सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
चंद्रमा का विभिन्न भावों :
चंद्रमा का विभिन्न भावों ...!
चंद्रमा के विभिन्न भावों का प्रभाव, महत्व, फल, नियम एवं उपाय !
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री अथर्ववेद तथा भविष्य, नारद, अग्नि और विष्णु पुराण की धार्मिक परंपराओं से प्रेरित एक ज्योतिषीय कथा !
चंद्रमा का विभिन्न भावों ...!
चंद्रमा का विभिन्न भावों में फल, दोष और निवारण :
चन्द्र का पहले भाव में फल :
सामान्य तौर पर कुण्डली का पहला घर मंगल और सूर्य के प्रभाव के अंतर्गत आता है....!
जब चंद्रमा यहां स्थित हो तो यह भाव मंगल, सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त प्रभाव में होगा...!
ये तीनों आपस में मित्र हैं और तीनो यहां की स्थिति के अनुसार परिणाम देंगे...!
सूर्य और मंगल इस घर में स्थित चंद्रमा को पूर्ण सहयोग देंगे...!
ऐसा जातक रहमदिल होगा और उसके भीतर उसकी मां के सभी लक्षण और गुण मौजूद होंगे...!
वह या तो भाइयों में बडा होगा या फिर उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जाता होगा...!
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| { Size | 60L x 60W cm |
| Product Dimensions | 60L x 60W Centimeters |
| Item Weight | 750 Grams |
| Number of Items | 1 |
| Orientation | Round |
| Shape | Round |
| Theme | Floral |
| Recommended Uses For Product | Decoration, Hangers, Holder, Wall |
| Frame Type | Unframed |
| Wall art form | Wall Hanging Decor } |
{ About this item
- Specifications: Size: 60 cm x 60 cm (24 inches) | Material: High-quality MDF wood (engineered wood) | Finish: Laser-cut | Origin: Made in India | Color: Golden
- Enhance energy and positivity with Om wall decor. This Om Wall Hanging gift item is a stunning addition to temple, office, home decor, perfectly complementing a nature-inspired ambiance. Om helps to energize our mind and body. It creates a blissful and stress-free environment.
- This Om Wall Hanging is an ideal choice for enhancing the ambiance of your living room, bedroom, kitchen, office, hotel, and dining room. It is particularly suitable for decoration during auspicious occasions such as Ganesh Chaturthi & Diwali.
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- Hand-crafted and meticulously constructed using top-notch materials. This piece of art surety exceptional durability for long-lasting enjoyment. }
“जब जन्मकुंडली के प्रथम भाव अर्थात लग्न में चंद्रमा स्थित हो, तब व्यक्ति का मन उसके व्यक्तित्व का प्रमुख आधार बन जाता है।
ऐसा व्यक्ति संवेदनशील, कल्पनाशील, लोगों की भावनाओं को समझने वाला तथा परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने वाला हो सकता है।”
यदि चंद्रमा शुभ और बलवान हो तो आकर्षण, लोकप्रियता, बुद्धिमत्ता, स्मरणशक्ति और सामाजिक संपर्क बढ़ सकते हैं।
व्यक्ति के चेहरे पर सौम्यता और व्यवहार में अपनापन दिखाई दे सकता है।
जातक पर उसकी मां का आशिर्वाद हमेशा रहता है साथ ही वह अपनी मां को प्रसन्न रखता है ऐसा करने से वह उन्नति करता है और उसे हर प्रकार से समृद्धि मिलती है....!
बुध से सम्बंधित चीजें और रिश्तेदार जैसे साली और हरा रंग आदि जो चंद्रमा के लिए हानिकार है...!
जातक के लिए भी प्रतिकूल प्रभाव साबित होगें इस लिए बेहतर है उन लोगों से दूर रहें...!
दूध से खोया बनाना या लाभ के लिए दूध बेचना आदि कृत्य पहले भाव में स्थित चंद्रमा को कमजोर करते हैं...!
इस का मतलब यदि जातक स्वयं भी इस प्रकार के कामों सें संलग्न होता है तो जातक का जीवन और सम्पत्ति नष्ट होने लगती है....!
ऐसे में जातक को दूध और पानी मुफ्त में बांटना चाहिए इससे आयु बढती और चारो ओर से समृद्धि आती है...!
ऐसा करने से जातक को 90 साल की दीर्घायु मिलती है और उसे सरकार से सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है...!
दूध से खोया बनाना या लाभ के लिए दूध बेचना आदि कृत्य पहले भाव में स्थित चंद्रमा को कमजोर करते हैं...!
इस का मतलब यदि जातक स्वयं भी इस प्रकार के कामों सें संलग्न होता है तो जातक का जीवन और सम्पत्ति नष्ट होने लगती है....!
ऐसे में जातक को दूध और पानी मुफ्त में बांटना चाहिए इससे आयु बढती और चारो ओर से समृद्धि आती है...!
ऐसा करने से जातक को 90 साल की दीर्घायु मिलती है और उसे सरकार से सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है...!
उपाय: सोमवार को शिवजी का पूजन, चंद्र दर्शन, “ॐ सोम सोमाय नमः” का जाप और माता का सम्मान शुभ माना जाता है।
चन्द्र का दूसरे भाव में फल :
दूसरे भाव चंद्रमा स्थित होने पर वह भाव बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव में होगा....!
क्योंकि दूसरा घर बृहस्पति का पक्का घर होता है और दूसरी राशि बृषभ का स्वामी शुक्र होता है...!
यहां स्थित चंद्रमा बहुत अच्छे परिणाम देता है. चंद्रमा इस घर में बहुत मजबूत हो जाता है क्योंकि...!
उसे शुक्र के खिलाफ बृहस्पति का अनुकूल समर्थन मिल जाता है इस कारण यहां का चंद्रमा अच्छे परिणाम देता है...!
यहाँ चंद्रमा होने पर व्यक्ति की वाणी में मधुरता तथा परिवार के प्रति भावनात्मक लगाव दिखाई दे सकता है।
धन के मामले में चंद्रमा की प्रकृति के कारण आय - व्यय में परिवर्तनशीलता भी देखी जा सकती है।
ऐसे में जातक के बहनें नहीं होतीं लेकिन निश्चित रूप से भाइयों की प्राप्ति होती है...!
लेकिन यदि ऐसा नहीं होता तो जातक की पत्नी के भाई अवश्य होते हैं...!
जातक को पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा जरूर मिलता है...!
ग्रहों की स्थिति जो भी हो लेकिन यहां स्थित चंद्रमा जातक के वंश को जरूर बढाता है...!
जातक अच्छी शिक्षा प्राप्त करता है जिससे उसके भाग्योदय में सहयोग मिलता है...!
चंद्रमा की चीजों से जुड़े व्यवसाय लाभप्रद साबित होंगे...!
जातक एक प्रतिष्ठित शिक्षक भी हो सकता है...!
बारहवें भाव में स्थित केतू यहां के चंद्रमा को ग्रहण लगाने वाला रहेगा जो जातक को अच्छी शिक्षा या पुत्र से वंचित कर सकता है...!
उपाय: माता - पिता का सम्मान, भोजन का दान और सोमवार को सफेद वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है।
चन्द्र का तीसरे भाव में फल :
तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा पर मंगल और बुध का भी प्रभाव होता है।
यहां स्थित चंद्रमा लंबा जीवन और अत्यधिक धन देने वाला होता है।
तृतीय भाव साहस, पराक्रम, छोटे भाई - बहन, लेखन, संचार और प्रयासों से संबंधित है।
यहाँ चंद्रमा व्यक्ति को कल्पनाशील लेखक, वक्ता, कलाकार या संचार से जुड़े कार्यों की ओर आकर्षित कर सकता है।
व्यक्ति अपने प्रयासों में मन और भावना को जोड़ता है।
लेकिन चंद्रमा चंचल होने के कारण प्रयासों में निरंतरता बनाए रखना कभी - कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा के कारण यदि नवमें और ग्यारहवें घर में कोई ग्रह न हों तो मंगल और शुक्र अच्छे परिणाम देंगें...!
जातक शिक्षा और सीखने की प्रगति के साथ, जातक के पिता की अर्थिक स्थिति खराब होगी लेकिन इससे जातक की शिक्षा और सीखने की प्रगति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडेगा...!
यदि केतु कुण्डली में किसी शुभ जगह पर है और चंद्रमा पर कोई दुश्प्रभाव नहीं डाल रहा है तो जातक की शिक्षा अच्छे परिणाम देने वाली और हर तरीके में फायदेमंद साबित होगी...!
यदि चंद्रमा हानिकर है...!
तो यह बडी धनहानि और खर्चे का कारण हो सकता है यह घटना नवमें भाव में बैठे ग्रह की दशा या उम्र में हो सकती है...!
उपाय: नियमित साधना, माता का आशीर्वाद और सोमवार को जल अर्पण करना शुभ माना जाता है।
+++ +++
चन्द्र का चौथे भाव में फल :
चौथे भाव में स्थित चंद्रमा पर केवल चंद्रमा का ही पूर्णरूपेण प्रभाव होता है क्योंकि वह चौथे भाव और चौथी राशि दोनो का स्वामी होता है...!
यहां चन्द्रमा हर प्रकार से बहुत मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है...!
चंद्रमा से संबन्धित वस्तुएं जातक के लिए बहुत फायदेमंद साबित होती हैं...!
मेहमानों को पानी की के स्थान पर दूध भेंट करें. मां या मां के जैसी स्त्रियों का पांव छूकर आशिर्वाद लें. चौथा भाव आमदनी की नदी है जो व्यय बढानें के लिए जारी रहेगी...!
दूसरे शब्दों में खर्चे आमदनी को बढाएंगे. जातक प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्ति होने के साथ - साथ नरम दिल और सभी प्रकार से धनी होगा...!
यदि चंद्रमा हानिकर है...!
जातक को अपनी माँ के सभी लक्षण और गुण विरासत में मिलेंगे और वह जीवन की समस्याओं का सामना किसी शेर की तरह साहसपूर्वक करेगा...!
जातक सरकार से सहयोग और सम्मान प्राप्त करेगा साथ में वह दूसरों को शांति और आश्रय प्रदान करेगा...!
जातक निश्चित तौर पर अच्छी शिक्षा प्राप्त करेगा...!
यदि बृहस्पति 6 भाव में हो और चंद्रमा चौथे भाव में तो जातक को पैतृक व्यवसाय फायदा देगा....!
यदि जातक के पास कोई अपना कीमती सामान गिरवी रख जाएगा तो वह उसे मांगने के लिए कभी नहीं आएगा...!
यदि चंद्रमा चौथे भाव में चार ग्रहों के साथ हो तो जातक आर्थिक रूप से बहुत मजबूत और अमीर होगा...!
पुरुष ग्रह जातक की मदद पुत्र की तरह करेंगे और स्त्री ग्रह पुत्रियों की तरह...!
तो यह बडी धनहानि और खर्चे का कारण हो सकता है यह घटना नवमें भाव में बैठे ग्रह की दशा या उम्र में हो सकती है...!
रात में दूध का सेवन जहर के समान कार्य करता है. यदि जातक चिकित्सक है तो उसके द्वारा रोगी को दी जाने वाली दवाएं यदि शुष्क हों तो मरीज पर इलाज का जादुई प्रभाव पड़ेगा. यदि जातक सर्जन है तो वह सर्जरी के माध्यम से वह महान धन और प्रसिद्धि अर्जित करेगा...!
यदि दूसरा और चौथा भाव खाली हो तो जातक पर पैसों की बरसात होगी. यदि शनि पहले भाव में स्थित हो तो विपरीत लिंगी के कारण जातक का विनाश हो जाता है....!
“वत्स! चतुर्थ भाव चंद्रमा के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भाव माता, घर, भूमि, वाहन, सुख और मानसिक शांति से संबंधित माना जाता है।”
शुभ चंद्रमा यहाँ गृह - सुख, माता का स्नेह, घर - परिवार से लगाव तथा मानसिक संतोष प्रदान कर सकता है।
व्यक्ति को सुंदर घर, जल या भूमि से संबंधित विषयों में रुचि हो सकती है।
यदि चंद्रमा पीड़ित हो तो घर में मानसिक तनाव, माता से चिंता या मन की बेचैनी बढ़ सकती है।
उपाय: माता की सेवा, शिव - पार्वती पूजन, घर में शांति बनाए रखना और सोमवार को दूध या चावल का दान करना परंपरागत उपाय माने जाते हैं।
Resin 7" Animal Lion Sculpture Statue Handcrafted Decorative Showpiece Idol for Home & Office Decor Figurine (Brown)
| { Theme | Abstract |
| Brand | Profound Craft |
| Colour | Golden_Lion |
| Style | Antique |
| Material | Resin |
| Occasion | Congratulations, Engagement, Farewell, Friendship Day, New Year |
| Product Dimensions | 24L x 7W x 18H Centimeters |
| Cartoon Character | Animal |
| Specific Uses For Product | Indoor |
| Number of Pieces } |
{ About this item
- Product Dimensions:- Length- 24 cm, Width- 7 cm, Height- 18 cm
- Product Material: Resin || Color - Brown || Package Content - 7" Animal Lion Sculpture Statue
- This resin 7" animal loin sculpture statue handcrafted decorative showpiece idol for home & office decor collectible figurine
- Suitable for any interior design pattern, home decor or collection! Decorate your table or decorate your dressing table with this amazing. || Gift Suggestions : Diwali, Christmas, Housewarming, Birthday, Anniversary.
- Care Instruction - Don't wash, use dry cotton cloth to remove dirt }
चन्द्र का पांचवें भाव में फल :
पांचवें भाव में स्थित चंद्रमा के परिणाम में सूर्य, केतू और चंद्रमा का प्रभाव रहेगा...!
जातक हमेशा सही तरीके से पैसा कमाने की कोशिश करेगा, वह कभी भी गलत तरीके नहीं अपनाएगा...!
वह व्यापार में तो अच्छा नहीं कर पाएगा लेकिन निश्चित रूप से सरकार की ओर से सम्मान और सहयोग प्राप्त करेगा...!
उसके द्वारा समर्थित कोई भी जीत जाएगा...!
यदि केतू सही स्थान पर बैठा है और फायदेमंद है तो जातक के पांच पुत्र होंगें चाहे चंद्रमा किसी अशुभ ग्रह के प्रभाव में ही क्यों न हो....!
अपनी शिक्षा और सीख के कारण जातक दूसरों के कल्याण के लिए अनेक उपाय करेगा लेकिन दूसरे उसके लिए अच्छा नहीं करेंगे...!
अगर जातक लालची और स्वार्थी हो जाता है तो वह नष्ट हो जाएगा. यदि जातक अपनी योजनाओं को एक गुप्त रखने में विफल रहता है...!
उसके अपने ही लोग उसे नुकसान पहुंचाएंगे...!
पंचम भाव बुद्धि, विद्या, संतान, मंत्र, प्रेम, रचनात्मकता और पूर्व पुण्य से संबंधित माना जाता है।
यहाँ चंद्रमा कल्पनाशक्ति और रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ा सकता है।
व्यक्ति ज्योतिष, साहित्य, कला, संगीत, शिक्षा या आध्यात्मिक विषयों में रुचि ले सकता है।
संतान के प्रति अत्यधिक भावनात्मक लगाव भी हो सकता है।
चंद्रमा पीड़ित होने पर प्रेम और भावनाओं में उतार - चढ़ाव संभव माना जाता है।
उपाय: विद्यार्थियों की सहायता, गौसेवा, मंत्र जाप तथा बच्चों के प्रति प्रेम और सद्व्यवहार शुभ माना जाता है।
चन्द्र का छठें भाव में फल :
यह भाव बुध और केतु से प्रभावित होता है।
इस घर में स्थित चंद्रमा दूसरे, आठवे, बारहवें और चौथे घरों में बैठे ग्रहों से प्रभावित होता है...!
ऐसा जातक बाधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त करता है और अपनी शैक्षिक उपलब्धियों का लाभ उठाने के लिए उसे बहुत संघर्ष करना पडता है...!
यदि चंद्रमा छठवें, दूसरे, चौथे, आठवें और बारहवें घर में होता है तो यह शुभ भी होता है ऐसा जातक किसी मरते हुए के मुंह में पानी की कुछ बूंदें डालकर उसे जीवित करने का काम करता है...!
यदि छठवें भाव में स्थित चंद्रमा अशुभ है और बुध दूसरे या बारहवें भाव में स्थित है तो जातक में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति पाई जाएगी...!
ठीक इसी तरह यदि चन्द्रमा अशुभ है और सूर्य बारहवें घर में है तो जातक या उसकी पत्नी या दोनो ही आंख के रोग या परेशानियों से ग्रस्त होंगे...!
यहाँ चंद्रमा व्यक्ति को दूसरों की सेवा करने वाला बना सकता है।
यदि चंद्रमा मजबूत हो तो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से निकलने की क्षमता रख सकता है।
लेकिन निर्बल चंद्रमा होने पर चिंता, मानसिक दबाव और छोटी - छोटी बातों को लेकर परेशान होने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
उपाय: जरूरतमंदों की सेवा, स्वच्छता, संयमित जीवन और सोमवार को शिवपूजन उपयोगी माने जाते हैं।
+++ +++
चन्द्र का सातवें भाव में फल :
सातवां घर शुक्र और बुध से संबंधित होता है...!
जब चंद्रमा इस भाव में स्थित होता है तो परिणाम शुक्र, बुध और चंद्रमा से प्रभावित होता है...!
शुक्र और बुध मिलकर सूर्य का प्रभाव देते हैं...!
पहला भाव सातवें को देखता है नतीजन पहले घर से सूर्य की किरणे सातवें भाव में बैठे चंद्रमा को सकारात्म रूप से प्रभावित करती हैं जिसका मतलब है कि चंद्रमा से संबंधित चीजों और रिश्तेदारों लाभकारी और अच्छे परिणाम मिलेंगे...!
शैक्षिक उपलब्धियां पैसा या धन कमाने के लिए उपयोगी साबित होंगी...!
उसके पास जमीन जायदाद हो या न हो लेकिन उसके पास नकद निश्चित रूप से हमेशा रहेगा...!
उसके पास कवि या ज्योतिषी बनने की अच्छी योग्यता होगी....!
अथवा वह चरित्रहीन हो सकता है और रहस्यवाद और अध्यात्मवाद को बहुत चाहता होगा...!
सातवें भाव में स्थित चंद्रमा जातक की पत्नी और मां के बीच अर्थ संघर्ष देता है जो दूध के व्यवसाय में प्रतिकूल प्रभावी होता है...!
ऐसे में जातक अगर मां का कहना नहीं मानता तो उसे तनाव और परेशानियों का सामना करना पडता है...!
उपाय: जीवनसाथी का सम्मान, विश्वास बनाए रखना, सोमवार का व्रत या शिव - पार्वती पूजन परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है।
चन्द्र का आठवें भाव में फल :
यह भाव मंगल और शनि के अंतर्गत आता है...!
यहां पर स्थित चंद्रमा जातक की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है...!
लेकिन यदि शिक्षा अच्छी है तो जातक की मां का जीवन छोटा होता है...!
लेकिन अक्सर यही देखने को मिलता है कि जातक शिक्षा और मां को खो देता है...!
हालांकि, यदि बृहस्पति और शनि दूसरे भाव में हों तो सातवें घर में बैठे चंद्रमा का बुरा कम हो जाएगा...!
इस भाव में स्थित चन्द्रमा जातक को पैतृद सम्पत्ति से वंचित करता है...!
यदि जातक की पैतृक सम्पत्ति के पास कोई कुंआ या तालाब होता है तो जातक के जीवन में चंद्रमा के प्रतिकूल परिणाम देखने को मिलते हैं...!
उपाय: महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिवपूजन, ध्यान और जरूरतमंदों की सहायता शुभ मानी जाती है।
+++ +++
चन्द्र का नौवें भाव में फल :
नौवां घर बृहस्पति, से सम्बंधित होता है जो चंद्रमा का परममित्र है...!
इस लिए जातक इन दोनों ग्रहों के लक्षण और सुविधाओं को आत्मसात करता है...!
साथ ही अच्छे आचरण, कोमक हृदय, मन से धार्मिक, और धार्मिक कृत्यों तथा तीर्थयात्राओं से प्रेम करने वाला होता है....!
वह 75 वर्षों तक जीवित रहता है. पाचवें घर में स्थित शुभ ग्रह संतान सुख में वृद्धि और धार्मिक कामों में गहन रुचि विकसित करता है...!
तीसरे भाव में स्थित मित्र ग्रह पैसे और धन में काफी वृद्धि करता है...!
उपाय: गुरु का सम्मान, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन, तीर्थ या देवस्थान की सेवा तथा जरूरतमंदों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
चन्द्र का दसवें भाव में फल :
दसवां घर हर तरीके में शनि द्वारा शासित है. यह घर चौथे घर के द्वारा देखा जाता है, जो चंद्रमा द्वारा शासित होता है....!
इस लिए इस घर में स्थित चंद्रमा जातक को 90 साल की लंबी आयु सुनिश्चित करता है...!
चंद्रमा और शनि आपस में शत्रु हैं इस लिए, तरल रूप में दवाओं का सेवन जातक को हमेशा हानिकारक साबित होंगी...!
रात में दूध का सेवन जहर के समान कार्य करता है. यदि जातक चिकित्सक है तो उसके द्वारा रोगी को दी जाने वाली दवाएं यदि शुष्क हों तो मरीज पर इलाज का जादुई प्रभाव पड़ेगा. यदि जातक सर्जन है तो वह सर्जरी के माध्यम से वह महान धन और प्रसिद्धि अर्जित करेगा...!
यदि दूसरा और चौथा भाव खाली हो तो जातक पर पैसों की बरसात होगी. यदि शनि पहले भाव में स्थित हो तो विपरीत लिंगी के कारण जातक का विनाश हो जाता है....!
विशेषकर विधवा जातक के विनाश का कारण बनती है....!
शनि से संबंधित वस्तुएं और व्यवसाय जातक के लिए फायदेमंद साबित होगा...!
उपाय: कर्म में ईमानदारी, जनता की सेवा और सोमवार को शिवपूजन शुभ माना जाता है।
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चन्द्र का ग्यारहवें भाव में फल :
यह घर बृहस्पति और शनि से पूरी तरह प्रभावित होता है. इस घर में स्थित हर ग्रह अपने शत्रु ग्रहों और उनके साथ जुडी बातों को नष्ट कर देता है....!
इस प्रकार यहां स्थित चंद्रमा अपने शत्रु केतू की चीजों को नष्ट कर देता है जैसे जातक के बेटे आदि को. यहां चंद्रमा को अपने शत्रुओं शनि और केतू की संयुक्त शक्ति का सामना करना पडता है...!
जिससे चंद्रमा कमजोर होता है...!
ऐसे में यदि केतू चौथे भाव में स्थित है तो जातक की मां का जीवन खतरे में पडेगा...!
बुध से जुडे व्यापार भी हानिप्रद साबित होंगे....!
शनिवार के दिन से घर का निर्माण या घर की खरीदी चंद्रमा के शत्रु को बलवान बनाते हैं जो जातक के लिए विनाशकारी साबित होगा....!
आधी रात के बाद कन्यादान और शुक्रवार के दिन किसी भी शादी समारोह में शामिल होना जातक के भाग्य को नुकसान पहुंचाएगा...!
उपाय: जरूरतमंदों को भोजन, जलदान और मित्रों के प्रति निष्कपट व्यवहार शुभ माना जाता है।
चन्द्र का बारहवें भाव में फल :
यह घर चंद्रमा के मित्र बृहस्पति का है. यहां स्थित चंद्रमा मंगल और मंगल से संबंधित चीजों पर अच्छा प्रभाव डालता है....!
लेकिन यह अपने दुश्मन बुध और केतु तथा उनसे संबंधित चीजों को नुकसान पहुंचाएगा...!
इस लिए मंगल जिस भाव में बैठा है उससे जुडा व्यापार और चीजें जातक के लिए अत्यधिक लाभकारी रहेंगी...!
ठीक इसी तरह बुध और केतू जिस घर में बैठे हैं....!
उससे जुडा व्यापार और चीजें जातक के लिए अत्यधिक हानिकारक रहेंगी...!
बारहवें घर में स्थित चंद्रमा जातक के मन में अप्रत्याशित मुसीबतों और खतरों को लेकर एक साधारण सा डर पैदा करता है....!
जिससे जातक की नींद और मानसिक शांति भंग होती है...!
यदि चौथे भाव में स्थित केतू कमजोर और पीडित हो तो जातक के पुत्र और मां पर प्रतिकूल असर पडता है...!
उपाय: ध्यान, मंत्र जाप, सेवा, जलदान और सोने से पहले मन को शांत रखना लाभकारी माना जाता है।
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🌕 प्रश्नकुंडली और गोचर में चंद्रमा :
शिष्य ने पूछा—
“गुरुदेव !
क्या केवल जन्मकुंडली में चंद्रमा को देखकर ही फल कहना चाहिए ?”
ऋषि ने उत्तर दिया—
“नहीं वत्स।
ज्योतिष में एक ही ग्रह या एक ही भाव देखकर अंतिम निर्णय नहीं करना चाहिए।”
प्रश्नकुंडली में चंद्रमा प्रश्नकर्ता के मन, चिंता और तत्काल मानसिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
प्रश्न के समय चंद्रमा की राशि, भाव, नक्षत्र, तिथि तथा अन्य ग्रहों से संबंध देखकर प्रश्न की प्रकृति को समझने की परंपरा है।
इसी प्रकार गोचर में चंद्रमा अत्यंत शीघ्र गति से राशि परिवर्तन करता है।
इस लिए उसका प्रभाव सामान्यतः अल्पकालिक मानसिक वातावरण, दैनिक घटनाओं और मनोदशा के संदर्भ में देखा जाता है।
लेकिन किसी भी गोचर का शुभ - अशुभ फल जन्मकुंडली, दशा - अंतरदशा, चंद्र राशि, लग्न, ग्रहबल और संबंधित भावों को देखे बिना निश्चित रूप से नहीं कहा जाना चाहिए।
🌸 चंद्रमा के लिए सामान्य वैदिक उपाय :
ऋषि ने शिष्य को अंतिम उपदेश देते हुए कहा—
“चंद्रमा को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा उपाय मन को शुद्ध करना है।”
परंपरागत रूप से निम्न उपाय किए जाते हैं—
१. सोमवार को भगवान शिव का पूजन करें।
२. शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
३. “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें।
४. माता-पिता तथा विशेष रूप से माता का सम्मान करें।
५. चावल, दूध, सफेद वस्त्र जैसी वस्तुओं का यथाशक्ति दान करें।
६. जरूरतमंदों को भोजन और जल दें।
७. पूर्णिमा की रात्रि में शांत मन से चंद्र दर्शन और ध्यान करें।
८. क्रोध, चिंता और नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण रखें।
९. जल का अपमान न करें और जल संरक्षण करें।
१०. रत्न जैसे मोती धारण करने का निर्णय केवल व्यक्तिगत कुंडली देखकर किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह से ही लें।
अंत में ऋषि ने आकाश की ओर देखते हुए कहा—
“चंद्रमा स्वयं प्रकाश का मूल स्रोत नहीं है, फिर भी वह सूर्य के प्रकाश को धारण करके रात्रि को प्रकाशित करता है।
इसी प्रकार मनुष्य का मन भी ज्ञान, संस्कार और सत्कर्मों का प्रकाश ग्रहण करके जीवन को सुंदर बनाता है।”
शिष्य ने पूछा—
“तो गुरुदेव, क्या चंद्रमा ही हमारे जीवन का भाग्य निर्धारित करता है?”
ऋषि मुस्कुराए—
“नहीं वत्स।
ग्रह संकेत देते हैं, लेकिन मनुष्य के कर्म, विवेक, संस्कार और पुरुषार्थ भी जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं।
कुंडली को भय का कारण नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और उचित मार्गदर्शन का साधन समझना चाहिए।”
उस रात शिष्य ने पहली बार चंद्रमा को केवल आकाश का एक ग्रह नहीं, बल्कि मन की शीतलता, माता के स्नेह, भावनाओं, स्मृति और आत्मचिंतन का प्रतीक समझकर देखा।
पूर्णिमा का चंद्रमा आकाश में चमक रहा था और ऋषि का अंतिम वचन आश्रम में गूँज रहा था—
“जिसने अपने मन को समझ लिया, उसने अपने जीवन की दिशा को समझने का प्रथम चरण पूरा कर लिया।”
🌙 ॐ सोम सोमाय नमः।
🌸 ॐ नमः शिवाय।
🙏🏻 चंद्रदेव एवं भगवान शिव की कृपा से सभी के जीवन में मानसिक शांति, सद्बुद्धि, सुख और समृद्धि बनी रहे।
शुभ चन्द्र व्यक्ति को धनवान और दयालु बनाता है।
सुख और शांति देता है।
!!!!! शुभमस्तु !!!
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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
Shri Maha Prabhuji Bethak Road, JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
सेल नंबर: . + 91- 9427236337 / + 91- 9426633096 ( GUJARAT )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद..
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
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