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Tuesday, July 22, 2025

राजयोग देते हैं सर्वसुख और जीवन के प्रशिक्षक हैं ये तीनों :

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

राजयोग देते हैं सर्वसुख और जीवन के प्रशिक्षक हैं ये तीनों :


जन्मपत्री में बलवान ग्रह और मजबूत भाव बनाते हैं राजयोग और देते हैं सर्वसुख...!




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श्री वैदिक ज्योतिष शास्त्र अनुसार  किसी की भी जन्मपत्री में ग्रह बलवान हों और भाग्य आदि भाव मजबूत हो, तो व्यक्ति को जीवन का सब सुख स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। 


श्री वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रह और भाव की स्थिति का आकलन करने के लिए अनेक नियम हैं !


जिनको ध्यान में रखकर यह पता लगाया जाता है कि जीवन में सुख और दुःख का क्या अनुपात है।

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हम सभी जानते हैं, जन्मपत्री में बारह घर होते हैं, जिनको भाव भी कहा जाता है, इन्हीं बारह भाव में जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन की समस्त घटनाऐं छिपी हुई होती हैं !

जिन्हें ज्योतिषी ग्रहों की चाल एवं ज्योतिष के अनेक नियमों एवं सिद्धान्तों द्वारा फलादेश के रूप में उजागर करते हैं।
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एक मजबूत ग्रह और भाव दे सकते हैं अच्छे परिणाम-  

श्री वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुछ बुनियादी नियम हैं, जिनसे किसी भी ग्रह की ताकत या मजबूती के बारे में निश्चित रूप से जाना जा सकता है। 


जन्मकुंडली में एक सशक्त भाव व्यक्ति को जीवन में सुरक्षा, स्थिरता और प्रगति की दिशा में सहारा प्रदान करता है। 

जीवन में विकास और विस्तार की संभावनाएं तब बढ़ती हैं जब जन्मकुंडली में घर की स्थिति मजबूत हो। 
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किसी भाव की मजबूती देखने के लिए इस प्रकार विचार करना चाहिए। 

कोई भी ग्रह तभी मजबूत होता है, जब वह निम्न शर्ते पूरी करता है। 

किसी भी भाव का स्वामी, केन्द्र या त्रिकोण में स्थित हो अथवा केन्द्र एवं त्रिकोण का स्वामी उसी भाव में स्थित हो। 

यदि कोई ग्रह केन्द्र भावों में या त्रिकोण भावों में स्थित हो अथवा शुभ ग्रहों के बीच में स्थित हो तो ऐसी अवस्था के कारण उस भाव अथवा ग्रह से संबंधित शुभ फल जातक को प्राप्त होते हैं। 

इसी प्रकार ग्रह अपनी उच्च राशि, मूल त्रिकोण या मित्र राशि में स्थित हो।

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भाव और उसका स्वामी शुभ ग्रहों के मध्य में स्थित हो।


भाव और उसके स्वामी को शुभ ग्रह की दृष्टि मिलती हो।


लग्न का स्वामी लग्नेश मजबूत हो, दसवें भाव के स्वामी या अन्य शुभ ग्रहों के साथ युति हो।


यदि कोई ग्रह अपने स्वयं के घर में स्थित हो या उस पर पूर्ण दृष्टि रखता हो।

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ग्रह या तो शुभ ग्रह के साथ किसी भाव में स्थित हो या उसे उसकी शुभ दृष्टि प्राप्त हो रही है।

यदि कोई ग्रह नवमांश कुंडली में वर्गोत्तम स्थिति में हो, तो ऐसी स्थिति में उस ग्रह एवं भाव से संबंधित शुभ फल व्यक्ति को उस ग्रह की महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा, गोचर आदि के कार्यकाल में मिलती है। 

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इसी को समझकर ज्योतिर्विद फलादेश करते हैं।


जीवन के प्रशिक्षक हैं ये तीनों : 

शनि की मेहनत, राहु की चतुराई और केतु का वैराग्य, जीवन के प्रशिक्षक हैं ये तीनों !

ज्योतिष शास्त्र में जिन नौ ग्रहों का वर्णन किया गया है, उनमें छाया ग्रह राहु - केतु का भी 
विशेष महत्व है। 

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जहां शनि देव व्यक्ति को परिश्रम कराते हैं, राहु चतुराई देता है, वहीं केतु वैराग्य और मोक्ष 
दिलाता है। 


शनि, राहु और केतु को आमतौर पर दुख और कष्ट का कारक माना जाता है, लेकिन यदि 
ये जन्मकुंडली में मजबूत हों तो राजयोग के समान फल देते हैं।


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  1. शनि कराता है मेहनत
  2. राहु देता है चतुराई
  3. केतु वैराग्य की ओर ले जाकर दिलाता है मोक्ष
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शनि के साथ अक्सर राहु - केतु का नाम आता है। 

आमतौर पर शनि, राहु, केतु इन तीनों को दुःख एवं कष्ट का कारक समझा जाता है, जब कि 

ये तीनों जन्मकुंडली में बलवान हों, तो राजयोग के समान फल देते हैं। 

जिस प्रकार राहु और शनि के बीच ज्यादा समानताएं होती हैं, उसी प्रकार केतु और मंगल के 
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बीच में भी एक विशिष्ट संबंध ज्योतिर्विदों ने माना है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी ग्रह कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। 

नवग्रहों में शनिदेव को दंडनायक का पद प्राप्त है, जो व्यक्ति को उसके पूर्व जन्म के कर्मों के 
अनुसार पुरस्कार - दण्ड दोनों देते हैं। 
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छाया ग्रह राहु - केतु का फल भी पूर्वजन्म के अनुसार व्यक्ति को मिलता है। 

राहु व्यक्ति के पूर्व जन्म के गुणों एवं विशेषताओं के आधार पर शुभाशुभ फल देता है। 

आमतौर पर एक आदमी सोचता है कि शनि, राहु, केतु ये तीनों दुःख, कष्ट, रोग एवं आर्थिक परेशानी देने वाले होते हैं पर ऐसा सबकी जन्मकुंडली में नहीं होता। 
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यदि जन्मकुंडली में ये तीनों शुभ स्थिति में हैं तो जातक को लाभ में कमी नहीं होती। 

ये तीनों व्यक्ति को बौद्धिक एवं तकनीकी तौर पर कुशल बना सकते हैं, जिससे इन्हें जीवन में सफलताएं मिलती हैं।

जहां शनि एक पिंड के रूप में मौजूद है, वहीं राहु - केतु छाया ग्रह हैं। 

राहु - केतु की अपनी कोई राशि भी नहीं है इस लिए ये जिस राशि पर बैठते हैं उस पर अपना अधिकार कर लेते हैं। 
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु वृष राशि में उच्च का होता है और वृश्चिक राशि में नीच का। 

राहु - केतु के बारे में ज्योतिषियों में मतांतर है, कुछ ज्योतिषी राहु को मिथुन राशि में उच्च और धनु राशि में नीच का मानते हैं, केतु को धनु में उच्च का मिथुन में नीच का मानते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि चूंकि शनि देव की गति धीमी है, इसलिए इसका शुभाशुभ फल जातक को धीरे - धीरे मिलता है। 
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राहु - केतु अचानक फल देते हैं, अगर राहु एक पल में जातक को ऊंचाइयों पर पहुंचा सकता है तो अगले ही पल उसे कंगाल बनाने की क्षमता भी रखता है। 

जबकि शनि देव जातक को परिश्रम एवं लगन तथा ईमानदारी से आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। 

शनि उन्हीं जातकों का साथ देते हैं, जो जीवन में सच बोलते हैं, पर राहु चतुराई और आसान तरीकों से सफलता पाने का विचार उत्पन्न कराता है।

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संतान के रूप में कौन आता है.......!! 

पूर्व जन्म के कर्मों से ही हमें इस जन्म मे माता - पिता, भाई बहिन, पति - पत्नी, प्रेमिका...!

मित्र - शत्रु, सगे - सम्बंधी इत्यादि संसार के जितने भी रिश्ते नाते है, सब मिलते है ।

इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है, या इनसे कुछ लेना होता है ।

वैसे ही संतान के रूप में हमारा कोई पूर्वजन्म का ‘सम्बन्धी’ ही आकर जन्म लेता है,

जिसे शास्त्रों में चार प्रकार का बताया गया है।

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ऋणानुबन्ध :-

पूर्व जन्म का कोई ऐसा जीव जिससे आपने ऋण लिया हो या उसका किसी भी प्रकार से धननष्ट किया हो...! 

तो वो आपके घर में संतान बनकर जन्म लेगा और आपका धन बीमारी में या व्यर्थ के कार्यों में तब तक नष्ट करेगा जब तक उसका हिसाब पूरा ना हो।
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शत्रु पुत्र :-

पूर्व जन्म का कोई दुश्मन आपसे बदला लेने के लिये आपके घर में संतान बनकर आयेगा और बड़ा होने पर माता - पिता से मारपीट, झगड़ा या उन्हें सारी जिन्दगी किसी भी प्रकार से सताता ही रहेगा । 

हमेशा कड़वा बोल कर उनकी बेइज्जती करेगा व उन्हें दुःखी रख कर खुश होगा ।
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उदासीन पुत्र :-

इस प्रकार की ‘सन्तान’, ना तो माता - पिता की सेवा करती है, और ना ही कोई सुख देता है और उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देती है । 

विवाह होने पर यह माता - पिता से अलग हो जाते हैं ।
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सेवक पुत्र :-

पूर्व जन्म में यदि आपने किसी की खूब सेवा की है...! 

तो वह अपनी की हुई सेवा का ऋण उतारने के लिये...! 

आपकी सेवा करने के लिये पुत्र बन कर आता है ।

जो बोया है, वही तो काटोगे, अपने माँ-बाप की सेवा की है...! 

तो ही आपकी औलाद बुढ़ापे में आपकी सेवा करेगी । 

वरना कोई पानी पिलाने वाला भी पास ना होगा ।
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आप यह ना समझें कि यह सब बातें केवल मनुष्य पर ही लागू होती है ।

इन चार प्रकार में कोई सा भी जीव आ सकता है ।

जैसे आपने किसी गाय कि निःस्वार्थ भाव से सेवा की है तो वह भी पुत्र या पुत्री बनकर आ सकती है ।

यदि आपने गाय को स्वार्थ वश पालकर उसको दूध देना बन्द करने के पश्चात घर से निकाल दिया हो तो वह ऋणानुबन्ध पुत्र या पुत्री बनकर जन्म लेगी ।
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यदि आपने किसी निरपराध जीव को सताया है तो वह आपके जीवन में शत्रु बनकर आयेगा ।

इसलिये जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं करें ।”

क्योंकि प्रकृति का नियम है कि आप जो भी करोगे, उसे वह आपको इस जन्म या अगले जन्म में, सौ गुना करके देगी ।

मार्गी शनि हो चुके हैं  इन राशियों पर बना रहेगा शनिदेव का आशीर्वाद :

शनि की महत्वपूर्ण चाल के चलते साल 2026 कई लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है....! 

इन राशियों के जीवन में अच्छे दिनों का आगमन होगा और इनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी हो जाएगी....!

हिंदू धर्म में शनिदेव को बहुत ही पूजनीय माना जाता है...! 

लेकिन, इनको न्यायप्रिय और कर्मफलदाता शनि के नाम से भी जाना जाता है...! 

दरअसल, हर व्यक्ति को शनि कर्मों के हिसाब से ही फल प्रदान करते हैं....! 

अगर किसी की कुंडली में शनि मजबूत है तो उसे शनि शुभ फल प्रदान करेंगे और किसी की कुंडली में शनि कमजोर है तो उस जातक शनि की टेढ़ी नजर रहेगी...!
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हिंदू पंचांग के अनुसार, 28 नवंबर यानी नवंबर में अंत में शनि मीन राशि में मार्गी हुए थे और इसी राशि में मार्गी होते हुए 20 जनवरी 2026 को शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे...! 

इस के बाद शनि 27 जुलाई 2026 को मीन राशि में ही वक्री यानी उल्टी चाल चलेंगे....! 

11 दिसंबर 2026 को शनि मीन राशि में फिर से मार्गी हो जाएंगे...! 

ज्योतिषियों के अनुसार, साल 2026 में शनि की यह स्थिति कई राशियों के लिए लकी मानी जा रही है...! 

आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में जिनको साल 2026 में फायदा होगा.
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मेष 

मेष साल 2026 की शुरुआत मेष राशि वालों काफी ज्यादा लाभान्वित रहेगी. सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे. बिजनेस में तगड़ा लाभ होता दिखाई देगा. ऑफिस में सीनियर्स और सहकर्मियों का साथ भी प्राप्त होगा. मीडिया और सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को फायदा होगा. विवाह तय होने के भी योग बन रहे हैं. कुल मिलाकर साल 2026 मेष राशि वालों के लिए अच्छा साबित होगा. हालांकि, मेष राशि वालों पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. लेकिन, इस राशि के जातक हर शनिवार शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करेंगे तो इन्हें फायदा होगा.
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धनु 

धनु शनिदेव की कृपा से साल 2026 धनु राशि वालों के लिए भी बहुत अच्छा माना जा रहा है. कोई बड़ी व्यापार की डील निकाल पाएंगे. नए लोगों से मुलाकात होगी. इस साल जो भी काम करेंगे उसका परिणाम लाभकारी मिलेगा. विदेश यात्रा का भी संयोग बन सकता है. लाइफ पाटर्नर के साथ रिश्ता मजबूत होगा. हालांकि, धनु राशि वालों को शनि ढैय्या चल रही है. लेकिन, अगर हर शनिवार को शनिदेव के नाम का दान किया जाए, तो ढैय्या का असर कम हो जाएगा.
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मीन 

मीन 28 नवंबर को शनिदेव मीन राशि में ही मार्गी हुए है. लेकिन, इनकी कृपा से मीन राशि वालों के लिए साल 2026 भी काफी लकी माना जा रहा है. छात्रों के लिए यह वक्त बहुत ही शुभ रहेगा. प्रेम संबंध बहुत अच्छे रहेंगे. परिवार के साथ बढ़िया समय बिताएंगे जिससे मन की ऊर्जा सकारात्मक हो जाएगी. समाज में मान सम्मान मिलेगा. वैसे तो इस समय मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. लेकिन, अगर शनिदेव की पूजा करेंगे तो उनका आशीर्वाद बना रहेगा. 
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2026 के पहले ही दिन चतुर्ग्रही योग, इन 3 राशियों के लिए सचमुच हैप्पी होगा न्यू ईयर :


2026 के पहले ही दिन धनु राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र का चतुर्ग्रही योग बनेगा...! 

इतना ही नहीं, सूर्य बुध ग्रह के साथ मिलकर बुधादित्य योग बनाएंगे...! 

मंगल के साथ मंगलादित्य योग और शुक्र के साथ शुक्रादित्य योग का भी निर्माण करेंगे...!
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नए साल 2026 का शुभारंभ एक बड़े ही दुर्लभ चतुर्ग्रही योग में होने जा रहा है...!

दरअसल, नए साल 2026 के पहले ही दिन धनु राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र का चतुर्ग्रही योग बनेगा...! 
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अभी मंगल धनु राशि में हैं. 16 दिसंबर को सूर्य, 20 दिसंबर को शुक्र और 29 दिसंबर को बुध भी धनु राशि में प्रवेश कर जाएंगे...! 

इतना ही नहीं, यहां बुध के साथ मिलकर सूर्य बुधादित्य योग बनाएंगे...! 
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मंगल के साथ मंगलादित्य योग और शुक्र के साथ शुक्रादित्य योग का भी निर्माण करेंगे...! 

ज्योतिषविदों का कहना है साल की शुरुआत में ये दुर्लभ संयोग तीन राशियों के लिए शुभ संकेत दे रहा है...!
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वृषभ राशि :

वृषभ राशि वालों को अचानक धन लाभ होगा. सफलता के नए अवसर सामने आएंगे. नौकरी और व्यापार दोनों क्षेत्रों में उन्नति की संभावना मजबूत होगी. समाज में आपका सम्मान बढ़ेगा. प्रेम जीवन में सौहार्द और रिश्तों में मधुरता आएगी. बड़े फैसले और निवेश के लिए समय अनुकूल रहेगा. लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे. साझेदारी में लाभ की संभावना अधिक रहेगी. धैर्य, संयम से किए गए कार्यों में सफलता मिलेगी.
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तुला राशि :

आपके आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में इजाफा होगा. करियर और व्यवसाय में प्रगति होगी. धन वृद्धि के योग बनते दिख रहे हैं. परिवार में खुशियां बढ़ेंगी और सामाजिक दायरे में आपका प्रभाव बढ़ेगा. आप अपनी रचनात्मक क्षमता और नेतृत्व के गुणों से खूब लाभ बटोरेंगे. नौकरी या व्यापार में नए दायित्व मिलेंगे, जो आपके लिए फायदेमंद सिद्ध होंगे. मित्रों और सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा. 
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धनु राशि :

आर्थिक मोर्चे पर लाभ होगा. शिक्षा, करियर और बिजनेस में प्रगति की संभावना दिख रही है. प्रेम संबंध और वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा. घर में सुखद वातावरण बना रहेगा. यह समय अपने लक्ष्यों पर ध्यान देने और नई योजनाओं की शुरुआत करने के लिए अनुकूल है. नए निवेश लाभकारी होंगे. किसी भी कार्य में सफलता मिलने की प्रबल संभावना है. स्वास्थ्य में सुधार होगा. चोट-दुर्घटना से बचे रहेंगे.
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!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
Shri Maha Prabhuji bethak Road,
JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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Monday, July 7, 2025

सूर्य देव , शनि की साढ़े साती :

शनि की साढ़े साती  : 

🪐ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र 🪐 

सूर्य देव :  

 रविवार विशेष - सूर्य देव 


समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर न सिर्फ सम्पूर्ण संसार के कर्ताधर्ता है बल्कि नवग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। 


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सूर्य देव एक ऐसे देव हैं जिनके दर्शन के बिना किसी के भी दिन का आरंभ नहीं होता है। 

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। 

भगवान सूर्य का दिन होने के कारण रविवार को भगवान सूर्य का उपासना बेहद ही पुण्यकारक माना जाता है। 


सूर्यदेव को हिरण्यगर्भ भी कहा जाता है। 

हिरण्यगर्भ यानी जिसके गर्भ में ही सुनहरे रंग की आभा है। 

इनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करने के लिए रविवार के दिन सूर्य भगवान का विधिवत पूजा पाठ करके जल चढ़ाना चाहिए।

ऐसा करने से भगवान सूर्य की कृपा हमारे परिवार पर बनी रहती है। 

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🔆सूर्य- पिता, स्वास्थ्य, यश सम्मान, प्रशासनिक नौकरियां व व्यापार के कारक ग्रह है। 

कुंडली में इनके शुभ होने से इन सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है।


🔆उदयगामी सूर्य को प्रणाम करना प्रगति की निशानी है। 

इसी लिए सुबह- सुबह स्नान करके उगते सूर्य को देखना चाहिए, उन्हें प्रणाम करना चाहिए। 

इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 


🔆सूर्यदेव की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। 

इसके पश्चात् उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें "ॐ घृणि सूर्याय नम:" या फिर "ॐ सूर्याय नमः" कहते हुए जल अर्पित करें। 

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🔆सूर्य को दिए जाने वाले जल में केवल लाल, पीले पुष्प मिला सकते हैं, लेकिन इसके अलावा और किसी प्रकार की सामग्री जल में नहीं मिलानी चाहिए क्योंकि इससे जल की पवित्रता भंग होती है।


🔆अर्घ्य समर्पित करते समय नजरें लोटे के जल की धारा की ओर रखें। 

जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिम्ब एक बिन्दु के रूप में जल की धारा में दिखाई देगा।


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🔆सूर्य को अर्घ्य समर्पित करते समय दोनों भुजाओं को इतना ऊपर उठाएं कि जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिंब दिखाई दे। 


🔆सूर्य देव की सात प्रदक्षिणा करें व हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए सूर्यनारायण के समक्ष आप इन मंत्रों का जाप भी कर सकते है-:

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1- ॐ सूर्याय नम:।


2- ॐ मित्राय नम:।


3- ॐ रवये नम:।


4- ॐ भानवे नम:।


5- ॐ खगाय नम:।


6- ॐ पूष्णे नम:।


7- ॐ हिरण्यगर्भाय नम:।


8- ॐ मारीचाय नम:।


9- ॐ आदित्याय नम:।


10- ॐ सावित्रे नम:।


11- ॐ अर्काय नम:।


12- ॐ भास्कराय नम:।।

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शनि की साढ़े साती  :


शनि की साढ़े साती के कुछ लक्षण दुर्गति परिणाम जाने अपने जन्म कुंडली से....!

 

बहुत सारी घटनाएं हमारे और आपके जीवन में हो रही है जो कि वर्तमान में शनि की अधिक प्रभाव और साडेसाती अधिया की असर के कारण हो रहा है जाने खास लक्षण 


हथेली की रेखाओं का रंग बदल जाना या नीला या काला हो जाना सिर की चमक गायब हो जाना और माथे पर काला रंग दिखना 

 

बात-बात पर गुस्सा आना वाणी और विचारों में बदलाव होना अचानक टेंशन बढ़ना और हमेशा सिर में दर्द रहना 

 

हर काम में असफलता मिलना 

शरीर में कुछ न कुछ कष्ट होना 

 

अपनों से धोखा मिलना मन मस्तिष्क बिना कारण के गर्म होना घर में पैसा टिकना न होना 

 

शनि की साढ़े साती तीन हिस्सों में होती है और हर हिस्सा लगभग ढाई साल का होता है. शनि साढ़े साती के दौरान, शनि व्यक्ति को जीवन भर के लिए सिख देने का प्रयास करता है. 

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शनि साढ़े साती के दौरान शनिदेव की पूजा करने से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है. 

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वर्तमान 2025 में मकर राशि कुंभ राशि पर शनि की साडेसाती अधिया का विशेष प्रभाव है जो की आने वाले समय में कर्ज जेल या अन्य धन का नुकसान तथा गुप्त शत्रुओं से 


अधिक पीड़ा तथा कार्य क्षेत्र व्यवसाय आदि में अधिक नुकसान होगा और वर्तमान में हो रहा है या मनोरोग या मानसिक रोग हो सकते हैं 


आप यथाशीघ्र शनि की साडेसाती अढैया की शांति निवारण करें और लाभ में...!


और अधिक जानकारी रत्न से जुड़ा हुआ परामर्श सलाह या आपको किसी भी तरह के रत्न चाहिए या जन्म कुंडली दिखाना है 


या कुंडली बनवाना है या किसी भी प्रकार की रत्न से जुड़ा हुआ विशेष जानकारी या रत्न चाहिए तो कॉल करें ....!


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यच्च किञ्चित् जगत्सर्वं,दृश्यते श्रूयतेऽपि वा।

अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं,व्याप्य नारायण:स्थित:।।


निष्कलाय विमोहाय,शुद्धायाशुद्धवैरिणे।

अद्वितीयाय महते,श्रीकृष्णाय नमो नमः।।

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जो कुछ हो चुका है, जो कुछ हो रहा है और होने वाला है...! 

वह दिखाई देने वाला और सुनने में आने वाला सम्पूर्ण जगत भगवान् नारायण ही हैं। 

इसमें भीतर और बाहर सब ओर से भगवान् नारायण ही व्याप्त हुए स्थित हैं।

'जो कला ( अवयव) से रहित हैं...! 

जिनमें मोह का सर्वथा अभाव है, जो स्वरूप से ही परम विशुद्ध हैं...! 

अशुद्ध ( स्वभाव तथा आचरण वाले) असुरों के शत्रु हैं तथा जिनसे बढ़कर या जिनके समान भी दूसरा कोई नहीं है...! 

उन सर्वमहान् परमात्मा श्रीकृष्ण को बारम्बार नमस्कार है।'

       

     || विष्णु भगवान की जय हो ||

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राहु-केतु गोचर, करियर में आ सकती हैं रुकावटें :


राहु–केतु का गोचर ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. 

राहु और केतु हर 18 महीने में राशि बदलते हैं, 

और उनका यह परिवर्तन जीवन में कई तरह के अवसर, चुनौतियां और बदलाव लेकर आता है.

राहु-केतु का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

ये दोनों ग्रह वर्ष के दौरान राशि और नक्षत्र परिवर्तन करते हुए कई जातकों की किस्मत बदल सकते हैं. 

कुछ राशियों को लाभ और नए अवसर मिलेंगे, जबकि कुछ को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. 

नववर्ष की शुरुआत के तुरंत बाद 29 मार्च 2026 को केतु मघा नक्षत्र में गोचर करेंगे. 

इसके बाद 25 नवंबर 2026 को केतु अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और फिर 5 दिसंबर को कर्क राशि में आएंगे. 

इन परिवर्तनों से पारिवारिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत मामलों पर असर देखा जा सकता है.

दूसरी ओर, राहु 2 अगस्त 2026 को कुंभ राशि में रहकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. 

इस के बाद 5 दिसंबर 2026 को राहु कुंभ से निकलकर मकर में संचरण करेंगे. 

उनकी यह चाल करियर, जिम्मेदारियों और सामाजिक दायरे पर प्रभाव डाल सकती है. 

राहु - केतु का यह गोचर साल 2026 में कुछ राशि वालों के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण बना सकता है.

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वृषभ राशि 


वृषभ राशि वालों के लिए यह समय घरेलू और बाहरी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. 

घर में तालमेल की कमी के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है. 

आर्थिक मामलों में यह अवधि सावधानी बरतने वाली होगी. 

किसी भी तरह का निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता है. 

धन का लेनदेन टालना ही अच्छा रहेगा. 

प्रेम विवाह की इच्छा रखने वालों के लिए भी स्थिति आसान नहीं रहेगी. 

सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगों को इस समय स्थानांतरण या तबादले से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

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सिंह 


मेष राशि वालों को इस समय खास सावधानी रखनी होगी. 

करियर और नौकरी में अचानक चुनौतियां सामने आ सकती हैं. 

कारोबार से जुड़े लोगों को व्यवसाय में मंदी का सामना करना पड़ सकता है, 

जिससे तनाव बढ़ेगा. नौकरी करने वालों की जिम्मेदारियों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, 

जो दिनचर्या को प्रभावित करेगी. प्रेम संबंधों में उतावलेपन से बचें. 

आय के नए स्रोत बनेंगे, लेकिन व्यवसाय में मनचाहा लाभ पाने के लिए मेहनत और प्रयास बढ़ाने होंगे. 

लापरवाही या जल्दबाजी से दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

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कन्या


कन्या राशि वालों के लिए यह समय कई पुराने मामलों और विवादों में उलझा सकता है. 

यदि कोई मामला कोर्ट - कचहरी में चल रहा है, तो उससे जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं और मानसिक थकान भी महसूस हो सकती है. 

ऐसे मामलों में धैर्य और सतर्कता आवश्यक रहेगी. व्यवसाय से जुड़े जातकों को जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह दूरी बनाकर चलनी होगी. 

जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसान दे सकता है. 

इस वर्ष नए रिश्ते या नई साझेदारी में आने से भी बचना बेहतर रहेगा, 

क्योंकि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे.

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सूर्य-शनि की युति, 4 जनवरी 2026 से शुरू होगा इन 3 राशियों का 'स्वर्णिम काल' :


वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य और शनि जो एक-दूसरे के शत्रु माने जाते हैं, 4 जनवरी 2026 को 72 डिग्री कोण पर आकर पंचांक योग बनाने वाले हैं. 

ऐसे में शनि और सूर्य पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी. लगभग 30 साल बाद बन रहा यह दुर्लभ राजयोग तीन राशियों के लिए भाग्योदय का संकेत है.

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को क्रमश: पिता-पुत्र होने के साथ-साथ एक दूसरे का शत्रु भी माना गया है. 

हालांकि इन दोनों ही शक्तिशाली ग्रहों की जोड़ी नए साल 2026 की शुरुआत में एक बड़ा ही दुर्लभ योग बनाने वाली है. 

दरअसल, 4 जनवरी 2026 को सू्र्य-शनि एक दूसरे से 72 डिग्री कोण पर स्थित होकर पंचांक योग का निर्माण करेंगे. 

इस दौरान शनि स्वराशि मीन में होंगे और सूर्य धनु राशि में रहेंगे, 

जिस पर गुरु बृहस्पति की दृष्टि भी बनी रहेगी. 

ज्योतिषविदों ने इसे महा 'राजयोग' बताया  है, जो करीब 30 वर्ष बाद बनने जा रहा है. 

यह दुर्लभ संयोग 2026 की शुरुआत में 3 राशि के जातकों का भाग्योदय कर सकता है...!

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कन्या राशि :


कन्या राशि में साल 2026 की शुरुआत में कन्या राशि में नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करेगा. 

आपके धन, करियर, कारोबार से जुड़े जो कार्य लंबित थे, उनमें गति आएगी. 

नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और कुछ बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. 

कोई बड़ा पद मिलने से आपका मन प्रसन्न रहेगा. विदेश घूमने, पढ़ने या बसने का सपना सच हो सकता है.

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धनु राशि


धनु राशि में सूर्य - शनि के इस दुर्लभ संयोग का असर धनु राशि पर भी दिखाई देगा. 

सफलता के लिए जिस बड़े मौके की तलाश आपको लंबे अरसे से है, वो बहुत जल्द मिलने वाला है. 

2026 की शुरुआत में व्यापारियों के हाथ मुनाफे की कोई बड़ी डील लग सकती है. 

नौकरीपेशा जातकों का भी भाग्य पूरा साथ देगा. समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. 

बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से खूब मुनाफा बटोरेंगे.

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मीन राशि :


मीन राशि सूर्य-शनि का ये संयोग मीन राशि वालों के लिए भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है. वित्तीय स्थिति में सुधार होगा. पुराना कर्ज या अटके हुए धन की वापसी होगी. यदि किसी निवेश में लंबे समय से पैसा फंसा हुआ था तो वो भी वापस मिल सकता है. जिन लोगों को काफी समय से रोजगार की तलाश है, उनकी ये खोज बहुत जल्द समाप्त हो सकती है. किसी अच्छी, बड़ी नौकरी का अवसर आपके हाथ लग सकता है. रोग-बीमारियों से भी छुटकारा पाएंगे.

!!!!! शुभमस्तु !!!

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🙏हर हर महादेव हर...!!


जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏


पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -

श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय

PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 

-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-

(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 

" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,

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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....

जय द्वारकाधीश....

जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा :

सन् 2026 में राशि / गुरु की महादशा : बुध ने मकर राशि में किया प्रवेश, मेष राशि के लोगों को मिल सकता है नौकरी में लाभ :  वैदिक ज्योतिष शास्त्...