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Monday, January 5, 2026

सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा :

सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा :

बुध ने मकर राशि में किया प्रवेश, मेष राशि के लोगों को मिल सकता है नौकरी में लाभ : 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र अनुसार इस समय मकर राशि में एक चतुर्ग्रही योग ( 4 ग्रहों की युति ) बन रहा है। 

इस समय मकर राशि में बुध के साथ सूर्य, मंगल, शुक्र भी हैं। 

बुध ग्रह ने 17 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश किया है, ये ग्रह 3 फरवरी तक इसी राशि में रहेगा। 

मकर शनि की राशि है और बुध-शनि के बीच मित्रता का भाव है। 

जाम खंभालिया गुजरात से ज्योतिषाचार्य  पंडारामा राज्यगुरू प्रभु वोरिया से जानिए सभी 12 राशियों के लिए दिन कैसा रह सकता है । 




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मेष राशि :

मेष राशि बुध आपके दसवें भाव में है। 

कार्यक्षेत्र में आपकी वाणी का प्रभाव बढ़ेगा। 

नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। 

व्यापारियों के लिए ये समय नई योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने का है।


वृषभ राशि :

वृषभ राशि नवम भाव में बुध आपके लिए शुभ है। 

उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिलेगी। 

धार्मिक यात्राओं के योग हैं और अटके हुए कानूनी या सरकारी काम इस समय में पूरे हो सकते हैं।


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मिथुन राशि :

मिथुन राशि आठवें भाव में बुध के आने से आपको रिसर्च के कामों में लाभ होगा। 

अचानक धन लाभ की संभावना है, लेकिन सेहत का ध्यान रखें। 

वाणी पर नियंत्रण रखें, वर्ना करीबी रिश्तों में गलतफहमी हो सकती है।

विपरीत लिंगी आपसे काफी आकर्षित रहेंगे। 

इस से आप काफी प्रसन्न रहेंगे। 

दान - पुण्य में आप रुचि लेंगे। 

सन्तान की शिक्षा में काफी अच्छी उन्नति हो सकती है। 

आपके ऊपर कार्यभार काफी ज्यादा रहेगा फिर भी आप बखूबी इसका प्रयोग कर पायेंगे। 

इस माह कानूनी मुकदमों से जुड़े मामलों में विजय मिलने की सम्भावना बन रही है। 

महीने का उत्तरार्ध महत्वपूर्ण कार्यों के लिये उपयुक्त है।


कर्क राशि :

कर्क राशि सातवें भाव में बुध है, ये व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देगा। 

जीवनसाथी से रिश्ता बेहतर होगा। 

यदि आप नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या नई पार्टनरशिप करना चाहते हैं, तो ये समय लाभदायक रहेगा।


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सिंह राशि :

सिंह राशि छठे भाव में बुध के आने से शत्रुओं पर विजय मिलेगी। 

प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम मिलेंगे। 

हालांकि, कर्ज के लेनदेन से बचें और अपने बजट पर नियंत्रण रखें। 

काम का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है।

महीने के पूर्वार्ध भाग में आपको थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा। 

गठिया और वायु विकार में वृद्धि होगी। 


कन्या राशि :

कन्या राशि पांचवें भाव में बुध के आने से रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। 

शेयर बाजार या निवेश से लाभ हो सकता है। 

प्रेम संबंध में स्पष्टता आएगी और आप अपने विचारों को बेहतर ढंग से व्यक्त कर पाएंगे।

इस महीने पैसे उधार देने से आपको बचना चाहिये। 

आरोप - प्रत्यारोप के कारण मैत्री सम्बन्ध प्रभावित हो सकते हैं। 

जीवनसाथी का स्वास्थ्य कमजोर रहने की आशंका है। 

रियल एस्टेट से जुड़े प्रकल्पों में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

यद्यपि इसे आप जल्द ही सुलझा भी लेंगे। नींद भरपूर मात्रा में अवश्य लें। 

अपनी जीवनशैली और खानपान में शुद्धता का ध्यान रखें।




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तुला राशि :

तुला राशि चौथे भाव में बुध के आने से भूमि या वाहन खरीदने के योग बनेंगे। 

पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा। 

माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। घर से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण निर्णय आप इस समय ले सकते हैं।

शुभ दिनाँक 1, 2, 5, 6, 13, 14, 20, 21, 24, 28, 31

अशुभ दिनाँक  8, 9, 13, 18, 26, 27, 29


वृश्चिक राशि :

वृश्चिक राशि तीसरे भाव में बुध आपके साहस को बढ़ाएगा। 

छोटी दूरी की यात्राएं लाभदायक रहेंगी। 

भाई - बहनों के साथ रिश्ते सुधरेंगे। 

लेखन, मार्केटिंग या पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए यह सुनहरा समय है।


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धनु राशि :

धनु राशि दूसरे भाव में बुध संचित धन में बढ़ोतरी करेगा। 

आपकी वाणी में सौम्यता आएगी, जिससे आप बिगड़े काम बना लेंगे। 

निवेश के लिए ये बहुत अच्छा समय है, खासकर पैतृक संपत्ति से लाभ हो सकता है।

मकर राशि :

मकर राशि बुध आपकी राशि में है। 

यहां 4 ग्रहों की युति आपको सम्मान दिलाएगी। आपका आत्मविश्वास चरम पर होगा। 

व्यक्तित्व में निखार आएगा और समाज में वर्चस्व बढ़ेगा। 

बस थोड़ा धैर्य बनाए रखें।

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कुंभ राशि :

कुंभ राशि बारहवें भाव में बुध खर्चों में बढ़ोतरी करेगा। 

नए संपर्कों से लाभ होने की संभावना है। 

जो लोग विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिल सकती है। 

नींद और मानसिक शांति का ध्यान रखें।


मीन राशि :

मीन राशि ग्यारहवें भाव में बुध आपकी आय के नए स्रोत खोलेगा। 

बड़े भाई - बहनों और मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। 

आपकी लंबे समय से रुकी हुई इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। 

सामाजिक दायरे में आपकी सक्रियता बढ़ेगी।

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आय को बढ़ाने के तरीकों पर विचार करेंगे। 

महीने के द्वितीय सप्ताह में घर में कोई मांगलिक कार्यक्रम हो सकता है। 

पाँचवें सप्ताह के दौरान नौकरीपेशा लोगों को जॉब के नये विकल्प मिल सकते हैं। 

आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आयेगा।

महीने की शुरुआत आपके लिये शुभ नहीं रहेगी। 

विवाह योग्य युवाओं के विवाह की चर्चा हो सकती है।
 
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आपकी सेहत में सुधार होगा। 

सहकर्मियों पर आँख मूँदकर भरोसा न करें। 

नया वाहन खरीद रहे हैं तो समस्या आने की आशंका है। 

प्रिय जन के साथ रोमांचक यात्रा पर जा सकते हैं। 

नेत्र रोगियों को थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा। 

कला जगत से जुड़े लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

12 जनवरी के पहले कोई कानूनी मामला तूल पकड़ सकता है।

शुभ दिनाँक  6, 7, 9, 13, 17, 18, 24, 27

अशुभ दिनाँक  1, 2, 11, 12, 15, 19, 28, 29

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गुरु की महादशा का अनुभव आधारित फल :


जन्मपत्रिका में गुरु यदि पीडित, अकारक, अस्त, पापी अथवा केन्द्राधिपति से दूषित हो तो इसकी दशा में अग्रांकित फल प्राप्त होते हैं। 

यहां मैं पुनः कहता हु की यह फल देखने से पहले आप समस्त प्रकार से यह जांच कर लें कि आपकी
में गुरु की क्या स्थिति है ? 

यह फल आपको तभी प्राप्त होंगे जब गुरु उपरोक्त स्थिति में होगा। 

साथ ही यह भी देखें कि गुरु के साथ किस ग्रह की युति है या किस ग्रह की दष्टि है अथवा गुरु की राशि में कौन सा ग्रह विराजमान है ? 

शुभ ग्रह, लग्नेश या कारक ग्रह की युति अथवा दृष्टि होने पर गुरु के अशुभ फल में निश्चय ही कमी
आयेगी। 

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"जैसा मैंने गुरु के लिये कहा कि यह अपना फल अधिकतर शुभ ही देते है."

परन्तु किसी भी रूप से उपरोक्त स्थिति में होने पर इनके अशुभ फल का रौद्र रूप अच्छे से अच्छे व्यक्ति को भयभीत कर देता है। 

यह अपने कारकत्व भाव में अकेला होने पर कारकत्व दोष से दूषित होते हैं तथा केन्द्र में केन्द्राधिपति दोष से पीड़ित होते है। 

इस लिये यह इन स्थिति के अतिरिक्त पूर्ण रूप से पापी अथवा पीड़ित हो तो इनकी महादशा में तथा इसके साथ इनकी ही अन्तर्दशा में निम्नानुसार फल प्राप्त होते हैं।

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मुख्यतः 

गुरु पत्रिका में वृषभ, मिथुन अथवा कन्या राशि में हो अथवा किसी नीच ग्रह के प्रभाव में हो अथवा गुरु की किसी राशि में कोई नीच या पापी ग्रह बैठा हो अथवा गुरु स्वयं नीचत्व को प्राप्त हो तो जातक को दुर्घटना, अग्नि भय, मानसिक कष्ट या प्रताड़ना, राजदण्ड, आकस्मिक पीड़ा अथवा किसी बड़ी चोरी से हानि का भय होता है। 

इस के अतिरिक्त गुरु किसी त्रिक भाव में हो अथवा त्रिक भाव के स्वामी के साथ हो तो जातक को अत्यन्त कष्ट प्राप्त होते हैं। 

इस में भी यदि इन भावों का स्वामी कोई पाप ग्रह हो तो फिर अशुभ फल की कोई सीमा नहीं होती है। 

नीचे मैं कई स्थान पर दोनों ग्रह ( गुरु तथा जिसका प्रत्यन्तर हो ) के अशुभ योग होने पर अशुभ फल की चर्चा करूंगा। 

उस में आप यह अवश्य देख लें कि उस स्थिति में कोई शुभ ग्रह प्रभाव दे रहा है ? 

यदि शुभ की दृष्टि अथवा युति हो तो अवश्य ही अशुभ फल में कमी आयेगी। 

आने वाली कमी का रूप शुभ ग्रह की शक्ति पर निर्भर करेगा। 

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इस के अतिरिक्त गुरु की महादशा में गुरु का अन्तर शुभ फल नहीं देता है, इसमें यदि।

1 गुरु द्वितीय भाव में हो तो अवश्य ही राजकीय दण्ड अथवा आर्थिक हानि होती है।

2 गुरु तृतीय अथवा एकादश भाव में अकेला हो तो जातक को पश्चिम दिशा की यात्रा अथवा अन्य कष्ट होते हैं।

3 गुरु यदि किसी केन्द्र भाव में हो तो जातक को राजदण्ड अथवा उच्चाधिकारी के कोप के साथ शारीरिक कष्ट होते हैं तथा मान सम्मान में कमी अथवा संतान पक्ष से पीड़ा होती है।

4 गुरु किसी त्रिकोण में हो तो व्यक्ति को स्त्री वर्ग से कष्ट, राजकीय प्रताड़ना तथा कार्यों में अवरोध के साथ अग्नि या दुर्घटना भय होता है।

5 यदि गुरु किसी त्रिक भाव अर्थात् 6 - 8 अथवा 12 भाव में हो तो व्यक्ति को मानसिक कष्ट के साथ अन्य कष्ट भी प्राप्त होते हैं।

6 गुरु यदि तृतीय अथवा एकादश भाव में शनि के साथ हो तो अवश्य शुभ फल प्राप्त होते हैं। 

इस में भी यदि शनि लग्नेश हो तो फिर शुभ फल की कोई सीमा ही नहीं होती है।

7 गुरु के मारकेश होने पर अर्थात् द्वितीय अथवा सप्तम भाव का स्वामी होने पर जातक को स्वयं मृत्यु तुल्य कष्ट अथवा जीवनसाथी को कष्ट प्राप्त होते हैं।

क्रमशः...अगले लेख में गुरु की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा से मिलने वाले फलों के विषय मे चर्चा करेंगे।



समयाभाव के कारण कृपया पोस्ट पर किसी प्रकार के शंका समाधान की अपेक्षा ना रखें। 

गुरु के द्वारा होने वाले रोग :


गुरु एक आकाश तत्वीय ग्रह है। 

गुरु का हमारे शरीर में चरबी, उदर, यकृत, त्रिदोष में विशेषकर कफ पर तथा रक्त वाहिनियों पर अधिकार रहता है। 

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गुरु को वैदिक ज्योतिष शास्त्र  में संतानकारक ग्रह माना गया है। 

जिनकी पत्रिकाओं में गुरु शुभ स्थिति में होता है, वह जातक सदैव इन रोगों से दूर रहता है। 

वह अच्छे विचार का, शारीरिक रूप से हृष्ट - पुष्ट तथा मानसिक रूप से बहुत बली होता है। 

पत्रिका में गुरु यदि पापी अथवा किसी पाप ग्रह से पीड़ित हो तो जातक इन रोगों के अतिरिक्त कर्ण व दंत रोग, अस्थि मज्जा में विकार, वायु विकार, अचानक मूर्छा आ जाना, ज्वार, आंतो की शल्य क्रिया, रक्त विकार के साथ मानसिक कष्ट तथा ऊंचे स्थान से गिरने का भय होता न इन रोगों के साधारणतः गुरु के 4 - 6 - 8 अथवा 12वें भाव में होने पर गोचरवश इन भावों में आने पर ही होने की सम्भावना अधिक होती है। 





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इस के साथ ही ऐसा भी आप न समझें कि यदि आपकी पत्रिका में गुरु पापी है तो यही रोग होंगे। 

रोगों में मुख्य बात यह भी होती है कि गुरु किस भाव किस राशि में स्थित है ? 

यहा पर हम पत्रिका में गुरु किस राशि में होने पर की सम्भावना अधिक होती है, इसकी चर्चा करेंगे। 

आप अपनी पत्रिका में पापी होने पर तुरन्त ही इस निर्णय पर न पहुंच जायें कि आपको यह रोग दोगा आप किसी भी निष्कर्ष पर जाने से पहले अपनी पत्रिका में अन्य योग अवश्य ही होगा, आप किसी भी देख लें।

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मेष राशि में गुरु के होने पर जातक को शिरो रोग अधिक होते हैं। 

यदि इस योग में गुरु पर मंगल अथवा केतू की दृष्टि हो तो किसी दुर्घटना में सिर में बड़ी चोट का योग बन सकता है।

वृषभ राशि में गुरु के प्रभाव से जातक को मुख, कण्ठ, श्वसन तंत्रिका तथा आहार नली में संक्रमण का भय होता है। 

यदि गुरु लग्न में इस राशि में हो तो व्यक्ति के जीवनसाथी को मूत्र संस्थान का संक्रमण तथा स्वयं को उदर विकार की सम्भावना होती है। 

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गुरु के पीड़ित अवस्था में ही यह रोग होते हैं, लेकिन मेरे अनुभव में गुरु पीड़ित हो अथवा नहीं, लेकिन इस राशि में वह वाणी विकार के साथ मुख रोग अवश्य देता है।

मिथुन राशि में गुरु व्यक्ति के कंधों व बांहों पर अधिक कष्ट देता है। 

बुध भी यदि पीड़ित हो तो त्वचा विकार तथा रक्त विकार का योग अधिक बन जाता है। 

यदि गुरु अथवा बुध पर कोई पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक के 32वें वर्ष में किसी दुर्घटना में हाथ कटने का योग भी बन जाता है। 

यहां पर गुरु का बहुत ही अधिक पीड़ित तथा बुध का लग्नेश न होने पर ही यह योग घटित होता है।

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कर्क राशि में गुरु के होने पर जातक को फेफड़ों के रोग, छाती तथा पाचन क्रिया पर असर आता है। 

मैंने देखा है कि यदि गुरु अधिक पीड़ित हो तथा चन्द्र के साथ चतुर्थ भाव व उसका स्वामी भी पीड़ित हो तो जातक कम आयु से ही रक्तचाप का रोगी तथा हृदयाघात का योग अवश्य बनता है। 

यदि लग्न भी कर्क ही हो तो जातक मानसिक कष्ट अधिक पाता है। 

उसे खाने - पीने के मामले में सावधानी रखनी चाहिये। 

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अगर केवल चन्द्र व गुरु ही पीड़ित हों तो जातक को गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी के कारण कुछ समय अस्पताल में बिताना पड़ता है। 

इस लिये ऐसे जातकों को गर्मी के मौसम में पानी का सेवन अधिक करना चाहिये अन्यथा उसको गर्मी के कारण अचानक मूर्छा आ सकती है।

सिंह राशि में यदि गुरु है तो जातक को उदर विकार के साथ हृदयाघात का भी भय रहता है तथा गर्मी में ऐसे जातक को भी उपरोक्त समस्या आ सकती।

कन्या राशि में गुरु के होने पर व्यक्ति आंतों के संक्रमण तथा पेट में जलन से अधिक परेशान रहता है।

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यदि मंगल की दृष्टि हो तो जातक को आंतों की भी क्रिया अथवा अपेन्डिक्स जैसे आपरेशन भी हो सकते हैं। 

यदि गुरु के साथ शुक्र भी विराजमान हो तो नपुंसकता अथवा शीघ्रपतन का भय रहता है। 

यदि शनि की दृष्टि आये तो भी यह रोग तो होना ही है।

तुला राशि में गुरु मूत्र विकार, जनन अंग, गुदा रोग तथा कमर के दर्द परेशान करता है। 

जातक को शीघ्रपतन का रोग अधिक होता है। 

यहां पर मेरा अनुभव है कि इस राशि में गुरु यह रोग देता अवश्य है लेकिन अधिक बली होने की स्थिति में, गुरु यदि सामान्य बली है तो यह रोग कम होते हैं । 





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अगर लग्न भी तुला है तो फिर गुरु जितना कम बली होगा, जातक के लिये उतना ही अच्छा है। 

यदि किसी उपरोक्त स्थिति में रोग हो तो वह किसी के भी कहने से गुरु रत्न को धारण न करे
अन्यथा इन रोगों को तो बल मिलेगा ही साथ ही अस्थि भंग का भी योग निर्मित होगा। 

इस स्थिति में गुरु को पूजा - पाठ से शान्त करना उचित होता है, क्योंकि इस लग्न में गुरु जितना अधिक कमजोर होगा, जातक को उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।

वृश्चिक राशि में गुरु के होने पर व्यक्ति का पाचन संस्थान खराब रहता है। 

मुख्यत: कब्ज अधिक होती है। 

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खट्टी डकार, आहार नली में जलन भी रहती है। 

गुदा रोग भी अधिक होते हैं। 

गुदा रोग भी कब्ज के ही कारण होते हैं। 

यदि मंगल की दृष्टि यहां हो तो फिर गुदा की दो बार शल्य क्रिया तो सामान्य बात है।

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धनु राशि में गुरु कमर से निचले हिस्से में अधिक समस्या देता है जिसमें दर्द, स्नायु विकार अथवा संधिवात जैसे रोग होते हैं। 

इस राशि में गुरु यदि लग्न भाव में होता है तो समस्या और अधिक गम्भीर होती है, हालांकि गुरु यहां लग्नेश होता है लेकिन फिर भी वह यदि किसी दुःस्थान में है तो जातक बहुत शारीरिक कष्ट उठाता
है। 

ऐसे जातकों को खानपान सादा तथा कम करना चाहिये।

मकर राशि में गुरु जातक को कमर तथा पैरों के दर्द से जीवन भर समस्या देता है। 

उसे दीर्घकालीन रोग होते हैं तथा उसके घुटने तो 30 वर्ष की आयु से ही खराब होने लगते हैं। 

स्नायुविकार का योग भी होता है। 

यदि शनि की यहां दृष्टि हो तो रोग कम होते हैं लेकिन पीड़ा तो झेलनी ही होती है।

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कुंभ राशि भी शनि की राशि है। 

गुरु के इस राशि में होने पर जातक का कमर से नीचे का हिस्सा बहुत ही कमजोर होता है। 

उसे उदर रोग व वायु विकार के साथ स्नायुविकार भी होता है। 

मैंने इस योग पर अनुभव किया है कि ऐसे जातक घुटने की समस्या से अधिक पीड़ित रहते हैं। 

यदि यह योग अष्टम भाव में शनि से द्रष्ट हो तो जातक को 35 वर्षायु में बायें घुटने से विकलांगता आती है।

मीन राशि का स्वामी स्वयं गुरु है, इस लिये इस राशि में गुरु के होने से जातक के शरीर में रोग प्रतिकारक क्षमता काफी कम होती है। 

वह मामूली संक्रमण में भी अधिक बीमार होता है। 

ऐसे जातक को उदर रोग, पाचन रस व लार का कम निर्माण तथा थोड़ा ही भोजन करने पर अपच के साथ कण्ठ में जलन जैसी समस्या अधिक आती है। 

इस लिये ऐसे जातको को भोजन अधिक चबा - चबा कर खाना चाहिये। 

बीच - बीच में पानी का प्रयोग भी करना चाहिये। 

गुरु के लग्न भाव में होने पर यह रोग कम होते हैं।

क्रमशः...

अगले लेख में हम रोग भाव मे गुरु के बैठने पर गुरु प्रदत्त विशेष रोगों के विषय मे चर्चा करेंगे।

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समयाभाव के कारण कृपया पोस्ट पर किसी प्रकार के शंका समाधान की अपेक्षा ना रखें। 

गुरु जनित रोगों से मुक्ति के विशेष एवं विस्तृत उपाय अंतिम लेखों के माध्यम से सांझा करेंगे।

न भारतीयो नववत्सरोSयं
 तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् ।
यतो धरित्री निखिलैव माता
 तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।।

यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।

”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:”
अतः पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।

पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।।

* मान मिले सम्मान मिले,खुशियों का वरदान मिले. *
 क़दम-क़दम पर मिले सफलता,डगर-डगर उत्थान मिले. * 
सूरज रोज संवारे दिन को,चाँद मधुर सपने ले आये, * 
हर पल समय दुलारे तुमको,सदियों तक पहचान मिले..... ~!!!

 पाश्चात्य नववर्ष की बहुत बहुत मंगलकामनाये ... 
/\ ॐ नमः शिवाय 
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Sunday, January 4, 2026

सन् 2026 में राशि का वैदिक राशिफल :

सन् 2026 में राशि का वैदिक  राशिफल :

मंगल रहेगा मकर राशि में, जानिए

वैदिक ज्योतिष शास्त्र अनुसार मंगल ने धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर लिया है। 

मंगल का राशि परिवर्तन 16 जनवरी को हुआ। 

मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम का कारक ग्रह है। 

मकर राशि में मंगल के आने से सभी 12 राशियों के लिए इसका असर बदल गया है।  

अब ये ग्रह 23 फरवरी तक इसी राशि में रहेगा। 

जाम खंभालिया गुजरात से ज्योतिषाचार्य पं. पंडारामा राज्यगुरू प्रभु वोरिया से जानिए सभी 12 राशियों के लिए दिन कैसा रह सकता है।

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मेष राशि :

मेष राशि मंगल इस राशि से दसवें भाव में है। 

ये समय आपके करियर के लिए शुभ साबित होगा। 

कार्यक्षेत्र में आपको नई जिम्मेदारियां मिलेंगी और आपके अधिकार बढ़ेंगे। 

यदि आप सरकारी नौकरी या उच्च पद की तैयारी कर रहे हैं, तो सफलता के योग हैं। 

अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें।


वृषभ राशि :

वृषभ राशि मंगल नौवें भाव में है। 

धार्मिक यात्राओं के योग बन रहे हैं और पिता के साथ संबंध में सुधार होगा। 

उच्च शिक्षा के लिए प्रयासरत लोगों को अच्छे अवसर मिलेंगे। 

हालांकि, भाई - बहनों के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है, इस लिए वाणी में मधुरता रखें।


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मिथुन राशि :

मिथुन राशि आपके लिए मंगल का आठवें भाव में है। 

स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का समय है। 

वाहन सावधानी से चलाएं। 

पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में कुछ हलचल हो सकती है। 

अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं, लेकिन शत्रुओं से सावधान रहने की जरूरत है।


कर्क राशि :

कर्क राशि मंगल इस राशि के सातवें भाव में है। 

व्यापारिक साझेदारों के साथ तालमेल सुधरेगा और नए अनुबंध हो सकते हैं। 

वैवाहिक जीवन में तनाव की स्थिति बन सकती है, क्योंकि मंगल के कारण स्वभाव में उग्रता आ सकती है। 

वैवाहिक जीवन में धैर्य से काम लें और अनावश्यक बहस से बचें।


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सिंह राशि :

सिंह राशि छठे भाव में मंगल है। आपके शत्रु पराजित होंगे और पुराने कर्ज या रोगों से मुक्ति मिलेगी। 

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए ये समय स्वर्ण काल जैसा है। 

नौकरी में आपका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहेगा और वरिष्ठ अधिकारी आपकी प्रशंसा करेंगे।


कन्या राशि : 

कन्या राशि मंगल पांचवें भाव में है। छात्रों के लिए ये ऊर्जा से भरा समय है, खासकर जो तकनीकी शिक्षा में हैं। 

प्रेम संबंध में थोड़ा संभलकर चलने की जरूरत है, क्योंकि अहंकार के कारण दूरियां आ सकती हैं। 

संतान पक्ष की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।


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तुला राशि :

तुला राशि आपकी राशि के चौथे भाव में मंगल का आना सुख - सुविधाओं में वृद्धि करेगा। 

आप नया वाहन या संपत्ति खरीदने की योजना बना सकते हैं। 

माता जी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। 

घर के नवीनीकरण पर खर्च हो सकता है। 

कार्यक्षेत्र में आपकी व्यस्तता रहेगी, जिससे पारिवारिक समय में कमी आ सकती है।


वृश्चिक राशि :

वृश्चिक राशि मंगल का गोचर आपके तीसरे भाव में होने से आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी 

छोटे भाई - बहनों का सहयोग मिलेगा और छोटी दूरी की यात्राएं हो सकती हैं। 

संचार और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को बड़ा लाभ मिल सकता है। 

आप अपने निर्णयों को लेकर काफी दृढ़ रहेंगे।


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धनु राशि :

धनु राशि दूसरे भाव में मंगल है, जिससे आपकी वाणी में कठोरता आ सकती है, परिवार में वाद - विवाद संभव है। 

हालांकि, आर्थिक दृष्टि से ये समय निवेश के लिए अच्छा है। 

धन संचय करने में सफल रहेंगे। 

खान - पान पर नियंत्रण रखें, अन्यथा दांतों से जुड़ी समस्या हो सकती है। 


मकर राशि :

मकर राशि मंगल आपकी ही राशि में है। 

आप खुद को ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। 

व्यक्तित्व में निखार आएगा, लेकिन ध्यान रहे कि यह ऊर्जा अति - आत्मविश्वास या गुस्से में न बदले। 

शारीरिक व्यायाम पर ध्यान दें, ताकि इस अतिरिक्त ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग हो सके। 


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कुंभ राशि :

कुंभ राशि बारहवें भाव में मंगल का गोचर आपके खर्चों में बढ़ोतरी कर सकता है। 

बाहरी संपर्कों से लाभ होने की संभावना है। 

जो लोग विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिल सकती है। 

नींद में कमी या आंखों से जुड़ी समस्या हो सकती है। 

कोर्ट - कचहरी के मामलों में सतर्क रहें।


मीन राशि :

मीन राशि ग्यारहवें भाव में मंगल धन लाभ कराएगा। 

आपकी आय के नए स्रोत बनेंगे और लंबे समय से रुकी हुई इच्छाएं पूरी होंगी। 

बड़े भाइयों और मित्रों का भरपूर सहयोग मिलेगा। 

सामाजिक दायरे में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद है।


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शिक्षा और करियर :

यह वर्ष करियर की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रहने वाला है। 

मार्च - अप्रैल के दौरान आप काफी यात्रायें कर सकते हैं। 

शनि की दृष्टि आपकी राशि से नवम भाव पर पड़ेगी जिसके कारण लोन लेकर उच्च शिक्षा लेने वाले जातकों के ऊपर से दबाव कम होगा। 

विद्यार्थी अपनी पढ़ाई को लेकर जिम्मेदार रहेंगे। 

किन्तु नौकरीपेशा लोग अपनी जॉब से असन्तुष्ट हो सकते हैं। 

बार - बार जॉब बदलने का विचार आयेगा। 

बुरे लोगों की संगत से दूर रहें। 

जुलाई से अक्टूबर के बीच आपको रोजगार सम्बन्धी बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं।

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सन् 2026 में मेष राशि का जनवरी माह का मासिक राशिफल :

मेष ( चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ ) शुभ रंग गुलाबी, 

शुभ अंक 1 व 8, 
शुभ धातु तांबा, 
शुभ रत्न मूंगा व पीला पुखराज, 
शुभ दिन मंगलवार ( रवि, सोम, गुरु ), 
इष्ट हनुमान, हनुमान चालीसा का पाठ विशेषफलप्रद।

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शुभमास    वैशाख, ज्येष्ठ, चैत्र, 
सामान्य मास  श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, मार्गशीर्ष, पौष। 

मध्यम मास   फाल्गुन 
अशुभ मास  आषाढ़, कार्तिक, माघ हैं।

मित्र राशि सिंह, तुला, धनु,
शत्रु राशि  मिथुन, कन्या,
व्यक्तित्व  दबंग, क्रोध युक्त व साहसी।

सकारात्मक तथ्य  कुटुम्ब को पालने वाला, चुनौती को स्वीकारने वाला, सदैव क्रियाशील।

नकारात्मक तथ्य  दम्भी, अधैर्यशाली...!

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इस महीने आपके परिवार में प्रेम और सद्भाव का वातावरण रहेगा। 

निर्णय लेने में दूरदर्शिता का परिचय दें। 

वित्तीय मामलों में अनुकूलता रहेगी। 

IT प्रोफेशनल्स के लिये महीना काफी उत्तम है। 

विदेशी कम्पनियों के किसी व्यापारिक प्रकल्प में शामिल हो सकते हैं। 

दाम्पत्य जीवन में परस्पर समर्पण और समन्वय बेहतरीन रहेगा। 

किसी भी कार्य को करने से पूर्व परिवार की सहमति लेना न भूलें। 

दूसरा और चौथा सप्ताह विशेष रूप से शुभ रहेगा।

महीने के शुरुआती सप्ताह में कुछ गलत निर्णय आपको व्यापार में काफी पीछे धकेल सकते हैं। 

पहले और तीसरे सप्ताह में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। 

अजनबी लोगों पर आवश्यकता से अधिक भरोसा न करें, वरना आपको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

सामाजिक बैठकों में एकपक्षीय विचार रखने से बचें। 

कुछ लोग आपकी बेइज्जती करने की कोशिश करेंगे। 

व्यापारिक पार्टनरशिप में किसी कारणवश समस्या हो सकती है। 

तीसरे सप्ताह में बुध आपको महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर कन्फ्यूज कर सकता है।

शुभ तारीख 
3,4,9,10,12,18,19,21,29,30

अशुभ तारीख 
1,2,5,7,13,14,23,24,28,31

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नववर्ष 2026 में बनेगा पंचग्रही राजयोग 
( जनवरी से इन राशियों का चमकेगा भाग्य )

पंडारामा प्रभु वोरिया राजगुरु  बताते हैं कि 2026 के जनवरी के मध्य में एक शुभसंयोग बनने जा रहा है जिसको पंचग्रही योग कहा जाता है। 

यह पंचग्रही योग मकर राशि में बन रहा है 13 जनवरी से 18 जनवरी तक।

★ 13 जनवरी को शुक्र मकर राशि में चले जाएंगे, 
★ 14 जनवरी को सूर्यदेव भी मकर राशि में जाएंगे, 
★ 16 जनवरी मंगल भी इसी राशि में जाएंगे, 
★ 17 जनवरी को बुध भी चले जाएंगे और 
★ 19 जनवरी को चंद्रमा के मकर राशि में 

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जैसे ही ये पाँच ग्रह एकसाथ युति का निर्माण करेंगे, पंचग्रही योग बन जायेगा। 

नए साल 2026 में बनने जा रहे पंचग्रही योग से इन राशियों को फायदा होगा।

वृषभ - पंचग्रही योग से कैरियर में बड़ा बदलाव संभव है, नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है, आत्मविश्वास बढ़ेगा, फैसले आपके पक्ष में रहेंगे।

मिथुन - आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, व्यापारियों को नई डील मिल सकती है, रुका हुआ पैसा वापस आने की संभावना है और नेटवर्किंग से फायदा होगा।

कर्क - मान - सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, सरकारी कामों में सफलता मिल सकती है, नेतृत्व क्षमता निखरेगी और वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।

सिंह - पंचग्रही योग से पुराने तनाव कम होंगे, कैरियर में स्थिरता आएगी और पारिवारिक मामलों में समाधान मिलेगा, निवेश से लाभ संभव है।

तुला - मेहनत का पूरा फल मिलने का समय है, नौकरी और बिजनेस दोनों में ग्रोथ दिखेगी, सेहत में सुधार और मानसिक स्पष्टता रहेगी।

धनु - धनु राशि वालों के लिए पंचग्रही योग भाग्य का साथ लेकर आ रहा है, शिक्षा, यात्रा और धार्मिक कार्यों में सफलता मिलेगी, नई योजनाओं की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है।

कुंभ - कुंभ राशि के जातकों के लिए यह योग बदलाव और उन्नति का संकेत देता है 

नौकरी में स्थान परिवर्तन या नई भूमिका मिल सकती है, आर्थिक मामलों में धीरे - धीरे सुधार होगा।


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जन्मकुंडली का दशम भाव आपकी सफलता का आइना होता है :

★ क्या आप 35+ age के हो गए और अभी भी मनचाही सफलता से वंचित हैं?

★ अच्छे कॉलेज या यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर भी ऊँच स्तर की जॉब नहीं मिली?

★ बड़ी Investment के बाद भी Business अच्छे से नहीं चल रहा?

अगर ऐसा हैं तो यह आर्टिकल सिर्फ और सिर्फ आपके लिए ही है। 

ईश्वर का धन्यवाद करो जो आप इस ब्लॉग पोस्ट तक पहुंच पाए हो।

पंडारामा प्रभु राजगुरु  बताते हैं कि ध्यान से पढ़िए जो मैं आज आपको बताने जा रहा हूँ। 

जन्म कुंडली का दशम भाव ( कर्म भाव ) व्यक्ति के करियर, पेशे, सामाजिक प्रतिष्ठा, यश, और जीवन में मिलने वाली सफलता का "आईना" होता है 

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जो व्यक्ति के कार्यों, महत्वाकांक्षाओं और सार्वजनिक छवि को दर्शाता है 

जिससे पता चलता है कि वह अपने कर्मों से कितनी ऊँचाई हासिल करेगा और उसे समाज में क्या मान - सम्मान मिलेगा।

दशम भाव क्यों है सफलता का आईना ?

1. यह भाव आपके व्यवसाय, नौकरी, करियर के उतार-चढ़ाव, और कार्यक्षेत्र में मिलने वाली सफलता या असफलता का मुख्य कारक होता है।

2. समाज में आपकी छवि, मान-सम्मान, उच्च पद और यश का निर्धारण दशम भाव से होता है।

3. यह आपकी आकांक्षाओं, लक्ष्यों, और उन्हें प्राप्त करने के लिए आपकी मेहनत और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

4. यह आपकी नेतृत्व क्षमता, अधिकार, और ज़िम्मेदारियों को भी दिखाता है।

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ग्रहों और राशियों का प्रभाव :

1. सूर्य, बृहस्पति, शनि: दशम भाव में इन ग्रहों की मजबूत स्थिति व्यक्ति को महत्वाकांक्षी, जिम्मेदार और सफल बनाती है।

2. शुक्र: शिक्षा, कानूनी क्षेत्र, या सामाजिक कार्यों से सफलता दिला सकता है।

3. शनि: कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता देता है, अक्सर विदेश यात्रा और तीर्थयात्राओं से जुड़ा होता है।

4. बुध: लेखन, संचार और बौद्धिक क्षेत्रों में पहचान दिलाता है।

5. लग्न का दशम में होना: यह करियर में बड़ी सफलता और प्रसिद्धि की इच्छा को दर्शाता है, जैसे लग्न का स्वामी दशम भाव में होना।

इस आर्टिकल का सारांश यह है कि दशम भाव आपकी कुंडली का वो हिस्सा है जो बताता है कि आप अपने जीवन में क्या 'करते' हैं और उसका क्या 'फल' मिलता है 

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इस लिए यह आपके कामकाजी / Professional और सामाजिक जीवन की सफलता का सच्चा प्रतिबिंब (आईना ) है।

इस आर्टिकल में आपको सफलता का गहरा राज बताया गया है। 

अगर आप ज्योतिष का ज्ञान नहीं रखते तो फिर आपको हमारे ज्योतिष गुरु से व्यक्तिगत रूप से जन्मकुंडली विश्लेषण लेना चाहिए। 

इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि हर किसी को यह जानकारी मिल सके।
हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 


सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा :

सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा : बुध ने मकर राशि में किया प्रवेश, मेष राशि के लोगों को मिल सकता है नौकरी में लाभ :  वैदिक ज्योतिष शास्त्...