शनिदेव और रोजगार :
शनिदेव और रोजगार :
शनि देव का रोजगार पर प्रभाव —
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर के अनुसार एक ज्योतिषीय कथा..!
शनि को सन्तुलन और न्याय का ग्रह माना गया है।
जो लोग अनुचित बातों के द्वारा अपनी चलाने की कोशिश करते हैं...!
जो बात समाज के हित में नही होती है और उसको मान्यता देने की कोशिश करते है...!
अहम के कारण अपनी ही बात को सबसे आगे रखते हैं, अनुचित विषमता, अथवा अस्वभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि उनको ही पीडित करता है।
शनि हम से कुपित न हो, उससे पहले ही हमे समझ लेना चाहिये, कि हम कहीं अन्याय तो नही कर रहे हैं, या अनावश्यक विषमता का साथ तो नही दे रहे हैं।
यह तपकारक ग्रह है, अर्थात तप करने से शरीर परिपक्व होता है, शनि का रंग गहरा नीला होता है, शनि ग्रह से निरंतर गहरे नीले रंग की किरणें पृथ्वी पर गिरती रहती हैं।
शरी में इस ग्रह का स्थान उदर और जंघाओं में है।
सूर्य पुत्र शनि दुख दायक, शूद्र वर्ण, तामस प्रकृति, वात प्रकृति प्रधान तथा भाग्य हीन नीरस वस्तुओं पर अधिकार रखता है।
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| { Brand | Generic |
| Colour | Krishna |
| Material | Wood |
| Style | Fine Art |
| Light fixture form | Sconce |
| Room Type | Bedroom, Hall, Home Office, Living Room |
| Product Dimensions | 30L x 30W x 2H Centimeters |
| Specific Uses For Product | Bedroom & Living Room |
| Indoor/Outdoor Usage | Indoor |
| Power Source | AC/DC } |
{ About this item
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भारतीय ज्योतिष परंपरा में शनि देव का नाम आते ही मनुष्य के मन में कर्म, न्याय, विलंब, संघर्ष, जिम्मेदारी और परिणाम—
इन सभी भावों का विचार होने लगता है।
शनि को केवल नौकरी में बाधा देने वाला ग्रह मानना अधूरा विचार है।
शनि वास्तव में कर्म के अनुसार फल देने वाला, अनुशासन सिखाने वाला और परिश्रम के बाद स्थायी उपलब्धि देने वाला ग्रह माना जाता है।
शनि सीमा ग्रह कहलाता है...!
क्योंकि जहां पर सूर्य की सीमा समाप्त होती है, वहीं से शनि की सीमा शुरु हो जाती है।
जगत में सच्चे और झूठे का भेद समझना, शनि का विशेष गुण है।
यह ग्रह कष्टकारक तथा दुर्दैव लाने वाला है।
विपत्ति, कष्ट, निर्धनता, देने के साथ साथ बहुत बडा गुरु तथा शिक्षक भी है, जब तक शनि की सीमा से प्राणी बाहर नही होता है, संसार में उन्नति सम्भव नही है।
रोजगार के विशिष्ट ज्योतिषीय निर्णय मुख्यतः
शनि जब तक जातक को पीडित करता है, तो चारों तरफ़ तबाही मचा देता है।
जातक को कोई भी रास्ता चलने के लिये नही मिलता है।
करोडपति को भी खाकपति बना देना इसकी सिफ़्त है।
अच्छे और शुभ कर्मों बाले जातकों का उच्च होकर उनके भाग्य को बढाता है, जो भी धन या संपत्ति जातक कमाता है, उसे सदुपयोग मे लगाता है।
गृहस्थ जीवन को सुचारु रूप से चलायेगा.साथ ही धर्म पर चलने की प्रेरणा देकर तपस्या और समाधि आदि की तरफ़ अग्रसर करता है।
🌑 कर्मभूमि का युवक :
अगर कर्म निन्दनीय और क्रूर है, तो नीच का होकर भाग्य कितना ही जोडदार क्यों न हो हरण कर लेगा...!
महा कंगाली सामने लाकर खडी कर देगा...!
कंगाली देकर भी मरने भी नही देगा...!
शनि के विरोध मे जाते ही जातक का विवेक समाप्त हो जाता है।
निर्णय लेने की शक्ति कम हो जाती है, प्रयास करने पर भी सभी कार्यों मे असफ़लता ही हाथ लगती है।
स्वभाव मे चिडचिडापन आजाता है, नौकरी करने वालों का अधिकारियों और साथियों से झगडे, व्यापारियों को लम्बी आर्थिक हानि होने लगती है।
विद्यार्थियों का पढने मे मन नही लगता है, बार बार अनुत्तीर्ण होने लगते हैं।
जातक चाहने पर भी शुभ काम नही कर पाता है।
दिमागी उन्माद के कारण उन कामों को कर बैठता है जिनसे करने के बाद केवल पछतावा ही हाथ लगता है।
शरीर में वात रोग हो जाने के कारण शरीर फ़ूल जाता है...!
और हाथ पैर काम नही करते हैं....!
गुदा में मल के जमने से और जो खाया जाता है उसके सही रूप से नही पचने के कारण कडा मल बन जाने से गुदा मार्ग में मुलायम भाग में जख्म हो जाते हैं...!
और भगन्दर जैसे रोग पैदा हो जाते हैं।
एकान्त वास रहने के कारण से सीलन और नमी के कारण गठिया जैसे रोग हो जाते हैं...!
हाथ पैर के जोडों मे वात की ठण्डक भर जाने से गांठों के रोग पैदा हो जाते हैं...!
शरीर के जोडों में सूजन आने से दर्द के मारे जातक को पग पग पर कठिनाई होती है।
दिमागी सोचों के कारण लगातार नशों के खिंचाव के कारण स्नायु में दुर्बलता आजाती है।
अधिक सोचने के कारण और घर परिवार के अन्दर क्लेश होने से विभिन्न प्रकार से नशे और मादक पदार्थ लेने की आदत पड जाती है...!
अधिकतर बीडी सिगरेट और तम्बाकू के सेवन से क्षय रोग हो जाता है...!
अधिकतर अधिक तामसी पदार्थ लेने से कैंसर जैसे रोग भी हो जाते हैं।
पेट के अन्दर मल जमा रहने के कारण आंतों के अन्दर मल चिपक जाता है, और आंतो मे छाले होने से अल्सर जैसे रोग हो जाते हैं।
शनि ऐसे रोगों को देकर जो दुष्ट कर्म जातक के द्वारा किये गये होते हैं, उन कर्मों का भुगतान करता है।
जैसा जातक ने कर्म किया है उसका पूरा पूरा भुगतान करना ही शनिदेव का कार्य है।
शनि की मणि नीलम है।
प्राणी मात्र के शरीर में लोहे की मात्रा सब धातुओं से अधिक होती है, शरीर में लोहे की मात्रा कम होते ही उसका चलना फ़िरना दूभर हो जाता है।
और शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते हैं।
इस लिये ही इसके लौह कम होने से पैदा हुए रोगों की औषधि खाने से भी फ़ायदा नही हो तो जातक को समझ लेना चाहिये कि शनि खराब चल रहा है।
शनि मकर तथा कुम्भ राशि का स्वामी है।
इसका उच्च तुला राशि में और नीच मेष राशि में अनुभव किया जाता है।
इसकी धातु लोहा, अनाज चना, और दालों में उडद की दाल मानी जाती है।
🪐 जन्मकुंडली में शनि और रोजगार :
ज्योतिषाचार्य ने आगे कहा—
“यदि शनि दशम भाव में हो तो व्यक्ति के जीवन में कर्म और जिम्मेदारी का विषय बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है।
फल राशि, दृष्टि, युति, दशा और बल पर निर्भर करेगा।
शुभ और मजबूत शनि व्यक्ति को धीरे - धीरे ऊँचा उठाने की क्षमता रखता है।
प्रारंभिक जीवन में संघर्ष हो सकता है, लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ स्थिति मजबूत हो सकती है।”
शनि सम्बन्धी व्यापार और नौकरी :
काले रंग की वस्तुयें, लोहा, ऊन, तेल, गैस, कोयला, कार्बन से बनी वस्तुयें, चमडा, मशीनों के पार्ट्स, पेट्रोल, पत्थर, तिल और रंग का व्यापार शनि से जुडे जातकों को फ़ायदा देने वाला होता है।
चपरासी की नौकरी, ड्राइवर, समाज कल्याण की नौकरी नगर पालिका वाले काम, जज, वकील, राजदूत आदि वाले पद शनि की नौकरी मे आते हैं।
कुंडली मे शनि की पहचान :
जातक को अपने जन्म दिनांक को देखना चाहिये, यदि शनि चौथे, छठे, आठवें, बारहवें भाव मे किसी भी राशि में विशेषकर नीच राशि में बैठा हो...!
तो निश्चित ही आर्थिक, मानसिक, भौतिक पीडायें अपनी महादशा, अन्तर्दशा, में देगा....!
इसमे कोई सन्देह नही है, समय से पहले यानि महादशा, अन्तर्दशा, आरम्भ होने से पहले शनि के बीज मंत्र का अवश्य जाप कर लेना चाहिये...!
ताकि शनि प्रताडित न कर सके, और शनि की महादशा और अन्तर्दशा का समय सुख से बीते...!
याद रखें अस्त शनि भयंकर पीडादायक माना जाता है...!
चाहे वह किसी भी भाव में क्यों न हो।
अंकशास्त्र में शनि :
ज्योतिष विद्याओं मे अंक विद्या भी एक महत्व पूर्ण विद्या है....!
जिसके द्वारा हम थोडे समय में ही प्रश्न कर्ता का स्पष्ट उत्तर दे सकते हैं....!
अंक विद्या में ८ का अंक शनि को प्राप्त हुआ है।
शनि परमतपस्वी और न्याय का कारक माना जाता है...!
इस की विशेषता पुराणों में प्रतिपादित है।
आपका जिस तारीख को जन्म हुआ है...!
गणना करिये, और योग अगर ८ आये, तो आपका अंकाधिपति शनिश्चर ही होगा...!
जैसे - ८ , १७ ,२६ तारीख आदि.यथा - १७ = १ + ७ = ८ , २६ = २ + ६ = ८...!
अंक आठ की ज्योतिषीय परिभाषा :
अंक आठ वाले जातक धीरे धीरे उन्नति करते हैं, और उनको सफ़लता देर से ही मिल पाती है।
परिश्रम बहुत करना पडता है...!
लेकिन जितना किया जाता है उतना मिल नही पाता है...!
जातक वकील और न्यायाधीश तक बन जाते हैं...!
और लोहा, पत्थर आदि के व्यवसाय के द्वारा जीविका भी चलाते हैं।
दिमाग हमेशा अशान्त सा ही रहता है...!
और वह परिवार से भी अलग ही हो जाता है...!
साथ ही दाम्पत्य जीवन में भी कटुता आती है।
अत: आठ अंक वाले व्यक्तियों को प्रथम शनि के विधिवत बीज मंत्र का जाप करना चाहिये.तदोपरान्त साढे पांच रत्ती का नीलम धारण करना चाहिये....!
ऐसा करने से जातक हर क्षेत्र में उन्नति करता हुआ...!
अपना लक्ष्य शीघ्र प्राप्त कर लेगा.और जीवन में तप भी कर सकेगा...!
जिसके फ़लस्वरूप जातक का इहलोक और परलोक सार्थक होंगे...!
शनि प्रधान जातक तपस्वी और परोपकारी होता है...!
वह न्यायवान, विचारवान, तथा विद्वान भी होता है...!
बुद्धि कुशाग्र होती है, शान्त स्वभाव होता है...!
और वह कठिन से कठिन परिस्थति में अपने को जिन्दा रख सकता है।
जातक को लोहा से जुडे वयवसायों मे लाभ अधिक होता है।
शनि प्रधान जातकों की अन्तर्भावना को कोई जल्दी पहिचान नही पाता है।
जातक के अन्दर मानव परीक्षक के गुण विद्यमान होते हैं।
शनि की सिफ़्त चालाकी, आलसी, धीरे धीरे काम करने वाला, शरीर में ठंडक अधिक होने से रोगी, आलसी होने के कारण बात बात मे तर्क करने वाला, और अपने को दंड से बचाने के लिये मधुर भाषी होता है।
{ About this item
- Why Om Bracelet - Om word itself gives energy. Om is described as the source of all knowledge, sound, and vibration. A gorgeous kada bracelet for all the lovers of Sankara, Lord shiva, Bholenath with exquisite carvings with ॐ Om design
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दाम्पत्यजीवन सामान्य होता है।
अधिक परिश्रम करने के बाद भी धन और धान्य कम ही होता है।
जातक न तो समय से सोते हैं और न ही समय से जागते हैं।
हमेशा उनके दिमाग में चिन्ता घुसी रहती है।
वे लोहा, स्टील, मशीनरी, ठेका, बीमा, पुराने वस्तुओं का व्यापार, या राज कार्यों के अन्दर अपनी कार्य करके अपनी जीविका चलाते हैं।
शनि प्रधान जातक में कुछ कमिया होती हैं...!
जैसे वे नये कपडे पहिनेंगे तो जूते उनके पुराने होंगे....!
हर बात में शंका करने लगेंगे, अपनी आदत के अनुसार हठ बहुत करेंगे...!
अधिकतर जातकों के विचार पुराने होते हैं।
उनके सामने जो भी परेशानी होती है सबके सामने उसे उजागर करने में उनको कोई शर्म नही आती है।
धन का हमेशा उनके पास अभाव ही रहता है...!
रोग उनके शरीर में मानो हमेशा ही पनपते रहते हैं...!
आलसी होने के कारण भाग्य की गाडी आती है और चली जाती है उनको पहिचान ही नही होती है..!
जो भी धन पिता के द्वारा दिया जाता है वह अधिकतर मामलों में अपव्यय ही कर दिया जाता है।
अपने मित्रों से विरोध रहता है।
और अपनी माता के सुख से भी जातक अधिकतर वंचित ही रहता है।
🔭 प्रश्नकुंडली में रोजगार का प्रश्न :
आरव ने पूछा—
“यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली उपलब्ध न हो तो?”
ज्योतिषाचार्य ने उत्तर दिया—
“तब परंपरागत प्रश्न ज्योतिष में प्रश्न पूछे जाने के समय की कुंडली बनाई जाती है।
इसे प्रश्नकुंडली कहते हैं।
रोजगार के प्रश्न में लग्न, दशम भाव, षष्ठ भाव, एकादश भाव, उनके स्वामी, चंद्रमा तथा शनि आदि का विचार किया जाता है।”
“यदि प्रश्नकुंडली में कर्मभाव मजबूत हो, उसके स्वामी का संबंध लाभ या सेवा भाव से बने और चंद्रमा अनुकूल स्थिति में हो, तो रोजगार के विषय में आशा मजबूत मानी जा सकती है।
यदि शनि संबंधित भावों को पीड़ित कर रहा हो तो विलंब संभव माना जाता है; लेकिन केवल शनि देखकर यह निर्णय नहीं करना चाहिए कि नौकरी नहीं मिलेगी।”
उन्होंने कहा—
“कई बार शनि केवल इतना कहता है—
‘समय लगेगा, लेकिन तैयारी मत छोड़ो।’”
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🌍 गोचर में शनि का प्रभाव :
अब ज्योतिषाचार्य ने वर्तमान ग्रह-गति की ओर संकेत करते हुए कहा—
“गोचर शनि को जन्मकुंडली से अलग करके नहीं देखना चाहिए।
शनि लगभग ढाई वर्ष एक राशि में रहता है, इस लिए उसका गोचर जीवन में लंबे समय तक प्रभाव का अनुभव करा सकता है।”
“जब शनि जन्मकुंडली के दशम भाव, दशमेश, चंद्र राशि या रोजगार संबंधी महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्रभावित करता है, तब व्यक्ति को काम के क्षेत्र में अधिक जिम्मेदारी, दबाव, पुनर्गठन, नौकरी परिवर्तन या स्थिरता के लिए अधिक मेहनत का अनुभव हो सकता है।”
“लेकिन यही समय किसी व्यक्ति को पद, अनुभव और अधिकार भी दे सकता है।
इस लिए शनि का गोचर केवल अशुभ मानना उचित नहीं।”
आरव ने पूछा—
“गुरुदेव, फिर लोग शनि से इतना डरते क्यों हैं?”
ज्योतिषाचार्य बोले—
“क्योंकि मनुष्य तुरंत फल चाहता है।
शनि तुरंत फल नहीं देता।
शनि पहले परीक्षा लेता है—
समय की, धैर्य की, ईमानदारी की और जिम्मेदारी की।
जो व्यक्ति परीक्षा में टिकता है, उसे अनुभव मिलता है।
अनुभव से योग्यता आती है और योग्यता से स्थायी सफलता।”
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🏢 नौकरी और व्यवसाय में शनि :
“रोजगार का अर्थ केवल नौकरी नहीं है,” गुरु ने समझाया।
“शनि का संबंध ऐसे कार्यों से माना जाता है जिनमें परिश्रम, अनुशासन, तकनीक, निर्माण, मशीनरी, उद्योग, लोहे, भूमि, श्रमिक व्यवस्था, प्रशासन, सुरक्षा, अनुसंधान, सेवा और दीर्घकालीन जिम्मेदारी शामिल हो सकती है।”
“यदि कुंडली में शनि और बुध का संबंध हो तो तकनीकी, गणना, लेखा, मशीन, इंजीनियरिंग या व्यवस्थित कार्यों की क्षमता देखी जा सकती है।
सूर्य से संबंध हो तो प्रशासनिक या अधिकार संबंधी क्षेत्र का संकेत मिल सकता है।
मंगल से संबंध हो तो तकनीकी, इंजीनियरिंग, मशीनरी, निर्माण अथवा श्रमप्रधान क्षेत्र सक्रिय हो सकते हैं।
लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा पूरी कुंडली देखकर ही करना चाहिए।”
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🙏🏻 शनि देव के नियम :
गुरु ने आरव से कहा—
“यदि शनि की कृपा चाहते हो तो केवल पूजा मत करो, अपने कर्म भी सुधारो।”
उन्होंने कुछ सरल नियम बताए—
पहला नियम —
समय का सम्मान करो।
नौकरी में समय पर पहुँचना, कार्य समय पर पूरा करना और वचन निभाना शनि के अनुशासन से जुड़ा व्यवहार माना जा सकता है।
दूसरा नियम —
श्रमिक और कमजोर व्यक्ति का अपमान न करो।
शनि को श्रम और उपेक्षित वर्गों से संबंधित माना जाता है।
इस लिए किसी गरीब, मजदूर, वृद्ध या जरूरतमंद के साथ अन्याय न करना महत्वपूर्ण है।
तीसरा नियम —
छल और बेईमानी से बचो।
कर्मफल की धारणा में गलत कर्म का परिणाम व्यक्ति को किसी न किसी रूप में प्राप्त होने की बात कही जाती है।
चौथा नियम —
शनिवार को संयम और सेवा।
सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या आवश्यक सहायता देना धार्मिक परंपरा में पुण्यकारी माना गया है।
पाँचवाँ नियम —
शनि मंत्र का जप।
परंपरा में “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जाता है।
संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, नियमितता और सदाचार है।
छठा नियम —
हनुमान उपासना।
शनि संबंधी भय या मानसिक तनाव में अनेक भक्त हनुमान जी की उपासना करते हैं।
शनिवार या मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धानुसार किया जा सकता है।
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🌸 शनि का संदेश :
कुछ महीनों बाद आरव को एक ऐसी नौकरी मिली जिसमें शुरुआत में वेतन बहुत अधिक नहीं था, लेकिन काम स्थायी था।
उसने मेहनत की।
पहले उसे छोटे कार्य मिले, फिर जिम्मेदारी बढ़ी।
कुछ वर्षों बाद वही व्यक्ति उस संस्था में महत्वपूर्ण पद पर पहुँच गया।
एक दिन वह फिर अपने गुरु के पास गया।
उसने कहा—
“गुरुदेव! अब मुझे समझ आया कि शनि देव ने मेरी नौकरी रोकी नहीं थी।
उन्होंने मुझे तैयार किया था।”
गुरु ने कहा—
“यही शनि का रहस्य है।
शनि डराने के लिए नहीं, कर्म का मूल्य समझाने के लिए हैं।”
उन्होंने अंतिम बात कही—
“जन्मकुंडली में शनि शुभ हो तो उसका फल परिश्रम के बाद स्थिरता के रूप में दिखाई दे सकता है।
पीड़ित हो तो संघर्ष और विलंब दिखाई दे सकता है।
प्रश्नकुंडली में वह रोजगार के प्रश्न में समय, बाधा और धैर्य का संकेत दे सकता है।
गोचर में वह कर्मक्षेत्र को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
लेकिन किसी भी स्थिति में केवल एक ग्रह देखकर रोजगार का अंतिम निर्णय नहीं करना चाहिए।”
“दशम भाव कर्म बताता है, षष्ठ भाव सेवा और संघर्ष को दिखाता है, द्वितीय भाव धन को, एकादश भाव लाभ को; और इन सबके साथ दशा, अंतर्दशा, ग्रहबल तथा गोचर का समन्वित विचार ही उचित ज्योतिषीय निर्णय देता है।”
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अंत में गुरु ने कहा—
«“जिसने कर्म से मित्रता कर ली, उसके लिए शनि शत्रु नहीं रहते।
जो धैर्य से चलता है, शनि उसे अनुभव देते हैं।
जो अनुभव से सीखता है, शनि उसे योग्यता देते हैं।
और जो योग्यता के साथ ईमानदारी रखता है, उसके लिए वही शनि स्थायी सफलता का आधार बन सकते हैं।”»
इस लिए रोजगार में बाधा आने पर निराश होने के बजाय अपनी जन्मकुंडली में दशम भाव, दशमेश, षष्ठ भाव, षष्ठेश, एकादश भाव, एकादशेश, शनि, सूर्य, बुध, गुरु, दशा - अंतर्दशा और वर्तमान गोचर का समग्र अध्ययन करवाना चाहिए।
शनि देव का मूल संदेश यही है—
कर्म करो, समय का सम्मान करो, अन्याय से बचो, श्रम का सम्मान करो, सेवा करो और परिणाम के लिए धैर्य रखो।
🌸 ॐ शं शनैश्चराय नमः। 🌸
🪐 शनि देव महाराज की कृपा से सभी योग्य कर्मशील लोगों को स्थिर रोजगार, सम्मान, सफलता और जीवन में उचित कर्मफल प्राप्त हो।
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!!!!! शुभमस्तु !!!
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद..
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
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