ ફરી વક્રી થઈને મકર રાશિમાં આવ્યા હતા. 

અને ફરીથી જાન્યુઆરી 2023ના રોજ શનિ મહારાજ કુંભ રાશિમાં આવ્યા અને ત્યારથી તે મૂળ ત્રિકોણ રાશિ કુંભ રાશિમાં બિરાજમાન છે. 

+++ +++

        પરંતુ 2025માં શનિ મહારાજ કુંભ રાશિમાંથી બહાર નીકળીને મીન રાશિમાં ગોચર કરશે.

શનિની સાડાસાતીનો પ્રકોપ ધટાડવા શું કરવું ?

        11 શનિવારે શનિ મંદિરમાં જઈને દર્શન કરીને દાન કરો.
        
        શનિદેવને સંબંધિત વસ્તુઓ જેમ કે કાળી છત્રી, ચંપલ, લોખંડ, કાળા તલ વગેરેનું દાન કરો.
        
        સફાઈ કામદારો, મજૂર વર્ગ એટલે કે ગરીબને દાન કરતા રહો.

        દરરોજ હનુમાન ચાલીસા અને બજરંગ બાણનો પાઠ કરો.

+++ +++

        દારૂ ન પીવો, જૂઠું બોલશો નહીં કે ગુસ્સો કરશો નહીં.

        પરાઈ સ્ત્રી પર ખરાબ નજર ન નાખો, તમારા કાર્યો હંમેશા શુદ્ધ રાખો.

        કાળા કૂતરા, કાગડા અને ગાયને દરરોજ રોટલી ખવડાવતા રહો અને દાન કરો.

        દરરોજ પીપળાના વૃક્ષની પૂજા કરો અને ઘીનો દીવો કરો.

+++ +++

પ્રભુ પંડારામા ( રાજ્યગુરુ )
દ્રાવિડ બ્રાહ્મણ 
જય માતાજી हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 
+++ +++


JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
+++ +++

सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा :

सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा : बुध ने मकर राशि में किया प्रवेश, मेष राशि के लोगों को मिल सकता है नौकरी में लाभ :  वैदिक ज्योतिष शास्त्...