सभी ज्योतिष मित्रो को मेरा निवेदन है..., आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे..., मे किसी के लेखो की कोपी नहि करता..., किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही है..., कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्ता भाई..., और आगे भी नही बढ़ता..., आप आपके महेनत से त्यार होने से बहुत आगे बठा जाता है...,
धन्यवाद......, जय द्वारकाधीश...,
एक ही गोत्र में विवाह की बाधा क्यों ?
एक ही गोत्र में विवाह की बाधा क्यों ?
इस ब्लॉग पोस्ट के अंतर्गत बहुत ही गुण रथ के ऊपर रजिस्ट्रेशन किया जाएगा और आज के समय में जो शक्तियां फैली हुई है...!
उन्हें विधार्थियों को दूर करने के लिए यह ब्लॉग पोस्ट बनाया जा रहा है...!
आप लोग इस ब्लॉग पोस्ट को जब पूरा देखेंगे तब सारी बातें समझ में आएंगी आज का जो विषय हैं...!
एक ही गोत्र में विवाह की मनाही क्यों है संस्थान पर इस का क्या असर पड़ता है....!
इत्यादि विषयों को हम आपके उपस्थित हुए हैं और आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक तौर पर कर देंगे...!
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हमारे शास्त्रों में हमारे ऋषि - मुनियों ने क्या तक चल दिया है...!
सभी विषयों पर चर्चा करेंगे तो आइए अब हम विश्लेषण को आरंभ करते हैं...!
हमारे सनातन धर्म के अंतर्गत वैवाहिक अलार्म सेट करने के पूर्व जब भी घर के बड़े - बुजुर्ग कि लड़की को देखने के लिए या लड़के को देखने के लिए जाते हैं...!
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तो वहां पे भी वह पूछते हैं कि गोत्र के अंतर्गत अब वहां पर किस का किस्सा को प्रकार जानकारी लेते हैं...!
है एक तो जो है कि मां के गोत्र का उसके बाद जाति के गोत्र का तो फिर पिता के गोत्र का यह तीन गोत्र की जानकारी ली जाती है...!
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है अब इसके पीछे कारण क्या है एक लड़का हो या लड़की हो...!
इन दोनों का एक गोत्र क्यों नहीं होना चाहिए अगर एक गोत्र होता है....!
तो यह बहुत और शुभ माना जाता है...!
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वैवाहिक संबंध के लिए का गोत्र से पता चलता है कि...!
आप कौन से वंश से ताल्लुक रखते हैं संबंध रखते हैं...!
शादी के दौरान लड़के व लड़की की मां और दोनों की शादी का गोत्र मिलाया जाता है....!
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इस सभी के गोत्र उन दोनों ही परिवारों के अलग - अलग होने चाहिए....!
ऐसा हमारे विशेषज्ञों का मत है...!
ऐसा हमारे सनातन धर्म ग्रंथों में वर्णित है और वही परिपाटी चली आ रही है...!
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इस के उपरांत इन सभी के गोत्र दोनों ही परिवारों ने अलग - अलग होने चाहिए...!
अगर इन तीनों पुत्रों में से चीनी ऐड का भी गोत्र मिलता है तो उसे भाई - बहन के रूप में देखा जाता है...!
ब्लड का संबंध माना जाता है वंशावली का संबंध माना जाता है...!
कि वह एक कहीं गोत्र के होते हैं ऐसे में उनकी शादी नहीं हो सकती है....!
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कार्यक्रम कि आखिर नहीं देता है के साथ शुभ नहीं माना जाता है इससे पति - पत्नी के बीच में समस्या बढ़ेगी और मन - मुटाव बढ़ेगा...!
वहीं एक ही गोत्र में शादी करने आपके बच्चों को भी परेशानियां झेलना पड़ेगा...!
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अब हम विज्ञान के आधार पर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर भी अगर विचार करते हैं...!
तो विज्ञान कहता है कि एक ही गोत्र होने का सीधा असर शादीशुदा जोड़े के बच्चे पर पड़ता है...!
अनुसंधान के अनुसार जब कोई एक ही वंश में साथी करता है....!
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तो बच्चे में जल से ही गंभीर असाध्य रोग उत्पन्न होने लगता है ऐसी स्थिति में है...!
मतलब आयु का विकल्प होता है शरीर का विकास नहीं होता है...!
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है तो यह खतरा संतान गुरु पर बसे लगता है...!
कि अब हमारे धर्म शास्त्रों के अंतर्गत कि छुट्टियों के अंतर्गत मनुस्मृति का नाम आप लोगों ने सुना होगा मनुस्मृति के अनुसार उसमें लिखा हुआ है...!
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कि एक ही गोत्र में शादी नहीं करनी चाहिए अगर कोई ऐसा करता है...!
तो उसका प्रभाव नकारात्मक होता है दोनों जोड़ों पर साथ ही कई तरह की बीमारियां भी बढ़ जाती है....!
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एक ही गोत्र में विवाह करने से संतान में अनेक प्रकार के दोष उत्पन्न होते हैं,,,!
इतना ही नहीं वह त्रिपंपुरा का माता कि रक्त संबंधों से संबंधित होता है....!
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वह इत्र जो है बहुत बड़ा महत्व रखता है...!
बेहतर परंपरा का यह जो निर्वाह हम सभी लोगों को करना चाहिए...!
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ऐसे में एक ही उम्र में शादी करने से न सिर्फ होने वाली हत्याकांड में सार्वजनिक दोस्तों बल्कि चरित्र और वंशित दोस्त भी उन पर थ्रो सकते हैं....!
संभावनाएं बढ़ जाती है आज के समाज में पर यह आप देख सकते हैं यह ही स्थितियां पाई जा रही है...!
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की सनातन संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह न करने की एक और बड़ी वजह यह है...!
उसको भी वह पतला देना चाहता हूं कि एक ही गोत्र में विवाह होने के कारण जो लड़का और लड़की अर्थात वर और कन्या भाई - बहन होते हैं...!
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क्योंकि उनके पूर्वज एक ही वंश के होते हैं ऐसे में एक गोत्र में विवाह बिल्कुल नहीं करना चाहिए...!
ऐसे में विवाह वर्जित होता है इसमें न शास्त्र सम्मत जाती है और ना ही आज का ज्ञान जो है सहमति दे रहा है...!
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तो मित्रो आज के वीडियो के अंतर्गत संस्था एक ही गोत्र में विवाह की मनाही क्यों है...!
आध्यात्मिक तथ्य एवं कि वैज्ञानिक तथ्यों पर विश्लेषण किए उसका संतान के ऊपर क्या असर पड़ेगा शारीरिक रूप से मानसिक रूप से क्या असर पड़ेगा आशा करता हूं...!
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कि यह जानकारी आप लोगों को उपयोगी होगी और आप लोग और को यह पसंद आया तो आप लोग कमेंट करते हुए लाइक करें...!
और अपने इष्ट मित्रों में शुभचिंतको पर अपने समाज में अधिक से अधिक शेयर करें..!
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ताकि लोग धर्म से दूर हो और अपने संस्कृति को समझे तब देख संस्कार को संजय अपने वह तो को समझते हुए...!
अपने बदलाव यह को सदस्य हुए निर्णय लेते हुए कोई भी व्यक्ति पर पहुंचे और चतुर्दिक विकास करने में सफल हो...!
हर हर महादेव हर जय जय मां अंबे..!
गौत्र किसे कहते है गौत्र का नाम कैसे पत्ता करे ?
हमारे सनातन धर्म के अंतर्गत बहुत से ऐसे व्यक्ति है जिनको अपने गौत्र के बारे में नहीं पता है और वह का महत्त्व क्या है...!
वह की उपयोगिता क्या है इसके बारे में कुछ भी नहीं पता है...!
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तो हमारे सनातन धर्म के अंतर्गत पुराणों में जो शास्त्रों में वर्णित तथ्यों के आधार पर हम शास्त्रों प्रमाणित बातें मित्रों लिए...!
सर्वप्रथम उक्त के बारे में जानकारी प्राप्त किया है में एक ऐसा चीज है....!
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जो कि जिसके माध्यम से हमारी पहचान पहचान जाते हैं...!
हमारे सनातन धर्म बहुत से ही हमारी पहचान अधिक संतान है कि ऋषि के वंशज यहां से ही पता चलता है और यह दो है....!
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कि उपयोगिता जो है हमारे समस्त धार्मिक कार्यों में इस का बड़ा ही महत्व है...!
जैसे पाणिग्रहण संस्कार करना होता है...!
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उसके पूर्वज मिला रोता में दिया हुआ कोई संकल्प लेते हैं...!
तो इसके अंतर्गत कि संघ के जिला प्रधान नियुक्त संकल्प सफल होता है और अगर आप युक्तियुक्त व्याकरण का हक है...!
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यह हक कि अब गाह इसके दो अर्थ होते हैं का का मतलब होता है गए और गांव का मतलब मतलब होता है....!
जो हमारे ऋषि परंपरा से जो हमारे पूर्वजों से ही चला आ रहा है शैतान है इसका यह बोधक है...!
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है तो इसके जो दो अर्थ है गाय और इंद्रियां का व्याकरण में पार्टी ने बतलाया है...!
है और का आधिपत्य पुत्र प्रवीण पुत्र का गोत्र का जो पहले क्या था कि जो हमारे ऋषि - महर्षि होते थे है...!
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तो वह के जंगलों में रहते थे उपासना में रहते थे....!
कि यज्ञ इत्यादि कार्यों में रहते थे तो आसपास के जो गांव रहते थे...!
तो वहां के लोग एकत्रित होते थे जब वह एकत्रित होते थे....!
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तो एकत्रित होने के पश्चात् उनके सिद्धांतों को उनके मतों को बच्चों को थे को अपनाते थे पुलिस को अपनाते हुए जो है...!
वह उनके उसी आधार पर वह गौत्र अपना नाम रखने लगे वह भी चालू हो गई पंसारी की मुख्य रूप से जो साथ का नाम आता है...!
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भारद्वाज गौतम सब्सक्राइब सब्सक्राइब टो मैं इसके ऊपर अब इस का जब विस्तार हुआ तो लगभग 170 से ऊपर जो है गुय चल रही है...!
इस समय और इसका विस्तार तरफ इस ब्लॉग पोस्ट में देख सकते हैं का प्ले लिस्ट में भी पड़ा हुआ है और ब्लॉग पोस्ट पर भी पड़ा हुआ है...!
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आप गोत्र प्रवर चिकित्सा प्रभारी नियुक्त नियुक्त किए हैं आप लोग समझ गए होंगे इस घृणित कि ब्लॉग पोस्ट होती है और घ्र इसकी उपयोगिता यह शादी नहीं कर सकते....!
क्योंकि ऐसा क्यों है कि समाज में माना जाता है पुराणों में वेदों से आता है....!
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कि एक गोत्र में शादी या संबद्ध नहीं कर सकते हैं वह एक संतान होते हैं....!
एक व्यक्ति 21600 के अंतर्गत वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं कर सकते हैं...!
कि युवा ग्रुप के ब्लॉग पोस्ट यही अब हमारे ऋषि ने कि वेद पुराणों में जैसे चंद्रिका है रात्रि है...!
भविष्य पुराण में वर्णित तथ्य हैं अब आप पति ने अपने पुत्र का नाम ही नहीं पता कैसे हो...!
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इस वक्त धार्मिक कार्य में क्या संकल्प में बोलेंगे तो उसके लिए ग्रंथों वेदों पुराणों में युक्त यह तस्वीर व पधि कि जिनको सपने झुकना नहीं पता को अपने व्यवसाय के बारे में पता अपने पूर्वजों के बारे में पता है...!
मतलब स्कूल उनके लिए गया कि थे रैद 2 बताया गया है पुराणों में बताया गया है...!
कि हो तब भी व्यक्ति सभी मनुष्य किसके संस्थान है कश्यप ऋषि की संतान तो वहां पर कश्यप गोत्र का उच्चारण करना चाहिए और उन्हें कश्यप गोत्र के अंतर्गत अपने आप को समझना चाहिए...!
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